बीकानेर में 8.50 करोड़ रुपये से आधुनिक ई-बस डिपो तैयार, 75 गाड़ियों की क्षमता और 18 चार्जिंग पॉइंट स्थापित बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के सामने 5 बीघा में 8.50 करोड़ रुपये की लागत से नया ई-बस डिपो बनाया गया है। यहां एक साथ 75 इलेक्ट्रिक बसें खड़ी हो सकेंगी और 18 गाड़ियों को एक साथ चार्ज किया जा सकेगा। शहरी परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने की कवायद में राजस्थान के बीकानेर शहर ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। पेट्रोल और डीजल पर चलने वाले पारंपरिक वाहनों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से शहर में इलेक्ट्रिक बसों के बड़े बेड़े के संचालन की जमीन तैयार हो चुकी है। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के ठीक सामने करीब 5 बीघा भूभाग पर एक सर्वसुविधायुक्त ई-बस डिपो का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। लगभग 8 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से विकसित इस परिसर को आगामी समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि सार्वजनिक यातायात को सुचारू और पर्यावरण हितैषी बनाया जा सके। इस नवनिर्मित डिपो में एक साथ 75 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध रखने के उद्देश्य से परिसर में अलग-अलग चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं, जिनकी मदद से एक ही समय में 18 बसों को एक साथ चार्ज किया जा सकता है। डिपो से जुड़े तकनीकी कर्मी लक्ष्मण सिंह के अनुसार, पहले चरण में यहां 9 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इन बसों की बैटरी को पूरी तरह चार्ज होने में करीब दो से ढाई घंटे का वक्त लगता है। फुल चार्ज होने के बाद प्रत्येक बस 200 से 250 किलोमीटर तक का सफर आसानी से तय कर सकती है। आगे चलकर इस बेड़े में 11 मीटर लंबी बड़ी बसें भी जोड़ी जाएंगी, जिससे सार्वजनिक आवागमन का नेटवर्क और मजबूत होगा। तकनीकी वर्कशॉप, वाशिंग लाइन और जरूरी बुनियादी ढांचा करीब 5 बीघा क्षेत्र में फैले इस आधुनिक डिपो परिसर को दैनिक संचालन की हर जरूरत के अनुरूप ढाला गया है। परिसर में सभी 75 बसों के व्यवस्थित खड़े होने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं, जिससे आवाजाही में रुकावट न हो। इसके साथ ही एक प्रशासनिक भवन और एक बड़ा तकनीकी वर्कशॉप भी बनाया गया है। वर्कशॉप के भीतर बसों की नियमित तकनीकी जांच, मेंटेनेंस और खराबी दूर करने के सारे साधन मौजूद रहेंगे। वाहनों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए अलग से वाशिंग लाइन तैयार की गई है, जबकि पानी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वाटर पंप और बड़ी पानी की टंकी स्थापित की गई है। अग्निशमन सुरक्षा के लिए हर चार बस के बीच फायर लेन इलेक्ट्रिक वाहनों में उच्च क्षमता की बैटरी और निरंतर चार्जिंग प्रक्रिया शामिल होने के कारण सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। किसी भी अप्रिय घटना या आग लगने के खतरे से निपटने के लिए डिपो में हर चार बसों के बीच एक समर्पित फायर लेन बनाई गई है। यह खाली रास्ता आपातकालीन स्थिति में दमकल गाड़ियों और राहत दलों को बिना किसी बाधा के तुरंत घटनास्थल तक पहुंचने की सुविधा देता है। ऐसी पुख्ता व्यवस्था से डिपो में खड़े महंगे वाहनों और चार्जिंग उपकरणों की सुरक्षा चौबीसों घंटे सुनिश्चित रहेगी। डिपो में बसों का पहुंचना शुरू, अब तक 11 गाड़ियां पहुंचीं डिपो का ढांचा पूरा होते ही नई गाड़ियों का आगमन भी गति पकड़ चुका है। लक्ष्मण सिंह ने स्पष्ट किया कि डिपो में सबसे पहले 5 नई इलेक्ट्रिक बसें लाई गई थीं, जिसके बाद 6 अन्य बसों की एक और खेप यहां पहुंच चुकी है। इस तरह वर्तमान समय तक कुल 11 बसें डिपो परिसर में आ चुकी हैं। शेष बसें भी निर्धारित कार्यक्रम के तहत जल्द यहां पहुंचेंगी। 