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  "type": "article",
  "title": "भरतपुर में लंपी वायरस का प्रकोप, अस्सी फीसदी टीकाकरण के बावजूद तीन हजार से अधिक मामले आए सामने",
  "summary": "राजस्थान के भरतपुर जिले में लंपी स्किन डिजीज का संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है और अब तक तीन हजार से ज्यादा गोवंश इसकी चपेट में आ चुके हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर हुए टीकाकरण के कारण इस बार बीमारी का रूप कम घातक है और सैकड़ों पशु स्वस्थ हो चुके हैं।",
  "content": "राजस्थान के भरतपुर जिले में एक बार फिर लंपी स्किन डिजीज ने गोवंश को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है, जिससे स्थानीय पशुपालकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। हालांकि इस बार संक्रमण का दायरा तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी घातकता पिछली बार की तुलना में कम आंकी जा रही है। पशुपालन विभाग पूरी तरह से सतर्क अवस्था में है और हालात को काबू में करने के लिए लगातार जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन की सक्रियता के बावजूद ग्रामीण इलाकों में बीमारी के नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में एहतियात बरती जा रही है।\n\nभरतपुर जिले में इस संक्रामक बीमारी के मामले मुख्य रूप से अगस्त के तीसरे सप्ताह के दौरान यानी बीस अगस्त के आसपास से देखे जाने लगे थे। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक पूरे जिले में लगभग तीन हजार गोवंश इस संक्रमण की गिरफ्त में आ चुका है। जानकारों और अधिकारियों का मानना है कि मानसून की विदाई के वक्त और बारिश के अंतिम दौर के बाद बढ़ी हुई आद्र्रता और मौसम में अचानक आए बदलाव ने इस वायरस के तेजी से फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर दी थीं। शुरुआती रिपोर्टों से यह बात सामने आई है कि उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे हुए इलाकों में इसके मामले सबसे ज्यादा तादाद में दर्ज किए गए, जिसके बाद यह धीरे-धीरे जिले के अन्य हिस्सों में भी फैलने लगा। वर्तमान समय में सेवर, नदबई और उच्चैन के क्षेत्रों में लंपी के सर्वाधिक मरीज जानवर मिल रहे हैं, जो पशु मालिकों के लिए बड़ी मुसीबत बने हुए हैं।\n\nजिलेभर में मवेशियों की कुल आबादी करीब एक लाख के आसपास है, जिसके मद्देनजर पशुपालन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए लगभग अस्सी प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। विभाग के अधिकारी मनोज कुमार ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इतनी बड़ी संख्या में हुए टीकाकरण का ही यह सकारात्मक परिणाम है कि इस बार बीमारी पशुओं के शरीर में गंभीर रूप धारण नहीं कर पा रही है। वैक्सीन लगने से मवेशियों के भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है, जिसके चलते मृत्यु दर में खासी गिरावट दर्ज की गई है। अब तक आठ सौ अट्ठाइस संक्रमित पशु पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपनी सामान्य स्थिति में लौट चुके हैं, जिसे एक राहत भरा संकेत माना जा रहा है। शत-प्रतिशत गोवंश को सुरक्षित करने के उद्देश्य से टीकाकरण अभियान अभी भी मैदान में लगातार जारी है।\n\nपशुपालकों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पालतू पशुओं के स्वास्थ्य पर पूरी तरह से नजर बनाए रखें। लंपी वायरस से पीड़ित कोई भी मवेशी शुरुआत के दिनों में चारा और पानी खाना-पीना कम कर देता है, जो इस बीमारी का सबसे पहला और प्रमुख लक्षण हो सकता है। इसके कुछ समय बाद पशु की त्वचा, गर्दन और उसकी पीठ के हिस्से पर गांठें यानी नोड्यूल उभरने लगते हैं। इसके अलावा तेज बुखार आना, आंखों और नाक से लगातार पानी टपकना तथा दूध के उत्पादन में भारी कमी आना भी इसके मुख्य लक्षणों में शुमार है। यदि समय पर सही उपचार मिल जाए तो पशु आमतौर पर तीन से पांच दिनों के भीतर सुधार के लक्षण प्रदर्शित करने लगता है।