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  "type": "article",
  "title": "भरतपुर के घना में स्कूली छात्रों को पर्यावरण संरक्षक बनाएगा वन विभाग का नया अभियान",
  "summary": "भरतपुर के विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में वन विभाग ने केवलादेव मित्र अभियान शुरू किया है, जिसके जरिए छात्रों को जैव विविधता और वेटलैंड संरक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।",
  "content": "भरतपुर स्थित विश्व विख्यात केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना) में आने वाले स्कूली विद्यार्थियों के लिए अब शैक्षणिक यात्राएं केवल रंग-बिरंगे पक्षियों को निहारने या तस्वीरें खींचने तक सीमित नहीं रहेंगी। राजस्थान वन विभाग ने एक अनूठी पहल की शुरुआत की है, जिसका नाम ‘केवलादेव मित्र अभियान’ रखा गया है। इस दूरगामी कार्यक्रम का प्राथमिक मकसद स्कूली बच्चों को प्रकृति, वेटलैंड और जैव विविधता के संरक्षण से व्यावहारिक रूप से जोड़ना है, ताकि वे कम उम्र से ही पर्यावरण के प्रति एक सजग और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा सकें।\n\nप्रकृति को करीब से समझने की अनूठी पहल\nघना डीएफओ चेतन कुमार के अनुसार, इस नए अभियान का केंद्रीय उद्देश्य नई पीढ़ी में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की सोच को मजबूती से स्थापित करना है। विद्यार्थी अक्सर किताबों में पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में पढ़ते हैं, लेकिन जब वे जमीन पर उतरकर उसे महसूस करते हैं, तो सीखने का दायरा कहीं अधिक बढ़ जाता है। इस कार्यक्रम के जरिए बच्चों को केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय संरचना और जीवों की आपसी निर्भरता का सीधा अनुभव कराया जा रहा है। मैदानी स्तर पर होने वाली व्यावहारिक गतिविधियों में हिस्सा लेकर छात्र प्रकृति को एक वैज्ञानिक और संवेदनशील नजरिए से देखना सीख रहे हैं।\n\nपहले महीने में 400 से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी\nवन विभाग की इस जमीनी कोशिश का असर शुरुआत से ही दिखने लगा है। अभियान की शुरुआत के महज पहले एक महीने के भीतर ही सात अलग-अलग शिक्षण संस्थानों के 400 से अधिक छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम का हिस्सा बन चुके हैं। उद्यान के शांत और प्राकृतिक परिवेश में बच्चों को देशी व प्रवासी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों, स्थानीय दुर्लभ वनस्पतियों और पूरे वेटलैंड इकोसिस्टम की बारीकियों से बेहद रोचक अंदाज में अवगत कराया जा रहा है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से यह समझाया जा रहा है कि प्राकृतिक जलस्रोत और नमभूमियां न केवल जलीय जीवों के लिए जीवन रेखा हैं, बल्कि वे प्रवासी पक्षियों के अस्तित्व और भूजल स्तर को संतुलित रखने के लिए भी अनिवार्य हैं।\n\nपहले चरण में 25 स्कूलों को जोड़ने का लक्ष्य\nवन विभाग द्वारा तैयार किए गए खाके के मुताबिक, अभियान के इस प्रारंभिक दौर में भरतपुर तथा उसके आसपास के क्षेत्रों के कुल 25 स्कूलों को चिन्हित कर शामिल किया जाएगा। इन सभी संस्थानों के छात्रों को राष्ट्रीय उद्यान का सघन और निर्देशित भ्रमण कराया जाएगा। इसके साथ ही उनकी रचनात्मकता और सीखने की ललक को निखारने के लिए नेचर वॉक, पेंटिंग और पर्यावरण पर आधारित क्विज प्रतियोगिताओं जैसी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी कार्ययोजना का अहम हिस्सा है।\n\nपर्यावरण संरक्षण की जीवंत पाठशाला\nवन विभाग का मानना है कि बचपन में पर्यावरण के प्रति जगाया गया अनुराग जीवन भर कायम रहता है। जब बच्चे कम उम्र में खुद प्रकृति की अहमियत को करीब से देखेंगे, तो वे अपने घरों, मित्रों और पूरे समाज के बीच संरक्षण का एक मजबूत संदेश फैलाने वाले सबसे प्रभावी दूत साबित होंगे। इस योजना के जरिए केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान केवल एक दर्शनीय पर्यटन स्थल न रहकर स्कूली विद्यार्थियों के लिए जैव विविधता और नमभूमि संरक्षण की एक जीवंत खुली पाठशाला के रूप में तब्दील हो रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल स्कूली छात्रों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर सीधे प्राकृतिक पर्यावरण और नमभूमि संरक्षण के व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ती है।