# भींडर के प्राथमिक विद्यालय में गिरी छत की पपड़ी, तीन बच्चे घायल होकर खून से लथपथ पहुंचे घर

> उदयपुर के भींडर इलाके में एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की छत का प्लास्टर अचानक गिरने से तीन मासूम छात्र घायल हो गए। हादसे के समय कक्षा में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था और बच्चे खुद पैदल चलकर अपने घर पहुंचे।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bhinder-ke-prathamika-vidyalaya-men-giri-chhata-ki-papari-tina-bachche-ghayala-hokara-khuna-se-lathapatha-pahunche-ghara-44395 · **Language:** Hindi
**Tags:** उदयपुर, भींडर, राजस्थान शिक्षा विभाग, स्कूल हादसा, जर्जर भवन, सरकारी स्कूल

राजस्थान में उदयपुर जिले के भींडर क्षेत्र स्थित एक सरकारी विद्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब कक्षा की छत का प्लास्टर भरभराकर नीचे आ गिरा। यह दुखद घटना वाणियातलाई ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले नारदा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को घटित हुई। रोजमर्रा की तरह कमरे में बैठकर पढ़ाई कर रहे नन्हे विद्यार्थियों पर अचानक भारी मलबा गिर पड़ा। मलबे की चपेट में आने से तीन बच्चे लहूलुहान हो गए और उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। हादसे की जोरदार आवाज सुनते ही पूरे स्कूल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

## लहूलुहान हालत में खुद पैदल चलकर घर पहुंचे घायल बच्चे
इस हादसे में कक्षा में मौजूद सात वर्षीय काजल, सात वर्षीय कृष्णा और आठ वर्षीय ललित गंभीर रूप से चोटिल हो गए। घटना के समय प्रशासनिक और शैक्षणिक लापरवाही का सबसे बुरा रूप देखने को मिला, क्योंकि उस वक्त कमरे में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं था। सिर से लगातार खून बहने और गंभीर दर्द के बावजूद किसी ने बच्चों की सुध नहीं ली। मजबूरी में ये तीनों घायल मासूम बच्चे स्कूल से खुद पैदल चलकर अपने घर पहुंचे।

जब परिजनों ने अपने जिगर के टुकड़ों को खून से सने कपड़ों में बदहवास हालत में देखा, तो उनके होश उड़ गए। परिजनों ने बिना कोई समय गंवाए फौरन बच्चों को भींडर स्थित जिला चिकित्सालय पहुंचाया। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में चिकित्सकों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू कर उनके सिर के घावों की मरहम-पट्टी की।

## कक्षा के भीतर टूटा फर्नीचर और बाहर निकले जंग लगे सरिये
छत से गिरा मलबा इतना भारी था कि उसने कक्षा में रखे मजबूत सामान को भी तबाह कर दिया। प्लास्टर का बड़ा हिस्सा सीधे अध्यापक की टेबल और कुर्सी पर गिरा, जिससे वे पूरी तरह टूटकर चकनाचूर हो गए। पुरानी और खस्ताहाल हो चुकी छत की हालत इतनी बदतर है कि प्लास्टर उखड़ने के बाद छत के भीतर मौजूद लोहे के जंग लगे सरिये साफ नजर आने लगे हैं।

रिकॉर्ड के अनुसार इस विद्यालय में कुल 37 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है। बच्चों को पढ़ाने के लिए एक नियमित शिक्षक और एक संविदा शिक्षक की तैनाती की गई है। इस गंभीर घटना की सूचना मिलने के बाद जब अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया, तो वहां एक शिक्षक अनुपस्थित पाया गया।

## मरम्मत के नाम पर केवल रंग-रोगन करने का आरोप
हादसे की खबर फैलते ही विद्यालय परिसर में स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का भारी जमावड़ा लग गया। लोगों में शिक्षा विभाग के प्रति गहरा रोष दिखाई दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2020 में छत पर प्लास्टर का काम करवाया गया था। उनका आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों ने भवन की बुनियादी मजबूती को सुधारने के बजाय केवल ऊपर से रंग-रोगन और पुताई करवाकर औपचारिकता पूरी कर ली थी।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस स्कूल भवन की जीर्ण-शीर्ण हालत को लेकर पूर्व में कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक चेतावनियां दी गई थीं, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। यदि उस वक्त पूरी छत गिर जाती तो नुकसान कहीं अधिक भयावह हो सकता था।

## प्रशासन ने जर्जर भवन कराया बंद, नए स्थान की तलाश जारी
घटना की भयावहता सामने आने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बच्चों की सुरक्षा को खतरे में देखते हुए अधिकारियों ने तुरंत प्रभाव से इस जर्जर स्कूल भवन को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए। विद्यालय बंद होने के बाद अब प्रशासन विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए गांव में किसी सुरक्षित वैकल्पिक स्थान की तलाश कर रहा है ताकि कक्षाएं दोबारा शुरू कराई जा सकें।

