दौसा में मानवीय पहलू: 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला सीढ़ियां चढ़ने में थीं असमर्थ, जिला जज ने खुद कार के पास पहुंचकर सौंपा चेक दौसा जिला न्यायालय में 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला जब सीढ़ियां नहीं चढ़ सकीं, तो जिला जज केशव कौशिक ने खुद नीचे आकर औपचारिकताएं पूरी कराईं और अवार्ड राशि का चेक सौंपा. अदालती कार्यप्रणाली में आमतौर पर पक्षकारों को कागजी औपचारिकताओं और आदेशों की तामील के लिए पेश होना पड़ता है, लेकिन राजस्थान के दौसा जिला न्यायालय परिसर में मानवीय संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण सामने आया. अपनी उम्र के 96वें पड़ाव पर पहुंच चुकी एक बुजुर्ग महिला जब शारीरिक अशक्तता के चलते पहली मंजिल पर मौजूद कोर्ट रूम तक पहुंचने की स्थिति में नहीं थीं, तब अदालत के मुखिया ने पद की औपचारिकताएं छोड़कर सीधे बुजुर्ग के पास जाने का फैसला किया. जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने खुद नीचे आकर वाहन में बैठी महिला से जरूरी कागजात पूरे करवाए और सहायता राशि का भुगतान सुनिश्चित किया. शारीरिक लाचारी के चलते पहली मंजिल तक पहुंचना था मुश्किल प्रकरण में मुआवजे की हकदार 96 वर्षीय सम्पत्ति देवी शर्मा (पत्नी स्वर्गीय राधेश्याम शर्मा) उम्रदराज होने के कारण चलने-फिरने में भारी लाचारी का सामना कर रही थीं. न्यायालय भवन में जिला जज की अदालत प्रथम तल पर स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. जब सम्पत्ति देवी शर्मा कोर्ट परिसर में गाड़ी से पहुंचीं, तो उनकी नाजुक शारीरिक हालत को देखते हुए परिजनों के लिए उन्हें ऊपर ले जाना असंभव लग रहा था. कोर्ट के कर्मचारियों और अधिकारियों ने जब इस असहज स्थिति की जानकारी जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक को दी, तो उन्होंने बिना किसी देरी के मामले में संवेदनशीलता दिखाई. जिला जज ने परिसर में खड़ी गाड़ी के पास जाकर पूरी कराईं औपचारिकताएं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष का भी दायित्व संभाल रहे जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने यह तय किया कि बुजुर्ग महिला को किसी भी सूरत में कष्ट नहीं होना चाहिए. वे स्वयं प्रथम तल पर स्थित अपने चैंबर से उतरकर नीचे आए और कोर्ट परिसर में खड़ी उस कार के पास पहुंचे जिसमें बुजुर्ग महिला बैठी हुई थीं. न्यायाधीश ने वहीं कार की खिड़की के पास खड़े रहकर कानूनी प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक हस्ताक्षरों और पहचान से जुड़ी कागजी प्रक्रियाओं को पूरा कराया, जिससे 96 वर्षीय महिला को बिना किसी शारीरिक परेशानी के कानूनी हक मिल सका. 8 लाख 21 हजार 67 रुपये की अवार्ड राशि का चेक सौंपा कागजी खानापूर्ति पूरी होते ही जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने अपने हाथों से 8 लाख 21 हजार 67 रुपये की अवार्ड राशि का चेक सम्पत्ति देवी शर्मा को सुपुर्द किया. यह पूरा प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ में विचाराधीन एक मामले से जुड़ा हुआ था. उच्च न्यायालय द्वारा 6 मई 2026 को इस संबंध में अंतिम अवार्ड पारित किया गया था. उच्च न्यायालय के उस आदेश की पालना करते हुए विपक्षी दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने ब्याज समेत कुल 8 लाख 21 हजार 67 रुपये की धनराशि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में जमा करवाई थी. बैंक खातों में जमा होनी है मुआवजे की राशि उच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देश थे कि जमा कराई गई यह अवार्ड राशि प्रार्थीगण के बचत खातों में सीधे स्थानांतरित की जाए, जिसके लिए लाभार्थियों का उपस्थित होकर सत्यापन करवाना