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  "type": "article",
  "title": "भरतपुर की ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर में टूटी सुरक्षा दीवारें और फैला कचरा, हादसों और बीमारियों का बढ़ा खतरा",
  "summary": "भरतपुर शहर के बीच से गुजरने वाली ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर प्रशासनिक अनदेखी के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है, जहां गायब दीवारों और दूषित पानी से स्थानीय नागरिक भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं।",
  "content": "भरतपुर शहर के केंद्र में मौजूद ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर वर्तमान में उचित देखरेख न मिलने के कारण गंभीर दुर्दशा का सामना कर रही है। यह नहर कभी शहर के लिए एक प्रमुख जलस्रोत होने के साथ-साथ इलाके की सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक पहचान का मुख्य स्तंभ रही है। शहर के बीचोंबीच स्थित होने के चलते रोजाना हजारों की संख्या में राहगीर और वाहन चालक इसके किनारों से होकर गुजरते हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक उपेक्षा के चलते इस प्राचीन जल धरोहर का गौरवशाली स्वरूप धीरे-धीरे धूमिल होता जा रहा है। नहर की लगातार बिगड़ती स्थिति ने स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे क्षेत्रवासी अब प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक उपाय करने की गुहार लगा रहे हैं।\n\nटूटी सुरक्षा दीवारें और मंडराता दुर्घटनाओं का खतरा\nनहर के किनारों पर की गई सुरक्षा व्यवस्था वर्तमान में पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। कई महत्वपूर्ण और व्यस्त स्थानों पर नहर के किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवारें या तो पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं या फिर वहां से पूरी तरह गायब हैं। इस मजबूत चारदीवारी के अभाव में मार्ग से आवागमन करने वाले आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए हर समय अनहोनी का डर बना रहता है। क्षेत्र के निवासी ओमप्रकाश सिंघल का कहना है कि सुरक्षा दीवार न होने की वजह से विशेषकर रात के अंधेरे में गंभीर सड़क हादसों की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है। बच्चों, बुजुर्गों और चौपहिया वाहन चालकों के लिए इस संकरे किनारे से सुरक्षित निकलना अब बेहद चुनौतीपूर्ण और डरावना अनुभव बन गया है।\n\nकचरे के ढेर से दूषित हुआ पानी और बढ़ा बीमारियों का डर\nसुरक्षा के अभाव के अलावा सुजानगंगा नहर में स्वच्छता की स्थिति भी बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। आसपास के क्षेत्रों के लोगों तथा असामाजिक तत्वों द्वारा नहर के जल में लगातार घरेलू कचरा और प्लास्टिक अपशिष्ट फेंका जा रहा है। लंबे समय से कचरा एकत्रित होने की वजह से नहर का पानी पूरी तरह दूषित होकर भयंकर बदबू मारने लगा है। जल का यह भीषण प्रदूषण न केवल दृश्य रूप से गंदगी फैला रहा है, बल्कि इससे पूरे इलाके का पर्यावरणीय संतुलन और भूजल गुणवत्ता भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। जमे हुए गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आसपास की बस्तियों में संक्रामक बीमारियां फैलने का निरंतर जोखिम बना हुआ है।\n\nनागरिकों की अपील और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग\nभरतपुर के जागरूक नागरिकों ने संबंधित सरकारी विभागों से इस गंभीर मामले का शीघ्र संज्ञान लेने की मांग उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी तत्काल प्रभाव से नहर के असुरक्षित हिस्सों का स्थलीय मुआयना करें और टूटी हुई सुरक्षा दीवारों का पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराएं। इसके साथ ही नहर के पानी में कचरा तथा प्लास्टिक फेंकने वाले व्यक्तियों पर कड़ा जुर्माना लगाने और नियमित रूप से जल की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिम्मेदार विभाग इस ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर को सुरक्षित और स्वच्छ स्वरूप लौटाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभरतपुर शहर में सुजानगंगा नहर की खस्ताहाल स्थिति से स्थानीय नागरिकों और राहगीरों के लिए रोजमर्रा की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं।