# बाड़मेर में उत्तर प्रदेश के कारीगरों का कमाल, 200 रुपये किलो वाले पंचमेवा की हर दिन 60 किलो तक बिक्री

> राजस्थान के सरहदी शहर बाड़मेर में उत्तर प्रदेश के बरेली से आए कारीगरों द्वारा तैयार किया जा रहा पारंपरिक पंचमेवा लोगों को खूब भा रहा है। नारियल, सिंघाड़ा, काजू और बादाम जैसे पौष्टिक तत्वों से बनी यह मिठाई 200 रुपये प्रति किलो के किफायती दाम पर बिक रही है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/barmer-men-uttar-pradesh-ke-karigaron-ka-kamala-200-rupaye-kilo-vale-panchmewa-ki-hara-dina-60-kilo-taka-bikri-40444 · **Language:** Hindi
**Tags:** बाड़मेर, पंचमेवा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बरेली, मिठाई

राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के बाजारों में इन दिनों एक खास किस्म की महक राहगीरों को अपनी ओर खींच रही है। थार के रेगिस्तानी इलाके में यह मिठास स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की पारंपरिक मिठाई पंचमेवा की है। सरहदी बाड़मेर में इस पारंपरिक मिष्ठान ने जबरदस्त पहचान बनाई है। सड़क किनारे सजे ठेले से उठती सोंधी खुशबू के कारण लोग खुद-ब-खुद वहां पहुंच रहे हैं और इस अनूठे स्वाद को चख रहे हैं। काजू और बादाम जैसे मेवों से तैयार होने के बावजूद इसका दाम सामान्य व्यक्ति की पहुंच में होना इसकी लोकप्रियता की सबसे अहम वजह बनकर उभरा है।

## बरेली से बाड़मेर तक स्वाद का सफर
बाड़मेर की गलियों में उत्तर प्रदेश की यह सौगात पहुंचाने के पीछे बरेली के रहने वाले कारीगर फूल सिंह और उनके सहयोगी हैं। फूल सिंह के साथ इस काम में धर्मवीर और विपिन भी पूरी निष्ठा से हाथ बंटा रहे हैं। अपना गृह राज्य छोड़कर राजस्थान के इस पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचे ये कारीगर अपनी पाक कला के जरिए लोगों के दिलों में जगह बना रहे हैं। सड़क से गुजरने वाले नागरिक जब ताजी तैयार हो रही मिठाई की खुशबू महसूस करते हैं, तो वे कदम रोककर ठेले की तरफ मुड़ जाते हैं।

## सेहत और स्वाद का बेहतरीन संगम
इस पंचमेवा की खासियत इसमें इस्तेमाल की जाने वाली शुद्ध और पौष्टिक सामग्री है। इसे बनाने में बारीक पिसा नारियल का बुरादा, पौष्टिक सिंघाड़ा, काजू, बादाम, चीनी और महकती इलायची का भरपूर प्रयोग किया जाता है। सूखे मेवों और नारियल के इस मेल से यह मिठाई न केवल स्वाद में लाजवाब बनती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी फायदेमंद मानी जाती है। ग्राहक इस मिठाई का आनंद मौके पर तो ले ही रहे हैं, साथ ही अपने घर-परिवार और बच्चों के लिए भी इसके पैकेट बंधवाकर ले जा रहे हैं। बाजार में सामान्य मिठाइयों के बढ़े हुए दामों के बीच यह पौष्टिक मेवा लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन गया है।

## धीमी आंच पर ढाई घंटे की कड़ी मेहनत
कारीगर फूल सिंह का कहना है कि इस पंचमेवा को तैयार करना धैर्य और कौशल की मांग करता है। सामग्री के एक बैच को पूरी तरह तैयार होने में लगभग दो से ढाई घंटे का वक्त लगता है। प्रक्रिया के दौरान नारियल बुरादा, सिंघाड़े का आटा, काजू, बादाम, शक्कर और इलायची को एक तय मात्रा में मिलाया जाता है और फिर धीमी आंच पर पकाया जाता है। इस काम में शारीरिक मेहनत और समय दोनों अधिक लगते हैं, मगर पकने के बाद इसका जो स्वाद निकलकर आता है, वह खरीदारों का मन मोह लेता है। स्थानीय मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके ठेले से प्रतिदिन 50 से 60 किलो पंचमेवा हाथों-हाथ बिक जाता है।

## किफायती दाम बना सबसे बड़ा आकर्षण
वर्तमान बाजार में सूखे मेवों विशेषकर काजू और बादाम की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं। इसके बावजूद बाड़मेर में यह पंचमेवा मात्र 200 रुपये प्रति किलो की दर से ग्राहकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी मुनासिब कीमत और उम्दा स्वाद की वजह से हर वर्ग का व्यक्ति इसे सहजता से खरीद पा रहा है। रेगिस्तानी शहर बाड़मेर में उत्तर प्रदेश के इस पारंपरिक स्वाद ने तेजी से अपनी धाक जमाई है और स्थानीय निवासी इस जायके की दिल खोलकर सराहना कर रहे हैं।

