{
  "type": "article",
  "title": "बीकानेर के डूंगर कॉलेज में अनोखा मेल, परिसर में एक साथ पढ़ाते हैं आठ शादीशुदा जोड़े",
  "summary": "राजकीय डूंगर कॉलेज में सोलह शिक्षक एक-दूसरे के जीवनसाथी हैं, जिनमें से कई पति-पत्नी एक ही विभाग में विद्यार्थियों को पढ़ाने का जिम्मा संभाल रहे हैं।",
  "content": "जीवनसाथी के साथ घरेलू सामंजस्य बिठाना तो आम बात है, परंतु एक ही परिसर में सहकर्मी बनकर कर्तव्य निभाना किसी भी संबंध को एक विशेष धरातल प्रदान करता है। राजस्थान के बीकानेर संभाग के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान, राजकीय डूंगर महाविद्यालय में अध्यापन से जुड़ी एक बेहद अनूठी व्यवस्था नजर आती है। यहां कुल आठ युगल ऐसे हैं जो आपस में वैवाहिक बंधन में बंधे हुए हैं और इसी संस्थान में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से चार जोड़े तो ऐसे हैं जो कॉलेज के एक ही अध्ययन संकाय के अंतर्गत साथ बैठकर अपने रोजमर्रा के दायित्व पूरे करते हैं।\n\nकामकाजी जीवन और व्यक्तिगत रिश्ते का सुंदर संतुलन\nएक छत के नीचे रहकर शिक्षा प्रदान करने वाले इन प्राध्यापकों का मानना है कि इससे उनके निजी और कार्यक्षेत्र के तालमेल में सकारात्मक बदलाव आया है। भूगोल अध्ययन विभाग में बतौर सह आचार्य कार्यरत डॉ. देवेश सहारण तथा उनकी धर्मपत्नी डॉ. श्वेता नेहरा विगत 18 वर्षों से दांपत्य जीवन बिता रहे हैं। इसी विभाग में दोनों वर्षों से अध्यापन की जिम्मेदारियां साथ निभा रहे हैं। डॉ. श्वेता नेहरा के अनुसार, दोनों के मध्य का सामंजस्य उनकी पेशेवर एवं घरेलू दोनों प्रकार की जिम्मेदारियों को सहज बनाता है। उनका कहना है कि वर्तमान दौर में युवाओं को अपने वैवाहिक संबंधों में आपसी तालमेल, समझदारी और संयम को प्राथमिकता देनी चाहिए। आज की नई पीढ़ी में अक्सर जल्दबाजी और धैर्य की कमी देखी जाती है, जबकि कई मसलों पर तुरंत उत्तेजित होने के बजाय मौन रहना परिस्थितियों को अपने आप अनुकूल बना देता है।\n\nसाथ दायित्व निभाने के कई व्यावहारिक फायदे\nडॉ. देवेश सहारण इस सह-अस्तित्व को दोनों के विकास के लिए बेहद फलदायी मानते हैं। उनका विचार है कि एक ही संस्थान में सेवा देने से दोनों को कार्यप्रणाली और विभागीय अपेक्षाओं की पूरी समझ रहती है, जिससे शैक्षणिक कार्यों में एक-दूसरे को भरपूर मदद मिल जाती है। उन्होंने बताया कि उनकी शादी पारंपरिक पारिवारिक रजामंदी से तय हुई थी और दोनों के कुटुम्ब पहले से परिचित थे। संयोग से दोनों को कार्यभार भी एक साथ ही आवंटित हुआ था। शाम के वक्त चाय पीते हुए दिनभर के घटनाक्रम पर चर्चा करना और घरेलू मोर्चे पर भी एक-दूसरे का हाथ बंटाना उनके रिश्ते को मजबूती देता है। उनका मानना है कि आपसी सहायता से दफ्तर और घर का संतुलन सरलता से सध जाता है।