\n\n• भारत में: ऐतिहासिक जल स्रोतों और शहरी नहरों की नियमित सुरक्षा ऑडिट समय पर न होने से देश भर के शहरी केंद्रों में जल प्रदूषण और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। प्रशासन को शहरी जलाशयों के संरक्षण और सुरक्षा मानकों पर कठोर नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता है।\n• भरतपुर में: सुरक्षा दीवारों के गायब होने से रात के समय नहर के किनारे से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों के लिए नहर में गिरने का बड़ा जोखिम बना रहता है। इसके साथ ही गंदे और सड़े हुए पानी में मच्छरों के पनपने से आसपास की रिहायशी बस्तियों में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप फैल सकता है।\n• यातायात पर प्रभाव: बिना चारदीवारी वाले संकरे रास्तों से बच्चों, बुजुर्गों और चौपहिया वाहनों की आवाजाही असुरक्षित हो चुकी है। लोगों को रात में इस मार्ग से गुजरते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने या वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की जरूरत पड़ रही है।\n• सफाई और जुर्माना: खुले में कचरा फेंकने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और जुर्माना न होने से नहर के आसपास रहने वालों का जीवन बदबू और कचरे से नारकीय हो रहा है। नागरिक प्रशासन से नियमित सफाई और बैरिकेडिंग की तत्काल मांग कर रहे हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभरतपुर की ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर की वर्तमान दुर्दशा निरंतर प्रशासनिक उपेक्षा, रखरखाव के अभाव और सार्वजनिक अनुशासन की कमी का सीधा परिणाम है।\n\n• देखरेख और मरम्मत का अभाव: लंबे समय से संबंधित प्रशासनिक विभागों द्वारा नहर के बुनियादी ढांचे और किनारों की मरम्मत की निगरानी नहीं की गई। समय पर प्लास्टर और चिनाई की मरम्मत न होने के कारण सुरक्षा दीवारें टूटकर पूरी तरह ढह गईं।\n• अनियंत्रित कचरा निस्तारण: आसपास रहने वाले लोगों और असामाजिक तत्वों द्वारा खुले तौर पर प्लास्टिक वेस्ट और घरेलू कूड़ा नहर में फेंका जाता रहा। कचरा डंप करने वालों के खिलाफ निगरानी या दंडात्मक कार्रवाई न होने से यह समस्या लगातार विकराल होती गई।\n• नियमित जल स्वच्छता का संकट: जल प्रवाह और सफाई की आवधिक व्यवस्था न होने से जमा हुआ पानी सड़ने लगा और बदबूदार कीचड़ में तब्दील हो गया। अब तक किसी ठोस संरक्षण परियोजना के अभाव में यह प्राचीन जल स्रोत प्रशासनिक प्राथमिकताओं से बाहर बना रहा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुजानगंगा नहर किस शहर में स्थित है?\nसुजानगंगा नहर राजस्थान के भरतपुर शहर के ठीक बीचोंबीच स्थित है।\n\n2. नहर के पास दुर्घटनाओं का खतरा क्यों बढ़ गया है?\nनहर के किनारों पर बनी सुरक्षा दीवारें टूट चुकी हैं या पूरी तरह गायब हो चुकी हैं, जिससे वाहनों और राहगीरों के गिरने का जोखिम बना रहता है।\n\n3. नहर का पानी प्रदूषित और बदबूदार क्यों हो रहा है?\nआसपास के लोगों और असामाजिक तत्वों द्वारा नियमित रूप से प्लास्टिक और कचरा नहर में फेंकने के कारण पानी बुरी तरह दूषित हो चुका है।\n\n4. स्थानीय नागरिक ओमप्रकाश सिंघल ने क्या चिंता जताई है?\nउन्होंने बताया कि सुरक्षा दीवार न होने से विशेषकर रात के समय गंभीर दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है और बच्चों व बुजुर्गों का निकलना असुरक्षित हो गया है।\n\n5. भरतपुर के निवासियों ने प्रशासन से क्या मांगें की हैं?\nनागरिकों ने टूटी दीवारों का तत्काल निर्माण कराने, कचरा फेंकने वालों पर भारी जुर्माना लगाने और नियमित जल सफाई कराने की मांग की है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-12",
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