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  "title": "भाजपा की जयपुर नगर निगम चुनाव में बड़ी जीत, लेकिन महापौर पद की प्रबल दावेदार ज्योति खंडेलवाल को वार्ड 110 में मिली शिकस्त",
  "summary": "जयपुर नगर निगम चुनावों में भाजपा बहुमत की ओर बढ़ रही है, लेकिन महापौर पद की प्रमुख दावेदार मानी जा रही ज्योति खंडेलवाल वार्ड 110 से चुनाव हार गई हैं।",
  "content": "जयपुर नगर निगम चुनावों में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ अपना बोर्ड बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। हालांकि, इस बड़ी चुनावी सफलता के बीच पार्टी को एक अप्रत्याशित और बड़ा झटका लगा है। वार्ड नंबर 110 से भाजपा की प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल चुनाव हार गई हैं। उन्हें जयपुर नगर निगम के महापौर पद के लिए सबसे मजबूत और संभावित उम्मीदवारों में से एक माना जा रहा था। इस अप्रत्याशित हार के बाद मेयर पद की रेस से उनका नाम बाहर हो गया है, जिससे उनके समर्थकों में भारी मायूसी का माहौल देखा जा रहा है।\n\n \n\nज्योति खंडेलवाल का राजनीतिक सफर और अनुभव\n\nज्योति खंडेलवाल जयपुर की राजनीति में एक बेहद सक्रिय और जाना-पहचाना चेहरा रही हैं। वह साल 2009 से 2014 तक कांग्रेस की तरफ से जयपुर की महापौर रह चुकी हैं। साल 2009 के निगम चुनाव में उन्होंने सीधे मुकाबले में भाजपा की सुमन शर्मा को शिकस्त दी थी और जयपुर की पहली महिला महापौर बनने का गौरव हासिल किया था। इसके बाद, साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें जयपुर संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बाद, अक्टूबर 2023 में उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा की सदस्यता ले लें थी। चालू नगर निगम चुनावों में भाजपा ने उन्हें वार्ड 110 से पार्षद का टिकट दिया था, जो कि सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित सीट है।\n\n \n\nदावेदारी का मजबूत आधार और भाजपा का प्रदर्शन\n\nपूर्व में पांच साल तक महापौर के रूप में कार्य करने का प्रशासनिक अनुभव ज्योति खंडेलवाल की दावेदारी का सबसे बड़ा मजबूत पक्ष माना जा रहा था। एक पूर्व महापौर होने के कारण पूरे जयपुर शहर में उनकी अच्छी पहचान थी। पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता और एक मजबूत महिला चेहरे के रूप में उनकी छवि ने मेयर पद के लिए उनके दावे को बेहद मजबूत बना दिया था। भाजपा को भी उनकी जीत का पूरा भरोसा था, लेकिन चुनावी परिणाम उम्मीदों के विपरीत रहे। हालांकि, इस व्यक्तिगत हार के बावजूद, कुल 150 वार्डों वाले जयपुर नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना अब तय माना जा रहा है। मतगणना की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है, लेकिन भाजपा बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच चुकी है।\n\n \n\nवार्डों के चुनावी नतीजे और अन्य महत्वपूर्ण अपडेट\n\nजयपुर नगर निगम के अब तक के नतीजों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 75 वार्डों पर विजय हासिल कर ली है। दूसरी ओर, कांग्रेस का प्रदर्शन इस बार काफी कमजोर रहा है और वह अब तक केवल 50 वार्डों में ही जीत दर्ज कर पाई है। इस बार के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और 12 निर्दलीयों ने जीत हासिल की है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी कारणों से सात वार्डों के चुनावी नतीजों को फिलहाल रोक कर रखा गया है, जिनका परिणाम राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बाद में जारी किया जाएगा। इस बार के चुनाव में वार्ड नंबर 146 की सीट भी काफी चर्चा में रही, जहां AIMIM समर्थित प्रत्याशी फिरोजा बानो ने जीत हासिल की है। फिरोजा बानो के चुनाव प्रचार में खुद ओवैसी और हनुमान बेनीवाल ने हिस्सा लिया था और उनके समर्थन में बड़ी जनसभाएं की थीं।