भीलवाड़ा के तखतपुरा में सरकारी मतदान से पहले ग्रामीणों ने खुद पर्चियों से चुना सरपंच प्रत्याशी, बालिका स्कूल को मिले 1.51 लाख रुपये भीलवाड़ा के तखतपुरा गांव में पंचायती राज चुनाव से पूर्व ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में गुप्त मतदान कराया। दावेदारों से बालिका स्कूल के कमरों के लिए तय दान राशि लेकर गांव ने सर्वसम्मत उम्मीदवार का चयन किया। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित तखतपुरा कन्याखेड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत पंचायती राज चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। जब आधिकारिक चुनाव की घोषणा के बाद गांव में सरपंच पद के लिए कई दावेदार सामने आने लगे, तो आपसी टकराव टालने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही मतदान कराने का फैसला किया। मंदिर परिसर में भगवान को साक्षी मानकर एक गुप्त मतदान आयोजित किया गया, जिसके जरिए गांव का साझा प्रत्याशी तय किया गया। इस अनूठी पहल का सबसे बड़ा फायदा गांव के विकास को हुआ, क्योंकि दावेदारों से सीधे बालिका विद्यालय के निर्माण के लिए सहयोग राशि ली गई। आपसी सहमति न बनने पर ग्रामीणों ने निकाला अनूठा रास्ता कान्याखेड़ी ग्राम पंचायत में सरपंच का पद अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित तय किया गया है। पूरे पंचायत क्षेत्र में कुल 2700 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें से 1800 मतदाता अकेले तखतपुरा गांव में हैं, जबकि शेष 900 मतदाता कान्याखेड़ी गांव से आते हैं। चूंकि अकेले तखतपुरा में बड़ा वोट बैंक मौजूद है, इसलिए यहां से दावेदारों की संख्या भी काफी ज्यादा थी। शुरुआती दौर में ग्रामीणों ने सभी पक्षों को एक जाजम पर बिठाकर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश की, मगर जब कोई भी दावेदार पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ, तो एक साझा नियम तय किया गया। ग्रामीणों ने गांव के प्रसिद्ध चारभुजा मंदिर परिसर में एक सार्वजनिक बैठक बुलाई। बैठक में फैसला हुआ कि जो भी व्यक्ति सरपंच चुनाव की दौड़ में शामिल होना चाहता है, उसे भामाशाह के रूप में 1 लाख 51 हजार रुपये की राशि गांव के बालिका स्कूल में कमरों के निर्माण के लिए जमा करानी होगी। इस अनिवार्य विकास शुल्क की शर्त के बाद मैदान में केवल दो महिला दावेदार ही शेष रह गईं। बाकी सभी दावेदारों ने स्वेच्छा से अपना नाम वापस ले लिया, जिससे मुकाबला सीधे तौर पर दो परिवारों के बीच सिमट गया। बाकायदा मतपत्र छपे और मतपेटी में डाले गए वोट मैदान में बची दो मुख्य दावेदारों में भेरूलाल नायक की पत्नी मंजू देवी और शंकर लाल बारेठ की पत्नी लीला देवी शामिल थीं। दोनों ही उम्मीदवारों ने ग्रामीणों की तय शर्त के मुताबिक 1 लाख 51 हजार रुपये की निर्धारित राशि स्कूल विकास के लिए जमा करवा दी। इसके बाद ग्रामीणों ने एक सुनियोजित चुनाव प्रक्रिया शुरू की। दोनों महिला प्रत्याशियों के नाम और उनकी तस्वीरों वाले बाकायदा औपचारिक मतपत्र छपवाए गए ताकि किसी भी मतदाता को कोई भ्रम न रहे। बुधवार को सुबह 6:00 बजे से लेकर शाम 6:00 बजे तक पूरे बारह घंटे मतदान की प्रक्रिया चली। इस आंतरिक मतदान में गांव की पुरुष मतदाता सूची को आधार बनाया गया। दिनभर में कुल 459 पुरुष मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए मतपेटी में पर्चियां डालीं। शाम को मतदान संपन्न होने के बाद जब सार्वजनिक तौर पर मतपेटी खोली गई और वोटों की गिनती शुरू हुई, तो उसमें से 18 मत खारिज पाए गए। मतगणना पूरी होने के बाद किसान परिवार की पृष्ठभूमि से आने वाले भेरूलाल नायक की पत्नी को ग्रामीणों ने अधिक मत मिलने पर अपना आधिकारिक सरपंच प्रत्याशी घोषित कर दिया। बीस सालों से चली आ रही है यह सामुदायिक परंपरा तखतपुरा गांव के लोगों का कहना है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि पिछले चार पंचायती राज चुनावों से यानी तकरीबन 20 सालों से यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है। हर चुनाव में जब भी पद के लिए कई उम्मीदवार सामने आते हैं, तो गांव की एकता और आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए यही लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीका