बीकानेर के श्रीकोलायत में 23 वर्षीय विश्वजीत सिंह भाटी बने सरपंच, 2134 मतों से हासिल की ऐतिहासिक जीत बीकानेर के श्रीकोलायत में 23 साल के विश्वजीत सिंह भाटी ने 2134 मतों के अंतर से सरपंच पद का चुनाव जीत लिया है, जिससे 50 वर्षों बाद उनके परिवार को गांव का नेतृत्व मिला है। राजस्थान के बीकानेर जिले के श्रीकोलायत में ग्रामीण राजनीति की एक नई मिसाल सामने आई है, जहां 23 वर्ष की उम्र में विश्वजीत सिंह भाटी ने गांव की बागडोर अपने हाथों में संभाल ली है। हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में सरपंच पद के लिए कुल आठ उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे थे। इस कड़े मुकाबले में विश्वजीत सिंह भाटी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2134 वोटों के बड़े अंतर से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही करीब 50 साल के लंबे अंतराल के बाद इस परिवार को गांव की सरपंची की जिम्मेदारी वापस मिली है। अपनी इस उपलब्धि के बाद युवा सरपंच ने पूरे गांव के विकास और तस्वीर बदलने के लिए व्यापक योजनाएं तैयार की हैं। पारिवारिक संस्कार और जनसेवा की प्रेरणा विश्वजीत सिंह भाटी ने अपनी उच्च शिक्षा में बीए फाइनल तक की पढ़ाई पूरी की है। इतनी कम उम्र में सार्वजनिक जीवन में कदम रखने और समाजसेवा से जुड़ने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता भूप सिंह भाटी से मिली। उनके पिता भूप सिंह भाटी लंबे समय से ग्रामीण अंचल में विभिन्न सामाजिक कार्यों और जनता की सेवा में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनका पूरा परिवार निरंतर समाज कल्याण के कार्यों से जुड़ा हुआ है। विश्वजीत के परिवार में उनकी एक बड़ी बहन हैं। परिवार में समाजसेवा की इसी मजबूत पृष्ठभूमि और संस्कारों ने विश्वजीत को आमजन के बीच रहकर उनके सुख-दुख साझा करने और काम करने के लिए प्रेरित किया है। चुनाव से पहले निजी खर्चे से कराए जनकल्याणकारी काम औपचारिक रूप से किसी प्रशासनिक अथवा संवैधानिक पद पर आने से पहले भी विश्वजीत सिंह भाटी ने अपने निजी संसाधनों से गांव में कई बड़े विकास कार्य संपन्न करवाए थे। गांव की बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करते हुए उन्होंने अपने खर्चे से 700 रोड लाइटें लगवाईं और इनके संचालन के लिए 300 नए बिजली के खंभे खड़े करवाए। इतना ही नहीं, गांव के लगभग 400 जरूरतमंद लोगों को नए बिजली कनेक्शन दिलाने में भी सक्रिय सहयोग किया। गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए 21 जेसीबी मशीनों की मदद से एक वृहद सफाई अभियान चलवाया गया, जिससे ग्रामीण इलाकों से गंदगी साफ हुई। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय आस्था का सम्मान करते हुए 20 पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार और नवीनीकरण कार्य भी पूरा करवाया। कोलायत सरोवर की सफाई और बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर सरपंच बनने के बाद विश्वजीत सिंह भाटी ने क्षेत्र के लिए अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया है। उनकी सबसे प्रमुख प्राथमिकताओं में विश्व विख्यात कोलायत सरोवर की पूरी तरह से और सघन साफ-सफाई करवाना शामिल है, जिससे इसकी धार्मिक तथा ऐतिहासिक पवित्रता और सुंदरता बनी रहे। इसके अतिरिक्त ग्रामीण बालिकाओं की शिक्षा को सुरक्षित और सुगम बनाना भी उनकी कार्ययोजना का प्रमुख हिस्सा है। वर्तमान में गांव की बच्चियों को स्कूल जाने के लिए तीन से चार किलोमीटर तक पैदल चलकर जाना पड़ता है, जिससे उन्हें कड़ी धूप और मौसम की मार झेलनी पड़ती है। इस परेशानी को दूर करने के लिए विश्वजीत निजी बसों की व्यवस्था करवाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि छात्राएं बिना किसी असुविधा के नियमित स्कूल पहुंच सकें। उनका कहना है कि वे बिना किसी पद के भी जनता की सेवा करते आ रहे थे, लेकिन अब सरपंच का दायित्व मिलने के बाद क्षेत्र का सर्वांगीण विकास करना और समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना उनका मुख्य संकल्प है। इसका आप पर असर श्रीकोलायत में युवा नेतृत्व के आने से ग्रामीण बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक स्वच्छता और स्कूली छात्राओं के दैनिक आवागमन में प्रत्यक्ष सुधार होगा। • श्रीकोलायत में: स्थानीय ग्रामीणों को कोलायत सरोवर की व्यापक सफाई और 20 जीर्णोद्धार किए गए मंदिरों से बेहतर सांस्कृतिक वातावरण मिलेगा। गांव में 700 स्ट्रीट लाइटों और 300 खंभों से रात के समय रास्तों पर रोशनी और सुरक्षा बनी रहेगी। • स्कूली छात्राओं के लिए: तीन से चार किलोमीटर पैदल चलने वाली ग्रामीण बालिकाओं को अब निजी बसों की सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे छात्राओं के स्कूल आने-जाने का समय बचेगा और उनकी पढ़ाई में नियमितता बनी रहेगी। • बिजली और स्वच्छता: गांव के करीब 400 नए बिजली कनेक्शनों और 21 जेसीबी मशीनों के सफाई अभियान से दैनिक जीवन सुगम हुआ है। आगामी दिनों में पंचायत स्तर पर जनसमस्याओं के सीधे और त्वरित निवारण की उम्मीद बढ़ गई है। • भारत में: यह परिणाम देश भर के युवाओं को चुनावी राजनीति और ग्रामीण शासन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है। 