# भरतपुर में अनोखे 'मच्छर के पकोड़े' का जलवा, नाम सुन उड़ जाते हैं होश

> भरतपुर के बयाना में मिलने वाले 'मच्छर के पकोड़े' अपने अजीब नाम की वजह से लोगों को हैरान कर देते हैं, लेकिन इनमें कोई कीट नहीं बल्कि बेसन और मसालों का इस्तेमाल होता है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-08-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bharatpur-me-anokhe-mosquito-pakodas-ka-jalwa-naam-sun-ud-jate-hain-hosh-24893 · **Language:** Hindi
**Tags:** भरतपुर, बयाना, मच्छर के पकोड़े, मानसून, स्ट्रीट फूड, राजस्थान

मानसून की दस्तक के साथ ही राजस्थान के भरतपुर जिले में तरह-तरह के लजीज व्यंजन लोगों की जुबान पर छा जाते हैं। हालांकि इस क्षेत्र में एक ऐसा अनूठा स्नैक भी मिलता है, जिसका नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के कान खड़े हो जाते हैं और वे सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। हम बात कर रहे हैं भरतपुर के बयाना इलाके के बेहद मशहूर 'मच्छर के पकोड़े' की। पहली बार इस नाम को सुनने वाले किसी भी शख्स के मन में अजीबोगरीब ख्याल आ सकते हैं, लेकिन इस पकवान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के कीट-पतंगों का कोई लेना-देना नहीं है। इसका यह अजीबोगरीब नाम असल में इसे तैयार करने वाले कारीगर के नाम पर रखा गया है, और बारिश के सीजन में इनकी डिमांड आसमान छूने लगती है।

## कारीगर के नाम पर पड़ा यह दिलचस्प नाम
बयाना की इस मशहूर दुकान पर मिलने वाले इन लजीज पकोड़ों का यह अनोखा नाम इसे बनाने वाले हलवाई के नाम यानी 'मच्छर' पर आधारित है। यही वजह है कि स्थानीय लोग और दूर-दूर से आने वाले पर्यटक इन्हें प्यार से मच्छर के पकोड़े कहकर ही बुलाते हैं। जब कोई अनजान शख्स पहली बार यह नाम सुनता है, तो वह न सिर्फ चौंक जाता है बल्कि कई बार इसे लेकर तरह-तरह के मजाक भी बनने लगते हैं। हालांकि जब ग्राहकों को यह असलियत मालूम होती है कि यह पूरी तरह से हाइजेनिक और सामान्य बेसन के पकोड़े हैं, तो उनकी जिज्ञासा और भी ज्यादा बढ़ जाती है। खासकर बारिश के सुहाने मौसम में इन गरमा-गरम पकौड़ियों का लुत्फ उठाने के लिए आसपास के गांवों और कस्बों से भी लोग खींचे चले आते हैं और दुकान पर अच्छी खासी रौनक देखने को मिलती है।

## सामग्री और बनाने की खास शैली
इन अनूठे पकोड़ों को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद पारंपरिक और स्वादिष्ट होती है। इन्हें बनाने के लिए मुख्य रूप से बेसन, बारीक कटे प्याज, उबले हुए आलू और तीखी हरी मिर्च जैसी आम सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसके बाद इसमें मसालों का एक गुप्त और विशेष मिश्रण मिलाया जाता है, जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ा देता है। कड़ाही में खौलते हुए गर्म तेल में इन्हें तब तक तला जाता है जब तक ये बाहर से पूरी तरह से सुनहरे और कुरकुरे न हो जाएं। आसमान से गिरती बारिश की बूंदों के बीच जब लोगों को ये गरमा-गरम और क्रिस्पी पकोड़े परोसे जाते हैं, तो उनका दिल खुश हो जाता है। यही मुख्य कारण है कि बरसात के दिनों में इनकी बिक्री सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना तक बढ़ जाती है और काउंटर पर हमेशा खरीदारों का तांता लगा रहता है।

## कीमत और ग्राहकों का जबरदस्त उत्साह
इन पकोड़ों की एक और खास बात इनकी तय की गई कीमत है, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है। इन खास पकोड़ों का बाजार भाव करीब 300 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से रहता है। पहली बार दाम सुनने पर कुछ लोगों को यह थोड़ा महंगा लग सकता है, लेकिन इनका बेहतरीन स्वाद चखने के बाद ज्यादातर ग्राहक दोबारा इन्हें खरीदने के लिए जरूर लौटते हैं। स्थानीय निवासियों के लिए अब यह सिर्फ एक साधारण खाने की चीज नहीं रह गई है, बल्कि बयाना के मानसून का एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा बन चुका है जिसके बिना बरसात का मजा अधूरा सा लगता है।

## क्यों खास है यह बरसाती अनुभव
यदि आप कभी भी बरसात के सीजन में भरतपुर के बयाना क्षेत्र की यात्रा पर जाएं और अचानक आपको 'मच्छर के पकोड़े' की आवाज सुनाई दे, तो आपको डरने या घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। वहां किसी कीट की नहीं बल्कि मच्छर नाम के एक कुशल कारीगर के हाथों से बने बेहद स्वादिष्ट और लजीज पकोड़े परोसे जा रहे होते हैं। बेसन, आलू, प्याज और मिर्च के बेहतरीन मेल से तैयार ये करारे पकोड़े अपने अजीबोगरीब नाम और लाजवाब जायके की वजह से पूरे इलाके में अपनी एक अलग पहचान कायम कर चुके हैं। यही अनूठा मेल इन्हें भरतपुर के बरसाती मौसम का सबसे दिलचस्प और यादगार अनुभव बनाता है।

## इसका आप पर असर
यह अनोखी खाद्य परंपरा मुख्य रूप से स्थानीय खानपान और पर्यटन से जुड़ी है, जिसका सीधा असर क्षेत्रीय विक्रेताओं और ग्राहकों की पसंद पर पड़ता है।

- **भारत में:** देश भर के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय स्ट्रीट फूड और अनोखे नामों वाली दुकानें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, जिससे क्षेत्रीय खानपान संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
- **भरतपुर में:** बयाना और आसपास के इलाकों के रहने वाले लोगों के लिए यह बरसाती सीजन में एक लोकप्रिय स्नैक विकल्प है, जिसके लिए स्थानीय बाजार में ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है।

## सवाल-जवाब

### 1. मच्छर के पकोड़े कहां मिलते हैं?
यह अनोखे पकोड़े राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना इलाके में मिलते हैं।

### 2. क्या इन पकोड़ों में सचमुच मच्छर होते हैं?
नहीं, इन पकोड़ों में किसी भी तरह के मच्छर या कीट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

### 3. इन पकोड़ों का नाम ऐसा क्यों रखा गया है?
इनका नाम इन्हें बनाने वाले मुख्य कारीगर के उपनाम 'मच्छर' के नाम पर रखा गया है।

### 4. इन पकोड़ों को बनाने में किन सामग्रियों का उपयोग होता है?
इन्हें बेसन, प्याज, आलू, हरी मिर्च और मसालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है।

### 5. मच्छर के पकोड़े की कीमत क्या है?
इन खास पकोड़ों की कीमत बाजार में लगभग 300 रुपये प्रति किलो है।

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