# बूंदी अस्पताल में प्रसव के बाद दो महिलाओं की मौत, ऑपरेशन थिएटर बंद कर शुरू हुई उच्च स्तरीय जांच

> राजस्थान के बूंदी जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद चार महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई, जिनमें से दो की इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया है और मामले की जांच के लिए दो कमेटियां गठित की हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bundi-aspatala-men-prasava-ke-bada-do-mahilaon-ki-mauta-pareshana-thietara-bnda-kara-shuru-hui-uchcha-stariya-jancha-33225 · **Language:** Hindi
**Tags:** बूंदी समाचार, राजस्थान, चिकित्सा लापरवाही, सिजेरियन डिलीवरी, अस्पताल जांच, मातृ स्वास्थ्य

राजस्थान के बूंदी जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई में प्रसव के बाद दो महिलाओं की मौत से प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। दरअसल, यहां 16 और 17 सितंबर को कुल चार महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद अचानक चारों प्रसूताओं की हालत गंभीर रूप से बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें तुरंत दूसरे बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया गया। लेकिन बेहद दुखद बात यह रही कि इनमें से दो महिलाओं, जिनकी पहचान 32 वर्षीय कविता और 33 वर्षीय वर्षा के रूप में हुई है, ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और वहां इस्तेमाल होने वाली दवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

## सिजेरियन ऑपरेशन और प्रसूताओं की हालत बिगड़ने का पूरा घटनाक्रम
इस पूरे मामले के घटनाक्रम को देखें तो इसकी शुरुआत 16 सितंबर को हुई थी। इस दिन जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई में दो गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन प्रसव कराया गया। प्रसव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों ही महिलाओं की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर करने का फैसला किया। इनमें से 32 वर्षीय कविता को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

इसके अगले ही दिन यानी 17 सितंबर को अस्पताल में फिर से दो महिलाओं का सिजेरियन प्रसव कराया गया। दुर्भाग्य से, इन दोनों महिलाओं की सेहत भी डिलीवरी के बाद तेजी से खराब होने लगी और उन्हें भी तत्काल रेफर करना पड़ा। इलाज के दौरान इनमें से 33 वर्षीय वर्षा की भी मृत्यु हो गई। मात्र दो दिनों के भीतर लगातार चार महिलाओं की हालत बिगड़ने और दो की मौत से पूरे अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

## यूरिन रुकने और किडनी फेल्योर की जताई जा रही आशंका
प्रसूताओं की मौत के कारणों को लेकर जो शुरुआती चिकित्सकीय जानकारी सामने आ रही है, उसमें यूरिन रुकने और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर स्थितियों की आशंका जताई गई है। चिकित्सा विशेषज्ञ इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या यह घातक स्थिति ऑपरेशन के दौरान या उसके बाद दी गई किसी दवा के रिएक्शन के कारण हुई, या फिर यह ऑपरेशन से जुड़ी किसी अन्य तकनीकी जटिलता का परिणाम थी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इन मौतों के वास्तविक कारणों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट और डॉक्टरों की तकनीकी टीम के आकलन के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

## एहतियातन ऑपरेशन थिएटर को किया गया सील
मामले की संवेदनशीलता और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तुरंत बड़ा कदम उठाया है। जांच पूरी होने तक जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इस ऑपरेशन थिएटर में सिजेरियन या किसी भी अन्य प्रकार की सर्जरी नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, ऑपरेशन थिएटर से सैंपल लेने के लिए एक विशेष तकनीकी टीम को भी भेजा गया है। यह टीम वहां इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, सर्जिकल दवाओं, एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर के वातावरण की जांच करेगी ताकि संक्रमण या किसी अन्य गड़बड़ी का पता लगाया जा सके।

इस दुखद घटना की सूचना मिलने के बाद अतिरिक्त जिला कलेक्टर एच.डी. सिंह भी व्यक्तिगत रूप से जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के कर्मचारियों, वहां मौजूद डॉक्टरों और पीएमओ से मुलाकात की और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली। अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने अधिकारियों से प्रसूताओं के इलाज के तरीकों, ऑपरेशन के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की क्रोनोलॉजी और उन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने की पूरी प्रक्रिया पर गहन फीडबैक लिया।

## जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की दो अलग-अलग टीमें गठित
की जा रही जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा दो उच्च स्तरीय कमेटियों का गठन किया गया है। इनमें से एक विशेष टीम स्वास्थ्य विभाग की ओर से तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी, जबकि दूसरी टीम प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकियों को परखेगी। ये दोनों ही टीमें अस्पताल में दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता, सर्जिकल उपकरणों के रखरखाव, डॉक्टरों की मुस्तैदी और प्रसव के बाद मरीजों की देखभाल में हुई किसी भी तरह की चूक की जांच करेंगी।

जिला अस्पताल के पीएमओ एनएल मीणा ने इस विषय पर बात करते हुए कहा कि अस्पताल प्रशासन ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के असली कारणों की सटीक जानकारी मिल पाएगी और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी हैं।

## इसका आप पर असर
यह दुखद घटना सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरों को उजागर करती है, जो सीधे तौर पर उन परिवारों को प्रभावित करती है जो प्रसव देखभाल के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं।

- **राजस्थान में:** बूंदी और उसके आसपास के जिलों के परिवारों को जिला अस्पताल में सर्जरी कराते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्हें अस्पताल में स्वच्छता और इस्तेमाल होने वाली दवाओं के बारे में डॉक्टरों से जरूर जानकारी लेनी चाहिए।
- **मरीजों की सुरक्षा:** ऑपरेशन थिएटर के अस्थायी रूप से बंद होने से अस्पताल की मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई में सिजेरियन और अन्य आपातकालीन ऑपरेशन पूरी तरह प्रभावित होंगे। आपातकालीन मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों या दूसरे नजदीकी शहरों के बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा।
- **जनता का भरोसा:** ऑपरेशन के बाद किडनी फेल्योर जैसी शिकायतें सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाती हैं। इससे सामान्य प्रसव के लिए भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाने वाले लोगों का भरोसा डगमगा सकता है।
- **प्रशासनिक जवाबदेही:** इस उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच से अस्पतालों के क्लीनिकल ऑडिट कड़े हो सकते हैं और लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है। इसका फायदा यह होगा कि आने वाले समय में सरकारी अस्पतालों में इलाज और सुरक्षा के मानकों में सुधार होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
दो दिनों के भीतर लगातार सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली चार प्रसूताओं की हालत बिगड़ने और दो की मौत के पीछे ऑपरेशन के बाद सामने आई गंभीर चिकित्सीय जटिलताएं मुख्य कारण थीं।

- **दवाओं के रिएक्शन की आशंका:** विशेषज्ञों का अनुमान है कि मरीजों में पेशाब रुकने और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की गई किसी एनेस्थीसिया या दवा के घातक साइड इफेक्ट के कारण हो सकती है।
- **सर्जरी से जुड़ी तकनीकी जटिलता:** जांच दल इस बात का पता लगा रहा है कि क्या ऑपरेशन की प्रक्रिया में कोई तकनीकी चूक हुई थी, जिसके कारण लगातार दो दिनों तक मरीजों की तबीयत इतनी गंभीर हो गई।
- **संक्रमण की संभावना:** ऑपरेशन थिएटर के वातावरण या वहां उपयोग किए जाने वाले सर्जिकल उपकरणों में किसी संक्रमण की आशंका को देखते हुए ही पूरे वार्ड को तुरंत सील कर दिया गया है ताकि प्रयोगशाला में नमूनों की जांच की जा सके।

## सवाल-जवाब

### 1. बूंदी जिला अस्पताल में क्या घटना हुई?
अस्पताल की मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई में 16 और 17 सितंबर को सिजेरियन प्रसव कराने वाली चार महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिनमें से दो की बाद में मौत हो गई।

### 2. मृतक प्रसूताओं के नाम और उम्र क्या हैं?
मृतक महिलाओं की पहचान 32 वर्षीय कविता और 33 वर्षीय वर्षा के रूप में की गई है।

### 3. प्रशासन ने अस्पताल में क्या एहतियाती कदम उठाए हैं?
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को जांच रिपोर्ट आने तक तुरंत सील कर दिया गया है और वहां सभी प्रकार के ऑपरेशन रोक दिए गए हैं।

### 4. महिलाओं की मौत के संभावित कारण क्या बताए जा रहे हैं?
शुरुआती जानकारी के अनुसार, महिलाओं में यूरिन रुकने और किडनी फेल होने की आशंका जताई जा रही है, जो किसी दवा के साइड इफेक्ट या ऑपरेशन की जटिलता से जुड़ा हो सकता है।

### 5. इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
मामले की तहकीकात के लिए दो उच्च स्तरीय जांच टीमों का गठन किया गया है, जिनमें से एक स्वास्थ्य विभाग की तकनीकी टीम है और दूसरी प्रशासनिक टीम है।

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