23 वर्ष की आयु में मिली यह जीत दर्शाती है कि जमीनी समाजसेवा के आधार पर युवा पीढ़ी पारंपरिक नेतृत्व में नया बदलाव ला सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह चुनावी परिणाम जमीनी समाजसेवा, पारिवारिक साख और गांव में दशकों पुरानी राजनीतिक विरासत के दोबारा उभरने के कारण संभव हुआ। • चुनावी जीत का तात्कालिक कारण: आठ प्रत्याशियों के कड़े मुकाबले में विश्वजीत सिंह भाटी को 2134 मतों के विशाल अंतर से जीत मिली क्योंकि उन्होंने चुनाव से पहले ही निजी खर्चे से गांव में बिजली, मंदिर नवीनीकरण और सफाई के बड़े काम कराए थे। • पारिवारिक पृष्ठभूमि और साख: विश्वजीत के पिता भूप सिंह भाटी लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय जनसेवा कर रहे हैं, जिससे पूरे परिवार की गांव में गहरी प्रतिष्ठा बनी हुई थी। इसी सामाजिक पूंजी और पारिवारिक प्रेरणा ने मतदाताओं में उनके प्रति भारी विश्वास जगाया। • 50 साल बाद ऐतिहासिक वापसी: इस परिवार के पास करीब 50 वर्ष पहले गांव की सरपंची थी, जिसके बाद अब जाकर युवा पीढ़ी के जरिए यह प्रशासनिक दायित्व पुनः उनके पास लौटा है। आगे चलकर पंचायत के आधिकारिक फंड और योजनाओं के जरिए तालाब सफाई व परिवहन के वादों को धरातल पर उतारा जाएगा। सवाल-जवाब 1. श्रीकोलायत में सरपंच चुनाव किसने और कितने मतों से जीता? 23 वर्षीय विश्वजीत सिंह भाटी ने आठ उम्मीदवारों के बीच हुए चुनाव में 2134 मतों के अंतर से सरपंच पद का चुनाव जीता। 2. विश्वजीत सिंह भाटी के परिवार को कितने समय बाद सरपंची मिली है? विश्वजीत सिंह भाटी के परिवार को करीब 50 साल बाद गांव की सरपंची की जिम्मेदारी वापस मिली है। 3. विश्वजीत सिंह भाटी की शैक्षिक योग्यता क्या है? विश्वजीत सिंह भाटी ने अपनी पढ़ाई बीए फाइनल तक की है। 4. सरपंच बनने से पहले विश्वजीत ने गांव में कौन से मुख्य विकास कार्य करवाए थे? उन्होंने निजी खर्चे से 700 रोड लाइट, 300 खंभे, 400 बिजली कनेक्शन, 21 जेसीबी से सफाई और 20 मंदिरों का नवीनीकरण करवाया था। 5. सरपंच पद संभालने के बाद उनकी शीर्ष प्राथमिकताएं क्या हैं? उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में कोलायत सरोवर की पूरी सफाई और तीन-चार किलोमीटर दूर पढ़ने जाने वाली बालिकाओं के लिए निजी बसों की व्यवस्था शामिल है। 6. विश्वजीत सिंह भाटी को जनसेवा की प्रेरणा किससे मिली? उन्हें समाजसेवा की प्रेरणा अपने पिता भूप सिंह भाटी से मिली है, जो लंबे समय से सामाजिक कार्यों में जुटे हुए हैं। प्रेरणा और सबक 23 साल के विश्वजीत सिंह भाटी का सफर साबित करता है कि पद मिलने का इंतजार किए बिना की गई सच्ची जनसेवा ही युवाओं को बड़ा जनसमर्थन और नेतृत्व दिलाती है। • पद से पहले काम करके दिखाएं: विश्वजीत ने चुनाव लड़ने से पहले ही अपने खर्चे से 700 लाइटें लगवाईं और 21 जेसीबी से सफाई करवाई। किसी उपाधि या पद की प्रतीक्षा करने के बजाय पहले समाज के लिए ठोस काम करना ही असली विश्वसनीयता बनाता है। • पारिवारिक संस्कारों को आगे बढ़ाएं: अपने पिता भूप सिंह भाटी की जनसेवा की सीख को आत्मसात करते हुए उन्होंने कम उम्र में ही जनहित को अपना लक्ष्य बनाया। परिवार से मिली नेक सीख को समाज के भले के लिए उपयोग करना व्यक्ति को जिम्मेदारी का अहसास कराता है। • शिक्षा के साथ सामाजिक जवाबदेही: बीए फाइनल की पढ़ाई के दौरान उन्होंने केवल व्यक्तिगत करियर तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे गांव की भलाई की जिम्मेदारी उठाई। उच्च शिक्षा के साथ-साथ अपने परिवेश की समस्याओं के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। • अभावों के खिलाफ व्यावहारिक समाधान खोजें: गांव की बच्चियों को तीन से चार किलोमीटर पैदल जाते देख उन्होंने निजी बसों की व्यवस्था करने की पहल की। केवल समस्याओं की शिकायत करने के बजाय समाज के कमजोर वर्गों के लिए व्यावहारिक कदम उठाना ही सच्चा नेतृत्व है। https://trendkia.com/rajasthan/bikaner-ke-kolayat-men-23-varshiya-vishwajit-singh-bhati-bane-sarapncha-2134-maton-se-hasila-ki-aitihasika-jita-54316 TrendKia — Har trend, sabse pehle.