\n\nपारिवारिक और पेशेवर दायित्वों की स्पष्ट सीमाएं\nसमाजशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शेरसिंह कुड़ी और उनकी जीवनसंगिनी डॉ. पूजा चौधरी भी इसी परिसर में नए अध्याय की शुरुआत कर चुके हैं। इस शिक्षण संस्थान में अध्यापन शुरू किए उन्हें अभी छह महीने का वक्त बीता है। डॉ. शेरसिंह का कहना है कि एक जैसी परिस्थितियों में रहने से वे कार्यक्षेत्र की चुनौतियों को गहराई से महसूस कर पाते हैं। वे घर की निजी समस्याओं को कार्यस्थल तक नहीं आने देते और संस्थान के कर्तव्यों का पूरी गंभीरता से निर्वहन करते हैं। दोनों का विवाह भी पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की पहली मुलाकात साक्षात्कार के दौरान हुई थी, जिसके उपरांत पारिवारिक सहमति से वैवाहिक निर्णय लिया गया। उनका कहना है कि आज स्त्रियां घर के साथ-साथ दफ्तर का दायित्व बखूबी निभा रही हैं, इसलिए पुरुषों का सहयोग बेहद आवश्यक है। नए रिश्तों में मतभेद उभरना स्वाभाविक है, लेकिन सीधी बातचीत से जटिल से जटिल समस्या का निराकरण निकाला जा सकता है।\n\nसंस्थान में पदस्थ आठों शिक्षक युगलों की सूची\nइस ऐतिहासिक राजकीय महाविद्यालय में अध्यापन करा रहे दंपतियों में विभिन्न विषयों के वरिष्ठ शिक्षाविद शामिल हैं। कॉलेज के प्राचार्य राजेंद्र पुरोहित प्राणीशास्त्र के प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी पत्नी अनिला पुरोहित इतिहास अध्ययन संकाय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र नाथ की धर्मपत्नी लीना शरण प्राणीशास्त्र विभाग में प्रोफेसर हैं। प्राणीशास्त्र के प्रोफेसर अनु शर्मा की जीवनसंगिनी सुमनलता त्रिपाठी वनस्पति विज्ञान विभाग में सेवाएं दे रही हैं। इसी तरह, भूगोल संकाय में डॉ. विजयप्रकाश सहायक आचार्य हैं और उनकी पत्नी विनीता मिर्धा भौतिक शास्त्र विभाग में सहायक आचार्य के पद पर पदस्थापित हैं।\n\nचार युगल साझा कर रहे हैं अपना-अपना विभाग\nसंस्थान में कार्यरत इन जोड़ों में से चार ऐसे हैं जिनका विभाग भी बिल्कुल एक ही है। भूगोल विषय के विद्यार्थियों को डॉ. देवेश सहारण और डॉ. श्वेता नेहरा दोनों सह आचार्य के रूप में पढ़ाते हैं। इतिहास विषय में प्रोफेसर सुखाराम और उषा लामरोर दोनों प्रोफेसर के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। वहीं समाजशास्त्र अध्ययन संकाय में दो अलग-अलग युगल सेवाएं दे रहे हैं। इनमें डॉ. महेंद्र थोरी और डॉ. सुनीता मंडा दोनों सहायक आचार्य हैं, तथा डॉ. शेरसिंह कुड़ी और डॉ. पूजा चौधरी भी समाजशास्त्र विभाग में ही सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत रहकर शिक्षण दे रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह अनोखा संयोग कार्यस्थल और व्यक्तिगत जीवन के स्वस्थ तालमेल को समझने के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।\n\n• राजस्थान में: राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत कर्मियों के लिए यह दिखाता है कि एक ही परिसर में सहकर्मी रहते हुए भी पेशेवर मर्यादाएं कैसे बनाए रखी जाती हैं। जो दंपति सरकारी नौकरियों में साथ पदस्थापन चाहते हैं, उनके लिए यह अनुभव एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।\n• युवा दंपतियों के लिए: दोनों साझेदारों के कामकाजी होने की स्थिति में घर और दफ्तर की जिम्मेदारियों को संतुलित करने का यह व्यावहारिक रास्ता दिखाता है। आपसी समझ और घर के कामों में बराबरी की भागीदारी से दांपत्य जीवन में तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।