# बीकानेर में आधुनिक बागवानी को बढ़ावा, प्लास्टिक मल्चिंग लगाने पर किसानों को मिलेगा 50 फीसदी अनुदान

> राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत बीकानेर जिले में किसानों को प्लास्टिक मल्चिंग अपनाने पर प्रति हेक्टेयर अधिकतम 20 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इच्छुक किसान राज किसान पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bikaner-men-adhunika-bagavani-ko-barhava-plastika-malchinga-lagane-para-kisanon-ko-milega-50-phisadi-anudana-38244 · **Language:** Hindi
**Tags:** बीकानेर, प्लास्टिक मल्चिंग, कृषि अनुदान, राज किसान पोर्टल, उद्यानिकी, राष्ट्रीय बागवानी मिशन

राजस्थान के बीकानेर जिले में संरक्षित खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को गति देने के लिए एक अहम पहल शुरू की गई है। जिले के उद्यानिकी किसानों को खेतों में प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल करने पर कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इस विशेष सरकारी पहल का मुख्य मकसद खेतों में अनावश्यक खरपतवार की रोकथाम करना, सीमित सिंचाई जल का अत्यधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित करना और बागवानी फसलों की समग्र पैदावार व गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। बीकानेर जिले के लिए उद्यान विभाग ने कुल 70 हेक्टेयर क्षेत्र में इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने का प्रशासनिक लक्ष्य निर्धारित किया है।

## राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत प्रति हेक्टेयर सहायता का गणित
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत संरक्षित खेती के विस्तार के लिए प्लास्टिक मल्च के प्रयोग को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के प्रावधानों के तहत किसानों को प्लास्टिक मल्च शीट की कुल लागत का 50 प्रतिशत वित्तीय सहयोग मिलेगा, जो अधिकतम 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक सीमित रहेगा। योजना नियमों के मुताबिक एक व्यक्तिगत किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए प्रोरेटा आधार पर यह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसानों के साथ-साथ मध्यम जोत वाले काश्तकार भी आधुनिक तकनीक अपनाने में सक्षम हो सकेंगे।

## अनुबंधित फर्मों से खरीद और लागत के मानक नियम
योजना के अंतर्गत आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को उद्यान विभाग द्वारा पहले से सूचीबद्ध एवं अनुबंधित फर्मों से ही निर्धारित गुणवत्ता वाली प्लास्टिक मल्च शीट की खरीद करनी होगी। प्रति हेक्टेयर प्रयुक्त मल्च शीट की गणना 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की आधार लागत या अनुबंधित फर्म द्वारा तय की गई वास्तविक दर, दोनों में से जो भी कम होगी, उसके आधार पर करके 50 प्रतिशत की अनुदान राशि जारी की जाएगी। इसके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मल्च शीट की इकाई लागत में 15 प्रतिशत की अतिरिक्त सीमा भी निर्धारित की गई है, ताकि स्थानीय काश्तकारों को उनके परिवेश के अनुसार समुचित लाभ मिल सके।

## बीकानेर जिले में 70 हेक्टेयर का लक्ष्य और श्रेणीवार आवंटन
उद्यान अनुसंधान एटीसी के उपनिदेशक प्रेमाराम ने विस्तृत ब्योरा देते हुए स्पष्ट किया कि बीकानेर जिले में कुल 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक लागू करने का लक्ष्य तय किया गया है। सामाजिक संतुलन और समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए इस लक्ष्य को श्रेणियों में बांटा गया है, जिसके अंतर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्र सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए तथा 20 हेक्टेयर क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए आरक्षित रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस तकनीक के व्यावहारिक प्रयोग से मिट्टी में लंबे समय तक नमी सुरक्षित रहती है, जिससे शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाकों में सिंचाई जल की भारी बचत होती है। साथ ही फसल पर धूप और कीटों के सीधे दुष्प्रभाव में कमी आने से अंतिम उत्पाद का बाजार मूल्य भी सुधरता है।

## नए आवेदकों को प्राथमिकता और पात्रता की शर्तें
विभाग ने लाभ वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पात्रता के कड़े मानदंड तय किए हैं। मुकेश गहलोत ने बताया कि योजना का आवंटन करते समय ऐसे काश्तकारों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पहले कभी इस अनुदान का लाभ नहीं उठाया है। दूसरी ओर, जिन किसानों ने वर्ष 2025-26 के दौरान पहले ही इस योजना के तहत आर्थिक लाभ प्राप्त कर लिया है, वे मौजूदा चरण में आवेदन के पात्र नहीं माने जाएंगे। विभाग की स्पष्ट नीति अधिक से अधिक नए किसानों को इस तकनीकी दायरे में जोड़ने की है, ताकि जिले के व्यापक क्षेत्र में उद्यानिकी का आधुनिकीकरण किया जा सके।

