भीलवाड़ा में तैयार मूंगफली की फसल को नुकसान से कैसे बचाएं, खुदाई और कटाई के सही नियम भीलवाड़ा के खेतों में मूंगफली पकने के बाद खुदाई का दौर शुरू हो चुका है, जहां मिट्टी में सही नमी और सही समय का चयन न करने पर फलियां जमीन में छूटने और दाने खराब होने का खतरा रहता है। भीलवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में मूंगफली की फसल पककर तैयार हो चुकी है और काश्तकार अब खेतों में खुदाई और कटाई की तैयारियों में सक्रिय नजर आ रहे हैं। फसल की बढ़िया पैदावार मिलने के बाद किसानों की सबसे बड़ी प्राथमिकता यही रहती है कि उपज को सुरक्षित और बिना नुकसान के खेतों से बाहर निकाला जाए ताकि दानों की बनावट और उनकी बाजार गुणवत्ता पूरी तरह बनी रहे। कटाई और खुदाई की प्रक्रिया के दौरान बरती गई जरा सी भी जल्दबाजी या असावधानी भारी नुकसान करा सकती है। इससे न केवल फलियां चटक सकती हैं और दाने टूट सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त नमी के कारण उपज के सड़ने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी कारण काम शुरू करने से पहले फसल के हर पहलू का बारीकी से मुआयना करना बेहद जरूरी माना जाता है। मिट्टी में नमी का संतुलन देखकर ही शुरू करें खुदाई मूंगफली के पौधों को जमीन से बाहर निकालने से ठीक पहले खेत की मिट्टी की स्थिति का जायजा लेना सबसे बुनियादी कदम है। यदि खेत की मिट्टी अत्यधिक कठोर और सूखी हो चुकी है, तो पौधों को खींचते समय जड़ें टूट जाती हैं और ढेर सारी फलियां जमीन के भीतर ही दबी रह जाती हैं। इसके विपरीत अगर खेत में बहुत अधिक गीलापन या कीचड़ जैसी स्थिति है, तो पौधों को उखाड़ते समय फलियों पर मिट्टी की मोटी परत चिपक जाती है। ऐसी मिट्टी लगी उपज को सुखाने में सामान्य से कहीं ज्यादा वक्त लगता है और दानों पर दाग लगने का डर रहता है। इसलिए किसानों को हमेशा ऐसे समय का चुनाव करना चाहिए जब मिट्टी में न तो बहुत सूखापन हो और न ही बहुत ज्यादा गीलापन, बल्कि आवश्यक नमी मौजूद हो ताकि पौधे बिना जोर लगाए आसानी से बाहर निकल आएं। फसल पकने की सटीक पहचान और कटाई का सही वक्त उपज की उत्तम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कटाई का उपयुक्त समय तय करना बेहद अहम भूमिका निभाता है। किसान अपने पौधों के बाहरी स्वरूप और पत्तियों को देखकर फसल के पकने का अनुमान लगा सकते हैं। जब मूंगफली पूरी तरह तैयार हो जाती है, तो फलियों के बाहरी छिलके का रंग बदल जाता है और अंदर स्थित दानों का आकार और रंग भी अपनी सही बनावट में आ जाता है। यदि कोई किसान जल्दबाजी में अपरिपक्व अवस्था में ही पौधों को उखाड़ लेता है, तो दाने छोटे और अविकसित रह जाते हैं, जिससे कुल उत्पादन और वजन घट जाता है। दूसरी तरफ यदि खुदाई में जरूरत से ज्यादा देर कर दी जाए, तो जमीन में फलियों की डंठल कमजोर पड़ जाती है और वे टूटकर मिट्टी में ही रह जाती हैं। इसी संतुलन को साधते हुए फसल के समुचित पकाव के आधार पर ही खुदाई की तारीख तय की जानी चाहिए। खेत में सुखाने का वैज्ञानिक तरीका और सफाई खेत से पौधे निकालने के तुरंत बाद उन्हें सीधे बोरियों में भरकर गोदाम में ले