बूंदी के बिजासन माता मंदिर में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, 750 सीढ़ियां चढ़कर पहुंच रहे श्रद्धालु शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर बूंदी जिले के इंद्रगढ़ स्थित प्राचीन बिजासन माता मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है। अरावली की पहाड़ियों पर बने इस मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। बूंदी जिले के इंद्रगढ़ में शारदीय नवरात्रि के इस पवित्र समय पर मां बिजासन के दरबार में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब देखने को मिल रहा है। अरावली पर्वतमाला की गोद में और एक ऊंची चोटी पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में मत् टेकने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। भक्त माता के जयकारे लगाते हुए लगभग 750 सीढ़ियों का कठिन सफर तय करके मंदिर तक पहुंच रहे हैं और अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा खुशहाली की प्रार्थना कर रहे हैं। इन नौ दिनों में पूरा मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ नजर आता है। हजार साल पुराना इतिहास और धार्मिक मान्यता इंद्रगढ़ में स्थापित मां बिजासन का यह पावन मंदिर अपनी ऐतिहासिक प्राचीनता और गहरी धार्मिक मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि यह पवित्र मंदिर करीब 1000 वर्ष पुराना है। स्थानीय धार्मिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, कृपानाथ महाराज की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां बिजासन ने यहीं पर प्रकट होने का आशीर्वाद दिया था। जिस पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है, उसे पवित्र शेषनाग के स्वरूप के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा, यह भी मान्यता है कि माता यहां किसी मूर्ति के रूप में नहीं बल्कि स्वयंभू रूप में विराजमान हैं। यही मुख्य कारण है कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं की इस शक्तिपीठ के प्रति अटूट और गहरी आस्था जुड़ी हुई है। योगी समाज की 28वीं पीढ़ी संभाल रही है पूजा की जिम्मेदारी इस मंदिर की परंपराएं भी सदियों पुरानी हैं और बहुतली अनूठी हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, यहां योगी समाज के लोग कई पीढ़ियों से लगातार मां बिजासन की नियमित पूजा-अर्चना और सेवा करते आ रहे हैं। इस समय योगी समाज की 28वीं पीढ़ी इस प्राचीन मंदिर में पूजा-पाठ की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही है। श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल भर नहीं है, बल्कि यह उनकी गहरी आस्था, पुरानी परंपराओं और मजबूत आध्यात्मिक विश्वास का एक बहुत बड़ा केंद्र बन चुका है। दूर-दराज से पहुंच रहे हैं भक्त नवरात्रि के इन विशेष दिनों में बूंदी और पूरे हाड़ौती आंचल के अलावा राजस्थान के अन्य जिलों और देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। कोई भक्त अपने पूरे परिवार के साथ तो कोई अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहा है। लगभग 750 सीढ़ियों का लंबा और थका देने वाला रास्ता तय करने के बावजूद भक्तों के उत्साह और उमंग में जरा भी कमी देखने को नहीं मिल रही है। दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का यह मानना है कि मां बिजासन के दरबार में आकर माथा टेकने से मन को असीम शांति मिलती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नवरात्रि के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और श्रद्धालुओं के हुजूम को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल और होमगार्ड के जवानों की तैनाती की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का यह प्रयास है कि दर्शन के लिए आने वाले किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और वे पूरी तरह सुरक्षित माहौल में शांतिपूर्ण ढंग से मां के दर्शन कर सकें। नवरात्रि के इन दिनों में मां बिजासन के दरबार में उमड़ रही यह भीड़ इंद्रगढ़ की धार्मिक पहचान और यहां के लोगों की अटूट आस्था को साफ दर्शाती है। सवाल-जवाब 1. बिजासन माता का मंदिर कहां स्थित है? यह प्राचीन मंदिर राजस्थान के बूंदी जिले के इंद्रगढ़ में अरावली पर्वतमाला की चोटी पर स्थित है। 2. मंदिर तक पहुंचने के लिए कितनी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं? श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 750 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। 3. यह मंदिर कितना पुराना माना जाता है? स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बिजासन माता का यह मंदिर करीब 1000 वर्ष पुराना है। 4. मंदिर में पूजा-अर्चना कौन करता आ रहा है? योगी समाज के लोग पीढ़ियों से यहां पूजा करते आ रहे हैं और वर्तमान में 28वीं पीढ़ी इस परंपरा को निभा रही है। https://trendkia.com/rajasthan/bundi-ke-bijasan-mata-temple-mein-umadi-bhakton-ki-bhaari-bheed-48743 TrendKia — Har trend, sabse pehle.