भीलवाड़ा के टीलों का खेड़ा में पानी के टांके से 5 फीट लंबे कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू भीलवाड़ा के गुरला क्षेत्र स्थित टीलों का खेड़ा गांव में पानी के टांके के भीतर पांच फीट लंबा कोबरा मिलने से हड़कंप मच गया, जिसे रेस्क्यू टीम ने 20 मिनट में सुरक्षित निकाल लिया। भीलवाड़ा जिले के गुरला इलाके में स्थित टीलों का खेड़ा गांव में उस समय अफरातफरी मच गई, जब एक रिहायशी परिसर में बने भूमिगत जल संग्रह ढांचे यानी पानी के टांके के भीतर पांच फीट लंबा अत्यंत विषैला कोबरा फन फैलाए फुफकारता मिला। यह घटना गांव निवासी लक्ष्मण लाल जाट के नोहरे में घटित हुई। घरेलू उपयोग के लिए जैसे ही टांके का ऊपरी ढक्कन हटाया गया, भीतर छिपे विशालकाय सांप को देखकर परिवार के सदस्य सन्न रह गए। अचानक इतने बड़े जहरीले जीव को सामने पाकर पूरे घर में घबराहट फैल गई और देखते ही देखते आसपास के ग्रामीण भी वहां जमा हो गए। परिजनों की सूझबूझ और रेस्क्यू दल को सूचना पानी के गहरे टांके में कोबरा की मौजूदगी के चलते किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इस संकट से कैसे निपटा जाए। परिजनों ने खुद कोई जोखिम उठाने के बजाय तत्काल वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर को पूरे मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही केंद्र के सचिव कुलदीप सिंह राणावत अपने सहयोगी दल के साथ टीलों का खेड़ा पहुंचे। मौके पर पहुंचकर विशेषज्ञों ने पहले टांके की बनावट और भीतर कोबरा की स्थिति का बारीकी से मुआयना किया, ताकि अभियान के दौरान न तो किसी व्यक्ति को कोई खतरा हो और न ही बेजुबान जीव को चोट पहुंचे। 20 मिनट का सघन अभियान और जंगल में रिहाई रेस्क्यू दल ने विशेष उपकरणों की मदद से कोबरा को बाहर निकालने की योजनाबद्ध प्रक्रिया शुरू की। संकरे और गहरे टांके में सांप लगातार फुफकार रहा था, लेकिन प्रशिक्षित टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित ढंग से बाहर निकाल लिया। पांच फीट लंबे इस विषधर के पकड़े जाते ही नोहरे में मौजूद लक्ष्मण लाल जाट, गांव के युवाओं, महिलाओं और अन्य परिजनों ने राहत की सांस ली। सफल रेस्क्यू के उपरांत कोबरा को आबादी से दूर एक सुरक्षित प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। ग्रामीणों को सुरक्षा और सावधानी के दिशानिर्देश अभियान के समापन पर सचिव कुलदीप सिंह राणावत ने उपस्थित ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें वन्यजीवों और विशेषकर सर्पदंश से बचाव के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि बरसाती मौसम के दौरान भूमिगत बिलों में पानी भरने अथवा ठंडक व नमी की तलाश में अक्सर सांप घरों, मवेशियों के बाड़ों, नोहरों और पानी के टांकों जैसी सुरक्षित जगहों में पनाह ले लेते हैं। ऐसे समय में इन स्थानों का इस्तेमाल करते हुए विशेष एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को स्पष्ट ताकीद की कि यदि कहीं भी सांप दिखाई दे, तो घबराकर आपा खोने या खुद डंडे से मारने और पकड़ने की गलती बिल्कुल न करें। ऐसा कदम जानलेवा साबित हो सकता है। सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि जीव से उचित फासला बनाए रखा जाए और तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू दल को सूचित किया जाए। सही समय पर दी गई सूचना और सावधानीपूर्वक किए गए इस अभियान के लिए ग्रामीणों ने रेस्क्यू टीम का आभार व्यक्त किया। इसका आप पर असर घरेलू जल संरचनाओं और बाड़ों में विषैले जीवों के छिपने की इस घटना से ग्रामीण परिवारों के लिए सतर्कता बरतना अनिवार्य हो गया है। • भारत में: ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले लोग बारिश के दिनों में जल कुंडों और बाड़ों को खोलते समय विशेष सतर्कता बरतें। