# बीकानेर के चित्रकार ने दीपावली पर बनाईं सोने की कलम से तराशी गई मां लक्ष्मी की चरण पादुकाएं

> राजस्थान के बीकानेर में चित्रकार राम कुमार भदानी ने आम की लकड़ी पर सोने की कलम और मीनाकारी से माता लक्ष्मी के पदचिह्न तैयार किए हैं। इन विशेष चरण पादुकाओं पर 12 धार्मिक प्रतीक उकेरे गए हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bikaner-ke-chitrakara-ne-deepawali-para-banain-sone-ki-kalama-se-tarashi-gai-man-lakshmi-ki-charana-padukaen-57947 · **Language:** Hindi
**Tags:** बीकानेर, राम कुमार भदानी, दीपावली, लक्ष्मी पूजन, चरण पादुका, हस्तशिल्प, मीनाकारी

दीपावली के शुभ अवसर पर धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए घरों में चरण चिह्न बनाने की पुरानी परंपरा रही है। आमतौर पर लोग अपने घरों के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर लाल रंग या सिंदूर से माता लक्ष्मी के पदचिह्न तैयार करते हैं। राजस्थान के बीकानेर शहर में इस लोक परंपरा को एक अनोखा और भव्य कलात्मक रूप दिया गया है। बीकानेर के प्रसिद्ध चित्रकार राम कुमार भदानी ने आम के पेड़ की लकड़ी पर सोने की कलम का उपयोग करके माता लक्ष्मी की बेहद खूबसूरत चरण पादुकाएं बनाई हैं, जो श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं।

## परंपरा और आधुनिक कला का सुंदर संगम
चित्रकार राम कुमार भदानी बताते हैं कि दीपावली पर माता लक्ष्मी के पैरों के निशान अंकित करने की परंपरा युगों से चली आ रही है। सामान्यतः लोग कपड़े, कागज या फर्श पर लाल रंग से ये चिह्न उकेरते हैं। इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इसे एक स्थायी और अलौकिक रूप देने का निर्णय लिया। उनका मुख्य उद्देश्य केवल एक कलात्मक वस्तु का निर्माण करना नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पौराणिक मान्यताओं और सनातन अध्यात्म से जोड़ना भी था। सोने की कलम से की गई यह बारीक कलाकारी न केवल दिखने में भव्य लगती है, बल्कि लोगों को अपनी प्राचीन परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा भी देती है।

## शुभ धार्मिक प्रतीकों का बारीक चित्रांकन
इन चरण पादुकाओं की सबसे बड़ी खासियत उन पर उकेरे गए अनेक पवित्र और धार्मिक प्रतीक हैं। राम कुमार भदानी के अनुसार, इन पादुकाओं पर कमल का फूल, त्रिशूल, शंख, चक्र, पद्म, स्वास्तिक, देवराज इंद्र का वज्र, तीर, धनुष, सूर्य, चंद्रमा तथा श्री यंत्र जैसे कुल 12 प्रमुख प्रतीकों को सूक्ष्मता से अंकित किया गया है। भारतीय संस्कृति में इन सभी प्रतीकों का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है। उदाहरण के लिए, कमल को पवित्रता और अपार समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं शंख और चक्र का सीधा संबंध भगवान विष्णु से है, जो सृष्टि के पालनहार हैं। इसके अतिरिक्त स्वास्तिक जीवन में शुभता लाता है, जबकि श्री यंत्र को माता लक्ष्मी की साधना और कृपा प्राप्ति का मुख्य केंद्र माना जाता है। इन सभी देव चिह्नों का समावेश पादुका को विशेष धार्मिक स्वरूप प्रदान करता है।

## आम की लकड़ी पर मीनाकारी और सोने की कलम का कमाल
इन चरण पादुकाओं को बनाने की निर्माण प्रक्रिया काफी जटिल और धैर्य की मांग करने वाली है। इसके लिए सबसे पहले आम के पेड़ की लकड़ी का चयन करके उसे सुंदर आकार में ढाला जाता है। लकड़ी तैयार होने के बाद उस पर सोने की कलम से अत्यंत सूक्ष्म और बारीक चित्रकारी की जाती है। इस पर पारंपरिक मीनाकारी का काम भी किया जाता है, जिससे इसकी चमक और सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। एक-एक प्रतीक को स्पष्ट और आकर्षक रूप देने के कारण इसे तैयार करने में काफी समय लगता है।