## इसका आप पर असर
बाड़मेर के स्थानीय निवासियों को महंगे मेवों से बनी पारंपरिक मिठाई बेहद कम दाम पर उपलब्ध हो रही है।

- **भारत में:** देश के विभिन्न हिस्सों से आए छोटे दस्तकार और हलवाई अंतर-राज्यीय स्तर पर अपनी पारंपरिक पाक शैलियों को स्थानीय बाजारों में पहुंचा रहे हैं। इससे आम नागरिकों को नए स्वादों से रूबरू होने का सुगम और सस्ता अवसर मिल रहा है।
- **बाड़मेर में:** स्थानीय निवासियों और परिवारों को काजू तथा बादाम जैसे तत्वों से भरपूर यह मिठाई केवल 200 रुपये प्रति किलो में मिल रही है। जो लोग त्योहारी या नियमित मिठाई के लिए महंगा खर्च नहीं करना चाहते, वे इस पोषक विकल्प को आसानी से खरीद सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तर प्रदेश के कारीगरों द्वारा बाड़मेर में तैयार किया जा रहा पंचमेवा अपने पौष्टिक तत्वों और असाधारण रूप से कम दाम के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है।

- **सीधे कारण:** इस मिठाई की भारी मांग की मुख्य वजह इसका 200 रुपये प्रति किलो का किफायती दाम और ताजी तैयारी से निकलने वाली खुशबू है। काजू, बादाम और सिंघाड़े से बनी मिठाई इस भाव में मिलना ग्राहकों को तुरंत आकर्षित करता है।
- **पृष्ठभूमि:** बरेली के कारीगर फूल सिंह, धर्मवीर और विपिन ने अपने पारंपरिक पाक हुनर को राजस्थान के सीमावर्ती बाजार में प्रस्तुत करने का फैसला किया। उन्होंने धीमी आंच पर ढाई घंटे पकाकर तैयार होने वाली पारंपरिक विधि को यहां लागू किया।
- **मौजूदा स्थिति:** स्वाद और दाम के बेहतरीन तालमेल के कारण इस ठेले पर हर दिन 50 से 60 किलो पंचमेवा हाथों-हाथ बिक रहा है। खरीदार इसे खुद खाने के अलावा घर ले जाने के लिए भी बड़े पैमाने पर खरीद रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. बाड़मेर में पंचमेवा कौन तैयार कर रहा है?
उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी कारीगर फूल सिंह अपने साथी धर्मवीर और विपिन के साथ मिलकर इसे तैयार कर रहे हैं।

### 2. इस पंचमेवा में कौन-कौन सी सामग्री शामिल है?
इसमें नारियल का बुरादा, सिंघाड़ा, काजू, बादाम, चीनी और इलायची का उपयोग किया जाता है।

### 3. बाड़मेर में इस मिठाई की कीमत क्या है?
यह पंचमेवा 200 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा जा रहा है।

### 4. एक बार में पंचमेवा तैयार करने में कितना समय लगता है?
कारीगरों को धीमी आंच पर एक बैच तैयार करने में करीब दो से ढाई घंटे का समय लगता है।

### 5. बाड़मेर में प्रतिदिन कितना पंचमेवा बिक रहा है?
स्थानीय ठेले से हर दिन करीब 50 से 60 किलो पंचमेवा की बिक्री हो रही है।

## प्रेरणा और सबक
उत्तर प्रदेश के कारीगरों ने कठिन मेहनत और प्रामाणिक हुनर के दम पर एक नए राज्य में अपनी पहचान बनाई है।

- **हुनर पर भरोसा:** अपनी पारंपरिक कला को किसी भी नए भौगोलिक क्षेत्र में पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। गुणवत्ता और प्रामाणिकता नए ग्राहकों को हमेशा आकर्षित करती है।
- **मेहनत और धैर्य:** एक बैच को धीमी आंच पर तैयार करने में दो से ढाई घंटे का कठिन परिश्रम लगता है। धैर्यपूर्वक की गई तैयारी ही अंतिम उत्पाद को बेहतर स्वाद देती है।
- **किफायती मूल्य निर्धारण:** उत्पाद की कीमत आम आदमी के बजट के अनुकूल रखकर बड़े पैमाने पर निरंतर बिक्री हासिल की जा सकती है। 200 रुपये प्रति किलो के दाम ने ही इस मिठाई को व्यापक स्वीकार्यता दिलाई।
- **टीम वर्क का महत्व:** फूल सिंह, धर्मवीर और विपिन की साझेदारी से काम का बंटवारा सहज हुआ और प्रतिदिन 50 से 60 किलो माल तैयार कर बेचना संभव हो सका।

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