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  "title": "चित्तौड़गढ़ किले की सदियों पुरानी प्राकृतिक झाड़ियों पर पके मीठे सीताफल की जबरदस्त मांग, 150 रुपये किलो तक पहुंचे दाम",
  "summary": "राजस्थान के चित्तौड़गढ़ दुर्ग में प्राकृतिक रूप से उगने वाले सीताफल की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस सीजन में यह फल 100 से 150 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है।",
  "content": "राजस्थान के ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग का परिसर इन दिनों अपनी अनूठी प्राकृतिक पैदावार की वजह से चर्चा में है। अपनी भव्य वास्तुकला, अद्वितीय त्याग और शौर्य गाथाओं के लिए मशहूर यह दुर्ग एक खास फल की लजीज मिठास के लिए भी पूरे भारत में जाना जाता है। दुर्ग की दीवारों और प्राचीर के आसपास पैदा होने वाले सीताफल की मांग इस समय अपने चरम पर है। यहां का सीताफल अपनी बेहतरीन मिठास और उच्च गुणवत्ता के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से आने वाले पर्यटकों का भी पसंदीदा फल बना हुआ है।\n\nबिना बुवाई के 13 किलोमीटर में फल रहे सदियों पुराने पेड़\nचित्तौड़गढ़ दुर्ग की कुल परिधि लगभग 13 किलोमीटर के विशाल दायरे में फैली हुई है। इस पूरे दुर्ग क्षेत्र के अनेक इलाकों में सैकड़ों सालों से सीताफल के पेड़ अपने आप प्राकृतिक रूप से उगते आ रहे हैं। इस उपज का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस ऐतिहासिक परिसर में लगे किसी भी सीताफल के पेड़ को किसी इंसान ने बीज बोकर नहीं लगाया है। सदियों से जंगलों और खाली पड़े स्थानों पर यह झाड़ियां और पेड़ स्वतः ही विकसित होते आए हैं। समय बीतने के साथ-साथ इनके प्राकृतिक फैलाव में बढ़ोतरी हुई है और बिना किसी रासायनिक उर्वरक या मानवीय कृषि प्रक्रिया के आज भी यहां की प्राकृतिक पैदावार पूरी तरह से सुरक्षित और उत्पादक बनी हुई है।\n\nपर्यटन सीजन और सीताफल का संगम, 100 से 150 रुपये प्रति किलो भाव\nवर्तमान समय में चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर सीताफल का मौसमी चक्र अपने पूरे शबाब पर देखा जा रहा है। स्थानीय बाजारों और किले के आसपास दुकानों पर यह सीताफल 100 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा जा रहा है। फल की इस आवक के दौरान दुर्ग परिसर में पर्यटकों की आवक भी अपने सबसे ऊंचे स्तर पर होती है। इस वजह से यहां रोज हजारों की संख्या में देसी और विदेशी सैलानी पहुंच रहे हैं। किले की सैर करने आने वाले पर्यटक इस खास प्राकृतिक सीताफल को बड़े चाव से खरीद रहे हैं, जिससे स्थानीय फल विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों के कारोबार में जोरदार उछाल दर्ज किया जा रहा है।\n\nकम बारिश का असर और महंगे ठेकों से मुनाफे की उम्मीद\nफल व्यापार से जुड़े स्थानीय कारोबारी अशोक राजोरा ने वर्तमान सीजन की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस वर्ष चित्तौड़गढ़ और आसपास के इलाकों में उम्मीद से कम बारिश दर्ज की गई है। कम वर्षा होने के कारण इस साल सीताफल की कुल उपज में मामूली गिरावट देखने को मिली है। हालांकि, पैदावार घटने के बावजूद बाजार में इसके दाम काफी मजबूत बने हुए हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। अशोक राजोरा का कहना है कि इस बार सीताफल के बगीचों के नीलामी ठेके भी ऊंची कीमतों पर दिए गए थे। इसके बावजूद महंगे ठेके लेने वाले ठेकेदार और फुटकर विक्रेता ऊंचे बाजार भावों के दम पर अपनी उम्मीद के मुताबिक अच्छा मुनाफा कमाने में सफल हो रहे हैं। यह मीठा सीताफल अब केवल एक मौसमी फल न रहकर चित्तौड़गढ़ की सांस्कृतिक व प्राकृतिक धरोहर का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है।\n\nइसका आप पर असर\nचित्तौड़गढ़ दुर्ग के सीताफल का नया सीजन पर्यटकों और स्थानीय व्यापारियों के लिए खास बदलाव लेकर आया है।\n\n• चित्तौड़गढ़ में: स्थानीय फल विक्रेताओं और ठेकेदारों को 100 से 150 रुपये प्रति किलो के ऊंचे भाव मिलने से बेहतर आय हो रही है। बारिश कम होने के बावजूद ऊंचे दाम फसल घाटे की भरपाई कर रहे हैं।\n• भारत में: देश भर से चित्तौड़गढ़ आने वाले सैलानियों को बिना किसी केमिकल के प्राकृतिक रूप से उगे मीठे सीताफल का स्वाद चखने का मौका मिल रहा है। बाजार में इसकी उपलब्धता स्थानीय पर्यटन और फल उद्योग को मजबूती दे रही है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nचित्तौड़गढ़ दुर्ग पर सीताफल की पैदावार और वर्तमान उच्च कीमतों के पीछे कई प्राकृतिक व व्यापारिक कारण शामिल हैं।\n\n• प्राकृतिक उपज: दुर्ग की 13 किलोमीटर परिधि में पिछले कई सौ सालों से सीताफल के पेड़ बिना बुवाई के अपने आप उगते और फैलते आए हैं।\n• सीजन का संगम: सीताफल का पकना और चित्तौड़गढ़ में पर्यटन का मुख्य सीजन एक ही समय पर पड़ता है, जिससे ग्राहक आधार अचानक बढ़ जाता है।\n• कम बारिश का प्रभाव: इस वर्ष क्षेत्र में कम वर्षा होने से कुल उत्पादन घट गया, जिससे सीमित आवक के कारण खुले बाजार में भाव 100 से 150 रुपये किलो तक बढ़ गए।\n• महंगे नीलामी ठेके: व्यापारियों ने इस बार बगीचों के ठेके अधिक दाम पर हासिल किए थे, जिसकी भरपाई के लिए ऊंचे दामों पर बिक्री की जा रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग का सीताफल क्यों खास माना जाता है?\nयह फल दुर्ग परिसर में सदियों से बिना बुवाई के प्राकृतिक रूप से उगता है और इसकी मिठास अन्य सीताफलों की तुलना में काफी अधिक होती है।\n\n2. बाजार में इस समय सीताफल किस दर पर बिक रहा है?\nचित्तौड़गढ़ दुर्ग के आसपास यह सीताफल 100 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है।\n\n3. इस साल सीताफल की पैदावार पर क्या असर पड़ा है?\nक्षेत्र में कम बारिश होने के कारण इस वर्ष सीताफल की कुल उपज में थोड़ी कमी आई है, लेकिन ऊंचे भाव मिलने से व्यापारी मुनाफे में हैं।\n\n4. दुर्ग की कितनी परिधि में यह सीताफल प्राकृतिक रूप से उपजता है?\nचित्तौड़गढ़ दुर्ग की लगभग 13 किलोमीटर की विशाल परिधि में सीताफल के पेड़ प्राकृतिक रूप से फैले हुए हैं।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-17",
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    "प्राकृतिक खेती"
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