\n• विद्यार्थियों के लिए: कॉलेज परिसर में शिक्षकों का ऐसा अनुशासित तालमेल विद्यार्थियों को संवाद और सहयोग का व्यावहारिक पाठ पढ़ाता है। इससे छात्रों को अपने शैक्षणिक और व्यक्तिगत आचरण में धैर्य का महत्व समझने में मदद मिलती है।\n• पारिवारिक संवाद: विवादों को त्वरित प्रतिक्रिया के बजाय शांति और बातचीत से हल करने की सीख रोजमर्रा के जीवन के लिए बेहद उपयोगी है। जीवन में संयम बरतने से कई घरेलू समस्याएं समय के साथ अपने आप सुलझ जाती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएक ही कॉलेज में इतनी बड़ी संख्या में पति-पत्नी का एक साथ पदस्थापित होना राज्य की प्रशासनिक पदस्थापन प्रक्रिया और साझा शैक्षणिक योग्यताओं का स्वाभाविक परिणाम है।\n\n• समान प्रतियोगी प्रक्रिया: कॉलेज शिक्षा विभाग में व्याख्याताओं की नियुक्तियां राज्य स्तरीय चयन परीक्षाओं और साक्षात्कारों के माध्यम से होती हैं। समान विषयों और योग्यताओं की तैयारी के दौरान कई युगल एक-दूसरे से जुड़े या चयन के बाद पदस्थापन के नियमों के तहत एक ही बड़े संस्थान में पहुंचे।\n• संभाग का सबसे बड़ा कॉलेज: बीकानेर का डूंगर महाविद्यालय संभाग का सबसे बड़ा राजकीय कॉलेज होने के कारण यहां विभिन्न संकायों में पदों की संख्या अधिक है। अधिक पद होने की वजह से कई वरिष्ठ प्राध्यापकों और नए प्रवक्ताओं को एक ही जगह पदभार ग्रहण करने का अवसर मिला।\n• पारिवारिक पदस्थापन नीति: सामान्य तौर पर सरकारी सेवाओं में पति-पत्नी को यथासंभव एक ही जिले या संस्थान में पदस्थापित करने को प्राथमिकता दी जाती है। इस प्रशासनिक व्यवस्था और समय के साथ हुए तबादलों ने इस अनोखे संयोग को आकार दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बीकानेर के किस कॉलेज में आठ शादीशुदा जोड़े कार्यरत हैं?\nबीकानेर संभाग के सबसे बड़े राजकीय डूंगर महाविद्यालय में आठ विवाहित जोड़े शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।\n\n2. इनमें से कितने जोड़े एक ही विभाग में काम कर रहे हैं?\nआठ जोड़ों में से चार जोड़े एक ही विभाग में साथ बैठकर अपने शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्व निभाते हैं।\n\n3. कौन-कौन से विभागों में पति-पत्नी दोनों एक साथ पदस्थापित हैं?\nभूगोल में एक जोड़ा, इतिहास में एक जोड़ा और समाजशास्त्र विभाग में दो अलग-अलग जोड़े एक साथ पदस्थापित हैं।\n\n4. डूंगर कॉलेज के प्राचार्य कौन हैं और उनकी पत्नी किस पद पर हैं?\nप्राचार्य राजेंद्र पुरोहित प्राणीशास्त्र के प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी पत्नी अनिला पुरोहित कॉलेज के इतिहास विभाग में प्रोफेसर हैं।\n\n5. भूगोल विभाग में कौन सा जोड़ा पिछले 18 वर्षों से साथ है?\nभूगोल विभाग में सह आचार्य डॉ. देवेश सहारण और सह आचार्य डॉ. श्वेता नेहरा विगत 18 वर्षों से वैवाहिक रिश्ते में साथ हैं।\n\n6. समाजशास्त्र विभाग में हाल ही में किस नए जोड़े ने पदभार संभाला है?\nसहायक आचार्य डॉ. शेरसिंह कुड़ी और उनकी पत्नी डॉ. पूजा चौधरी ने करीब छह महीने पहले समाजशास्त्र विभाग में पदभार संभाला है।