भीलवाड़ा में त्योहारी सीजन पर स्वास्थ्य विभाग सतर्क, मिलावटी मावा और मिठाइयों की ऐसे करें पहचान दिवाली के त्योहारी सीजन के दौरान भीलवाड़ा में स्वास्थ्य विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ औचक निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने लोगों से मिठाई खरीदते वक्त सतर्क रहने की अपील की है और नकली मावे की पहचान के आसान तरीके बताए हैं। दीपावली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में चिकित्सा और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इस खास मौके पर बाजारों में दूध, मावा, मिठाइयों और अन्य खान-पान की वस्तुओं की मांग में काफी तेजी आ जाती है, जिसका फायदा उठाकर मिलावट करने वाले लोग सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें पूरे क्षेत्र में ताबड़तोड़ निरीक्षण कर रही हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी प्रमुख दुकानों, मिष्ठान भंडारों और बड़े गोदामों की लगातार जांच कर रहे हैं ताकि लोगों तक सुरक्षित सामग्री पहुंचे। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य एक्सपायरी डेट के सामान, सड़े-गले खाद्य उत्पादों और सिंथेटिक मिलावट वाली चीजों पर कड़ी नजर रखना है। भीलवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने शहरवासियों और जिले के तमाम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस त्योहारी मौसम में खान-पान की चीजें खरीदते वक्त पूरी सावधानी बरतें। उनका कहना है कि मिठाइयों का रंग, उनकी प्राकृतिक महक और स्वाद से ही मिलावट का आसानी से पता लगाया जा सकता है। खास तौर पर दूध और मावे से बनने वाली चीजों को लेते समय अत्यधिक सतर्कता की जरूरत होती है। थोड़ी सी समझदारी अपनाकर हम अपनी और अपने परिवार की सेहत को गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से बचा सकते हैं। डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने आगे बताया कि दीपावली के मद्देनजर पूरे जिलेभर में स्वास्थ्य टीमों की तरफ से लगातार औचक कार्रवाई जारी है। खाद्य सुरक्षा अमले का मुख्य मकसद लोगों को गुणवत्तापूर्ण और पूरी तरह सुरक्षित खाद्य सामग्री मुहैया कराना है, साथ ही अवधिपार सामान बेचने वालों या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाना है। विभाग ने नागरिकों से यह भी कहा है कि वे कोई भी खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर छपी विनिर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम अवधि, पैकेजिंग और उसकी गुणवत्ता की जांच जरूर करें। यदि किसी भी प्रतिष्ठान पर मिलावट या खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी से जुड़ी कोई गड़बड़ी दिखे, तो इसकी जानकारी तुरंत जिला स्तरीय कंट्रोल रूम के फोन नंबर पर दी जानी चाहिए। त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में मिलने वाली मिठाइयों में मिलावट के खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने लोगों को जागरूक करने के लिए कुछ बेहद आसान और कारगर उपाय भी साझा किए हैं ताकि आम लोग खुद भी परख सकें। मिठाइयों और मावे की शुद्धता परखने के आसान तरीके बाजार से मिठाइयों की खरीदारी करते समय मिलावटी सामान से बचने के लिए कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। सबसे पहले बात आती है खुशबू की, क्योंकि असली मिठाइयों की महक बेहद सौम्य और प्राकृतिक होती है जो शुद्ध घी, असली दूध और খাঁटी केसर जैसी चीजों से आती है। यदि किसी मिठाई से कोई तेज या तीखी और अप्राकृति गंध आ रही है, तो यह इस बात का संकेत है कि उसमें हानिकारक एसेंस या सिंथेटिक रंगों का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा, खोया यानी मावे से तैयार होने वाली मिठाइयों में मिलावट की आशंका सबसे अधिक बनी रहती है। असली मावे को जब अपनी