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  "title": "दौसा में उपसभापति मतदान से ठीक पहले प्रवेश द्वार पर टकराव, विधायक डीसी बेरवा और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी बहस",
  "summary": "दौसा नगर परिषद में उपसभापति चुनाव की वोटिंग से पूर्व प्रवेश को लेकर विधायक डीसी बेरवा और एएसपी शंकरलाल मीणा में तीखी नोकझोंक हुई।",
  "content": "राजस्थान के दौसा नगर परिषद परिसर में उपसभापति पद के मतदान की शुरुआत से ऐन पहले जबरदस्त सियासी सरगर्मी और गहमागहमी देखने को मिली। कांग्रेस खेमे के जनप्रतिनिधियों के मतदान स्थल पर पहुंचने के दौरान मुख्य द्वार पर कांग्रेस विधायक डीसी बेरवा और एएसपी शंकरलाल मीणा के मध्य तीखी तकरार हो गई। प्रवेश को लेकर शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते काफी बढ़ गया, जिससे मतदान केंद्र के बाहर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई।\n\nप्रवेश द्वार पर विवाद की असल वजह\nमतदान केंद्र के मुख्य द्वार पर उपजे इस विवाद की मुख्य वजह एक बाहरी व्यक्ति का प्रवेश कराने का प्रयास था। विधायक डीसी बेरवा मतदान करने जा रहे पार्षदों के साथ एक अतिरिक्त व्यक्ति को भी नगर परिषद भवन के भीतर भेजने की मांग कर रहे थे। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे एएसपी शंकरलाल मीणा ने नियमों का हवाला देते हुए अनाधिकृत व्यक्ति को भीतर जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस अधिकारी के इस रुख के बाद दोनों पक्षों के बीच जोरदार नोकझोंक शुरू हो गई। विवाद गहराने पर एएसपी ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी तुरंत रिटर्निंग ऑफिसर को दी।\n\nप्रशासन का कड़ा रुख और नियमों का हवाला\nगेट पर बने गतिरोध को दूर करने के लिए तहसीलदार गजानंद मीणा तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। तहसीलदार ने प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिस पार्षद के साथ सहयोगी को भेजने का प्रयास किया जा रहा था, उन्होंने नामांकन पत्रों में स्वयं को साक्षर दर्ज कराया था। निर्वाचन नियमों के अनुसार जब कोई जनप्रतिनिधि स्वयं साक्षर घोषित है, तो मतदान कक्ष में उनके साथ किसी सहायक या अन्य व्यक्ति को जाने की वैधानिक इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। प्रशासन के इस स्पष्ट निर्णय के बाद माहौल शांत हुआ और मतदान प्रक्रिया आगे बढ़ी।\n\nउपसभापति की कुर्सी के लिए सीधा मुकाबला\nदौसा नगर परिषद में उपसभापति पद के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ चरम पर है। इस अहम पद के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जितेंद्र शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की तरफ से सुनीता सैनी अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं। इन दोनों प्रमुख दलों के बीच आमने-सामने की जंग चल ही रही थी कि एक निर्दलीय प्रत्याशी द्वारा नामांकन फॉर्म खरीदे जाने से दलीय गणित और ज्यादा उलझ गया है। निर्दलीय की इस सक्रियता ने दोनों ही दलों के रणनीतिकारों को अपनी रणनीति नए सिरे से परखने पर मजबूर कर दिया है।\n\nसभापति चुनाव के नतीजों की पृष्ठभूमि\nउपसभापति चुनाव में कांग्रेस बढ़े हुए मनोबल के साथ उतरी है, जिसका मुख्य कारण हाल ही में संपन्न हुआ सभापति का चुनाव है। सभापति पद के कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी रेखा गुर्जर ने 31 मत हासिल करके शानदार जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर, बीजेपी उम्मीदवार कविता गुर्जर को केवल 24 वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमाने के बाद अब कांग्रेस उपसभापति पद पर भी अपना परचम लहराने के पूरे प्रयास में है, वहीं बीजेपी इस चुनाव के जरिए अपनी पिछली हार का बदला लेने और वापसी करने की पुरजोर कोशिश कर रही है।