भरतपुर में लंपी वायरस का प्रकोप तेज, नदबई में एक ही दिन में मिले 100 नए मरीज भरतपुर जिले में गोवंश में लंपी वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे कुल मामले 631 तक पहुंच गए हैं। स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने युद्ध स्तर पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। भरतपुर जिले में गोवंश के बीच घातक लंपी वायरस का संक्रमण लगातार विकराल रूप धारण कर रहा है। ग्रामीण इलाकों में इस बीमारी के पैर पसारने से मवेशी पालकों की नींद उड़ गई है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि केवल नदबई ब्लॉक में ही एक ही दिन के भीतर लंपी वायरस के 100 नए मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस खतरनाक संक्रमण की वजह से पूरे जिले में अब तक कुल 631 पशु इसकी चपेट में आ चुके हैं। लंपी वायरस के बढ़ते प्रकोप और गंभीर होती परिस्थितियों को देखते हुए जिला कलेक्टर कमर चौधरी ने प्रशासनिक अमले और पशुपालन विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय आपात बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वायरस के फैलाव पर ब्रेक लगाने, प्रभावित इलाकों में पशुओं का टीकाकरण करने और बीमार मवेशियों के समय पर इलाज को लेकर गहन मंत्रणा की गई। जिला कलेक्टर ने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि संक्रमण को रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने पशुपालन विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर निगरानी रखने के कड़े आदेश दिए हैं। संक्रमण रोकने के लिए बनीं विशेष टीमें इस खतरनाक वायरस के प्रसार को सख्ती से रोकने के लिए जिले के प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर पशुपालन विभाग की तरफ से विशेष नियंत्रण और मॉनिटरिंग टीमें तैनात कर दी गई हैं। ये दलगत टीमें कई मोर्चों पर पूरी मुस्तैदी से काम कर रही हैं। गांवों में घर-घर जाकर निगरानी की जा रही है और त्वरित उपचार दिया जा रहा है। ये टीमें गांवों का दौरा करके संक्रमित पशुओं की पहचान कर रही हैं और उन्हें तुरंत अलग करके उनका इलाज शुरू कर रही हैं। स्वस्थ पशुओं में इस बीमारी के संक्रमण को रोकने के लिए प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है ताकि सुरक्षित गोवंश को बचाया जा सके। पशुपालकों की शिकायतों और आपातकालीन सूचनाओं का तेजी से समाधान करने के लिए हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं ताकि सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा दल तुरंत मौके पर पहुंच सके। पशुपालन विभाग ने जिले के तमाम पशुपालकों से विशेष अपील की है कि वे अपने मवेशियों को अन्य जानवरों से अलग रखें और बाड़ों में साफ-सफाई का विशेष प्रबंध करें। यदि किसी भी पशु में बुखार, शरीर पर गांठें उभरने या मुंह से लार टपकने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो फौरन नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या कंट्रोल टीम को इसकी सूचना दें। समय रहते जांच और उपचार मिलने से बेजुबान पशुओं की जान बचाई जा सकती है। इसका आप पर असर लंपी वायरस के तेजी से फैलते संक्रमण का सीधा असर स्थानीय पशुपालकों की आजीविका और डेयरी कारोबार पर पड़ रहा है। • भारत में: देश के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में गोवंश में फैलने वाली ऐसी बीमारियां पशुधन की सुरक्षा और दूध के उत्पादन को प्रभावित करती हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है। • भरतपुर में: भरतपुर जिले और विशेषकर नदबई क्षेत्र के पशुपालकों को अपने मवेशियों को बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने और तुरंत टीकाकरण कराने की आवश्यकता है। • सतर्कता: पशुपालकों को प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बीमार पशुओं को तुरंत अलग करना चाहिए और लक्षण दिखते ही चिकित्सा टीम से संपर्क करना चाहिए। • सुरक्षा उपाय: बाड़ों में साफ-सफाई रखने और अन्य मवेशियों से संपर्क रोकने से स्वस्थ गोवंश को इस घातक संक्रमण की चपेट में आने से बचाया जा सकता है। • प्रशासनिक मदद: किसान और पशुपालक आपात स्थिति में जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम की हेल्पलाइन की मदद ले सकते हैं। सवाल-जवाब 1. भरतपुर जिले में लंपी वायरस के कुल कितने मामले सामने आ चुके हैं? स्वास्थ्य एवं पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भरतपुर जिले में अब तक कुल 631 पशु लंपी वायरस की चपेट में आ चुके हैं। 2. जिले के किस ब्लॉक में लंपी वायरस के सबसे ज्यादा नए मामले एक दिन में मिले हैं? नदबई ब्लॉक में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां अकेले एक ही दिन में लंपी वायरस के 100 नए मामले सामने आए हैं। 3. इस संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से क्या कदम उठाया गया है? जिला कलेक्टर कमर चौधरी ने प्रशासनिक और पशुपालन अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय आपात बैठक कर निगरानी और टीकाकरण बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। 4. संक्रमण को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने कौन सी विशेष टीमें बनाई हैं? विभाग ने हर ब्लॉक स्तर पर विशेष नियंत्रण और मॉनिटरिंग टीमें गठित की हैं जो घर-घर जाकर निगरानी, टीकाकरण और त्वरित उपचार कर रही हैं। 5. पशुपालकों को अपने मवेशियों में कौन से लक्षण दिखने पर तुरंत सूचना देनी चाहिए? बुखार, शरीर पर गांठें उभरना या मुंह से लार गिरना जैसे लक्षण दिखने पर पशुपालकों को तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करना चाहिए। https://trendkia.com/rajasthan/bharatpur-men-lumpy-virus-ka-prakopa-teja-nadbai-men-eka-hi-dina-men-mile-100-nae-marija-24988 TrendKia — Har trend, sabse pehle.