जाना सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है। पौधों में उस समय प्राकृतिक नमी की मात्रा अधिक होती है, और यदि उन्हें सीधे भंडारण में रख दिया जाए तो फफूंद लगने और दाने खराब होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। पौधों को निकालने के बाद उन्हें किसी साफ, समतल और सूखी जगह पर अच्छी तरह फैलाकर रखना चाहिए ताकि उन्हें धूप और खुली हवा का समुचित लाभ मिल सके। जिन फलियों पर मिट्टी चिपकी रह गई हो, उन्हें बेहद सावधानीपूर्वक साफ करना चाहिए ताकि छिलका न टूटे। बहुत ज्यादा झुलसाने वाली धूप या अनुचित तरीके से सुखाने के बजाय मौसम के मिजाज और फसल की नमी को देखते हुए ही सुखाने का पूरा चक्र पूरा किया जाना चाहिए। फसल की संभाल, छंटाई और सुरक्षित भंडारण के नियम खुदाई के बाद से लेकर अंतिम भंडारण तक फसल को संभालने के दौरान अत्यधिक सावधानी की दरकार होती है ताकि फलियां टूटे नहीं और भीतर के दाने किसी भी प्रकार से क्षतिग्रस्त न हों। कटी हुई फसल को एक स्थान पर इकट्ठा करते समय उस पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने या पौधों को जमीन पर घसीटने से पूरी तरह बचना चाहिए। खेत में ही ऐसी फलियों की छंटाई कर लेनी चाहिए जो सड़ी हुई, बीमारी से प्रभावित या टूटी हुई हों। खराब फलियों को स्वस्थ उपज से अलग कर देने से बाकी फसल की गुणवत्ता सुरक्षित बनी रहती है। जब फलियां पूरी तरह से सूख जाएं, तब उनकी अंतिम सफाई करके ही उन्हें भंडारण कक्ष में रखना चाहिए। भंडारण का स्थान हमेशा साफ सुथरा, सूखा और सीलन से पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए। अगले फसल चक्र की जमीन तैयार करने की रणनीति मूंगफली की कटाई का काम पूरा होते ही किसानों के सामने अगले कृषि चक्र की जमीन तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। खेत से पुरानी फसल के अवशेषों और डंठलों को पूरी तरह साफ करने के बाद जमीन की मौजूदा स्थिति को देखकर आगामी बुवाई की रूपरेखा तय की जा सकती है। कटाई और छंटाई के दौरान बची हुई उच्च गुणवत्ता वाली फलियों को अलग से सहेज कर रखने से नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकता है। किसानों को स्थानीय मौसम के बदलावों, मिट्टी की उर्वरता और क्षेत्रीय कृषि सलाह को केंद्र में रखकर ही अगली फसल का चयन और खेत की जुताई करनी चाहिए। सही समय पर खुदाई, संतुलित सुखाई और नमी मुक्त भंडारण के जरिए मूंगफली की उच्च गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसका आप पर असर मूंगफली की कटाई और भंडारण में सही कृषि पद्धतियां अपनाने से किसानों की उपज सुरक्षित रहती है और बाजार में बेहतर दाम सुनिश्चित होते हैं। • भारत में: देश भर के मूंगफली उत्पादक किसान सही नमी में खुदाई और उचित सुखाई करके अपनी उपज के नुकसान को रोक सकते हैं। ऐसा करने से मंडियों में उच्च गुणवत्ता वाले दानों का अधिक मूल्य मिलता है और भंडारण में फफूंद का खतरा खत्म होता है। • भीलवाड़ा में: भीलवाड़ा जिले के काश्तकार अपनी तैयार फसल को मिट्टी में छूटने से बचाने के लिए खेत में आवश्यक नमी देखकर ही खुदाई की योजना बनाएं। फसल अवशेषों