# भजन गायिका श्री राजपुरोहित अब राइफल शूटिंग में दिखा रहीं दम, सिरोही में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ले रहीं हिस्सा

> जालौर की 12 वर्षीय भजन गायिका श्री राजपुरोहित सिरोही में आयोजित राज्य स्तरीय 14 वर्षीय राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में पाली जिले का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bhajana-gayika-shri-rajpurohit-aba-raiphala-shutinga-men-dikha-rahin-dama-sirohi-men-rajya-stariya-pratiyogita-men-le-rahin-hissa-42450 · **Language:** Hindi
**Tags:** श्री राजपुरोहित, राइफल शूटिंग, सिरोही, जालौर, पाली, राजस्थानी भजन, राजस्थान समाचार

राजस्थान के सिरोही जिले के वासडा गांव में आयोजित राज्य स्तरीय राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में पूरे प्रदेश से युवा प्रतिभाएं अपनी निशानेबाजी का जौहर दिखाने पहुंची हैं। इस खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए खिलाड़ियों के बीच जालौर जिले की 12 वर्षीय श्री राजपुरोहित विशेष ध्यान आकर्षित कर रही हैं। श्री केवल खेल के मैदान में ही नहीं, बल्कि संगीत की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान रखती हैं और बहुत छोटी उम्र से मंच पर राजस्थानी भजनों की प्रस्तुति देती आ रही हैं।

## राज्य स्तरीय शूटिंग स्पर्धा में पाली जिले का प्रतिनिधित्व
वासडा स्थित उम्मेद इंटरनेशनल स्कूल के परिसर में 14 वर्ष से कम आयु वर्ग की राज्य स्तरीय राइफल शूटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में श्री राजपुरोहित पाली जिले की टीम की तरफ से निशाना साध रही हैं। जिला स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने के बाद उनका चयन इस राज्य स्तरीय स्पर्धा के लिए हुआ था। गायन के व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद उन्होंने खेलों के प्रति अपने लगाव को कभी कम नहीं होने दिया और प्रतियोगिता में पदक जीतने के इरादे से मैदान में उतरी हैं।

## चार साल की उम्र से गायन और सात साल में पहला मंच
जालौर जिले के सांकरणा गांव की मूल निवासी श्री राजपुरोहित ने संगीत की अपनी यात्रा बहुत छोटी उम्र में आरंभ कर दी थी। उन्होंने महज चार साल की आयु में भजन गाना शुरू किया था और जब वह सात वर्ष की हुईं, तब से उन्होंने बड़े मंचों पर लाइव प्रस्तुतियां देनी शुरू कर दीं। अपने गीतों और भजनों के माध्यम से वह राजस्थानी भाषा और स्थानीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रही हैं। उन्होंने राजस्थान के अधिकांश जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र के मुंबई शहर में भी कई धार्मिक मंचों पर गायन प्रस्तुत किया है।

## कक्षा सातवीं की छात्रा और सोशल मीडिया पर व्यापक लोकप्रियता
श्री राजपुरोहित वर्तमान में पाली जिले के राजस्थान नोबल पब्लिक स्कूल में कक्षा 7वीं की छात्रा हैं। पढ़ाई और खेल के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी उनकी प्रतिभा को काफी सराहा जाता है। इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनके पारंपरिक गायन के वीडियो बेहद लोकप्रिय हैं। राजस्थान के प्रसिद्ध लोक देवता ओम बन्ना पर गाए गए उनके एक विशेष भजन को अब तक 5 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं, जिससे इंटरनेट पर उनकी एक मजबूत पहचान बनी है।

## संस्कृति के संरक्षण और खेलों में आगे बढ़ने का संकल्प
श्री राजपुरोहित जालौर, पाली, सिरोही और उदयपुर सहित प्रदेश के अनेक हिस्सों में अपने सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर चुकी हैं। सिरोही में भी वह आने वाले दिनों में एक भजन संध्या में अपनी गायकी पेश करने वाली हैं। मुख्य रूप से धार्मिक भजनों और राजस्थानी लोकगीतों को समर्पित श्री का कहना है कि वह अपनी कला के जरिए स्थानीय संस्कृति और भाषा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगी। इसके साथ ही वह राइफल शूटिंग के क्षेत्र में भी कड़ी मेहनत करते हुए नए मुकाम हासिल करना चाहती हैं।

## इसका आप पर असर
यह खबर दर्शाती है कि ग्रामीण परिवेश के युवा किस प्रकार सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक खेलों में एक साथ पहचान बना रहे हैं।

