चूरू के सूरवास स्कूल में मिड-डे मील में गिरी छिपकली, 36 से ज्यादा मासूम बच्चे अस्पताल में भर्ती राजस्थान के चूरू जिले में शुक्रवार को सूरवास गांव के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने से 36 से अधिक बच्चे फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गए। भोजन के बर्तन में छिपकली मिलने के बाद बच्चों को तुरंत सुजानगढ़ के अस्पताल पहुंचाया गया। राजस्थान के चूरू जिले में स्थित सूरवास गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में शुक्रवार को मध्याह्न भोजन के दौरान एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला वाकया सामने आया। स्कूल में बच्चों के लिए तैयार किए गए मिड-डे मील के बर्तन में अचानक मरी हुई छिपकली दिखाई दी। इस दूषित भोजन को ग्रहण करने के तुरंत बाद 36 से ज्यादा मासूम स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी और वे फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ गए। देखते ही देखते बच्चों को उल्टी, पेट में तेज दर्द और घबराहट की शिकायतें शुरू हो गईं, जिससे पूरे विद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूल स्टाफ और स्थानीय लोगों ने 108 एंबुलेंस और निजी गाड़ियों की मदद से सभी बीमार बच्चों को सुजानगढ़ के राजकीय बगड़िया अस्पताल पहुंचाया, जहां इमरजेंसी वार्ड में उनका इलाज चल रहा है। खाना परोसते वक्त बर्तन में दिखी छिपकली विद्यालय की शिक्षिका मोनिका ने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि शुक्रवार को जब बच्चों की कतार में खाना परोसा जा रहा था, ठीक उसी समय भोजन के बड़े बर्तन में छिपकली नजर आई। शिक्षकों ने बिना किसी देरी के तुरंत भोजन वितरण को रुकवा दिया, परंतु तब तक कई बच्चे खाना खा चुके थे। भोजन करने के कुछ ही मिनटों बाद मासूमों ने पेट दर्द और उल्टी की शिकायत शुरू कर दी। वहीं, एक पीड़ित बच्चे के अभिभावक मगाराम ने स्कूल प्रबंधन और रसोइयों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पोषाहार तैयार करते समय बुनियादी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके चलते खाने में छिपकली गिर गई और दर्जनों बच्चे बीमार पड़ गए। प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी पहुंचे अस्पताल घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमले और शिक्षा विभाग में खलबली मच गई। सुजानगढ़ के तहसीलदार अर्जुन लाल सालोदिया और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रणजीत सिंह भींचर तुरंत राजकीय बगड़िया अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने इमरजेंसी वार्ड का दौरा कर उपचाराधीन बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और अस्पताल के डॉक्टरों को निर्देश दिए कि बच्चों को हरसंभव बेहतर चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए। वर्तमान में चिकित्सा विभाग और शिक्षा विभाग की टीमें पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और बच्चों की स्थिति की निगरानी कर रही हैं। अभिभावकों में भारी आक्रोश और निष्पक्ष जांच का भरोसा सूरवास गांव के स्कूल में भोजन में छिपकली गिरने और बच्चों के बीमार होने की खबर जैसे ही फैली, पूरे गांव में चिंता और तनाव का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पीड़ित बच्चों के परिजन और ग्रामीण अस्पताल परिसर में जमा हो गए। ग्रामीणों ने मिड-डे मील पकाने वाले स्टाफ और स्कूल प्रशासन की घोर लापरवाही के खिलाफ जमकर गुस्सा जाहिर किया। अस्पताल पहुंचे अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अधिकारियों के इस भरोसे के बाद ही अस्पताल में तनावपूर्ण स्थिति शांत हो सकी। इसका आप पर असर इस घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। • चूरू और राजस्थान में: सरकारी विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों की समीक्षा की जा सकती है। माता-पिता अपने बच्चों के स्कूलों में बनने वाले मिड-डे मील की निगरानी को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं। • अस्पताल और उपचार: फूड प्वाइजनिंग के शिकार 36 से अधिक बच्चों का राजकीय बगड़िया अस्पताल में उपचार जारी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है ताकि सभी सुरक्षित ठीक हो सकें। • प्रशासनिक कार्रवाई: घटना की जांच के बाद स्कूल और रसोइयों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। इससे अन्य विद्यालयों में भी खाना पकाने की प्रक्रिया में लापरवाही पर रोक लगने की उम्मीद है। • अभिभावकों की चिंता: स्कूलों में परोसे जाने वाले पोषाहार के प्रति ग्रामीणों और पालकों में गहरी चिंता पैदा हुई है। इससे आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर स्कूलों में जांच और निरीक्षण की मांग बढ़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ सरकारी स्कूल में मिड-डे मील बनाते समय आवश्यक सुरक्षा और स्वच्छता मानकों की अनदेखी के चलते यह दुर्घटना हुई। • रसोई में घोर लापरवाही: खाना पकाते समय बर्तनों को सही ढंग से ढंककर न रखने के कारण उसमें छिपकली गिर गई। अभिभावकों का आरोप है कि पोषाहार तैयार करने के दौरान जरूरी सतर्कता पूरी तरह गायब थी। • वितरण के दौरान देरी से पहचान: जब खाना परोसा जा रहा था, तब भोजन के बर्तन में छिपकली दिखाई दी। इस सूचना पर खाना परोसना तुरंत रोका गया, लेकिन तब तक कई दर्जन बच्चे दूषित भोजन खा चुके थे। • प्रशासनिक जांच शुरू: तहसीलदार और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। पूरे मामले की आधिकारिक जांच कराई जा रही है ताकि लापरवाही के कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान हो सके। सवाल-जवाब 1. यह घटना किस स्कूल में और कब हुई? यह घटना शुक्रवार को राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ उपखंड स्थित सूरवास गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई। 2. कितने बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुए हैं? मिड-डे मील खाने के बाद 36 से अधिक स्कूली बच्चे फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आकर बीमार हो गए। 3. बच्चों को इलाज के लिए किस अस्पताल में भर्ती कराया गया है? सभी बीमार बच्चों को सुजानगढ़ के राजकीय बगड़िया अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराकर इलाज दिया जा रहा है। 4. भोजन में छिपकली मिलने पर क्या कदम उठाया गया? शिक्षकों द्वारा बर्तन में छिपकली देखते ही तुरंत खाना परोसना रुकवाया गया और बीमार बच्चों को एंबुलेंस व निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया। 5. अस्पताल का दौरा किन अधिकारियों ने किया? सुजानगढ़ के तहसीलदार अर्जुन लाल सालोदिया और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रणजीत सिंह भींचर ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य का जायजा लिया। 6. प्रशासन ने ग्रामीणों और अभिभावकों को क्या आश्वासन दिया है? अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और लापरवाही के दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भरोसा दिया है। https://trendkia.com/rajasthan/churu-ke-surwas-skula-men-mida-de-mila-men-giri-chhipakali-36-se-jyada-masuma-bachche-aspatala-men-bharti-45858 TrendKia — Har trend, sabse pehle.