को समय पर हटाकर किसान अगले रबी चक्र की बुवाई के लिए अपने खेतों को तेजी से तैयार कर सकते हैं। • फसल प्रबंधन: कटाई के बाद खराब और सड़ी हुई फलियों को अलग छांटकर सुरक्षित उपज के साथ मिलने से रोका जाना चाहिए। इससे पूरे लॉट की गुणवत्ता बरकरार रहती है और व्यापारियों से किसी प्रकार की कटौती का सामना नहीं करना पड़ता। • सुरक्षित भंडारण: धूप और हवा में पूरी तरह सुखाने के बाद ही फलियों को सीलन रहित सूखे गोदामों में संग्रहित किया जाना चाहिए। किसान नमी वाले कमरों से बचकर अपनी उपज को लंबे समय तक बिना खराबी के सुरक्षित रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ मूंगफली की खुदाई के दौरान पैदावार खराब होने या फलियां जमीन में छूटने के पीछे मिट्टी की नमी और फसल की अपरिपक्वता मुख्य कारण बनते हैं। • मिट्टी में अत्यधिक सूखापन या नमी: जरूरत से ज्यादा सूखी जमीन में पौधे खींचने पर जड़ें टूट जाती हैं और फलियां मिट्टी में ही फंसी रह जाती हैं। वहीं ज्यादा गीली जमीन में खुदाई करने से फलियों पर मिट्टी की मोटी परत जम जाती है जिसे सुखाना कठिन हो जाता है। • गलत समय पर खुदाई: फसल को उसके पूर्ण पकाव से पहले उखाड़ लेने से दाने अविकसित और छोटे रह जाते हैं। इसके विपरीत बहुत देर तक खेत में छोड़ देने पर डंठल कमजोर होकर टूट जाते हैं जिससे फलियां जमीन में छूट जाती हैं। • सीधे भंडारण की असावधानी: खेत से निकालते ही बिना सुखाए फसल को पैक कर देने से अंदर की प्राकृतिक नमी दानों में फफूंद पैदा कर देती है। पर्याप्त धूप और हवा न मिलने से सुरक्षित पैदावार भी भंडारण के दौरान नष्ट हो जाती है। सवाल-जवाब 1. मूंगफली की खुदाई के लिए खेत की मिट्टी कैसी होनी चाहिए? खेत की मिट्टी में आवश्यक नमी होनी चाहिए ताकि पौधे आसानी से निकल सकें। न तो मिट्टी बहुत ज्यादा सूखी होनी चाहिए और न ही अत्यधिक गीली। 2. सूखी मिट्टी में मूंगफली निकालने से क्या नुकसान होता है? अत्यधिक सूखी मिट्टी होने पर पौधों को खींचने में दिक्कत होती है और कई फलियां जमीन के भीतर ही टूटकर छूट जाती हैं। 3. फसल के पकने की पहचान कैसे की जा सकती है? फसल पकने पर फलियों के बाहरी छिलके का रंग बदल जाता है और अंदर मौजूद दानों का आकार और रंग पूरी तरह विकसित नजर आता है। 4. खुदाई के तुरंत बाद मूंगफली को सीधे भंडारित क्यों नहीं करना चाहिए? ताजी फसल में नमी अधिक होती है, जिसे बिना सुखाए सीधे भंडारण में रखने पर फफूंद लगने और दाने खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। 5. कटाई के बाद खराब फलियों को अलग करना क्यों जरूरी है? सड़ी, खराब या क्षतिग्रस्त फलियों को अलग कर देने से बची हुई अच्छी उपज सुरक्षित रहती है और उसकी बाजार गुणवत्ता खराब नहीं होती। 6. मूंगफली की कटाई के बाद खेत में क्या करना चाहिए? फसल के अवशेषों को साफ करके और मिट्टी की स्थिति देखकर अगले फसल चक्र की बुवाई के लिए जुताई और तैयारी शुरू करनी चाहिए। https://trendkia.com/rajasthan/bhilwara-men-taiyara-mungaphali-ki-phasala-ko-nukasana-se-kaise-bachaen-khudai-aura-katai-ke-sahi-niyama-42117 TrendKia — Har trend, sabse pehle.