# भीलवाड़ा में दिवाली पर पशुधन पूजा का महत्व, इन जरूरी बातों का रखें खास ध्यान

> भीलवाड़ा में दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में गाय, बैल और अन्य पशुधन की पूजा करने की विशेष परंपरा है। इस दौरान पशुओं को सजाने और पूजा करने के साथ-साथ उनकी सेहत और सुरक्षा से जुड़ी कुछ अहम बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bhilwara-mein-diwali-par-pashudhan-puja-ka-mahatva-57733 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिवाली पूजा, पशुधन पूजा, भीलवाड़ा, गोवर्धन पूजा, किसान परंपरा, पशु देखभाल

भीलवाड़ा में दिवाली का पर्व केवल रोशनी और खुशियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण संस्कृति में यह उत्सव पशुधन के प्रति आभार जताने का भी एक बड़ा माध्यम है। इस विशेष अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में मां लक्ष्मी की आराधना के बाद गाय, बैल और अन्य मवेशियों की पूजा की जाती है। किसान इन बेजुबान जीवों को अपने परिवार का अटूट हिस्सा मानते हैं और इनकी सुख-समृद्धि के लिए कामना करते हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ पशुओं का श्रृंगार किया जाता है और उन्हें विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।

## पशुधन पूजा की पारंपरिक विधि और मान्यता
भीलवाड़ा नगर के प्रसिद्ध पंडित कमलेश व्यास के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में कृषि और आजीविका की रीढ़ मवेशी ही होते हैं। खेती किसानी के कार्यों से लेकर दूध और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए किसान पूरी तरह से पशुओं पर निर्भर रहते हैं। यही वजह है कि दिवाली के पावन पर्व पर पशुओं की विशेष पूजा कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। इस दिन सुबह सबसे पहले पशुओं को अच्छी तरह से नहलाया जाता है और उन्हें सुंदर ढंग से सजाया जाता है। कई जगहों पर उन्हें पारंपरिक वस्त्रों और रंगों से भी संवारा जाता है।

पूजा के दौरान पशुओं के माथे पर रोली और अक्षत यानी चावल का तिलक लगाया जाता है। इसके पश्चात उन्हें फूलों की माला पहनाई जाती है और उनके समीप दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। अनुष्ठान को पूरा करते हुए पशुओं को गुड़ और ताजी हरी घास का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि पशुधन की अच्छी सेहत और खुशहाली से ही पूरे घर-परिवार में समृद्धि बनी रहती है। यह परंपरा इंसानों और पशुओं के बीच के गहरे प्रेम और आपसी जुड़ाव को दर्शाती है।

## पूजा के दौरान बरती जाने वाली जरूरी सावधानियां
पशुधन की पूजा करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। सबसे पहले पशुओं को साफ पानी से नहलाना चाहिए और उनके शरीर को अच्छी तरह सुखाना बेहद जरूरी है। यदि मौसम ठंडा हो तो मवेशियों को बहुत ठंडे पानी से नहलाने से बचना चाहिए ताकि वे सर्दी की चपेट में न आएं। इसके अलावा पशुओं को हमेशा ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां साफ-सफाई और हवा का उचित प्रबंध हो।

पूजा-पाठ के दौरान तिलक लगाते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि रोली, सिंदूर या अन्य कोई भी पूजन सामग्री पशु की आंखों, नाक या मुंह के संपर्क में न आए। आरती के समय दीपक या अगरबत्ती को मवेशियों से सुरक्षित दूरी पर रखें ताकि आग से उन्हें किसी प्रकार की चोट या घबराहट न हो। प्रसाद के रूप में दी जाने वाली चीजें हमेशा ताजा और स्वच्छ होनी चाहिए।

## खानपान और सुरक्षा से जुड़े अन्य निर्देश
त्योहार के उत्साह में कई बार लोग पशुओं को कुछ भी खिला देते हैं, जिससे बचना चाहिए। पूजा के दिन मवेशियों को किसी भी प्रकार का बासी, सड़ा हुआ या गंदा भोजन नहीं खिलाना चाहिए। इसके अलावा पशुओं को जबरन सजाने या अनुचित तरीके से कसकर बांधने से भी परहेज करना चाहिए ताकि उन्हें शारीरिक या मानसिक कष्ट न हो।

