कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ चुनावी मैदान में उतरीं आईआईटी दिल्ली की छात्रा, पिता की पार्टी के खिलाफ लड़ेंगी चुनाव झालरापाटन नगरपालिका चुनाव के वार्ड 27 से आईआईटी दिल्ली की अंतिम वर्ष की छात्रा गायत्री दुआ आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरी हैं, जबकि उनके पिता भाजपा के वरिष्ठ स्थानीय पदाधिकारी हैं। राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित झालरापाटन नगरपालिका के आगामी चुनावों ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मियों को काफी बढ़ा दिया है। इस निकाय चुनाव की सबसे चर्चित सीट वार्ड 27 बनकर उभरी है, जहां मुकाबला पारंपरिक राजनीति से हटकर बेहद रोचक और अनोखा रूप ले चुका है। इस जगह से देश के सबसे प्रमुख तकनीकी संस्थान आईआईटी दिल्ली की अंतिम वर्ष की छात्रा गायत्री दुआ ने राजनीतिक पारी की शुरुआत की है। उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आकर्षक नौकरी प्रस्तावों को दरकिनार करते हुए अपने गृहनगर लौटने और सीधे स्थानीय निकाय चुनावों में किस्मत आजमाने का निर्णय लिया है। आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरकर उन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय और दिलचस्प बना दिया है। तकनीकी शिक्षा छोड़ जनसेवा का चुना रास्ता प्रौद्योगिकी के आधुनिक दौर में जहां आईआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों के छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद बड़े कॉरपोरेट पैकेज चुनते हैं, वहीं गायत्री दुआ ने जनसेवा को अपनी पहली प्राथमिकता बनाया है। वह फिलहाल रोबोटिक्स और AI विषयों की पढ़ाई कर रही हैं और उनका अंतिम वर्ष जारी है। डिग्री पूरी होने के बाद उनके पास कॉर्पोरेट सेक्टर की बड़ी कंपनियों में जाने के कई बेहतर अवसर उपलब्ध थे। इसके बावजूद उन्होंने किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी का रुख करने के बजाय झालरापाटन वापस आकर जमीनी स्तर की राजनीति में सक्रिय होने का फैसला किया। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा का वास्तविक लाभ स्थानीय मुद्दों को सुलझाने और अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा करने में होना चाहिए। एक ही छत के नीचे दो अलग विचारधाराएं इस चुनावी मुकाबले का सबसे ध्यान खींचने वाला पहलू उम्मीदवार की पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। गायत्री दुआ के पिता का क्षेत्र में एक लंबा और सशक्त राजनीतिक इतिहास रहा है। वे लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं और पूर्व में वार्ड पार्षद के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के जिला कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई है। वर्तमान समय में भी वे भाजपा मंडल उपाध्यक्ष के पद पर पूरी सक्रियता के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। घर के मुखिया और पिता की पूरी राजनीतिक पहचान जहां भाजपा की नीतियों और विचारधारा के इर्द-गिर्द केंद्रित है, वहीं उनकी बेटी ने विपक्षी दल आम आदमी पार्टी का दामन थामकर सभी को हैरान कर दिया है। एक ही परिवार के भीतर दो परस्पर विरोधी राजनीतिक विचारधाराओं की मौजूदगी ने इस चुनाव को विशेष बना दिया है। लाल बाग क्षेत्र का वार्ड 27 बना आकर्षण का केंद्र झालावाड़ जिले के झालरापाटन शहर स्थित लाल बाग क्षेत्र के वार्ड 27 में पार्षद पद की लड़ाई अब पूरे क्षेत्र के लिए कौतूहल का विषय बन चुकी है। एक तरफ जहां तकनीक और उच्च शिक्षा से समृद्ध एक युवा महिला का चुनाव में आना स्थानीय शासन में नए विचारों के आगमन का संकेत देता है, वहीं दूसरी तरफ पिता-पुत्री के अलग-अलग राजनीतिक रास्तों ने जनता की उत्सुकता को कई गुना बढ़ा दिया है। स्थानीय मतदाता इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि एक तरफ पिता का स्थापित राजनीतिक आधार है और दूसरी तरफ बेटी की नई सोच व अलग दल का सिंबल। चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि झालरापाटन की जनता इस अनूठे राजनीतिक समीकरणों के बीच किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है। इसका आप पर असर यह समाचार स्थानीय निकाय चुनाव में शिक्षित युवाओं की भागीदारी और पारिवारिक राजनीतिक गतिशीलता के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। • भारत में: यह घटनाक्रम देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों से निकलने वाली युवा पीढ़ी के जमीनी राजनीति और निकाय चुनावों की ओर बढ़ते रुझान को रेखांकित करता है। इससे सार्वजनिक नीति निर्माण में पढ़े-लिखे युवाओं को आगे आने की प्रेरणा मिलती है। • राजस्थान और झालरापाटन में: झालरापाटन के वार्ड 27 के निवासियों के लिए एक उच्च शिक्षित पार्षद चुनने का विकल्प उपलब्ध हुआ है जो नागरिक सुविधाओं में आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर सकती है। वहीं स्थानीय मतदाताओं को अपने वोट का चयन करते समय पार्टी व परिवार की विचारधारा के अंतर को ध्यान में रखना होगा। ऐसा क्यों हुआ झालावाड़ के झालरापाटन में निकाय चुनाव की सरगर्मियों के बीच यह अनोखा राजनीतिक समीकरण पिता और पुत्री के अलग-अलग राजनीतिक मार्गों को चुनने के कारण बना है। • सीधे जनसेवा की इच्छा: आईआईटी दिल्ली में रोबोटिक्स व AI की छात्रा गायत्री दुआ ने एमएनसी नौकरियों के बजाय जमीनी राजनीति के माध्यम से स्थानीय लोगों की सेवा करने का इरादा जताया है। • विपक्षी दल का चयन: पिता के लंबे समय से भाजपा पदाधिकारी रहने के बावजूद गायत्री ने आम आदमी पार्टी का दामन थामकर स्वतंत्र राजनीतिक रुख अपनाया। • स्थानीय राजनीति में चर्चा: एक ही घर में भाजपा और आप की मौजूदगी ने वार्ड 27 के स्थानीय निकाय चुनाव को पूरे जिले की सबसे चर्चित सीट बना दिया है। सवाल-जवाब 1. गायत्री दुआ किस शिक्षण संस्थान में पढ़ाई कर रही हैं? गायत्री दुआ देश के प्रमुख संस्थान आईआईटी दिल्ली में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। 2. गायत्री दुआ झालरापाटन के किस वार्ड से चुनाव लड़ रही हैं? वह झालरापाटन के लाल बाग क्षेत्र स्थित वार्ड 27 से पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं। 3. गायत्री दुआ ने किस राजनीतिक दल के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है? उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। 4. गायत्री दुआ के पिता की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है? उनके पिता भाजपा के पूर्व पार्षद, विहिप के पूर्व जिला कोषाध्यक्ष और वर्तमान में भाजपा मंडल उपाध्यक्ष हैं। प्रेरणा और सबक यह फैसला युवा पीढ़ी के लिए सार्वजनिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और परंपरा से हटकर फैसला लेने की सीख देता है। • उच्च पैकेज से ऊपर समाज सेवा: बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नौकरियों को छोड़कर अपने शहर लौटना दिखाता है कि व्यक्तिगत करियर से ऊपर जनहित को रखा जा सकता है। • स्वतंत्र विचारधारा की ताकत: पारिवारिक परंपरा से हटकर अपनी सोच के अनुसार राजनीतिक दल चुनना युवाओं की वैचारिक स्वतंत्रता का उदाहरण प्रस्तुत करता है। • तकनीकी ज्ञान का स्थानीय उपयोग: रोबोटिक्स और AI जैसी आधुनिक शिक्षा को स्थानीय समस्याओं के समाधान में लगाने की सोच आज की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। https://trendkia.com/rajasthan/corporate-placement-chhod-chunavi-maidan-mein-uteen-iit-delhi-ki-chhatra-father-ki-party-ke-khilaf-ladengi-chunav-30393 TrendKia — Har trend, sabse pehle.