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  "title": "बीकानेर महापौर चुनाव: कांग्रेस ने सुलझाया बागी का संकट, अब बीजेपी से होगी सीधी टक्कर",
  "summary": "बीकानेर नगर निगम चुनाव में बागी उम्मीदवार नवरतन डागा द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस ने राहत की सांस ली है, जिससे अब मेयर पद के लिए बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला तय हो गया है।",
  "content": "बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव में नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन कांग्रेस पार्टी के लिए बहुत बड़ी राहत की खबर आई है। पार्टी से बगावत करके निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने वाले पार्षद नवरतन डागा ने आखिरकार अपना पर्चा वापस ले लिया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद अब बीकानेर महापौर पद के लिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला होना तय हो गया है। राजस्थान के कुल 10 नगर निगमों में से बीकानेर एकमात्र ऐसा नगर निगम है जहां कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला है। इसके बावजूद, नामांकन के दिन कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी अनिल कल्ला के सामने अपनी ही पार्टी के पार्षद नवरतन डागा के खड़े होने से पार्टी नेतृत्व में खलबली मच गई थी। कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस की यह आंतरिक गुटबाजी महापौर चुनाव का पूरा खेल बिगाड़ सकती है, लेकिन अब डागा के हटने से इस खतरे की आशंका बेहद कम हो गई है। हालांकि, बीजेपी अब भी पूरे आत्मविश्वास के साथ यह दावा कर रही है कि नगर निगम का बोर्ड वही बनाएगी।\n\n \n\nबागी का मान-मनौव्वल और पार्टी के भीतर का घटनाक्रम\n\nबीकानेर में नवरतन डागा द्वारा बागी तेवर दिखाते हुए नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद ही कांग्रेस पार्टी हरकत में आ गई थी। पार्टी नेतृत्व ने अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखने और डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशें तेज कर दी थीं। शुरुआत में नवरतन डागा अपने फैसले पर अड़े रहे और मानने को तैयार नहीं हुए। आखिरकार, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से आमने-सामने की मुलाकात और लंबी बातचीत के बाद डागा ने अपना नामांकन वापस लेने पर सहमति जताई। अपना पर्चा वापस लेने के बाद डागा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने केवल अपनी बात को लोकतांत्रिक तरीके से सबके सामने रखने के लिए नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस के एक सच्चे सिपाही हैं और जब पार्टी के सभी लोगों ने मिलकर अनिल कल्ला को अपना उम्मीदवार चुना है, तो वे भी इस फैसले के साथ खड़े हैं। डागा ने कहा कि उनकी लड़ाई केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर थी, जिसकी सराहना खुद प्रदेश अध्यक्ष ने भी की है। आपको बता दें कि कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी अनिल कल्ला, राजस्थान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के सगे भतीजे हैं।\n\n \n\nपरिवारवाद के आरोपों पर पूर्व मंत्री का पलटवार\n\nबागी प्रत्याशी के मान जाने पर राहत महसूस कर रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने नवरतन डागा के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि डागा ने पार्टी की एकजुटता और हित में अपना नामांकन वापस लिया है, जिसके लिए पूरी पार्टी उनकी आभारी है। वहीं, अनिल कल्ला को टिकट दिए जाने पर लग रहे परिवारवाद के आरोपों पर डॉ. बीडी कल्ला ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वे पिछले 50 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं और आज तक उनके अपने घर से कोई भी सदस्य राजनीतिक रूप से आगे नहीं आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परिवार का कोई योग्य सदस्य अपनी मेहनत से चुनाव लड़ता है, तो इसे परिवारवाद कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विरोधी दल में भी ऐसे कई परिवार हैं जिनके कई सदस्य चुनाव लड़ते हैं। इस बीच, कांग्रेस के देहात जिला अध्यक्ष बिसनाराम सिहाग ने भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पूरी कांग्रेस पार्टी इस समय पूरी तरह एकजुट है और नगर निगम चुनाव में पार्टी का मेयर कम से कम 50 मतों के साथ शानदार जीत दर्ज करेगा।\n\n \n\nबीकानेर का चुनावी गणित और सीटों का समीकरण\n\nबागी उम्मीदवार के मैदान से हटने के बाद अब बीकानेर मेयर चुनाव की जंग सीधे तौर पर कांग्रेस के अनिल कल्ला और बीजेपी के उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह शेखावत के बीच सिमट गई है। हालांकि, बीजेपी भी शांत नहीं बैठी है और वह कांग्रेस के खेमे में सेंध लगाने के लिए हर संभव राजनीतिक रणनीति अपना रही है। बीजेपी नेताओं को पूरा भरोसा है कि वे निर्दलीय पार्षदों की मदद से अपना बोर्ड बनाने में सफल रहेंगे। अगर बीकानेर नगर निगम के सभी 80 वार्डों के गणित पर नजर डालें, तो कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत मौजूद है। कांग्रेस ने यहां कुल 42 सीटों पर जीत हासिल की है, जो बहुमत के आंकड़े से एक अधिक है। दूसरी तरफ, बीजेपी के पास केवल 27 सीटें हैं। इन दोनों के अलावा सदन में 10 निर्दलीय पार्षद और 1 पार्षद आरएलपी का जीतकर आया है। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास अपने 42 पार्षदों के अलावा 5 निर्दलीय पार्षदों का भी पूरा समर्थन हासिल है, जिससे उनकी स्थिति बेहद मजबूत हो जाती है।\n\n \n\nबीजेपी की रणनीति और राजस्थान का सियासी माहौल\n\nकम सीटें होने के बावजूद बीजेपी क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के दम पर जीत हासिल करने का दावा लगातार कर रही है। इस सियासी घमासान का अंतिम फैसला आगामी 21 सितंबर को होगा, जब मेयर पद के लिए मतदान कराया जाएगा। उसी दिन यह साफ हो जाएगा कि बीकानेर का नया महापौर कौन बनेगा। क्या कांग्रेस अपने इस इकलौते गढ़ को बहुमत के दम पर बचाने में कामयाब रहेगी, या फिर बीजेपी अपनी रणनीतिक तोड़फोड़ की राजनीति से कांग्रेस के मुंह से जीत का निवाला छीन लेगी। उल्लेखनीय है कि बीकानेर नगर निगम पर पिछले 10 वर्षों से बीजेपी का ही कब्जा रहा है, इसलिए वह इस गढ़ को आसानी से नहीं छोड़ना चाहती। राजस्थान के कुल 309 स्थानीय निकायों में से बीजेपी ने अब तक 25 पर अपना कब्जा जमा लिया है। भीलवाड़ा और भरतपुर नगर निगम के महापौर पदों के साथ-साथ बीजेपी ने राज्य के 23 अन्य निकायों में निर्विरोध जीत हासिल की है। विशेष रूप से, सीएम भजनलाल के गृह जिले भरतपुर और उसके पास के डीग जिले के सभी निकायों में बीजेपी ने एकतरफा जीत दर्ज की है, जहां सभी निकाय प्रमुख निर्विरोध चुने गए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस चुनावी घटनाक्रम का बीकानेर के नागरिकों और राजस्थान की राजनीति पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• स्थानीय प्रशासन पर असर: बीकानेर को जल्द ही एक नया महापौर मिलेगा जो शहर के रुके हुए विकास कार्यों को गति दे सकेगा। इससे स्थानीय बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।\n\n• बीकानेर में राजनीतिक स्थिरता: बागी उम्मीदवार के हटने से कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह शांत हो गई है। यह स्थिति बीकानेर नगर निगम में एक स्थिर बोर्ड के गठन की संभावना को बढ़ाती है।\n\n• राजस्थान में कांग्रेस का वजूद: राज्य के 10 निगमों में से केवल बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत मिला है। यहाँ की जीत कांग्रेस के राज्यव्यापी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाएगी, जबकि हार से पार्टी को भारी झटका लगेगा।\n\n• निर्दलीय पार्षदों की बढ़ती अहमियत: सदन में मौजूद 10 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों ही पार्टियां उनका समर्थन हासिल करने के लिए उनके क्षेत्रों में अधिक विकास के वादे कर सकती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक संकट कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण को लेकर उपजे असंतोष और स्थानीय गुटबाजी के कारण पैदा हुआ था जिसे बाद में शीर्ष स्तर के हस्तक्षेप से सुलझाया गया।\n\n• टिकट वितरण पर नाराजगी: पूर्व कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला को टिकट दिए जाने से पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और पार्षद नवरतन डागा नाराज थे। उन्होंने इसे परिवारवाद का रूप मानकर विरोध दर्ज कराने के लिए निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया था।\n\n• शीर्ष नेतृत्व का सीधा हस्तक्षेप: कांग्रेस के पास बहुमत का आंकड़ा (42 सीटें) बहुत ही नाजुक स्तर पर था। किसी भी बगावत से महापौर की सीट हाथ से जा सकती थी, जिसके चलते कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को व्यक्तिगत रूप से दखल देकर डागा को मनाना पड़ा।\n\n• बीजेपी का आक्रामक रुख: बीजेपी पिछले 10 सालों से बीकानेर नगर निगम पर राज कर रही है और उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। अपनी 27 सीटों के साथ वह निर्दलीयों और क्रॉस वोटिंग के जरिए कांग्रेस के मामूली बहुमत को तोड़ने की पूरी कोशिश कर रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बीकानेर नगर निगम महापौर चुनाव के लिए मतदान कब होगा?\nबीकानेर नगर निगम महापौर पद के लिए मतदान आगामी 21 सितंबर को होना निर्धारित किया गया है।\n\n2. कांग्रेस और बीजेपी की तरफ से महापौर पद के उम्मीदवार कौन हैं?\nकांग्रेस की तरफ से अनिल कल्ला और बीजेपी की तरफ से सुरेंद्र सिंह शेखावत महापौर पद के मुख्य उम्मीदवार हैं।\n\n3. नवरतन डागा ने अपना नामांकन क्यों वापस ले लिया?\nकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात के बाद नवरतन डागा ने अपनी नाराजगी दूर कर पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में नामांकन वापस लिया।\n\n4. बीकानेर नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा क्या है और किस पार्टी के पास कितनी सीटें हैं?\nकुल 80 वार्डों वाले इस निगम में बहुमत का आंकड़ा 41 है। कांग्रेस के पास 42 सीटें, बीजेपी के पास 27 सीटें, निर्दलीयों के पास 10 सीटें और RLP के पास 1 सीट है।\n\n5. बीकानेर नगर निगम पर पिछले कितने वर्षों से बीजेपी का कब्जा रहा है?\nबीकानेर नगर निगम पर पिछले 10 वर्षों से लगातार बीजेपी का शासन रहा है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-18",
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