## राज किसान पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
योजना से जुड़ने के इच्छुक सभी पात्र किसान राज्य सरकार के आधिकारिक राज किसान पोर्टल के माध्यम से अपना ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। उद्यान विभाग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाते हुए ऑनलाइन पत्रावलियां आमंत्रित की हैं। किसानों को परामर्श दिया गया है कि वे आवेदन सबमिट करने से पहले अपनी भूमि के आवश्यक दस्तावेज, बैंक विवरण और पात्रता शर्तों की विधिवत जांच कर लें। आवेदन से संबंधित किसी भी तकनीकी कठिनाई या मार्गदर्शन के लिए किसान अपने संबंधित क्षेत्र के सहायक कृषि अधिकारी अथवा स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक उद्यान से सीधे संपर्क कर जानकारी जुटा सकते हैं।

## इसका आप पर असर
बीकानेर जिले के बागवानी किसानों के लिए इस योजना से खेती की शुरुआती लागत कम होगी और पानी की भारी बचत संभव होगी।

- **लागत में कमी:** किसानों को मल्च शीट पर प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये तक की सीधी छूट मिलेगी। इससे प्रति हेक्टेयर लगने वाला 40 हजार रुपये तक का खर्च घटकर आधा रह जाएगा।
- **पानी और मजदूरी की बचत:** खेतों में मल्चिंग शीट बिछाने से खरपतवार नहीं उगेगी और मिट्टी में नमी बरकरार रहेगी। परिणामस्वरूप बार-बार निराई-गुड़ाई कराने की मजदूरी और अतिरिक्त सिंचाई का खर्च बचेगा।
- **आवेदन की सुविधा:** पात्र किसान घर बैठे या ई-मित्र के जरिए राज किसान पोर्टल पर अपना आवेदन दाखिल कर सकते हैं। जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद विभाग स्वीकृत फाइलों पर सब्सिडी जारी करेगा।
- **बीकानेर में:** जिले के कुल 70 हेक्टेयर रकबे के किसानों को सीधे वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 50 हेक्टेयर और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 20 हेक्टेयर का कोटा आरक्षित किया गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
बीकानेर के शुष्क परिवेश में सीमित जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन और बागवानी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह पहल लाई गई है।

- **जल संरक्षण की आवश्यकता:** रेगिस्तानी और शुष्क क्षेत्रों में तेज वाष्पीकरण के कारण मिट्टी की नमी तेजी से खत्म होती है। प्लास्टिक मल्चिंग मिट्टी की ऊपरी परत को ढंककर वाष्पीकरण को रोकती है और पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है।
- **खरपतवार नियंत्रण का दबाव:** खुली फसलों में खरपतवार उगने से मुख्य पौधे के पोषक तत्वों की हानि होती है और निराई की लागत बढ़ती है। मल्च शीट सूरज की रोशनी को रोककर खरपतवार के बीजों को पनपने से रोक देती है।
- **योजना की निरंतरता:** राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए यह सहायता प्रदान की जा रही है। पूर्व वर्षों में तकनीक अपनाने वाले किसानों के सकारात्मक अनुभवों के बाद अब नए किसानों तक इसे पहुंचाने का फैसला लिया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. बीकानेर में प्लास्टिक मल्चिंग पर कितनी सब्सिडी मिल रही है?
किसानों को लागत का 50 प्रतिशत, जो अधिकतम 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक है, अनुदान के रूप में दिया जाएगा।

### 2. एक किसान अधिकतम कितने क्षेत्र के लिए इस योजना का लाभ ले सकता है?
एक किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए प्रोरेटा आधार पर योजना का लाभ उठा सकता है।

### 3. बीकानेर जिले में कुल कितने हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है?
जिले में कुल 70 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 50 हेक्टेयर सामान्य और 20 हेक्टेयर अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए है।

### 4. क्या वर्ष 2025-26 में लाभ ले चुके किसान दोबारा आवेदन कर सकते हैं?
नहीं, जिन किसानों ने वर्ष 2025-26 में इसका लाभ लिया है वे इस बार पात्र नहीं होंगे, नए आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

### 5. इस योजना के लिए आवेदन कहां और कैसे किया जा सकता है?
पात्र किसान राज किसान पोर्टल के माध्यम से अपना ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।

### 6. मल्च शीट कहां से खरीदना अनिवार्य है?
किसानों को उद्यान विभाग द्वारा अनुबंधित फर्मों से ही निर्धारित प्लास्टिक मल्च शीट खरीदनी होगी।

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