\n\nइसका आप पर असर\nइस घटनाक्रम का सीधा असर स्थानीय नगर परिषद के प्रशासनिक संचालन और चुनावी नियमों की सख्ती पर पड़ता है।\n\n• स्थानीय नागरिकों पर असर: नगर परिषद में उपसभापति के चुनाव से शहर के विकास कार्यों और स्थानीय योजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा तय होगी। नई परिषद बनने के बाद क्षेत्र की नागरिक सुविधाओं और बजट आवंटन में तेजी आने की उम्मीद है।\n• चुनाव नियमों का पालन: प्रशासन द्वारा साक्षर जनप्रतिनिधियों के साथ सहायकों के प्रवेश पर रोक लगाने से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है। इससे नियमों के उल्लंघन की गुंजाइश खत्म होती है और मतदान निष्पक्ष रूप से संपन्न होता है।\n• राजनीतिक समीकरण: सभापति के बाद उपसभापति का पद किसी एक दल के पास जाने से नगर निकाय में शक्ति संतुलन तय होता है। इससे आगामी स्थानीय फैसलों में सत्तारूढ़ गुट को मजबूती मिलेगी।\n• प्रशासनिक सतर्कता: मतदान केंद्र के बाहर हुए विवाद के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक जांच कड़ी कर दी गई है। इससे किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप की संभावना पूरी तरह रुक जाती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विवाद मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश नियमों के अनुपालन और एक साक्षर जनप्रतिनिधि के साथ बाहरी व्यक्ति को ले जाने की मांग के चलते उत्पन्न हुआ।\n\n• अनाधिकृत प्रवेश की मांग: विवाद की सीधी शुरुआत तब हुई जब विधायक द्वारा एक पार्षद के साथ अन्य व्यक्ति को नगर परिषद के अंदर ले जाने का प्रयास किया गया। पुलिस अधिकारी ने बिना अनुमति किसी भी बाहरी व्यक्ति को मतदान केंद्र में प्रवेश देने से साफ मना कर दिया।\n• नामांकन रिकॉर्ड की स्थिति: तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि संबंधित पार्षद ने अपने नामांकन प्रपत्रों में स्वयं को साक्षर दर्ज कराया था। चुनावी प्रावधानों के तहत साक्षर मतदाता के साथ किसी सहयोगी को मतदान कक्ष में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।\n• चुनावी तनाव और प्रतिष्ठा की लड़ाई: सभापति चुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी वापसी के लिए सक्रिय थी, जबकि कांग्रेस अपनी बढ़त बनाए रखने का प्रयास कर रही थी। दोनों दलों के बीच पहले से बने राजनीतिक दबाव ने प्रवेश द्वार पर तनाव को और बढ़ा दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दौसा नगर परिषद के बाहर विवाद क्यों हुआ?\nविधायक डीसी बेरवा पार्षदों के साथ एक अन्य व्यक्ति को अंदर भेजना चाहते थे, जिसे एएसपी ने अनुमति देने से मना कर दिया।\n\n2. तहसीलदार गजानंद मीणा ने प्रवेश को लेकर क्या नियम स्पष्ट किया?\nउन्होंने बताया कि संबंधित पार्षद नामांकन में साक्षर दर्ज हैं, इसलिए उनके साथ किसी दूसरे व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।\n\n3. उपसभापति पद के लिए मुख्य उम्मीदवार कौन हैं?\nबीजेपी की तरफ से जितेंद्र शर्मा और कांग्रेस की तरफ से सुनीता सैनी उपसभापति पद के लिए चुनाव मैदान में हैं।\n\n4. हाल ही में हुए सभापति चुनाव का क्या परिणाम रहा था?\nकांग्रेस प्रत्याशी रेखा गुर्जर ने 31 वोट पाकर जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी की कविता गुर्जर को 24 वोट मिले थे।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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