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए स्थानीय वन्यजीव हेल्पलाइन नंबर पहले से सुरक्षित रखें। • भीलवाड़ा में: भीलवाड़ा और गुरला क्षेत्र के ग्रामीण अपने नोहरों और पानी के टांकों के ढक्कन हमेशा कसकर बंद रखें। घर या बाड़े में सांप दिखने पर उसे छेड़ने के बजाय तत्काल स्थानीय रेस्क्यू टीम से संपर्क करें। • सुरक्षा उपाय: घरेलू परिसरों में अंधेरे और नमी वाले कोनों में जाने से पहले पर्याप्त रोशनी और जांच सुनिश्चित करें। बिना उपकरण के किसी भी विषैले जीव को पकड़ने या मारने की चेष्टा बिल्कुल न करें। • त्वरित सहायता: आपात स्थिति के दौरान स्थानीय पशु व वन्यजीव राहत केंद्रों के फोन नंबरों की जानकारी ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध रहनी चाहिए। इससे समय रहते विशेषज्ञ मदद प्राप्त कर दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ बरसात के मौसम में प्राकृतिक आवासों में पानी भरने और नमी बढ़ने के कारण सांप अक्सर सुरक्षित और सूखे आश्रय की तलाश में रिहायशी परिसरों में प्रवेश कर जाते हैं। • मौसम और नमी का प्रभाव: लगातार वर्षा और नमी के चलते जमीन के नीचे बने बिलों में पानी भर जाता है, जिससे सांप बाहर निकलकर सूखी और ठंडी शरणगाह तलाशते हैं। पानी के टांकों और बाड़ों का वातावरण उन्हें छिपने के लिए अनुकूल लगता है। • सुरक्षित पनाह की खोज: ग्रामीण नोहरों और मवेशियों के बाड़ों में बनी खुली या आंशिक रूप से ढकी संरचनाएं बाहरी हलचल से दूर होती हैं। शांत और अंधेरी जगह होने के कारण पांच फीट लंबा कोबरा टांके के भीतर जाकर छिप गया था। • जागरूकता और रोकथाम: विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसी घटनाएं हर साल बारिश के मौसम में सामने आती हैं। टांकों के ढक्कन ढीले रहने या आसपास दरारें होने से जीवों को अंदर जाने का रास्ता आसानी से मिल जाता है। सवाल-जवाब 1. यह घटना भीलवाड़ा के किस गांव में घटित हुई? यह घटना भीलवाड़ा जिले के गुरला क्षेत्र स्थित टीलों का खेड़ा गांव में लक्ष्मण लाल जाट के नोहरे में हुई। 2. पानी के टांके में कितना बड़ा सांप मिला था? पानी के टांके के भीतर से पांच फीट लंबा अत्यंत विषैला कोबरा बरामद हुआ। 3. कोबरा को सुरक्षित निकालने में रेस्क्यू टीम को कितना समय लगा? विशेषज्ञों की रेस्क्यू टीम ने करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद कोबरा को सुरक्षित बाहर निकाला। 4. रेस्क्यू दल का नेतृत्व किसने किया? वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के सचिव कुलदीप सिंह राणावत ने अपनी टीम के साथ इस अभियान का नेतृत्व किया। 5. रेस्क्यू के बाद कोबरा का क्या किया गया? सांप को आबादी क्षेत्र से दूर सुरक्षित वन क्षेत्र में बिना किसी नुकसान के छोड़ दिया गया। 6. सांप दिखने पर विशेषज्ञों ने क्या करने की सलाह दी है? विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि सांप दिखने पर घबराएं नहीं, उससे उचित दूरी बनाए रखें और तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचित करें। https://trendkia.com/rajasthan/bhilwara-ke-teelon-ka-kheda-men-pani-ke-tanke-se-5-phita-lnbe-kobara-ka-surakshita-reskyu-46507 TrendKia — Har trend, sabse pehle.