भीलवाड़ा में दिन और रात के पारे में 13 डिग्री का फासला, मौसमी बीमारियों की चपेट में आए लोग मानसून की वापसी के बाद भीलवाड़ा में दिन की चुभती धूप और रात की ठंडक के बीच 13 डिग्री का अंतर दर्ज हुआ है, जिसके चलते अस्पतालों की ओपीडी में वायरल बुखार और जुकाम के मरीजों की तादाद बढ़ गई है। भीलवाड़ा जिले से वर्षा ऋतु की रवानगी होते ही आबोहवा में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बारिश का दौर थमते ही वातावरण में तेज धूप और उमस का असर गहराने लगा है। इस बदलते मौसमी चक्र के कारण दिन और रात के पारे में भारी विषमता दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों की सेहत पर पड़ रहा है। जिले भर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और निजी चिकित्सालयों में उपचार के लिए पहुंचने वाले बीमार लोगों की कतारें लगातार लंबी होती जा रही हैं। दिन में पसीने छुड़ाने वाली गर्मी और रात में अचानक महसूस होने वाली ठंडक के दोहरे प्रभाव से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मानसून की बेरुखी के बाद अक्टूबर में तीखी गर्मी इस वर्ष का मानसूनी मौसम भीलवाड़ा जिले के लिए उम्मीदों के अनुरूप साबित नहीं हुआ। बादलों की लगातार बेरुखी के चलते क्षेत्र में जोरदार बारिश के अवसर बेहद कम रहे और मेघ पूरी तरह खुलकर नहीं बरसे। पूरे वर्षाकाल में किसान वर्ग और आम निवासी अच्छी बारिश की टकटकी लगाए बैठे रहे, परंतु अधिकांश समय आकाश साफ ही नजर आया। पर्याप्त वर्षा के अभाव में अब अक्टूबर माह का आरंभ होते ही वातावरण में उमस और तपिश दोबारा हावी हो गई है, जिससे दिनभर लोग पसीने और चिपचिपी गर्मी से परेशान हो रहे हैं। पारे में 3 से 4 डिग्री की उछाल और 13 डिग्री का बड़ा अंतर बीते एक सप्ताह के दौरान दर्ज किए गए मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो तापमान में निरंतर 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इस वर्तमान मौसमी बदलाव का सबसे प्रमुख पहलू दिन के अधिकतम और रात के न्यूनतम तापमान का बहुत बड़ा अंतर है। भीलवाड़ा शहर में इस समय अधिकतम और न्यूनतम पारे के बीच लगभग 13 डिग्री सेल्सियस का भारी फासला बना हुआ है। दोपहर के वक्त तीखी चुभने वाली धूप और आर्द्रता बेचैनी बढ़ा रही है, जबकि शाम ढलते ही ठंडी हवाओं से वातावरण में हल्की ठंडक घुल जाती है। पारे का यह तीव्र उतार-चढ़ाव मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल असर डाल रहा है, जिसके चलते लोग तेजी से शारीरिक व्याधियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। महात्मा गांधी अस्पताल और निजी क्लिनिकों में उमड़े मरीज दोपहर की कड़ी धूप और रात की ठंडक के इस विषम संयोजन ने शहर में मौसमी विकारों को तेजी से फैला दिया है। वायरल संक्रमण, तेज बुखार, सिरदर्द, सर्दी और जुकाम से पीड़ित नागरिकों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। भीलवाड़ा के प्रमुख महात्मा गांधी अस्पताल के अतिरिक्त शहर के विभिन्न निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में मरीजों का भारी तांता लगा हुआ है। बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में आने वाले अधिकांश व्यक्तियों में सूखी खांसी, जुकाम, तेज बदन दर्द और वायरल बुखार के स्पष्ट लक्षण मिल रहे हैं। चिकित्सकों की एहतियाती हिदायत चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि ऋतु परिवर्तन के इस संक्रांति काल में बरती गई मामूली सी असावधानी भी गंभीर अस्वस्थता का कारण बन सकती है। ऐसे मौसम में दैनिक आहार और दिनचर्या को लेकर सतर्कता बरतना अनिवार्य है। चिकित्सकों ने नागरिकों को पानी उबालकर पीने, खुले स्थानों पर बिकने वाली खाद्य सामग्रियों तथा अधिक तली-भुनी चीजों से परहेज करने का परामर्श दिया है। साथ ही शरीर के तापमान को संतुलित रखने के लिए अनुकूल