जरूरी था. इसी विधिक अनिवार्यता के चलते बुजुर्ग महिला को न्यायालय परिसर तक लाया गया था. विधिक नियमों की मर्यादा को पूरी तरह बनाए रखते हुए जिस तरह न्यायाधीश ने खुद चलकर जरूरतमंद नागरिक को राहत दी, उसकी न्यायालय परिसर में खूब सराहना हो रही है. इस कदम ने यह साबित किया कि न्याय वितरण प्रणाली में स्थापित नियमों का पालन करते हुए भी बुजुर्गों और लाचार नागरिकों के प्रति दया और सहृदयता का व्यवहार किया जा सकता है. इसका आप पर असर यह घटना दिखाती है कि वरिष्ठ और दिव्यांग नागरिकों के लिए न्यायिक प्रक्रियाएं अधिक सुलभ और संवेदनशील हो सकती हैं. • भारत में: यह निर्णय देश की निचली अदालतों के लिए एक प्रेरणादायक नजीर प्रस्तुत करता है कि बुजुर्गों की सुविधा के लिए नियमों का मानवीय अनुप्रयोग कैसे किया जाए. इससे भविष्य में अदालती भवनों में लिफ्ट और रैंप जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को भी बल मिलेगा. • दौसा में: स्थानीय अदालत परिसर में आने वाले बुजुर्ग और असहाय पक्षकारों को राहत देने के लिए प्रशासनिक संवेदनशीलता का स्पष्ट संदेश गया है. आम लोगों में न्यायपालिका के प्रति भरोसा और सम्मान पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है. ऐसा क्यों हुआ अदालती आदेश की औपचारिकता पूरी करने के लिए एक शारीरिक रूप से असमर्थ 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा, जिसके बाद न्यायाधीश ने संवेदनशीलता दिखाते हुए खुद बाहर आने का निर्णय लिया. • सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थता: प्रार्थी सम्पत्ति देवी शर्मा की उम्र 96 वर्ष होने के कारण वे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर थीं और पहली मंजिल पर स्थित कोर्ट रूम तक सीढ़ियों से नहीं पहुंच सकती थीं. कोर्ट अधिकारियों द्वारा न्यायाधीश को इस गंभीर लाचारी से अवगत कराया गया. • उच्च न्यायालय का आदेश: राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने 6 मई 2026 को अवार्ड पारित किया था, जिसके तहत लाभार्थियों के बचत खाते में राशि जमा कराने हेतु औपचारिकताएं पूरी करनी जरूरी थीं. • बीमा कंपनी द्वारा राशि जमा: अदालती आदेश की अनुपालना में विपक्षी दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने ब्याज सहित 8 लाख 21 हजार 67 रुपये की राशि अधिकरण में जमा करवा दी थी, जिसे वितरित करने के लिए विधिक सत्यापन आवश्यक था. सवाल-जवाब 1. दौसा जिला न्यायालय में जिला जज ने क्या कदम उठाया? जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने पहली मंजिल से नीचे आकर कार में बैठी 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला से औपचारिकताएं पूरी कराईं और चेक सौंपा. 2. बुजुर्ग महिला का नाम क्या है और वे कोर्ट रूम क्यों नहीं जा सकीं? बुजुर्ग महिला का नाम सम्पत्ति देवी शर्मा है और 96 वर्ष की आयु तथा शारीरिक अशक्तता के कारण वे सीढ़ियां चढ़कर पहली मंजिल तक नहीं जा सकीं. 3. बुजुर्ग महिला को कितनी राशि का चेक प्रदान किया गया? महिला को ब्याज सहित कुल 8 लाख 21 हजार 67 रुपये की अवार्ड राशि का चेक सौंपा गया. 4. यह मामला किस न्यायालय के आदेश से जुड़ा हुआ था? यह प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ द्वारा 6 मई 2026 को पारित किए गए आदेश से संबंधित था. 5. मुआवजे की राशि किस बीमा कंपनी द्वारा जमा कराई गई थी? मुआवजे की कुल राशि विपक्षी दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी द्वारा अधिकरण में जमा करवाई गई थी. https://trendkia.com/rajasthan/dausa-men-manaviya-pahalu-96-varshiya-bujurga-mahila-sirhiyan-charhane-men-thin-assam-rtha-jila-jaja-ne-khuda-kara-ke-pasa-pahunch-41738 TrendKia — Har trend, sabse pehle.