\n\nजिला प्रशासन और पशुपालन विभाग की तरफ से उत्पन्न हुई इस आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला मुख्यालय पर एक विशेष कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। सभी पशुपालकों को यह हिदायत दी गई है कि यदि उनके किसी भी पशु में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो वे तुरंत इसकी सूचना कंट्रोल रूम के फोन नंबर 05644-224375 पर दें। जैसे ही विभाग को इसकी सूचना मिलती है, एक विशेष रैपिड रिस्पांस टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो जाती है। इस दल में एक योग्य पशु चिकित्सक, एक एलएसआई और एक पशुधन परिचर शामिल होते हैं जो मौके पर पहुंचकर इलाज करते हैं। इसके अलावा विभाग ने यह एडवाइजरी भी जारी की है कि लोग संक्रमित मवेशियों को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग रखें और साफ-सफाई का विशेष प्रबंध करें। मक्खी और मच्छरों के प्रकोप से पशुओं को बचाना भी इस संक्रमण की चेन को तोड़ने में बेहद मददगार साबित हो सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nभरतपुर और आसपास के क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने की मांग करती है, क्योंकि बीमारी फैलने से दूध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: देश के ग्रामीण और पशुपालक बहुल इलाकों में इस तरह के वायरल संक्रमण मवेशियों की सेहत और आजीविका को सीधे प्रभावित करते हैं। किसानों को समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना चाहिए ताकि आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।\n• भरतपुर में: जिले के सेवर, नदबई और उच्चैन क्षेत्रों में पशुपालकों को अपने मवेशियों की विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता है। किसी भी लक्षण के दिखते ही तुरंत कंट्रोल रूम नंबर 05644-224375 पर संपर्क करके सरकारी रैपिड रिस्पांस टीम की मदद लेनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभरतपुर में लंपी वायरस के दोबारा सक्रिय होने के पीछे मुख्य रूप से मौसमी बदलाव और पर्यावरणीय स्थितियां जिम्मेदार हैं।\n\n• मानसून का अंतिम दौर: बारिश के मौसम के अंत में बढ़ी हुई आद्र्रता और तापमान में उतार-चढ़ाव ने वायरस के पनपने के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार किया।\n• भौगोलिक सीमाएं: उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे इलाकों में संक्रमण सबसे पहले उभरा और वहां से संपर्क के जरिए अन्य क्षेत्रों में तेजी से फैला।\n• टीकाकरण का प्रभाव: अस्सी फीसदी पशुओं का टीकाकरण हो जाने के कारण इस बार वायरस का प्रकोप घातक रूप लेने से बच गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भरतपुर में लंपी वायरस के कितने मामले सामने आए हैं?\nपशुपालन विभाग के अनुसार भरतपुर जिले में अब तक लगभग तीन हजार गोवंश में लंपी संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।\n\n2. भरतपुर में लंपी वायरस के मामले कब से आने शुरू हुए थे?\nजिले में लंपी वायरस के मामले अगस्त के तीसरे सप्ताह से विशेषकर बीस अगस्त के आसपास से सामने आने लगे थे।\n\n3. जिले में कितने प्रतिशत गोवंश का टीकाकरण हो चुका है?\nपशुपालन विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए जिले के लगभग अस्सी प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण पूरा कर लिया है।\n\n4. लंपी वायरस के संक्रमण से अब तक कितने पशु स्वस्थ हुए हैं?\nअब तक 828 संक्रमित पशु पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं।\n\n5. भरतपुर में किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं?\nवर्तमान में सेवर, नदबई और उच्चैन क्षेत्रों में लंपी संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं।\n\n6. संक्रमित पशु की सूचना देने के लिए कौन सा कंट्रोल रूम नंबर जारी किया गया है?\nपशुपालक किसी भी संक्रमित पशु की सूचना जिला स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम के नंबर 05644-224375 पर दे सकते हैं।\n\n7. रैपिड रिस्पांस टीम में कौन-कौन शामिल होता है?\nइस टीम में एक पशु चिकित्सक, एक एलएसआई और एक पशुधन परिचर शामिल होते हैं।\n\n8. लंपी वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?\nसंक्रमित पशु शुरुआत में चारा और पानी कम कर देता है और शरीर, गर्दन तथा पीठ पर गांठें दिखाई देने लगती हैं।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-18",
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    "पशुपालन विभाग",
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    "राजस्थान पशु चिकित्सा"
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