\n\nप्रेरणा और सबक\nघर और कार्यस्थल पर एक साथ रहते हुए सकारात्मक संबंध बनाए रखने वाले इन शिक्षकों के अनुभव आधुनिक जीवन के लिए उपयोगी सूत्र देते हैं।\n\n• संयम और धैर्य: किसी भी विवाद पर फौरन प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए क्योंकि कई जटिलताएं शांत रहने पर समय के साथ स्वयं समाप्त हो जाती हैं।\n• कामकाज का बंटवारा: जब दोनों जीवनसाथी नौकरी कर रहे हों तो घरेलू दायित्वों में बराबरी की भागीदारी पारिवारिक संतुलन बनाए रखने का सबसे सशक्त आधार है।\n• दायित्वों की स्पष्ट सीमा: घरेलू विवादों को कार्यस्थल पर न ले जाना और संस्थान की जिम्मेदारियों को स्वतंत्र रूप से निभाना पेशेवर सफलता सुनिश्चित करता है।\n• सीधा संवाद: मनमुटाव दूर करने का सबसे सरल और अचूक उपाय एक मेज पर बैठकर शांतिपूर्ण चर्चा करना है।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/bikaner-ke-dungar-college-men-anokha-mela-parisara-men-eka-satha-parhate-hain-atha-shadishuda-jore-54150",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-11-01",
  "tags": [
    "डूंगर कॉलेज",
    "बीकानेर समाचार",
    "राजस्थान शिक्षा",
    "असिस्टेंट प्रोफेसर",
    "शिक्षा जगत"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia",
  "whatItMeansForYou": "यह अनोखा संयोग कार्यस्थल और व्यक्तिगत जीवन के स्वस्थ तालमेल को समझने के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।\n\n• राजस्थान में: राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत कर्मियों के लिए यह दिखाता है कि एक ही परिसर में सहकर्मी रहते हुए भी पेशेवर मर्यादाएं कैसे बनाए रखी जाती हैं। जो दंपति सरकारी नौकरियों में साथ पदस्थापन चाहते हैं, उनके लिए यह अनुभव एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।\n• युवा दंपतियों के लिए: दोनों साझेदारों के कामकाजी होने की स्थिति में घर और दफ्तर की जिम्मेदारियों को संतुलित करने का यह व्यावहारिक रास्ता दिखाता है। आपसी समझ और घर के कामों में बराबरी की भागीदारी से दांपत्य जीवन में तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।\n• विद्यार्थियों के लिए: कॉलेज परिसर में शिक्षकों का ऐसा अनुशासित तालमेल विद्यार्थियों को संवाद और सहयोग का व्यावहारिक पाठ पढ़ाता है। इससे छात्रों को अपने शैक्षणिक और व्यक्तिगत आचरण में धैर्य का महत्व समझने में मदद मिलती है।\n• पारिवारिक संवाद: विवादों को त्वरित प्रतिक्रिया के बजाय शांति और बातचीत से हल करने की सीख रोजमर्रा के जीवन के लिए बेहद उपयोगी है। जीवन में संयम बरतने से कई घरेलू समस्याएं समय के साथ अपने आप सुलझ जाती हैं।",
  "whyItHappened": "एक ही कॉलेज में इतनी बड़ी संख्या में पति-पत्नी का एक साथ पदस्थापित होना राज्य की प्रशासनिक पदस्थापन प्रक्रिया और साझा शैक्षणिक योग्यताओं का स्वाभाविक परिणाम है।\n\n• समान प्रतियोगी प्रक्रिया: कॉलेज शिक्षा विभाग में व्याख्याताओं की नियुक्तियां राज्य स्तरीय चयन परीक्षाओं और साक्षात्कारों के माध्यम से होती हैं। समान विषयों और योग्यताओं की तैयारी के दौरान कई युगल एक-दूसरे से जुड़े या चयन के बाद पदस्थापन के नियमों के तहत एक ही बड़े संस्थान में पहुंचे।