हल्के सूती वस्त्र पहनने का सुझाव दिया गया है। विशेषकर छोटे बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को इस बदलते वातावरण से विशेष सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि उन्हें मौसमी वायरल के संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके। इसका आप पर असर बदलते मौसम और तापमान के 13 डिग्री के अंतर से आम लोगों की दैनिक दिनचर्या और शारीरिक स्वास्थ्य सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। • भीलवाड़ा में: स्थानीय निवासियों को दिन में भारी उमस और रात में ठंडक का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे दोहरे मौसम के कारण शहर के अस्पतालों में ओपीडी का समय और दवा काउंटरों की कतारें लंबी हो गई हैं। • मौसमी बीमारियों से बचाव: तापमान में अचानक बदलाव से वायरल बुखार और जुकाम का खतरा बढ़ गया है। इससे बचने के लिए नागरिकों को उबला हुआ पानी पीने और खुले खानपान से पूरी तरह परहेज करने की जरूरत है। • बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा: कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बुजुर्गों और बच्चों पर इस मौसम का सबसे बुरा असर पड़ सकता है। परिजनों को चाहिए कि वे शाम ढलते ही बच्चों और बुजुर्गों के पहनावे और खानपान पर अतिरिक्त ध्यान दें। • दैनिक कामकाज पर असर: तेज धूप और उमस से कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। बाहर काम करने वाले लोगों को दोपहर की चुभती धूप से बचने और खुद को हाइड्रेटेड रखने की सलाह दी गई है। ऐसा क्यों हुआ भीलवाड़ा में मानसूनी वर्षा की विदाई और वर्षा की कमी के कारण वातावरण में शुष्कता और तेज धूप अचानक लौट आई है, जिससे मौसमी विसंगति पैदा हुई है। • कमजोर मानसून का असर: इस सीजन में जिले में पर्याप्त मानसूनी बारिश नहीं हो पाई और मेघ मेहरबान नहीं हुए। मिट्टी में नमी की कमी और साफ आसमान की वजह से अक्टूबर शुरू होते ही तेज धूप ने धरातल को तपाना शुरू कर दिया। • तापमान में तीव्र उतार-चढ़ाव: पिछले एक हफ्ते में पारे में 3 से 4 डिग्री की वृद्धि हुई है। दिन में तेज धूप से अधिकतम पारा चढ़ जाता है जबकि रात में आसमान साफ रहने से विकिरण के चलते तापमान तेजी से गिरकर 13 डिग्री का अंतर बना रहा है। • रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव: दिन के गर्म वातावरण और रात की ठंडक के लगातार संपर्क में आने से इंसानी शरीर का तापमान संतुलन गड़बड़ा जाता है। इसी शारीरिक खिंचाव की वजह से मौसमी वायरल और बैक्टीरिया का प्रसार तेज हो गया है। सवाल-जवाब 1. भीलवाड़ा में दिन और रात के तापमान में कितना अंतर दर्ज किया गया है? भीलवाड़ा में वर्तमान में दिन के अधिकतम और रात के न्यूनतम तापमान के बीच लगभग 13 डिग्री सेल्सियस का भारी अंतर चल रहा है। 2. पिछले एक सप्ताह में तापमान में कितनी बढ़ोतरी हुई है? मौसम के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक सप्ताह में तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 3. मौसम बदलने से अस्पतालों में किस तरह के मरीज सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं? अस्पतालों की ओपीडी में वायरल बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम और बदन दर्द की समस्या से ग्रस्त मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है। 4. इस मौसमी बदलाव से बचने के लिए डॉक्टरों ने क्या सलाह दी है? चिकित्सकों ने उबला हुआ पानी पीने, खुले व तली-भुनी चीजों से परहेज करने, मौसम के अनुसार कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का खास ख्याल रखने की सलाह दी है। https://trendkia.com/rajasthan/bhilwara-men-dina-aura-rata-ke-pare-men-13-digri-ka-phasala-mausami-bimariyon-ki-chapeta-men-ae-loga-42366 TrendKia — Har trend, sabse pehle.