\n\nइसका आप पर असर\nजयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम आने वाले वर्षों में शहर के नागरिक प्रशासन और विकास योजनाओं की दिशा तय करेंगे।\n\n  - पूरे भारत में: स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे यह दर्शाते हैं कि भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां जमीनी स्तर पर कितनी मजबूत हैं। इससे शहरी विकास नीतियों और स्थानीय शासन को लेकर मतदाताओं के रुख का पता चलता है।\n\n  - जयपुर में: भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने से शहरवासी उम्मीद कर सकते हैं कि नगर निगम के विकास कार्यों में तेजी आएगी क्योंकि अब एक ही दल का बोर्ड होगा। हालांकि, महापौर पद की मुख्य दावेदार की हार के बाद अब एक नया प्रशासनिक चेहरा सामने आएगा, जिससे स्थानीय प्राथमिकताओं में बदलाव हो सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह चुनावी परिणाम भाजपा के पक्ष में एक मजबूत लहर और स्थानीय स्तर पर मतदाताओं की विशिष्ट प्राथमिकताओं के मिश्रण को दर्शाते हैं।\n\n  - शहरी क्षेत्रों में भाजपा का दबदबा: भाजपा ने शहरी क्षेत्रों में अपनी संगठनात्मक ताकत के बल पर 150 में से 75 वार्डों में जीत दर्ज की। इस मजबूत प्रदर्शन ने पार्टी को अपने कुछ बड़े चेहरों की हार के बावजूद बहुमत के आंकड़े तक पहुंचा दिया।\n\n  - वार्ड 110 में उलटफेर: पूर्व महापौर के रूप में ज्योति खंडेलवाल के पास पांच साल का प्रशासनिक अनुभव था, लेकिन वार्ड 110 के स्थानीय मतदाताओं ने दूसरे प्रत्याशी को चुना। यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर के चुनावों में केवल बड़ा चेहरा या दल बदलना जीत की गारंटी नहीं होता।\n\n  - सघन चुनाव प्रचार का असर: वार्ड 146 जैसी चर्चित सीटों पर ओवैसी और हनुमान बेनीवाल जैसे प्रमुख नेताओं के आक्रामक प्रचार ने मतदाताओं को प्रभावित किया। इस रणनीतिक प्रचार के कारण ही वहाँ एआईएमआईएम समर्थित प्रत्याशी को एक बड़ी जीत हासिल हुई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जयपुर नगर निगम चुनाव में किसने जीत हासिल की?\nभाजपा ने 150 में से 75 वार्डों में जीत दर्ज की है और वह बोर्ड बनाने की स्थिति में है, जबकि कांग्रेस को केवल 50 सीटें मिली हैं।\n\n2. ज्योति खंडेलवाल की हार क्यों महत्वपूर्ण है?\nवह 5 साल के प्रशासनिक अनुभव वाली पूर्व महापौर हैं और उन्हें भाजपा की ओर से मेयर पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था।\n\n3. ज्योति खंडेलवाल ने किस वार्ड से चुनाव लड़ा और वह किस श्रेणी के लिए आरक्षित था?\nउन्होंने वार्ड 110 से चुनाव लड़ा था, जो सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित सीट थी।\n\n4. वार्ड 146 का क्या परिणाम रहा?\nएआईएमआईएम समर्थित प्रत्याशी फिरोजा बानो ने ओवैसी और हनुमान बेनीवाल के आक्रामक चुनाव प्रचार के बाद इस चर्चित सीट पर जीत हासिल की।\n\n5. कुछ वार्डों के नतीजे क्यों रोके गए हैं?\nतकनीकी कारणों से 7 वार्डों के नतीजों को रोका गया है, जिन्हें राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बाद में जारी किया जाएगा।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-14",
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