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  "type": "article",
  "title": "भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में बढ़ी फसलों की आवक, कम बारिश और कम भाव से अन्नदाता परेशान",
  "summary": "भीलवाड़ा की कृषि उपज मंडी में इन दिनों फसलों की आवक जोरों पर है, लेकिन इस बार कम बारिश और बाजार में कम भाव मिलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।",
  "content": "भीलवाड़ा की प्रमुख कृषि उपज मंडी में इन दिनों विभिन्न प्रकार की कृषि उपजों की भारी आवक देखने को मिल रही है। वर्तमान में इस मंडी के भीतर प्रतिदिन लगभग 500 से 600 बोरियों तक की पहुंच दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद स्थानीय अन्नदाताओं के हाथ मायूसियां लग रही हैं, क्योंकि उन्हें अपनी मेहनत के एवज में बाजार से वाजिब मूल्य प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। इस कृषि सीजन के दौरान मानसून सत्र में न्यून वर्षा होने तथा मौसम के मिजाज में बार-बार आए उतार-चढ़ाव ने उत्पादकता को गहरा आघात पहुंचाया है। इसके अलावा पिछले वर्ष की समान अवधि के आंकड़ों से तुलना की जाए तो इस बार कई प्रमुख कृषि जिंसों के दाम काफी नीचे चल रहे हैं, जिससे किसानों की माली हालत कमजोर होती जा रही है।\n\nखेती की बढ़ती लागत और मंडियों में मंदी का दोतरफा दबाव\nक्षेत्र के कृषकों का स्पष्ट रूप से कहना है कि कृषि कार्यों के संचालन में आने वाला खर्च लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। बुवाई के लिए उत्तम किस्म के बीज, खेतों में डालने वाले उर्वरक, फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशक दवाइयां और कटाई-बुआई के समय मजदूरों की मजदूरी में लगातार इजाफा हुआ है। इसके बावजूद जब वे पसीना बहाकर तैयार की गई अपनी फसल को बेचने के लिए मंडी के प्रांगण में पहुंचते हैं, तो उन्हें उम्मीद के विपरीत बहुत कम दाम थमा दिए जाते हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में किसानों के लिए अपनी खेती में लगा हुआ मूलधन निकालना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ प्रकृति की बेरुखी और दूसरी तरफ खुले बाजार में कम कीमत मिलने की दोहरी मार ने किसानों की चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है।\n\nभीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में फसलों के ताजा दाम\nभीलवाड़ा की इस अधिकृत मंडी के भीतर विभिन्न अनाजों और तिलहनों के भावों पर यदि नजर डाली जाए तो कई तरह के आंकड़े सामने आते हैं। मंडी में गेहूं की बिक्री 2631 रुपए से लेकर 2703 रुपए प्रति क्विंटल के दायरे में दर्ज की गई। इसके अलावा हाइब्रिड मक्का के भाव 2651 से 2661 रुपए, मूंगफली के 5000 से 5010 रुपए और साबुत चना दाल के दाम 5750 से 6195 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे। मंडियों में देसी लाल मक्का 2904 से 2914 रुपए प्रति क्विंटल, सरसों 7200 से 7210 रुपए, ज्वार 2000 से 2010 रुपए और जौ 2125 से 2135 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकती नजर आई। ग्वार का कारोबार 5950 से 5960 रुपए, साबुत उड़द यानी काली दाल 8000 से 8910 रुपए, सोयाबीन 4200 से 4210 रुपए, साबुत मूंग दाल 8505 से 8515 रुपए और देसी सफेद मक्का के दाम 2010 से 2110 रुपए प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए।\n\nकिसानों का दर्द और आसींद क्षेत्र के हालात\nभीलवाड़ा जिले के आसींद इलाके के निवासी किसान नारायण लाल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष जलवायु की अनियमितता ने उनकी फसल के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता दोनों को ही बुरी तरह प्रभावित किया है। जब वे अपनी उपज को लेकर मंडी पहुंचते हैं, तो पिछले साल की भांति संतोषजनक दाम बिल्कुल नहीं मिल रहे हैं। किसान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, \"खेती में बीज, खाद, दवाई और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है।