अपनाया जाता है। इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि चुनावी होड़ से गांव के बुनियादी ढांचे को सीधा लाभ पहुंचाया जाता है। हर बार चुनाव से पहले प्रत्याशियों के समक्ष स्थानीय गौशाला के प्रबंधन अथवा गांव के स्कूल के विकास के लिए दान देने की स्पष्ट शर्त रखी जाती है। इसके बाद गुप्त मतदान कराया जाता है और जो भी प्रत्याशी जीतता है, पूरा गांव एकजुट होकर आधिकारिक चुनाव में उसी का समर्थन करता है, जिससे चुनावी रंजिश की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाती है। इसका आप पर असर इस अनूठी सामुदायिक चुनावी प्रक्रिया का सीधा असर गांव के विकास और स्थानीय सामाजिक व्यवस्था पर पड़ता है। • भारत में: यह घटनाक्रम देश भर की ग्राम पंचायतों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल पेश करता है। चुनाव से पहले अनावश्यक खर्चे और आपसी मनमुटाव को रोककर गांवों में स्कूल और गौशाला जैसे जनकल्याण कार्यों के लिए धन जुटाया जा सकता है। • भीलवाड़ा में: तखतपुरा के बालिका विद्यालय को कमरों के निर्माण के लिए सीधी वित्तीय मदद मिल गई है। इसके साथ ही आगामी पंचायती राज के दूसरे चरण के मतदान के दौरान गांव में गुटबाजी और तनाव का माहौल नहीं रहेगा। • दावेदारों के लिए: चुनावी दौड़ में शामिल होने वाले परिवारों को जनता का भरोसा जीतने के लिए सार्वजनिक विकास में योगदान देना अनिवार्य हुआ। इससे बेवजह खड़े होने वाले प्रत्याशियों की छंटनी हुई और सही उम्मीदवार सामने आया। • मतदाताओं के लिए: ग्रामीणों ने खुद मतपत्रों और मतपेटियों के जरिए अपनी पसंद का उम्मीदवार चुन लिया है। आधिकारिक चुनाव के दिन अब अधिकांश ग्रामीण एक ही उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट होकर मतदान करेंगे। ऐसा क्यों हुआ गांव में कई दावेदारों के सामने आने और आपसी कटुता से बचने के उद्देश्य से ग्रामीणों ने यह आंतरिक चुनाव कराने का फैसला लिया। • आरक्षण और दावेदारों की भीड़: कान्याखेड़ी ग्राम पंचायत में सरपंच सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने के बाद तखतपुरा गांव में कई परिवारों से दावेदार सामने आ गए थे। आपसी बातचीत में कोई भी नाम वापस लेने को तैयार नहीं था, जिससे गतिरोध बन गया। • स्कूल के लिए धन जुटाने की शर्त: गतिरोध दूर करने के लिए चारभुजा मंदिर में हुई बैठक में बालिका विद्यालय में कमरे बनवाने हेतु 1.51 लाख रुपये की विकास राशि तय की गई। इस शर्त से दावेदारों की संख्या छंटकर केवल दो रह गई। • बीस साल पुरानी परंपरा: तखतपुरा में पिछले चार चुनावों यानी 20 सालों से यह स्थापित रिवाज रहा है कि चुनाव से पहले स्कूल या गौशाला दान की शर्त रखी जाती है। इस ऐतिहासिक रिवाज ने ग्रामीणों को लोकतांत्रिक ढंग से आंतरिक मतदान कराने के लिए प्रेरित किया। सवाल-जवाब 1. तखतपुरा गांव किस जिले और ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है? तखतपुरा राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित कान्याखेड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। 2. कान्याखेड़ी ग्राम पंचायत में कुल कितने मतदाता हैं? इस ग्राम पंचायत में कुल 2700 मतदाता हैं, जिनमें से 1800 तखतपुरा और 900 कान्याखेड़ी गांव के हैं। 3. सरपंच पद के दावेदारों के सामने क्या शर्त रखी गई थी? दावेदारों के सामने बालिका स्कूल में कमरे निर्माण के लिए भामाशाह के रूप में 1 लाख 51 हजार रुपये जमा करने की शर्त रखी गई थी। 4. मतदान में किन दो महिला प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ? यह मुकाबला भेरूलाल नायक की पत्नी मंजू देवी और शंकर लाल बारेठ की पत्नी लीला देवी के बीच हुआ। 5. आंतरिक मतदान में कुल कितने वोट पड़े और कितने खारिज हुए? मतदान में कुल 459 पुरुष मतदाताओं ने वोट डाले, जिनमें से 18 मत खारिज किए गए। 6. तखतपुरा में यह अनोखी चुनाव परंपरा कितने समय से चली आ रही है? यह परंपरा पिछले चार चुनावों से यानी तकरीबन 20 सालों से लगातार निभाई जा रही है। https://trendkia.com/rajasthan/bhilwara-ke-takhatpura-men-sarakari-matadana-se-pahale-graminon-ne-khuda-parchiyon-se-chuna-sarpanch-pratyashi-balika-skula-ko-mil-47852 TrendKia — Har trend, sabse pehle.