- **राजस्थान में:** स्कूली छात्रों और युवा एथलीटों को पढ़ाई के साथ-साथ पारंपरिक कला और राज्य स्तरीय खेल आयोजनों में भाग लेने का प्रोत्साहन मिलता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेल अकादमियों और सांस्कृतिक मंचों का दायरा बढ़ता है।
- **सिरोही और पाली में:** स्थानीय स्कूलों और खेल संघों के माध्यम से उभरती हुई प्रतिभाओं को जिला स्तर से राज्य स्तर तक पहुंचने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। अभिभावक और बच्चे विभिन्न प्रतिभाओं को एक साथ तराशने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
- **पारंपरिक कलाकारों के लिए:** सोशल मीडिया मंच क्षेत्रीय भाषाओं और लोक संगीत को राष्ट्रीय स्तर पर नए श्रोताओं तक पहुंचाने का सशक्त जरिया बन रहे हैं। युवा कलाकार इंटरनेट की मदद से अपनी कला को लाखों लोगों तक ले जा सकते हैं।
- **छात्रों के लिए:** बहुआयामी प्रतिभा विकसित करने के लिए अकादमिक पढ़ाई, खेल अभ्यास और रचनात्मक गतिविधियों के बीच उचित संतुलन बनाना संभव है। इससे छात्रों का समग्र व्यक्तित्व निखरता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह प्रतियोगिता स्कूली खेलों के वार्षिक कैलेंडर के तहत आयोजित की गई है, जिसमें विभिन्न जिलों के विजेता खिलाड़ी राज्य स्तर पर पदक के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।

- **प्रतियोगिता का आयोजन:** सिरोही के वासडा स्थित उम्मेद इंटरनेशनल स्कूल में 14 वर्ष से कम आयु वर्ग की राज्य स्तरीय राइफल शूटिंग स्पर्धा रखी गई है ताकि राज्य भर के युवा निशानेबाजों को मंच मिल सके।
- **पाली टीम में चयन:** जिला स्तरीय राइफल शूटिंग ट्रायल और टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के आधार पर ही श्री राजपुरोहित का चयन राज्य स्तरीय टीम में हुआ।
- **बचपन से बहुमुखी अभ्यास:** चार वर्ष की उम्र से संगीत साधना और स्कूल स्तर पर खेलों में लगातार अभ्यास के चलते वह गायन और निशानेबाजी दोनों क्षेत्रों में एक साथ सक्रिय रह पाई हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. श्री राजपुरोहित किस जिले की रहने वाली हैं?
श्री राजपुरोहित राजस्थान के जालौर जिले के सांकरणा गांव की रहने वाली हैं।

### 2. वह किस प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं?
वह सिरोही जिले के वासडा में आयोजित 14 वर्ष से कम आयु वर्ग की राज्य स्तरीय राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं।

### 3. वह किस जिले की टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं?
वह इस राज्य स्तरीय शूटिंग प्रतियोगिता में पाली जिले की टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

### 4. उन्होंने भजन गायन की शुरुआत किस उम्र में की थी?
उन्होंने 4 वर्ष की उम्र में भजन गाना शुरू किया था और 7 वर्ष की उम्र से स्टेज शो करने लगी थीं।

### 5. श्री राजपुरोहित किस स्कूल और कक्षा में पढ़ती हैं?
वह पाली जिले के राजस्थान नोबल पब्लिक स्कूल में कक्षा 7वीं की छात्रा हैं।

### 6. सोशल मीडिया पर उनके किस भजन को 5 लाख से अधिक व्यूज मिले हैं?
राजस्थान के लोक देवता ओम बन्ना पर उनके द्वारा गाए गए भजन को 5 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।

## प्रेरणा और सबक
कम उम्र में सांस्कृतिक गायन और प्रतिस्पर्धी खेल दोनों में निरंतर प्रगति करने का सफर हर युवा के लिए प्रेरणादायक है।

- **विविध रुचियों में संतुलन:** एक ही समय पर पढ़ाई, गायन और राइफल शूटिंग जैसे केंद्रित खेल का अभ्यास कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है।
- **सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव:** आधुनिक गतिविधियों में भाग लेते हुए भी अपनी क्षेत्रीय भाषा और लोक संस्कृति के संवर्धन के प्रति समर्पित रहा जा सकता है।
- **प्रारंभिक शुरुआत और निरंतरता:** बचपन से नियमित अभ्यास और मंच प्रस्तुतियों का अनुभव बड़े स्तर पर आत्मविश्वास और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

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