भीलवाड़ा के किसानों ने बदली खेती की तस्वीर, फूलों के उत्पादन से बढ़ रही है तगड़ी कमाई भीलवाड़ा में किसान पारंपरिक फसलों के साथ गुलाब, गेंदा और गुलदावरी की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। राज्य सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत इस पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है। भीलवाड़ा जिले के अन्नदाता अब केवल पुरानी और पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय फूलों की खेती की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। इस बदलाव से उनकी आमदनी में उल्लेखनीय इजाफा हो रहा है और खेती अब घाटे का सौदा नहीं बल्कि फायदे का बिजनेस बनती जा रही है। जिले में गुलाब, गेंदा और गुलदावरी जैसे फूलों का दायरा लगातार फैल रहा है, जिससे खेती का यह आधुनिक तरीका स्थानीय किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। बाजार में फूलों की मांग पूरे साल बनी रहती है, खासकर जब शादियों का सीजन आता है, बड़े धार्मिक अनुष्ठान होते हैं या कोई राजनीतिक जलसा आयोजित किया जाता है। ऐसे अवसरों पर फूलों के दाम आसमान छूते हैं, जिसका सीधा फायदा भीलवाड़ा के मेहनतकश किसानों को मिलता है और वे अतिरिक्त कमाई कर लेते हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, फूलों का यह व्यवसाय कम समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिल रही बड़ी आर्थिक मदद इस आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार किसानों को भरपूर सहयोग प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत किसानों को फूलों की खेती करने पर इकाई लागत का पूरा 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। अगर प्रति हेक्टेयर या निर्धारित मानक के अनुसार 20 हजार रुपये की इकाई लागत आती है, तो सरकार की तरफ से सीधे 10 हजार रुपये तक की सहायता राशि किसानों के खातों में पहुंचाई जाती है। भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान विभाग के निदेशक डॉ. शंकर सिंह राठौड़ ने बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि यह जिला अब फूलों के बड़े हब के रूप में अपनी खास पहचान दर्ज करा रहा है। उन्होंने बताया कि किस तरह किसान पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर व्यावसायिक कृषि की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, जो उन्हें साल के बारहों महीने आर्थिक सुरक्षा देता है। व्यावसायिक खेती और मुनाफे का नया गणित फूलों की खेती को विशुद्ध रूप से व्यावसायिक खेती माना जाता है, जिसमें पारंपरिक अनाजों या अन्य फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा कमाने का मौका होता है। फसल तैयार होने के बाद जैसे ही माल बाजार में पहुंचता है, मांग के मुताबिक तुरंत अच्छे दाम मिल जाते हैं, जिससे किसानों के पास नकदी का प्रवाह भी तेजी से होता है। सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी और बाजार में सालभर रहने वाली भारी मांग के कारण भीलवाड़ा के किसानों का हौसला काफी ऊंचा है। आने वाले दिनों में जिले के और अधिक किसानों के इस मुनाफे वाली खेती से जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। इसका आप पर असर भीलवाड़ा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में फूलों की खेती करने वाले किसानों की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा और उनकी सालाना कमाई बढ़ेगी। • भारत में: कृषि विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को सरकार की बागवानी योजनाओं के माध्यम से वित्तीय जोखिम कम करने और बेहतर नकदी फसल उगाने का अवसर मिलता है। • भीलवाड़ा में: जिले के किसान गुलाब, गेंदा और गुलदावरी जैसी अधिक मांग वाली फसलों को उगाकर स्थानीय शादियों और त्योहारों के बाजार का सीधा लाभ उठा रहे हैं। • आर्थिक लाभ: इकाई लागत पर मिलने वाला 50 प्रतिशत अनुदान किसानों पर शुरुआती निवेश का बोझ कम करता है और उनकी जेब से लगने वाली पूंजी बचाता है। • बाजार पहुंच: धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों के दौरान फूलों के दाम बढ़ने से किसानों को पारंपरिक अनाजों की तुलना में कम समय में अधिक मुनाफा मिलता है। • सरकारी सहायता: राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिलने वाले 10 हजार रुपये तक के अनुदान से छोटे किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने की प्रेरणा मिलती है। सवाल-जवाब 1. भीलवाड़ा के किसान किन प्रमुख फूलों की खेती कर रहे हैं? भीलवाड़ा के किसान मुख्य रूप से गुलाब, गेंदा और गुलदावरी के फूलों की खेती कर रहे हैं। 2. फूलों की खेती पर सरकार कितना अनुदान दे रही है? राजस्थान सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत फूलों की खेती पर इकाई लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दे रही है। 3. 20 हजार रुपये की इकाई लागत पर कितना अनुदान मिलता है? 20 हजार रुपये की इकाई लागत पर किसानों को 10 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। 4. भीलवाड़ा में उद्यान विभाग के निदेशक कौन हैं? डॉ. शंकर सिंह राठौड़ भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान विभाग के निदेशक हैं। 5. किसानों को फूलों की खेती से अतिरिक्त मुनाफा कब होता है? शादी समारोह, धार्मिक आयोजनों और राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान मांग बढ़ने पर किसानों को अतिरिक्त मुनाफा मिलता है। https://trendkia.com/rajasthan/bhilavara-ke-kisanon-ne-badali-kheti-ki-tasvira-phulon-ke-utpadana-se-barha-rahi-hai-tagari-kamai-27882 TrendKia — Har trend, sabse pehle.