उंगलियों के बीच रगड़ा जाता है, तो उसमें से हल्की सी चिकनाहट और दूध जैसी भीनी खुशबू महसूस होती है। इसके विपरीत, नकली मावा मसलने पर थोड़ा रबड़ की तरह खिंचता है या दानेदार लगता है और उसमें से एक अजीब सी दुर्गंध भी आ सकती है। ऐसे घटिया या नकली मावे से बनी मिठाइयों का सेवन करने से पेट में तेज दर्द, उल्टी और दस्त जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। रंगों की मिलावट का परीक्षण करना भी उतना ही जरूरी है। यदि किसी मिठाई का रंग जरूरत से ज्यादा गहरा या अस्वाभाविक रूप से चमकदार नजर आए, तो उसमें सिंथेटिक रंगों की मिलावट होने की पूरी आशंका रहती है। विशेष तौर पर पीले, गुलाबी और नारंगी रंग की मिठाइयों में यह खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता है। इसकी सच्चाई परखने के लिए मिठाई का एक छोटा टुकड़ा पानी में डालकर जांचा जा सकता है, और यदि रंग पानी में घुल जाए तो यह साफ हो जाता है कि उसमें हानिकारक रंगों का इस्तेमाल किया गया है। इसका आप पर असर त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की शुद्धता और मिलावट को लेकर लोगों को अपनी सेहत के प्रति बेहद सचेत रहने की जरूरत है। • भारत में: त्योहारी सीजन के दौरान देश भर के बाजारों में बिकने वाले दूध और मावे से बने उत्पादों में मिलावट का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को पेट संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। • भीलवाड़ा में: भीलवाड़ा जिले के स्थानीय बाजारों और मिष्ठान भंडारों से मिठाई खरीदते समय उपभोक्ता निर्माण तिथि और एक्सपायरी की जांच जरूर करें तथा संदेह होने पर तुरंत जिला कंट्रोल रूम को सूचना दें। ऐसा क्यों हुआ त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में मिठाइयों की अचानक बढ़ने वाली भारी मांग मिलावटखोरों के लिए मुनाफा कमाने का अवसर बन जाती है। • मांग में भारी उछाल: दिवाली जैसे बड़े पर्वों पर दूध, मावा और अन्य खाद्य सामग्रियों की खपत कई गुना बढ़ जाती है, जिसे पूरा करने के लिए अवैध मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। • प्रशासनिक कार्रवाई: आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा टीमों को बाजारों में औचक निरीक्षण और सख्त कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। • स्वास्थ्य जोखिम: सिंथेटिक रंगों और खराब मावे के सेवन से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती और जन-जागरूकता आवश्यक होती है। सवाल-जवाब 1. भीलवाड़ा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह विशेष अभियान क्यों चलाया जा रहा है? दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग और मिलावट की आशंका को रोकने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। 2. भीलवाड़ा में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कौन हैं? भीलवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा हैं। 3. असली मावे की पहचान कैसे की जा सकती है? असली मावे को उंगलियों के बीच मसलने पर हल्की चिकनाहट और दूध जैसी भीनी खुशबू आती है, जबकि नकली मावा रबड़ जैसा या दानेदार लगता है। 4. मिठाइयों में रंगों की मिलावट की जांच कैसे करें? मिठाई का थोड़ा सा टुकड़ा पानी में डालने पर यदि रंग घुल जाए, तो उसमें हानिकारक सिंथेटिक रंगों की मिलावट की पुष्टि होती है। 5. खाद्य पदार्थों में मिलावट या अनियमितता मिलने पर कहां सूचना दें? किसी भी दुकान पर मिलावट की आशंका होने पर इसकी सूचना तुरंत जिला स्तरीय कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबर पर दी जानी चाहिए। https://trendkia.com/rajasthan/bhilwara-men-tyohari-sijana-para-svasthya-vibhaga-satarka-milavati-mava-aura-mithaiyon-ki-aise-karen-pahachana-48629 TrendKia — Har trend, sabse pehle.