# बाड़मेर में विद्यार्थियों ने प्रकृति संग रचा रक्षाबंधन का अनोखा धागा, वृक्षों को बांधा रक्षासूत्र और लिया हरित संकल्प

> सरहदी जिले बाड़मेर के मॉर्डन स्कूल में रक्षाबंधन का त्योहार एक सामाजिक संदेश के रूप में मनाया गया। कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों ने भाइयों की कलाई के साथ पेड़-पौधों को रक्षासूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण का दृढ़ संकल्प लिया।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/barmer-men-vidyarthiyon-ne-prakriti-snga-racha-rakshabndhana-ka-anokha-dhaga-vrikshon-ko-bandha-rakshasutra-aura-liya-harita-snkal-23148 · **Language:** Hindi
**Tags:** बाड़मेर समाचार, रक्षाबंधन 2026, मॉर्डन स्कूल बाड़मेर, पर्यावरण संरक्षण, पेड़-पौधों को राखी, राजस्थान न्यूज़

सीमावर्ती बाड़मेर क्षेत्र में इस बार रक्षाबंधन पर्व को एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक तरीके से मनाया गया। भाई-बहन के अटूट स्नेह, भरोसे और सुरक्षा के पारंपरिक प्रतीक इस त्योहार को यहाँ के युवाओं ने एक व्यापक सामाजिक दायित्व के साथ जोड़ दिया। परंपरागत रूप से जहाँ बहनें केवल अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती हैं, वहीं इस बार बाड़मेर के मॉर्डन स्कूल परिसर में खुशियों की डोर पर्यावरण की रक्षा के संकल्प तक विस्तृत हो गई। छात्रों ने इस सांस्कृतिक अवसर का उपयोग प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी रेखांकित करने के लिए किया।

## वृक्षों को बनाया जीवन का साथी और बाँधा रक्षासूत्र
विद्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बहनों ने अपने भाइयों को राखी बाँधते समय आपसी संबंधों को सहेजने और हर परिस्थिति में एक-दूसरे के प्रति किए गए वादों को निभाने का वचन लिया। इसके तुरंत बाद छात्रों ने परिसर में स्थित पेड़-पौधों के तनों और शाखाओं पर रक्षासूत्र बाँधे। विद्यार्थियों ने इन वृक्षों को अपने सच्चे साथी के रूप में स्वीकार करते हुए उनकी सुरक्षा और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उठाने की घोषणा की।

इस अनोखी गतिविधि पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मॉर्डन स्कूल की छात्रा हर्षिता ने बताया कि पेड़-पौधों को राखी बाँधने का मूल उद्देश्य इंसान और प्रकृति के रिश्ते को सम्मान देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार एक भाई जीवन भर अपनी बहन की रक्षा का संकल्प उठाता है, ठीक उसी तरह प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह प्रकृति, पर्यावरण और हरियाली की रक्षा के लिए तत्पर रहे। प्रकृति की सुरक्षा के बिना मानव जीवन की रक्षा अधूरी मानी जाएगी।

## शिक्षकों से पढ़ाई और अनुशासन का अनूठा संकल्प
इस वर्ष का आयोजन केवल पारंपरिक अनुष्ठानों और हरियाली तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शैक्षणिक अनुशासन का भाव भी समाहित था। रक्षाबंधन के इस पावन मंच पर छात्रों ने अपने गुरुजनों और शिक्षकों से भी कई महत्त्वपूर्ण वादे किए। विद्यार्थियों ने अपनी कक्षाओं में लगन से अध्ययन करने, परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए टॉप करने और विद्यालय परिसर में अनुशासित आचरण बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

स्कूल की छात्रा अदिति खत्री ने इस संदर्भ में जानकारी साझा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों को भरोसा दिलाया है कि वे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर मुकाम हासिल करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। भाइयों की कलाई पर बँधी राखी जहाँ पारिवारिक मजबूती की याद दिला रही थी, वहीं पौधों पर बँधा धागा कुदरत के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध करा रहा था।