75 बसों को संभालने की पूरी क्षमता रखने वाला यह केंद्र आने वाले दिनों में बीकानेर की आधुनिक और हरित यातायात व्यवस्था की मुख्य धुरी बनने जा रहा है। इसका आप पर असर इस आधुनिक ई-बस डिपो के शुरू होने से बीकानेर के यात्रियों को प्रदूषण मुक्त और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा। • बीकानेर में: शहर के मुख्य मार्गों पर जल्द ही 9 मीटर वाली शांत और वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती दिखेंगी। इससे पेट्रोल-डीजल के धुएं से राहत मिलेगी और दैनिक यात्रियों को किफायती बस सेवा मिलेगी। • भारत में: टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को जमीन पर उतारने का यह मजबूत उदाहरण है। इससे देश भर के छोटे शहरों में डीजल आधारित बसों को तेजी से बदलने की गति बढ़ेगी। • यात्रियों के लिए सुविधा: एक बार चार्ज होने पर 200 से 250 किमी चलने की क्षमता के कारण शहर के भीतर रूटों पर फेरों में निरंतरता रहेगी। दो से ढाई घंटे के चार्जिंग समय की वजह से दिन भर बसों का संचालन बिना रुकावट संभव होगा। • पर्यावरण और स्वास्थ्य: डीजल बसों के मुकाबले शून्य टेलपाइप उत्सर्जन होने से शहर की हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। स्थानीय स्तर पर वायु प्रदूषण कम होने से सांस संबंधी परेशानियों में कमी आएगी। ऐसा क्यों हुआ बीकानेर में इलेक्ट्रिक बसों के लिए समर्पित बुनियादी ढांचा तैयार करने की योजना बढ़ती प्रदूषण चिंताओं और आधुनिक सार्वजनिक यातायात की जरूरत के तहत पूरी की गई है। • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बुनियादी जरूरत: पारंपरिक डीजल डिपो की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों को उच्च क्षमता वाले चार्जिंग ग्रिड और विशेष रखरखाव सेटअप की आवश्यकता होती है। इसी वजह से 8.50 करोड़ रुपये का निवेश कर 18 चार्जिंग पॉइंट और वर्कशॉप वाला अलग डिपो तैयार किया गया। • चरणबद्ध फ्लीट विस्तार योजना: 75 बसों की क्षमता इसलिए तय की गई ताकि भविष्य में आने वाली 11 मीटर लंबी बसों को भी आसानी से समायोजित किया जा सके। बुनियादी ढांचे को पहले तैयार करके बसों की आपूर्ति को सुगम बनाया जा रहा है। • सख्त सुरक्षा मानक: बैटरी चालित बड़ी गाड़ियों में आग लगने के संभावित जोखिम को देखते हुए हर चार बस के बाद समर्पित फायर लेन बनाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त होने के बाद ही डिपो में अब तक 11 बसों का प्रवेश कराया गया है। सवाल-जवाब 1. बीकानेर में नया ई-बस डिपो कहां बनाया गया है और इसकी लागत कितनी है? यह ई-बस डिपो महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के सामने करीब 5 बीघा जमीन पर 8 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से बनाया गया है। 2. इस डिपो में कुल कितनी बसें खड़ी हो सकेंगी और कितने चार्जिंग पॉइंट हैं? परिसर में 75 बसों को खड़ा करने की क्षमता है और यहां एक समय में 18 बसों को चार्ज करने की व्यवस्था की गई है। 3. डिपो में चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें कितने समय में चार्ज होती हैं और कितनी दूरी तय करती हैं? शुरुआत में चलने वाली 9 मीटर लंबी बसें 2 से 2.5 घंटे में पूरी चार्ज हो जाती हैं और एक चार्ज में 200 से 250 किलोमीटर तक चलती हैं। 4. डिपो में सुरक्षा के लिए क्या विशेष इंतजाम किए गए हैं? आपात स्थिति में अग्निशमन और राहत कार्यों की सुविधा के लिए हर चार बसों के बीच एक समर्पित फायर लेन बनाई गई है। 5. वर्तमान में डिपो में कितनी इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं? शुरुआत में 5 बसें आई थीं और बाद में 6 और बसें पहुंचने से अब तक कुल 11 बसें डिपो में आ चुकी हैं। 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