\n\n• भरतपुर में: स्थानीय स्कूलों के विद्यार्थियों को विश्व विख्यात पक्षी अभयारण्य में निःशुल्क या निर्देशित व्यावहारिक अध्ययन का मौका मिलेगा। पहले चरण में चयनित 25 विद्यालयों के सैकड़ों बच्चे नेचर वॉक, क्विज और पेंटिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियों के जरिए प्रकृति संरक्षण सीखेंगे।\n• भारत में: यह मॉडल देश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों और वेटलैंड्स के लिए स्कूली शिक्षा को ईको-टूरिज्म और संरक्षण से जोड़ने की व्यावहारिक मिसाल पेश करता है। आने वाले समय में अन्य राज्यों के वन विभाग भी छात्र-केंद्रित प्रकृति मित्र अभियानों को अपने संरक्षित क्षेत्रों में लागू कर सकते हैं।\n• छात्रों के लिए: विद्यार्थियों में पर्यावरण विज्ञान और जीव विज्ञान के प्रति रुचि केवल परीक्षा तक सीमित न रहकर वास्तविक दुनिया की समझ में बदलेगी। इससे युवा पीढ़ी में वन्यजीव और नमभूमि संरक्षण को लेकर दीर्घकालिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।\n• अभिभावकों व शिक्षकों के लिए: स्कूलों को अपने शैक्षणिक भ्रमणों को केवल मौज-मस्ती के बजाय औपचारिक प्रकृति संरक्षण पाठ्यक्रम से जोड़ने का संरचित मंच मिलता है। शिक्षक इसके जरिए छात्रों को जलवायु और जैव विविधता जैसे जटिल विषयों को सरलता से समझा सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकेवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में वन विभाग ने यह अभियान इसलिए शुरू किया क्योंकि पारंपरिक स्कूली भ्रमण केवल सतही पर्यटन तक सीमित रह जाते थे। बच्चों को पारिस्थितिकी तंत्र और वेटलैंड के महत्व की व्यावहारिक जानकारी देने के लिए इस विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई।\n\n• सीमित व्यावहारिक समझ: स्कूली बच्चे आमतौर पर राष्ट्रीय उद्यान का दौरा सिर्फ पक्षियों को देखने और तस्वीरें खींचने के लिए करते थे, जिससे वे पार्क के पारिस्थितिक महत्व को गहराई से नहीं समझ पाते थे। इसी कमी को दूर करने के लिए विभाग ने संरचित व्यावहारिक शिक्षा शुरू की।\n• वेटलैंड्स पर बढ़ता संकट: नमभूमियों और जलस्रोतों के संरक्षण की जरूरत लगातार बढ़ रही है, जिसे आने वाली पीढ़ी को समझाना बेहद आवश्यक माना गया। वेटलैंड्स के बिना प्रवासी पक्षियों और स्थानीय जैव विविधता का टिक पाना संभव नहीं है।\n• कम उम्र में चेतना विकसित करना: वन अधिकारियों का आकलन है कि छोटी उम्र में मिली प्रकृति की समझ समाज में व्यापक जागरूकता लाने का सबसे टिकाऊ जरिया बनती है। बच्चे अपने परिवारों और सहपाठियों के बीच संरक्षण का प्रभावी संदेश पहुंचा सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. केवलादेव मित्र अभियान क्या है?\nयह भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में वन विभाग द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को वेटलैंड और जैव विविधता संरक्षण का व्यावहारिक ज्ञान देना है।\n\n2. इस अभियान के पहले महीने में कितने बच्चों ने भाग लिया?\nअभियान के पहले ही महीने में सात अलग-अलग स्कूलों के 400 से अधिक छात्र इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।\n\n3. पहले चरण में कितने स्कूलों को शामिल करने की योजना है?\nवन विभाग की कार्ययोजना के तहत पहले चरण में भरतपुर और आसपास के कुल 25 स्कूलों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।\n\n4. विद्यार्थियों के लिए कौन-कौन सी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं?\nछात्रों को राष्ट्रीय उद्यान का सघन भ्रमण कराने के अलावा नेचर वॉक, पेंटिंग और पर्यावरण विषयक क्विज जैसी गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है।\n\n5. घना डीएफओ चेतन कुमार ने इस पहल का क्या मुख्य उद्देश्य बताया?\nउन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और संरक्षण की भावना को बचपन से ही विकसित करना है ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-03",
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