## इसका आप पर असर
इस घटना ने सरकारी विद्यालयों के बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

- **राजस्थान में:** राज्यभर के अभिभावक अपने बच्चों को जर्जर सरकारी भवनों में भेजने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच की मांग कर सकते हैं। शिक्षा विभाग पर सभी खस्ताहाल स्कूल भवनों का तत्काल ढांचागत ऑडिट कराने का दबाव बढ़ सकता है।
- **उदयपुर और भींडर में:** नारदा गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले 37 बच्चों की कक्षाएं अब नए स्थान की व्यवस्था होने तक प्रभावित रहेंगी। स्थानीय प्रशासन और शिक्षा अधिकारियों द्वारा क्षेत्र के अन्य पुराने विद्यालयों की छतों और दीवारों का तुरंत निरीक्षण किया जा सकता है।
- **छात्र सुरक्षा के संदर्भ में:** कक्षाओं में शिक्षकों की अनिवार्य उपस्थिति और आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था को कड़ाई से लागू किए जाने की जरूरत रेखांकित हुई है। ग्रामीण स्तर पर विद्यालय प्रबंधन समितियों को मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच का अधिकार मिलना आवश्यक है।
- **सरकारी मरम्मत योजनाओं पर:** निर्माण और रखरखाव के नाम पर केवल रंग-रोगन करने वाले संविदाकारों और निगरानी अधिकारियों पर सीधी जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। बजट आवंटन के बाद वास्तविक मरम्मत सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी हो सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह हादसा प्राथमिक स्कूल के पुराने हो चुके भवन की बुनियादी मरम्मत न होने और केवल सतही पुताई कर मामले को दबाने के कारण हुआ। अधिकारियों को बार-बार सूचना देने के बावजूद भवन के ढांचे को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।

- **ढांचागत कमजोरी:** छत का निर्माण काफी पुराना था और समय के साथ उसके भीतर लगे लोहे के सरिये जंग खा चुके थे। इस वजह से कंक्रीट और प्लास्टर की पकड़ कमजोर हो गई और वह भरभराकर नीचे गिर पड़ा।
- **लीपापोती वाली मरम्मत:** साल 2020 में छत पर केवल नया प्लास्टर और रंग-रोगन करवाया गया था। भवन के मुख्य ढांचे की आवश्यक मजबूती जांचे बिना किए गए इस काम से आंतरिक खराबी छिपी रह गई।
- **प्रशासनिक अनदेखी:** ग्रामीणों और अभिभावकों ने अधिकारियों को भवन की खस्ताहाल स्थिति के बारे में पहले भी कई बार आगाह किया था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों ने समय पर कोई तकनीकी निरीक्षण या मरम्मत नहीं कराई।
- **कक्षा में निगरानी का अभाव:** हादसे के समय कक्षा में किसी भी शिक्षक की मौजूदगी नहीं थी और निरीक्षण में एक शिक्षक अनुपस्थित मिला। इस अनुपस्थिति के कारण चोटिल बच्चों को मौके पर कोई प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका।

## सवाल-जवाब

### 1. यह हादसा किस स्थान और किस स्कूल में हुआ?
यह हादसा राजस्थान के उदयपुर जिले के भींडर क्षेत्र में वाणियातलाई ग्राम पंचायत के नारदा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में हुआ।

### 2. हादसे में कौन-कौन से बच्चे घायल हुए हैं?
इस घटना में सात वर्षीय काजल, सात वर्षीय कृष्णा और आठ वर्षीय ललित के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं।

### 3. हादसे के बाद घायल बच्चे अस्पताल कैसे पहुंचे?
कक्षा में किसी शिक्षक के न होने के कारण बच्चे लहूलुहान हालत में खुद पैदल चलकर घर पहुंचे, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें भींडर जिला चिकित्सालय पहुंचाया।

### 4. स्कूल में कुल कितने बच्चे और शिक्षक तैनात हैं?
विद्यालय में 37 बच्चे नामांकित हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए एक स्थायी व एक संविदा शिक्षक नियुक्त हैं।

### 5. ग्रामीणों ने स्कूल की मरम्मत को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
ग्रामीणों का आरोप है कि 2020 में केवल रंग-रोगन और पुताई करवाकर औपचारिकता पूरी की गई थी, जबकि मूल मरम्मत कार्य नहीं कराया गया।

### 6. हादसे के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाया है?
प्रशासन ने जर्जर स्कूल भवन को तुरंत बंद करने के निर्देश दिए हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित वैकल्पिक स्थान की तलाश शुरू कर दी है।

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