\n• संभाग का सबसे बड़ा कॉलेज: बीकानेर का डूंगर महाविद्यालय संभाग का सबसे बड़ा राजकीय कॉलेज होने के कारण यहां विभिन्न संकायों में पदों की संख्या अधिक है। अधिक पद होने की वजह से कई वरिष्ठ प्राध्यापकों और नए प्रवक्ताओं को एक ही जगह पदभार ग्रहण करने का अवसर मिला।\n• पारिवारिक पदस्थापन नीति: सामान्य तौर पर सरकारी सेवाओं में पति-पत्नी को यथासंभव एक ही जिले या संस्थान में पदस्थापित करने को प्राथमिकता दी जाती है। इस प्रशासनिक व्यवस्था और समय के साथ हुए तबादलों ने इस अनोखे संयोग को आकार दिया।",
  "questionsAndAnswers": [
    {
      "question": "बीकानेर के किस कॉलेज में आठ शादीशुदा जोड़े कार्यरत हैं?",
      "answer": "बीकानेर संभाग के सबसे बड़े राजकीय डूंगर महाविद्यालय में आठ विवाहित जोड़े शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।"
    },
    {
      "question": "इनमें से कितने जोड़े एक ही विभाग में काम कर रहे हैं?",
      "answer": "आठ जोड़ों में से चार जोड़े एक ही विभाग में साथ बैठकर अपने शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्व निभाते हैं।"
    },
    {
      "question": "कौन-कौन से विभागों में पति-पत्नी दोनों एक साथ पदस्थापित हैं?",
      "answer": "भूगोल में एक जोड़ा, इतिहास में एक जोड़ा और समाजशास्त्र विभाग में दो अलग-अलग जोड़े एक साथ पदस्थापित हैं।"
    },
    {
      "question": "डूंगर कॉलेज के प्राचार्य कौन हैं और उनकी पत्नी किस पद पर हैं?",
      "answer": "प्राचार्य राजेंद्र पुरोहित प्राणीशास्त्र के प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी पत्नी अनिला पुरोहित कॉलेज के इतिहास विभाग में प्रोफेसर हैं।"
    },
    {
      "question": "भूगोल विभाग में कौन सा जोड़ा पिछले 18 वर्षों से साथ है?",
      "answer": "भूगोल विभाग में सह आचार्य डॉ. देवेश सहारण और सह आचार्य डॉ. श्वेता नेहरा विगत 18 वर्षों से वैवाहिक रिश्ते में साथ हैं।"
    },
    {
      "question": "समाजशास्त्र विभाग में हाल ही में किस नए जोड़े ने पदभार संभाला है?",
      "answer": "सहायक आचार्य डॉ. शेरसिंह कुड़ी और उनकी पत्नी डॉ. पूजा चौधरी ने करीब छह महीने पहले समाजशास्त्र विभाग में पदभार संभाला है।"
    }
  ],
  "inspiration": "घर और कार्यस्थल पर एक साथ रहते हुए सकारात्मक संबंध बनाए रखने वाले इन शिक्षकों के अनुभव आधुनिक जीवन के लिए उपयोगी सूत्र देते हैं।\n\n• संयम और धैर्य: किसी भी विवाद पर फौरन प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए क्योंकि कई जटिलताएं शांत रहने पर समय के साथ स्वयं समाप्त हो जाती हैं।\n• कामकाज का बंटवारा: जब दोनों जीवनसाथी नौकरी कर रहे हों तो घरेलू दायित्वों में बराबरी की भागीदारी पारिवारिक संतुलन बनाए रखने का सबसे सशक्त आधार है।\n• दायित्वों की स्पष्ट सीमा: घरेलू विवादों को कार्यस्थल पर न ले जाना और संस्थान की जिम्मेदारियों को स्वतंत्र रूप से निभाना पेशेवर सफलता सुनिश्चित करता है।\n• सीधा संवाद: मनमुटाव दूर करने का सबसे सरल और अचूक उपाय एक मेज पर बैठकर शांतिपूर्ण चर्चा करना है।"
}