# बीकानेर की पुगल रोड पर सजीं मां दुर्गा की मनमोहक मूर्तियां, बालोतरा के कारीगरों को मिल रहे अच्छे दाम

> शारदीय नवरात्रि के आगमन से पहले बीकानेर में बालोतरा के मूर्तिकार 2 से 6 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं, जिनकी कीमत 3 हजार से 8 हजार रुपये तक तय की गई है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bikaner-ki-pugal-road-para-sajin-man-durga-ki-manamohaka-murtiyan-balotra-ke-karigaron-ko-mila-rahe-achchhe-dama-45924 · **Language:** Hindi
**Tags:** बीकानेर, नवरात्रि, दुर्गा प्रतिमा, बालोतरा, पुगल रोड, मूर्तिकार, राजस्थान

शारदीय नवरात्रि उत्सव की शुरुआत से ठीक पहले बीकानेर शहर में भक्तिमय और उल्लासपूर्ण माहौल साफ नजर आने लगा है। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव की तैयारियों के बीच दूरदराज के इलाकों से पहुंचे हुनरमंद मूर्तिकार दिन-रात जुगत लगाकर मां दुर्गा के विभिन्न रूपों को मिट्टी के जरिए साकार करने में जुटे हैं। शहर की पुगल रोड के किनारे इन दिनों मिट्टी की सोंधी महक फैली हुई है, जहां सड़क किनारे सजे अस्थायी शिविरों में देवी की भव्य और आकर्षक प्रतिमाएं अंतिम रूप ले रही हैं।

बाड़मेर जिले के बालोतरा क्षेत्र से आए यह पारंपरिक कारीगर पिछले कई सप्ताह से लगातार एकाग्रचित्त होकर इन मूर्तियों को गढ़ने, उन्हें तराशने और चटक प्राकृतिक रंगों से निखारने का काम कर रहे हैं। नवरात्रि के नौ दिवसीय पर्व के दौरान शहर के अनगिनत सार्वजनिक पूजा पंडालों तथा घरों में मां दुर्गा की विधिवत घटस्थापना की परंपरा है। इसी धार्मिक आवश्यकता के चलते इन कारीगरों के हाथों तैयार की गई मूर्तियां स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं।

## पीढ़ियों की कला परंपरा और सड़क किनारे कठिन साधना
पुगल रोड की खुली पटरियों पर डेरा डाले यह कलाकार पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण के पारंपरिक हुनर को संजोए हुए हैं। खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे बिताए जाने वाले कई हफ्ते इन कारीगरों की लगन, कड़े परिश्रम और अपनी कला के प्रति गहरे समर्पण को बयां करते हैं। परिवार सहित इस काम में जुटे कलाकार नारायण ने बताया कि वे बीते कई वर्षों से अपने पूरे कुनबे के साथ बीकानेर का रुख करते हैं और नवरात्रि के विशेष मौसम में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों का सृजन करते हैं।

परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर इस रचनात्मक प्रक्रिया में हाथ बंटाते हैं। कोई मिट्टी तैयार करने की मशक्कत करता है, तो कोई बांस की खपच्चियों से ढांचा तैयार करने में लगा रहता है। इस तरह पूरा परिवार मिलकर आस्था के इस महापर्व के लिए कलात्मक योगदान देता है।

## बांस, पुआल और चिकनी मिट्टी से 2 से 6 फीट तक का आकार
इन कलाकारों की कार्यशालाओं में तैयार की जा रही प्रतिमाओं की विविधता और बनावट देखते ही बनती है। यहां 2 फीट की छोटी प्रतिमाओं से लेकर 6 फीट तक की विशालकाय मूर्तियां भक्तों के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाजार में सबसे अधिक मांग मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी स्वरूप और सिंह पर सवार तेजस्वी रूपों की देखी जा रही है, जिन्हें श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा और भाव के साथ पसंद कर रहे हैं।

इन प्रतिमाओं के निर्माण में चाक-चिकनी मिट्टी के साथ बांस की खपच्चियों और धान के पुआल का बेहद नफासत भरा उपयोग किया जाता है। पुआल और बांस का आंतरिक ढांचा मूर्तियों को जरूरी मजबूती प्रदान करता है, जबकि ऊपर से लगाई जाने वाली चिकनी मिट्टी की परत चेहरे के भावों और आभूषणों को असाधारण सुंदरता देती है। अंतिम चरण में इन पर किए जाने वाले आकर्षक रंग मूर्तियों को जीवंत बना देते हैं।