## डेढ़ से दो महीने की मेहनत और सीमित उपलब्धता
चित्रकार भदानी के अनुसार, ऐसी एक जोड़ी चरण पादुका को तैयार करने में लगभग डेढ़ से दो महीने का लंबा समय लगता है। बारीक कारीगरी और विभिन्न प्रतीकों को शुद्धता के साथ उकेरना अत्यधिक एकाग्रता का काम है। दीपावली के पर्व को ध्यान में रखते हुए उन्होंने विशेष रूप से 100 जोड़ी चरण पादुकाएं तैयार की हैं। श्रद्धालुओं और संग्राहकों के लिए इन विशेष पादुकाओं की कीमत 1100 रुपये प्रति जोड़ी रखी गई है, ताकि लोग अपने घरों के पूजा स्थल परन्हें स्थापित कर सकें।

## इसका आप पर असर
यह समाचार भारतीय पारंपरिक हस्तकला और धार्मिक अनुष्ठानों के अनूठे मेल को दर्शाता है।

- **भारत भर में:** कला प्रेमियों और श्रद्धालुओं को त्योहारों के अवसर पर पारंपरिक प्रतीकों से सजी नई हस्तशिल्प वस्तुएं अपनाने की प्रेरणा मिलती है। यह भारतीय संस्कृति की विविधता और रचनात्मकता को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देता है।
- **राजस्थान और बीकानेर में:** स्थानीय हस्तशिल्प और उस्ता कला परंपरा को बढ़ावा मिलने से क्षेत्रीय चित्रकारों और कारीगरों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं। बीकानेर की पारंपरिक चित्रकारी और मीनाकारी को राष्ट्रीय पहचान मिलने से स्थानीय कला बाजार को मजबूती मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
दीपावली पर देवी लक्ष्मी की पूजा और उनके स्वागत के लिए पदचिह्न बनाने की सदियों पुरानी परंपरा को कलात्मक स्वरूप देने के उद्देश्य से यह पहल की गई।

- **सांस्कृतिक जुड़ाव:** चित्रकार का मुख्य उद्देश्य आम लोगों और युवा पीढ़ी को केवल लाल रंग के अस्थायी निशानों से आगे बढ़ाकर प्राचीन धार्मिक प्रतीकों के वास्तविक महत्व से परिचित कराना है।
- **स्थायी कला का निर्माण:** फर्श या कागज पर बनाए जाने वाले चिह्न जल्द मिट जाते हैं, इसलिए आम की लकड़ी पर सोने की कलम और मीनाकारी से एक स्थायी पूजा वस्तु तैयार की गई।
- **प्रतीकात्मक महत्व:** पदचिह्नों पर 12 विशिष्ट धार्मिक चिह्नों को उकेरकर इसे पूजा स्थल के लिए अधिक फलदायी और शुभ बनाने की कोशिश की गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. सोने की कलम से चरण पादुका किसने बनाई है?
राजस्थान के बीकानेर निवासी चित्रकार राम कुमार भदानी ने सोने की कलम से माता लक्ष्मी की चरण पादुका बनाई है।

### 2. चरण पादुका बनाने में किस लकड़ी का उपयोग किया गया है?
इन चरण पादुकाओं को तैयार करने के लिए आम के पेड़ की लकड़ी का उपयोग किया गया है।

### 3. चरण पादुका पर कौन-कौन से धार्मिक प्रतीक उकेरे गए हैं?
इन पर कमल, त्रिशूल, शंख, चक्र, पद्म, स्वास्तिक, इंद्र का वज्र, तीर, धनुष, सूर्य, चंद्रमा और श्री यंत्र जैसे 12 प्रतीक उकेरे गए हैं।

### 4. दीपावली के लिए कितनी जोड़ी चरण पादुकाएं बनाई गई हैं?
दीपावली के पर्व को ध्यान में रखते हुए कुल 100 जोड़ी चरण पादुकाएं तैयार की गई हैं।

### 5. एक जोड़ी चरण पादुका की कीमत कितनी रखी गई है?
एक जोड़ी चरण पादुका की कीमत 1100 रुपये रखी गई है।

### 6. इन पादुकाओं को तैयार करने में कितना समय लगता है?
बारीक कारीगरी और प्रतीकों को उकेरने के कारण एक जोड़ी पादुका तैयार करने में करीब डेढ़ से दो महीने का समय लगता है।

## प्रेरणा और सबक
बीकानेर के इस चित्रकार की लगन और नवाचार से कई महत्वपूर्ण जीवन सबक मिलते हैं।

- **परंपरा में नवाचार:** पुरानी रीति-रिवाजों को आधुनिक या अनूठे कलात्मक ढंग से पेश करके नई पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनाया जा सकता है।
- **धैर्य और एकाग्रता:** एक काम में डेढ़ से दो महीने का समय लगाकर सूक्ष्म कारीगरी करना यह सिखाता है कि महान कला के लिए अटूट समर्पण आवश्यक है।
- **सुलभता का ध्यान:** सोने की कलम और मीनाकारी जैसी कीमती कलाकृति बनाने के बावजूद 1100 रुपये की उचित कीमत रखकर इसे आम श्रद्धालुओं की पहुंच में रखा गया है।

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