भरतपुर के पूर्व फौजी पूरन सिंह ने चुनी अनोखी राह, शीर्षासन करते हुए पूरी कर रहे गिरिराज परिक्रमा सेना से सेवानिवृत्ति के बाद पूरन सिंह ने एक अनूठा कदम उठाते हुए शीर्षासन की मुद्रा में गोवर्धन गिरिराज जी की परिक्रमा शुरू की है। उनका यह कठिन प्रयास और योग के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। भरतपुर में सेना से सेवानिवृत्ति के बाद एक पूर्व सैनिक ने अपनी अनूठी शैली और मजबूत इच्छाशक्ति से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पूरन सिंह नामक ये पूर्व फौजी सामान्य तौर पर चलने के बजाय सिर के बल यानी शीर्षासन की मुद्रा में भगवान गोवर्धन गिरिराज जी की परिक्रमा कर रहे हैं। उनका यह अद्भुत तरीका हर देखने वाले के लिए कौतूहल और आकर्षण का विषय बना हुआ है। अपनी इस अनोखी यात्रा के दौरान जब वे डीग पहुंचे, तो वहां मौजूद स्थानीय श्रद्धालुओं ने उनका जोरदार स्वागत किया और उनके इस जज्बे की जमकर सराहना की। आम तौर पर जहां लोग सामान्य रूप से चलकर परिक्रमा पूरी करते हैं, वहीं पूरन सिंह ने इस कठिन मार्ग को अपने शारीरिक संतुलन और योग साधना के जरिए तय करने का बीड़ा उठाया है। इस पूरी प्रक्रिया में वे अपने दोनों हाथों के बल पर शरीर का पूरा भार संभालते हैं और संतुलन बनाए रखते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। उनके इस बेहद कठिन अभ्यास को सड़क पर चलते हुए जो भी देखता है, वह हैरान रह जाता है और उनके अनुशासन की दाद देता है। योग और अनुशासन का संदेश इस अनूठी यात्रा के रास्ते में जहां से भी उनका काफिला गुजर रहा है, वहां उन्हें देखने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक एकत्र हो रहे हैं। इस बारे में बात करते हुए पूरन सिंह का कहना है कि योग और निरंतर अभ्यास के बलबूते शरीर को हमेशा स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखा जा सकता है। उनका मानना है कि उम्र के आंकड़े का कोई खास महत्व नहीं होता है, यदि इंसान के मन में पक्का इरादा और कुछ हटकर दिखाने का जुनून हो, तो दुनिया का कोई भी कठिन लक्ष्य असंभव नहीं रहता है। युवाओं को प्रेरित करने का उद्देश्य इस पूरी कठिन परिक्रमा को निकालने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य आम जनता को योग के फायदों के प्रति जागरूक करना और देश के युवाओं को रोजाना व्यायाम करने के लिए प्रेरित करना है। उनका विचार है कि योग साधना के जरिए जहां एक तरफ शरीर को सेहतमंद रखा जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ ईश्वर की सच्ची भक्ति और सेवा भी पूरी निष्ठा के साथ की जा सकती है। पहले भी बना चुके हैं रिकॉर्ड अपनी इस अद्भुत क्षमता के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वे शीर्षासन की विभिन्न विधाओं में वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। अब वे गोवर्धन गिरिराज जी की पूरी परिक्रमा इसी कठिन शीर्षासन मुद्रा में पूरी करके एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम करने के इरादे से मैदान में उतरे हैं। इसी लक्ष्य को साधने के लिए वे बिना रुके लगातार अपनी इस यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। सेना की नौकरी छोड़ने के बाद भी उनका यह अटूट समर्पण और जज्बा हर उम्र के व्यक्ति को गहराई से प्रभावित कर रहा है। उनका यह प्रयास यह मजबूत संदेश देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची आस्था के मिलन से इंसान हर असंभव लगने वाले काम को भी संभव कर सकता है। इसका आप पर असर यह अनूठी खबर उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है जो उम्र या शारीरिक सीमाओं का हवाला देकर फिटनेस से दूर रहते हैं। • भारत में: यह यात्रा देश भर के लोगों को अपने दैनिक जीवन में योग और शारीरिक अनुशासन को शामिल करने का मजबूत संदेश देती है। • भरतपुर में: स्थानीय निवासियों और डीग क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए यह घटना आस्था और अद्भुत शारीरिक क्षमता के अनूठे संगम के रूप में सामने आई है। ऐसा क्यों हुआ यह अनोखा अभियान किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं बल्कि एक पूर्व सैनिक के वर्षों के कड़े अभ्यास और दृढ़ संकल्प का हिस्सा है। • पूर्व सैनिक की पृष्ठभूमि: पूरन सिंह पहले भी शीर्षासन से जुड़े मामलों में विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं जिससे उन्हें इस कठिन चुनौती को पूरा करने का आत्मविश्वास मिला। • योग का प्रचार: उनका मुख्य उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। • कठिन लक्ष्य: अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता को परखने के लिए उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण मार्ग को चुना है। सवाल-जवाब 1. पूरन सिंह कौन हैं? पूरन सिंह सेना से सेवानिवृत्त हुए एक पूर्व फौजी हैं जो अपनी अनूठी परिक्रमा के लिए चर्चा में हैं। 2. वे किस स्थान पर परिक्रमा कर रहे हैं? वे भगवान गोवर्धन गिरिराज जी की परिक्रमा कर रहे हैं। 3. परिक्रमा करने का उनका तरीका क्या है? वे सामान्य रूप से चलने के बजाय सिर के बल यानी शीर्षासन की मुद्रा में परिक्रमा कर रहे हैं। 4. यात्रा के दौरान वे कहां पहुंचे हैं? अपनी इस अनोखी यात्रा के दौरान वे डीग पहुंचे हैं जहां स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। 5. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है? उनका उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करना और युवाओं को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करना है। 6. क्या वे पहले भी कोई रिकॉर्ड बना चुके हैं? हां, वे इससे पहले भी शीर्षासन में वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुके हैं। प्रेरणा और सबक पूरन सिंह की यह प्रेरक यात्रा दिखाती है कि अनुशासन और दृढ़ संकल्प से कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है। • दृढ़ इच्छाशक्ति: यदि आपके मन में पक्का इरादा है, तो उम्र या विपरीत परिस्थितियां आपके लक्ष्यों के आड़े नहीं आती हैं। • नियमित अभ्यास: योग और शारीरिक अनुशासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है। • नया कीर्तिमान: किसी भी सामान्य कार्य को अनूठे तरीके से करने का जुनून आपको एक अलग पहचान दिला सकता है। • प्रेरणा का प्रसार: आपका कड़ा परिश्रम और समर्पण समाज के युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। https://trendkia.com/rajasthan/bharatpur-ke-purav-fauji-puran-singh-ne-chuni-anokhi-rah-sirsasana-karte-hue-puri-kar-rahe-giriraj-parikrama-57404 TrendKia — Har trend, sabse pehle.