भूख हड़ताल से बिगड़ी लॉरेंस बिश्नोई के रिश्तेदार सचिन थापन की हालत, अजमेर के जेएलएन अस्पताल में कराया गया भर्ती अजमेर की उच्च सुरक्षा जेल में पिछले 17-18 दिनों से अनशन कर रहे गैंगस्टर सचिन थापन का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसे भारी पुलिस सुरक्षा के बीच जेएलएन अस्पताल में दाखिल कराया गया है. राजस्थान के अजमेर स्थित उच्च सुरक्षा कारागार में बंद कुख्यात कैदी सचिन थापन की शारीरिक स्थिति गंभीर होने के बाद उसे बुधवार को आपातकालीन स्थिति में जवाहरलाल नेहरू अस्पताल पहुंचाया गया. चिकित्सकों की विशेष देखरेख में उसे तुरंत भर्ती कर उपचार प्रक्रिया प्रारंभ की गई है. अस्पताल परिसर और संबंधित वार्ड को छावनी में तब्दील करते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है. कैदी पिछले 17-18 दिनों से लगातार अनशन पर था और भोजन ग्रहण करने से पूरी तरह परहेज कर रहा था, जिसके चलते उसके शरीर में आवश्यक तत्वों की भारी कमी दर्ज की गई है. बैरक बदलने की मांग और सुरक्षा नियमों पर तकरार इस पूरे विवाद की शुरुआत जेल के भीतर कैदियों के अनुशासन से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम से हुई थी. सचिन थापन के दो करीबी सहयोगी भी उसी जेल परिसर में अलग खंड में बंद हैं. कुछ दिन पूर्व उन दोनों बंदियों ने अपने कक्ष के भीतर निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया था. इस अनुशासनहीनता और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कारागार प्रबंधन ने सिविल लाइंस थाने में बाकायदा प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इसके उपरांत सचिन थापन ने जेल प्रबंधन के समक्ष यह हठ पकड़ लिया कि उसके उन दोनों साथियों को उसकी ही कोठरी में स्थानांतरित किया जाए. कारागार अधिकारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और जेल नियमों का हवाला देते हुए इस मांग को सीधे तौर पर ठुकरा दिया. अधिकारियों का स्पष्ट तर्क था कि संवेदनशील और हिंसक मामलों में लिप्त बंदियों को एक साथ रहने की छूट देना जेल की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. इस प्रशासनिक फैसले के विरोध में कैदी ने अन्न त्यागने का फैसला किया और अपनी जिद मनवाने के लिए अनशन शुरू कर दिया. मूसेवाला हत्याकांड और विदेश से प्रत्यर्पण की पृष्ठभूमि सचिन थापन कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भांजा है और पंजाब के बहुचर्चित गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की आपराधिक योजना में मुख्य सूत्रधारों में गिना जाता है. जांच एजेंसियों के अनुसार, उसने इस हत्याकांड की साजिश रचने के साथ-साथ शूटरों के लिए घातक हथियारों और साजो-सामान का प्रबंध करने में अहम भूमिका निभाई थी. वारदात को अंजाम दिए जाने से ठीक पहले वह जाली यात्रा दस्तावेजों और फर्जी पासपोर्ट के सहारे देश की सीमा लांघकर संयुक्त अरब अमीरात के शहर दुबई भाग निकला था. दुबई से वह आगे बढ़ते हुए अजरबैजान में छिप गया था. भारतीय सुरक्षा और कूटनीतिक एजेंसियों के निरंतर प्रयासों और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 1 अगस्त 2023 को उसे अजरबैजान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था. तभी से उसे कड़ी चौकसी के बीच अजमेर की इस विशेष जेल में रखा गया है. चिकित्सीय निगरानी और प्रशासनिक सतर्कता लंबे उपवास के प्रारंभिक दिनों में बंदी ने जेल के भीतर सामान्य चिकित्सकीय जांच या दवाएं लेने से भी साफ इनकार कर दिया था. लगातार कई दिनों तक भूखे रहने से जब उसकी नब्ज और शारीरिक स्थिति चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई, तब कारागार अधिकारियों ने बिना देरी किए उसे शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में भेजने का निर्णय लिया. अस्पताल के उपअधीक्षक अमित यादव ने स्थिति की समीक्षा करते हुए जानकारी दी कि डॉक्टरों का एक दल मरीज की सेहत पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रहा है. पुलिस