## मेहनत का मिला सम्मान, 3 हजार से 8 हजार रुपये तक तय हुए दाम
कारीगरों के इस अथक श्रम का उचित प्रतिफल भी उन्हें इस बार बेहतर आमदनी के रूप में मिलता दिखाई दे रहा है। प्रतिमाओं के आकार, ऊंचाई और उनकी बारीक नक्काशी के आधार पर इनकी कीमतें 3 हजार रुपये से लेकर 8 हजार रुपये तक तय की गई हैं। शहरवासी इन कारीगरों के हुनर और कठिन परिश्रम का सम्मान करते हुए पंडालों और घरेलू पूजा के लिए उत्साहपूर्वक मूर्तियों की खरीदारी कर रहे हैं। आकर्षक रंगों से सजी माता की इन मनमोहक प्रतिमाओं की तेज बिक्री से कलाकारों के चेहरों पर खुशी है और उनका यह मौसमी व्यवसाय आर्थिक रूप से काफी संबल देने वाला साबित हो रहा है।

## इसका आप पर असर
नवरात्रि पर घर या सार्वजनिक पंडालों में दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने वाले श्रद्धालुओं और आयोजकों के लिए यह खबर सीधे तौर पर उपयोगी है।

- **बीकानेर में:** स्थानीय निवासी और पूजा समितियां पुगल रोड से सीधे कारीगरों से 2 से 6 फीट की प्रतिमाएं खरीद सकते हैं। इससे बिचौलियों के बिना 3 हजार से 8 हजार रुपये की उचित कीमत पर मूर्तियां उपलब्ध हो रही हैं।
- **पारंपरिक कारीगरों के लिए:** हस्तनिर्मित मूर्तियों की मांग बढ़ने से प्रवासी मूर्तिकारों की आजीविका को सीधा सहारा मिला है। इस मौसमी बिक्री से उन्हें कई हफ्तों की कड़ी मेहनत का पूरा आर्थिक लाभ मिल पा रहा है।
- **श्रद्धालुओं के लिए:** सिंह वाहिनी और महिषासुर मर्दिनी जैसे स्वरूपों के विभिन्न आकारों में उपलब्ध होने से भक्त अपनी जगह और बजट के अनुसार चयन कर सकते हैं। समय रहते सीधी खरीदारी करने से अंतिम समय की भागदौड़ से बचा जा सकता है।
- **पर्यावरण और परंपरा:** बांस, पुआल और चिकनी मिट्टी से बनी इन पारंपरिक मूर्तियों को चुनना स्थानीय कला और प्रकृति दोनों के अनुकूल रहता है। भक्त कृत्रिम सामग्रियों के बजाय इन पारंपरिक प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
शारदीय नवरात्रि से पहले बीकानेर में बाड़मेर के कारीगरों का जुटना और मूर्तियों का निर्माण एक स्थापित मौसमी और धार्मिक चक्र का हिस्सा है।

- **धार्मिक उत्सव की मांग:** नवरात्रि के नौ दिनों में घरों और सार्वजनिक पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना अनिवार्य परंपरा है। इस व्यापक मांग की पूर्ति के लिए मूर्तियों का पहले से निर्माण जरूरी होता है।
- **पारंपरिक आजीविका का चक्र:** बालोतरा के कारीगर कई पीढ़ियों से इस शिल्पकला से जुड़े हैं और हर साल सीजन में बीकानेर आकर काम करते हैं। स्थानीय स्तर पर बाजार मिलने के कारण वे परिवार सहित अस्थायी रूप से यहां डेरा डालते हैं।
- **बारीक और समयसाध्य प्रक्रिया:** मिट्टी, पुआल और बांस से मूर्तियां तैयार करने, सुखाने और रंगने में हफ्तों का समय लगता है। इसलिए कारीगर पर्व शुरू होने से काफी पहले अपनी कार्यशालाएं स्थापित कर लेते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. बीकानेर में मां दुर्गा की मूर्तियां कहां तैयार की जा रही हैं?
बीकानेर की पुगल रोड के किनारे सड़क किनारे लगे शिविरों में मां दुर्गा की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।

### 2. यह मूर्तिकार किस क्षेत्र से आए हैं?
यह मूर्तिकार बाड़मेर जिले के बालोतरा क्षेत्र से अपने परिवारों के साथ बीकानेर पहुंचे हैं।

### 3. मूर्तियों की ऊंचाई और आकार क्या है?
इन मूर्तियों की ऊंचाई 2 फीट से लेकर 6 फीट तक है।

### 4. दुर्गा प्रतिमाओं की कीमत क्या रखी गई है?
मूर्तियों के आकार और कारीगरी के अनुसार इनके दाम 3 हजार रुपये से लेकर 8 हजार रुपये तक तय किए गए हैं।

### 5. किन स्वरूपों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है?
महिषासुर मर्दिनी और मां दुर्गा के सिंह पर सवार स्वरूपों की मांग श्रद्धालुओं के बीच सबसे अधिक है।

### 6. इन मूर्तियों को बनाने में किन सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है?
मूर्तियों के निर्माण में बांस, पुआल और चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है ताकि वे मजबूत और सुंदर बन सकें।

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