## त्योहार को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की पहल
स्कूल के प्रिंसिपल नवनीत पंचोरी ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि रक्षाबंधन जैसे महान पर्व को केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक सीमाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों को जब सामाजिक चेतना, प्रकृति की देखभाल और दायित्वबोध से जोड़ा जाता है, तो उनका महत्त्व कई गुना बढ़ जाता है। बाड़मेर में छात्रों द्वारा उठाई गई यह 'वादों वाली राखी' की पहल न केवल हरियाली की सुरक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी में अनुशासन और प्रकृति-प्रेम के संस्कारों को भी सिंचित करेगी।

## इसका आप पर असर
यह पहल दर्शाती है कि सांस्कृतिक त्योहारों को किस प्रकार सामुदायिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम बनाया जा सकता है।

- **भारत में:** यह नवाचार देश भर के शिक्षण संस्थानों को त्योहारों के दौरान पौधरोपण और प्रकृति सुरक्षा को जोड़ने का विचार देता है। इससे युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।
- **राजस्थान में:** राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में वृक्षारोपण और हरियाली संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए यह एक अनुकरणीय उदाहरण है। स्थानीय समुदायों में जल और वन संसाधनों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
- **बाड़मेर में:** सरहदी क्षेत्र बाड़मेर में स्कूली छात्रों का यह कदम स्थानीय स्तर पर हरित क्षेत्र को बढ़ाने में मददगार साबित होगा। इससे क्षेत्र के अन्य विद्यालयों और युवा वर्ग को भी पर्यावरण अभियानों से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।
- **विद्यार्थियों के लिए:** यह पहल छात्रों में शैक्षणिक अनुशासन और सामाजिक दायित्वों के प्रति गंभीरता पैदा करती है। इससे वे पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के साथ नैतिक मूल्यों को अपना सकेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. बाड़मेर के मॉर्डन स्कूल में रक्षाबंधन किस अलग अंदाज में मनाया गया?
मॉर्डन स्कूल में छात्रों ने भाइयों की कलाई के साथ-साथ पेड़-पौधों को रक्षासूत्र बाँधे और पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लिया।

### 2. इस कार्यक्रम में किन कक्षाओं के विद्यार्थियों ने भाग लिया?
इस आयोजन में मॉर्डन स्कूल के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

### 3. विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों से क्या वादे किए?
छात्रों ने पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने, कक्षा में टॉप करने, अनुशासित रहने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का वादा किया।

### 4. छात्रा हर्षिता के अनुसार पेड़-पौधों को राखी बाँधने का क्या संदेश था?
हर्षिता के अनुसार, जिस तरह भाई बहन की रक्षा करता है, उसी तरह हर इंसान को पेड़-पौधों को साथी मानकर प्रकृति की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

### 5. मॉर्डन स्कूल के प्रिंसिपल नवनीत पंचोरी ने इस पहल के बारे में क्या कहा?
प्रिंसिपल नवनीत पंचोरी ने कहा कि रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित न रखकर प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ना एक सराहनीय कदम है।

## प्रेरणा और सबक
बाड़मेर के विद्यार्थियों का यह प्रयास दिखाता है कि सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक सामाजिक सरोकारों से जोड़कर बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

- **उत्सवों को उद्देश्य देना:** त्योहारों को केवल रस्मों तक सीमित न रखकर उन्हें पर्यावरण या समाज की भलाई से जोड़ना चाहिए।
- **प्रकृति से गहरा जुड़ाव:** पेड़-पौधों को अपना साथी मानकर उनकी रक्षा का संकल्प लेना हरियाली बचाने का सर्वोत्तम मार्ग है।
- **अनुशासन और लक्ष्य का निर्धारण:** जीवन में सफलता पाने के लिए शिक्षकों और अपनों से पढ़ाई तथा अनुशासन का पक्का वादा करना जरूरी है।
- **सामूहिक प्रयास का प्रभाव:** जब छात्र और शिक्षक मिलकर किसी सामाजिक पहल की शुरुआत करते हैं, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है।

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