पशुधन की यह पूजा केवल एक धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पशुओं के प्रति सम्मान और उनकी देखभाल की भावना का संदेश देती है। पंडित कमलेश व्यास का कहना है कि किसानों को केवल पूजा के दिन ही नहीं, बल्कि वर्षभर पशुओं की सेहत, स्वच्छता और उनके खानपान का पूरा ख्याल रखना चाहिए। इससे त्योहार की असली सार्थकता सिद्ध होती है और पशुधन पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

## इसका आप पर असर
दिवाली के दौरान पशुधन पूजा से जुड़े ये नियम पशुपालकों और किसानों के लिए सीधे तौर पर उपयोगी हैं।

- **भीलवाड़ा में:** स्थानीय किसानों और पशुपालकों को मवेशियों को ठंड के पानी से बचाने और बासी चारा न खिलाने की सलाह पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे त्योहारी सीजन में पशुओं को मौसमी बीमारियों और पेट की तकलीफों से सुरक्षित रखा जा सकता है।
- **भारत में:** देश के ग्रामीण हिस्सों में पशुओं की पूजा करने वाले सभी पालकों को आग के खतरों और आंखों में तिलक जाने जैसी दुर्घटनाओं से बचाव करना चाहिए। साफ-सफाई और ताजा आहार सुनिश्चित करने से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दूध उत्पादन पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
- **सुरक्षा उपाय:** पूजा के दौरान मवेशियों को कसकर बांधने या जबरन सजाने से उन्हें तनाव या शारीरिक चोट लग सकती है। संयम बरतने से पशु शांत रहते हैं और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव होता है।
- **खानपान मानक:** केवल ताजा हरी घास और गुड़ का प्रसाद देने से पशुओं का पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है। दूषित भोजन देने से मवेशी गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
ग्रामीण भारत में दिवाली के ठीक बाद पशुधन की पूजा करने की प्रथा सदियों पुरानी सांस्कृतिक और आजीविका की जड़ों से जुड़ी हुई है। यह परंपरा किसानों के जीवन में मवेशियों के महत्वपूर्ण योगदान को सम्मान देने के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।

- **कृषि निर्भरता:** ग्रामीण क्षेत्रों की आजीविका आज भी खेती और पशुपालन पर टिकी हुई है, जिससे पशु परिवार का अहम हिस्सा बन जाते हैं।
- **आसमान आभार:** सालभर खेतों में मेहनत करने और दूध जैसी जरूरतें पूरी करने वाले मवेशियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह मुख्य अवसर होता है।
- **सांस्कृतिक मान्यता:** धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पशुधन की प्रसन्नता और सेवा करने से घर-परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. भीलवाड़ा में दिवाली के बाद किसकी पूजा की जाती है?
भीलवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद गाय, बैल और अन्य पशुधन की पूजा की जाती है।

### 2. पशुधन पूजा के दौरान पशुओं को क्या खिलाया जाता है?
पूजा के दौरान पशुओं को प्रसाद के रूप में गुड़ और ताजी हरी घास खिलाई जाती है।

### 3. पूजा के वक्त पंडित कमलेश व्यास ने क्या सलाह दी है?
पंडित कमलेश व्यास ने पशुओं को ठंड के पानी से नहलाने से बचने और उनकी साफ-सफाई तथा खानपान का ध्यान रखने की सलाह दी है।

### 4. पशुओं को सजाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पशुओं को सजाते समय ध्यान रखें कि रोली या सिंदूर उनकी आंखों, नाक और मुंह में न जाए तथा उन्हें जबरन न बांधा जाए।

### 5. दीपावली पर पशुधन की पूजा क्यों की जाती है?
यह खेती और आजीविका में मदद करने वाले पशुओं के प्रति आभार जताने और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है।

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