प्रशासन किसी भी तरह की सुरक्षा चूक से बचने के लिए अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गहन पड़ताल कर रहा है. इसका आप पर असर जेल प्रशासन और अस्पताल के बीच सुरक्षा प्रबंधन को लेकर इस घटना का सीधा असर प्रशासनिक नीतियों और स्थानीय नागरिकों पर पड़ता है. • राजस्थान में: अजमेर के जेएलएन अस्पताल में सुरक्षा घेरा कड़ा होने से सामान्य मरीजों और उनके तीमारदारों की जांच प्रक्रिया बढ़ गई है. अस्पताल प्रशासन ने आपातकालीन वार्ड के आसपास पुलिस बल तैनात कर आवाजाही को नियंत्रित किया है ताकि आम जनता को असुविधा न हो. • भारत में: देश भर की उच्च सुरक्षा जेलों में बंद संगठित गिरोहों के सदस्यों पर निगरानी तंत्र और सख्त किया जाएगा. जेल मैन्युअल के तहत कैदियों द्वारा अनशन के जरिए अनुचित मांगें मनवाने की कोशिशों पर प्रशासनिक नियमों की समीक्षा हो सकती है. • सुरक्षा प्रोटोकॉल: संवेदनशील बंदियों को अस्पताल लाते समय शहर की मुख्य सड़कों पर यातायात और पुलिस पेट्रोलिंग में त्वरित बदलाव किए जाते हैं. इससे आम यात्रियों को अस्पताल मार्ग पर कुछ समय के लिए अतिरिक्त पुलिस चेकिंग का सामना करना पड़ सकता है. • कानूनी कार्रवाई: सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और जेल सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कैदियों के खिलाफ दर्ज मामलों में त्वरित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. इससे यह संदेश जाता है कि जेल के भीतर अनुशासन तोड़ने वालों पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी. ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति कैदी की अवैध मांगों, कारागार संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना और जेल प्रशासन के कड़े सुरक्षा नियमों के टकराव से उत्पन्न हुई है. • सहयोगियों द्वारा तोड़फोड़: सचिन थापन के दो साथियों ने अपनी कोठरी में लगे सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया. इस घटना के चलते दोनों को अलग और कड़ी निगरानी में रखा गया था. • अवैध मांग पर अड़ना: थापन ने अपनी बैरक बदलने और तोड़फोड़ के आरोपी दोनों साथियों को अपने साथ एक ही कक्ष में रखने का दबाव बनाया. जेल प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए इस अनुचित मांग को सिरे से खारिज कर दिया. • विरोध का अनुचित रास्ता: अपनी मांगें न माने जाने पर बंदी ने 17-18 दिनों तक खाना खाने से इनकार कर दिया और भीतर प्रारंभिक इलाज भी नहीं कराया. लंबे समय तक भूखे रहने से स्वास्थ्य लगातार गिरता गया और अंततः अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ गई. सवाल-जवाब 1. सचिन थापन को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया है? तबीयत बिगड़ने के बाद सचिन थापन को कड़ी सुरक्षा के बीच अजमेर के जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 2. सचिन थापन कितने दिनों से भूख हड़ताल पर था? सचिन थापन पिछले 17-18 दिनों से जेल में लगातार भूख हड़ताल पर बैठा हुआ था. 3. सचिन थापन की जेल प्रशासन से क्या मांग थी? वह अपनी बैरक बदलने और अपने दो अन्य सहयोगियों को अपनी ही बैरक में साथ रखने की मांग पर अड़ा हुआ था. 4. जेल प्रशासन ने उसकी मांग मानने से क्यों इनकार कर दिया? प्रशासन ने सुरक्षा नियमों और व्यवस्था का हवाला देते हुए संवेदनशील कैदियों को एक साथ रखने की मांग को अनुचित बताया. 5. सचिन थापन पर मुख्य रूप से क्या आरोप हैं? वह पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की साजिश रचने और शूटरों को हथियार मुहैया कराने का मुख्य आरोपी है. 6. सचिन थापन को भारत कब लाया गया था? फर्जी पासपोर्ट से विदेश भागने के बाद उसे 1 अगस्त 2023 को अजरबैजान से प्रत्यर्पित कर भारत वापस लाया गया था. https://trendkia.com/rajasthan/bhukha-haratala-se-bigari-lawrence-bishnoi-ke-rishtedara-sachin-thapan-ki-halata-ajmer-ke-jln-hospital-men-karaya-gaya-bharti-50414 TrendKia — Har trend, sabse pehle.