भरतपुर के मोरतलाब गांव में सड़क न होने से चारपाई पर अस्पताल ले जाने को मजबूर लोग राजस्थान के भरतपुर जिले के मोरतलाब गांव में आजादी के 79 साल बाद भी सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बरसात के दिनों में मरीजों को चारपाई पर लादकर पहाड़ी से नीचे उतारना पड़ता है। देश को आजाद हुए सात दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित मोरतलाब गांव के बाशिंदे आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। विकास की तमाम दावों के बीच इस गांव की तस्वीर झकझोर देने वाली है, जहां सड़क जैसी प्राथमिक सुविधा के अभाव में लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बरसात का मौसम आते ही यहां के हालात बेहद दयनीय हो जाते हैं। हालात इतने विकट होते हैं कि ग्रामीणों को अपने मवेशियों के साथ पहाड़ी की चोटी पर शरण लेनी पड़ती है, लेकिन उस ऊंचाई तक पहुंचने या वहां से नीचे उतरने के लिए कोई पक्का मार्ग तक मौजूद नहीं है। ग्रामीणों के लिए यह संकट तब अपने चरम पर पहुंच जाता है जब परिवार का कोई सदस्य अचानक बीमार पड़ जाता है। हाल ही की एक घटना में जब गांव की एक बुजुर्ग महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। पहाड़ी इलाका दुर्गम होने और वाहन के आने-जाने का कोई जरिया न होने के कारण लोगों ने महिला को चारपाई पर लिटाया। इसके बाद कई ग्रामीणों ने मिलकर उस चारपाई को अपने कंधों और हाथों के सहारे जोखिम भरे रास्तों से नीचे उतारा। स्थानीय लोगों का दर्द है कि यदि किसी मरीज को वक्त रहते सही उपचार के लिए नीचे नहीं पहुंचाया जाए, तो उसकी जान पर बन सकती है। ऐसे में पक्के रास्ते का न होना बीमारों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए जी का जंजाल बन गया है। बुनियादी सुविधाओं का गंभीर संकट स्थानीय निवासियों का कहना है कि मोरतलाब गांव में सड़क, बिजली और पीने के पानी जैसी जरूरी व्यवस्थाएं लंबे समय से नदारद हैं। मानसून के दिनों में तो यहां रहना किसी चुनौती से कम नहीं होता। पहाड़ी इलाका होने के कारण सामान्य दिनों में भी यहां आवागमन बेहद कठिन रहता है। रोजमर्रा के सामान को लाने या किसी अन्य जरूरी काम के लिए भी ग्रामीणों को लंबी दूरियां और जोखिम भरे रास्ते पार करने पड़ते हैं। बिजली न होने के कारण अंधेरे में जीवन गुजारने को मजबूर ग्रामीण पानी के लिए भी खासे परेशान रहते हैं। पीने के पानी का पुख्ता इंतजाम न होने के चलते लोगों को काफी दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोकर लाना पड़ता है, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक थकान बढ़ जाती है। प्रशासन से पक्के मार्ग और विकास की गुहार इन तमाम दुश्वारियों से त्रस्त होकर गांव के लोगों ने अब जिला प्रशासन के सामने गुहार लगाई है। ग्रामीणों की मांग है कि पहाड़ की तलहटी से लेकर बस्ती तक एक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि वाहनों का आवागमन सुगम हो सके। इसके अलावा, गांव में बिजली और पेयजल की सुचारू व्यवस्था करने की भी मांग जोर पकड़ रही है, जिससे बरसात के दिनों में लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि आज के आधुनिक दौर में भी यदि मरीजों को चारपाई पर ढोकर अस्पताल ले जाना पड़े, तो यह व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। अब पूरे गांव को उम्मीद है कि प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेगा और उनकी इस चिर-प्रतीक्षित समस्या का जल्द से जल्द ठोस समाधान निकालेगा। इसका आप पर असर आम नागरिकों के लिए इस खबर का सीधा असर और संदेश निम्नलिखित है: • भारत में: देश के कई ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में आज भी सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव होना नीति निर्माताओं के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। • भरतपुर में: मोरतलाब और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा और परिवहन के लिए स्थानीय प्रशासन से पक्के रास्तों की मांग को लेकर आवाज उठानी पड़ रही है। सवाल-जवाब 1. मोरतलाब गांव किस जिले में स्थित है? मोरतलाब गांव राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है। 2. बरसात के मौसम में ग्रामीणों को क्या परेशानी होती है? बरसात के दिनों में ग्रामीणों को अपने पशुओं के साथ पहाड़ पर रहना पड़ता है और पक्का रास्ता न होने के कारण मरीजों को चारपाई पर लादकर नीचे लाना पड़ता है। 3. गांव में किन-किन बुनियादी सुविधाओं का अभाव है? गांव में सड़क, बिजली और पर्याप्त पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का लंबे समय से अभाव है। 4. ग्रामीणों ने प्रशासन से क्या मुख्य मांग की है? ग्रामीणों ने गांव तक पहुंचने के लिए पक्के रास्ते के निर्माण के साथ-साथ बिजली और पेयजल की उचित व्यवस्था करने की मांग की है। https://trendkia.com/rajasthan/bharatpur-ke-mortalab-ganva-men-saraka-na-hone-se-charapai-para-aspatala-le-jane-ko-majabura-loga-21258 TrendKia — Har trend, sabse pehle.