भीलवाड़ा के भदाली खेड़ा में खुला राज सखी मार्ट, महिलाओं के हुनर को मिला नया बाजार भीलवाड़ा जिले के भदाली खेड़ा में राजीविका के तहत राज सखी मार्ट की शुरुआत की गई है, जहां महिलाओं द्वारा तैयार अचार, मसाले, जूट बैग और अन्य स्थानीय उत्पाद एक ही छत के नीचे मिल रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को सही बाजार दिलाना है। भीलवाड़ा जिले के भदाली खेड़ा में महिलाओं के कौशल को बढ़ावा देने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राजीविका के अंतर्गत यहां राज सखी मार्ट की शुरुआत की गई है, जिसके जरिए ग्रामीण महिलाओं को अपने हाथों से बनाए गए उत्पादों को बेचने के लिए एक बड़ा मंच मिल रहा है। इस मार्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां अचार, मसाले, शरबत, साबुन और जूट के बैग जैसे तमाम स्थानीय उत्पाद एक ही छत के नीचे आसानी से खरीदे जा सकते हैं। इस अनूठी पहल से न केवल महिलाओं की मेहनत को सही पहचान मिल रही है, बल्कि उनके हुनर को एक व्यावसायिक दिशा भी मिल रही है। विभिन्न प्रकार के स्वदेशी और हस्तनिर्मित उत्पाद राज सखी मार्ट की संचालिका कंचन लुहार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यहां स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की एक लंबी श्रृंखला उपलब्ध है। इनमें खासतौर पर पारंपरिक अचार, आंवला कैंडी, गुलाब का शरबत, सौंफ का शरबत, विभिन्न प्रकार के शुद्ध मसाले, केमिकल फ्री साबुन और पर्यावरण के अनुकूल जूट के बैग शामिल हैं। ये सभी सामग्रियां महिलाएं अपने हाथों से पूरी मेहनत के साथ तैयार करती हैं। इसके अलावा, इस मार्ट में राजस्थान के दूसरे हिस्सों में बनने वाली लोक कला और स्थानीय वस्तुओं को भी खासी जगह दी गई है, जिससे खरीदारों के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं रहती है। दूसरे जिलों की मशहूर हस्तकला भी उपलब्ध इस मार्ट के दायरे को सिर्फ स्थानीय स्तर तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसमें राजस्थान के अन्य जिलों की पारंपरिक कलाओं को भी शामिल किया गया है। खरीदार यहां आकर दौसा की प्रसिद्ध हस्तनिर्मित जूतियां, झालावाड़ की सुंदर चूड़ियां और राजसमंद जिले के मालेला गांव की प्रसिद्ध मिट्टी से बनी कलाकृतियां भी खरीद सकते हैं। इसके साथ ही, महिला समूहों द्वारा तैयार की गई विभिन्न प्रकार की खाने योग्य और सजावटी प्लेटें भी यहां बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। इस तरह यह केंद्र न केवल भीलवाड़ा बल्कि पूरे राज्य की ग्रामीण कला और दस्तकारी का एक बेहतरीन संगम बन गया है। किफायती कीमतों पर मिल रहा उच्च गुणवत्ता का सामान संचालिका कंचन लुहार के मुताबिक, मार्ट में मिलने वाले सभी उत्पाद बेहद किफायती और वाजिब दामों पर उपलब्ध हैं, ताकि आम लोग भी आसानी से खरीदारी कर सकें। यहां आने वाले ग्राहक अपनी रोजमर्रा की जरूरत और पसंद के हिसाब से अलग-अलग सामग्रियां चुन रहे हैं। जैसे-जैसे इस मार्ट के बारे में लोगों को जानकारी मिल रही है, वैसे-वैसे यहां आने वाले खरीदारों की संख्या और उनका रुझान भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बढ़ते समर्थन से महिला उद्यमियों को अपने सामान की बिक्री के लिए और अधिक सुनहरे अवसर मिल रहे हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में भी सुधार आ रहा है। मांडल क्षेत्र का पहला अनूठा मार्ट मांडल पंचायत समिति के विकास अधिकारी गुलाब सिंह गुर्जर ने इस परियोजना के बारे में विस्तार से बताया कि राज सखी मार्ट मांडल क्षेत्र का अपने तरह का पहला ऐसा केंद्र है। इस मार्ट में राजीविका से जुड़े विभिन्न समूहों के लगभग 25 से 50 प्रकार के उत्पाद एक ही जगह पर प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखे गए हैं। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके हुनर के बूते पर आगे बढ़ने और आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने के पर्याप्त अवसर देना है। ग्रामीण आजीविका विकास परिषद की तरफ से महिलाओं को समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे वे अपने काम में और अधिक निपुण हो सकें। इस मार्ट के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में तैयार होने वाली वस्तुओं को सीधे उपभोक्ता बाजार तक पहुंचाने में बहुत बड़ी मदद मिल रही है। इसका आप पर असर यह पहल भीलवाड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोलती है। • भीलवाड़ा में: स्थानीय महिलाओं को अपने द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बेचने के लिए एक स्थायी और समर्पित बाजार मिल गया है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और महिलाओं को उनके उत्पादों का पूरा मुनाफा सीधे मिलेगा। • भारत में: ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों और राजीविका जैसी पहलों के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलता है। इससे देश भर में स्थानीय कारीगरों और महिला उद्यमियों की आजीविका मजबूत होती है। ऐसा क्यों हुआ ग्रामीण महिलाओं के कौशल को व्यावसायिक पहचान देने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने की आवश्यकता के चलते इस मार्ट की स्थापना की गई है। • सीमित बाजार पहुंच: ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के पास अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को बेचने के लिए बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच का अभाव रहता था। • सरकारी सहायता और प्रशिक्षण: राजीविका योजना के तहत महिलाओं को प्रशिक्षित कर उनके उत्पादों को एक छत के नीचे उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई गई। • स्थानीय कला का संरक्षण: राजस्थान के विभिन्न जिलों की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और जीवित रखने के उद्देश्य से इसे एकीकृत किया गया है। सवाल-जवाब 1. राज किस जिले में शुरू किया गया है? राज सखी मार्ट भीलवाड़ा जिले के भदाली खेड़ा में शुरू किया गया है। 2. इस मार्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है? इस मार्ट का उद्देश्य महिलाओं के हुनर को बाजार उपलब्ध कराना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। 3. मार्ट में मुख्य रूप से कौन-कौन से उत्पाद मिल रहे हैं? मार्ट में अचार, मसाले, शरबत, साबुन, जूट के बैग और अन्य स्थानीय उत्पाद मिल रहे हैं। 4. इस मार्ट में अन्य किन जिलों की वस्तुएं उपलब्ध हैं? यहाँ दौसा की जूतियां, झालावाड़ की चूड़ियाँ और राजसमंद के मालेला की मिट्टी से बनी वस्तुएं उपलब्ध हैं। 5. राज सखी मार्ट की संचालिका कौन हैं? राज सखी मार्ट की संचालिका कंचन लुहार हैं। 6. मांडल क्षेत्र के विकास अधिकारी कौन हैं? मांडल पंचायत समिति के विकास अधिकारी गुलाब सिंह गुर्जर हैं। प्रेरणा और सबक भीलवाड़ा की महिलाओं की यह पहल आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है। • हुनर को पहचान दिलाएं: महिलाओं ने अपने पारंपरिक कौशल और घरेलू कला को व्यवसाय में बदलकर अपनी आजीविका का साधन बनाया है। • सामूहिकता की ताकत: स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जुड़कर महिलाएं बड़े पैमाने पर उत्पादन और विपणन करने में सफल हो रही हैं। • स्थानीय उत्पादों का महत्व: छोटे पैमाने पर घर में तैयार होने वाली वस्तुएं भी सही मंच मिलने पर व्यापक बाजार पा सकती हैं। https://trendkia.com/rajasthan/bhilwara-ke-bhadali-kheda-mein-khula-raj-sakhi-mart-mahilaon-ke-hunar-ko-mila-naya-bazaar-48295 TrendKia — Har trend, sabse pehle.