\" फसल को उगाने और पकाने में महीनों की कड़ी मेहनत लगती है, किंतु बाजार में उचित मूल्यांकन न मिलने के कारण लागत वसूलना भी असंभव सा प्रतीत होने लगा है।\n\nबारिश की कमी और भविष्य की उम्मीदें\nमानसून के दौरान अपर्याप्त वर्षा होने से फसलों को शुरुआती दौर में ही बड़ा झटका लग चुका था। यदि ऐसे कठिन दौर में उत्पादित माल के उचित दाम भी किसानों के हाथ न लगें, तो उनकी आर्थिक रीढ़ पूरी तरह से चरमरा जाएगी। अन्नदाता यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में जिंसों के बाजार भाव में कुछ सुधार देखने को मिलेगा, जिससे उन्हें थोड़ी बहुत राहत नसीब हो सकेगी। फिलहाल भीलवाड़ा की इस मंडी में फसलों की आवक का सिलसिला बदस्तूर जारी है, लेकिन लाभकारी मूल्यों के अभाव में किसान वर्ग गहरे मानसिक तनाव में जीवन गुजार रहा है। किसानों की एकमात्र प्रमुख मांग यही है कि उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन या लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे खेती के भारी-भरकम खर्चों की भरपाई कर सकें और अपनी कठिन मेहनत का वास्तविक प्रतिफल प्राप्त कर पाएं।\n\nइसका आप पर असर\nकम बारिश और कम बाजार भाव के चलते किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा और गहरा असर पड़ रहा है, जिससे उन्हें लागत निकालना भी भारी पड़ रहा है।\n\n• भारत में: देश के कृषि प्रधान क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता और कम समर्थन मूल्यों के कारण किसानों को फसल की लागत वसूलने में कठिनाई हो रही है। इस स्थिति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं दोनों पर महंगाई और क्रय शक्ति का दबाव बढ़ सकता है।\n• भीलवाड़ा में: स्थानीय कृषि उपज मंडी में मक्का, गेहूं, सरसों और दलहन जैसी प्रमुख फसलों के कम दाम मिलने से भीलवाड़ा और आसींद क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मंडियों में उचित मूल्य मिलने से उनकी स्थिति सुधरेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nफसालों के कम भाव मिलने और किसानों को हो रहे नुकसान के पीछे मुख्य रूप से मानसून के दौरान अपर्याप्त वर्षा और मौसम में हुए लगातार उतार-चढ़ाव हैं।\n\n• कमजोर मानसून और जलवायु परिवर्तन: इस सीजन में समय पर पर्याप्त बारिश न होने के कारण फसलों की कुल पैदावार और उनकी गुणवत्ता दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।\n• बढ़ती कृषि लागत: खेती में उपयोग होने वाले बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक दवाइयां और कृषि मजदूरों की मजदूरी में लगातार तेज वृद्धि हुई है।\n• पिछले साल की तुलना में मंदी: पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार कई प्रमुख कृषि जिंसों के थोक दाम नीचे चल रहे हैं, जिससे किसानों को घाटा हो रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में रोजाना कितनी बोरियां पहुंच रही हैं?\nभीलवाड़ा मंडी में इन दिनों प्रतिदिन करीब 500 से 600 बोरियां फसल पहुंच रही हैं।\n\n2. भीलवाड़ा मंडी में गेहूं के भाव क्या रहे?\nमंडी में गेहूं के भाव 2631 से 2703 रुपए प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए।\n\n3. किसानों को किन कारणों से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है?\nकम बारिश, मौसम के उतार-चढ़ाव और पिछले साल के मुकाबले इस बार फसल के कम दाम मिलने से किसानों को नुकसान हो रहा है।\n\n4. आसींद क्षेत्र के किस किसान ने अपनी परेशानी साझा की?\nआसींद क्षेत्र के रहने वाले किसान नारायण लाल ने अपनी फसल के कम भाव मिलने की परेशानी साझा की।\n\n5. मंडी में सरसों के भाव कितने दर्ज किए गए?\nभीलवाड़ा मंडी में सरसों के भाव 7200 से 7210 रुपए प्रति क्विंटल रहे।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-26",
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    "भीलवाड़ा मंडी",
    "कृषि समाचार",
    "फसल भाव",
    "मानसून प्रभाव",
    "किसान समस्या",
    "गेहूं मक्का दाम"
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  "site": "TrendKia"
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