दौसा में विज्ञान मेले का जलवा, स्कूली छात्रों ने पेश किए भविष्य के स्मार्ट शहर और चंद्रयान-3 से जुड़े नवाचार दौसा में आयोजित तीन दिवसीय विज्ञान और गणित मेले में 12 जिलों के 500 विद्यार्थियों ने भविष्य के नवाचार, आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय समाधानों पर शानदार मॉडल प्रस्तुत किए। दौसा स्थित आदर्श विद्या मंदिर बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में तीन दिवसीय विज्ञान एवं गणित मेले का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। विद्या भारती द्वारा संचालित इस शैक्षणिक आयोजन में जयपुर प्रांत के 12 विभिन्न जिलों से पहुंचे लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने अपनी मेधा, मौलिक सोच और तकनीकी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने मात्र पाठ्यपुस्तकों के सिद्धांतों तक सीमित रहने के बजाय वर्तमान दौर की व्यवहारिक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को केंद्र में रखकर कामकाजी मॉडल तैयार किए। इस पूरे मेले का प्राथमिक मकसद नई पीढ़ी के मन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करना और गणित जैसे विषयों के प्रति सहज रुचि जागृत करना था। स्मार्ट सिटी-2050 और चंद्रयान की थीम पर सजे आधुनिक मॉडल प्रदर्शनी स्थल पर कदम रखते ही विद्यार्थियों की दूरगामी सोच स्पष्ट नजर आ रही थी। भारत के ऐतिहासिक चंद्र अन्वेषण मिशन चंद्रयान-3 से प्रेरित नवाचारों के साथ-साथ वर्ष 2050 की शहरी आवश्यकताओं को दर्शाने वाला 'फ्यूचर स्मार्ट सिटी-2050' मॉडल आगंतुकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस मॉडल में भविष्य के सुनियोजित नगरों की रूपरेखा बहुत बारीकी से खींची गई थी। इसके साथ ही स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी की उपयोगिता को समझाने वाले तकनीकी प्रारूप भी सराहे गए। दिव्यांगजनों की दैनिक आवाजाही को सुगम बनाने के उद्देश्य से विकसित की गई स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक और स्मार्ट ग्लासेस ने यह दिखाया कि तकनीक किस प्रकार संवेदनशील हो सकती है। सुरक्षा एवं निगरानी के लिए तैयार किए गए रडार सिस्टम, वाई-फाई के माध्यम से त्वरित डेटा ट्रांसफर की प्रणाली तथा बिजली बचाने वाले ऑटोमेटिक लाइट सेंसर जैसे उपकरणों ने साबित किया कि छात्र आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में लागू करने में पूरी तरह सक्षम हैं। पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक कृषि और नागरिक प्रबंधन पर जोर प्रदर्शनी में पर्यावरणीय संतुलन, जल स्रोतों की सुरक्षा और टिकाऊ खेती से जुड़े मुद्दों को भी भरपूर प्राथमिकता दी गई। छात्रों ने कचरा प्रबंधन के लिए स्मार्ट डस्टबिन, जल प्रदूषण को नियंत्रित करने की विधियां, जैविक खेती के तौर-तरीके तथा खेतों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए स्मार्ट सिंचाई प्रणालियों के मॉडल प्रस्तुत किए। वर्षा जल संचयन की तकनीकों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव और शहरों में सुचारू यातायात सुनिश्चित करने वाली आधुनिक ट्रैफिक लाइट व्यवस्था से जुड़े प्रोजेक्ट्स की सभी ने सराहना की। इसके अलावा विज्ञान की मूलभूत समझ को पुख्ता करते सरल मशीन, आपातकालीन प्राथमिक उपचार और पदार्थों की भौतिक अवस्थाओं को समझाने वाले ज्ञानवर्धक मॉडल भी शामिल थे। इन सभी प्रयासों से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि वैज्ञानिक नवाचारों के जरिए शहरीकरण, प्रदूषण और संसाधन प्रबंधन जैसी बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है। चार वर्गों में हुई प्रतियोगिताएं, अब ब्यावर और गोरखपुर का रुख इस आयोजन में प्रतियोगियों को उम्र और कक्षा के आधार पर शिशु, बाल, किशोर तथा तरुण वर्ग में विभाजित किया गया था। मॉडल प्रदर्शन के अलावा विद्यार्थियों ने शोध पत्र-वाचन जैसी बौद्धिक प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। विद्या भारती के प्रांतीय निरीक्षक अरुण दुबे तथा विद्यालय की प्रधानाचार्य उमा शर्मा के अनुसार पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह और सीखने की ललक उल्लेखनीय रही। दौसा के इस प्रांतीय मेले में अव्वल रहने वाले प्रतिभाशाली छात्र अब आगामी दौर की प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। राज्य स्तर पर राजस्थान के सभी 41 जिलों की भागीदारी वाला अगला विज्ञान मेला 2 से 4 नवंबर तक ब्यावर में आयोजित किया जाएगा। इसके उपरांत राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले विजेता 26 नवंबर से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय विज्ञान मेले में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। इसका आप पर असर यह विज्ञान मेला स्कूली छात्रों को सैद्धांतिक पढ़ाई से आगे बढ़कर व्यवहारिक शोध और समस्या निवारण की ओर प्रेरित करता है। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाले ऐसे आयोजनों से स्कूली प्रतिभाओं को जमीनी तकनीक और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिलता है। यह प्रक्रिया भविष्य के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की नींव तैयार करने में मदद करती है। • दौसा और राजस्थान में: राज्य के 12 जिलों से आए 500 प्रतिभागियों के बीच चयनित छात्र अब ब्यावर में 2 से 4 नवंबर तक राज्य स्तरीय मुकाबले में भाग लेंगे। स्थानीय विद्यालयों के विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए यह नवाचारों को करीब से देखने और राज्य-स्तरीय मंचों की तैयारी का सीधा मार्ग खोलता है। • छात्रों और शिक्षकों के लिए: मॉडल निर्माण और शोध पत्र वाचन जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में नवाचार और सार्वजनिक प्रस्तुति का आत्मविश्वास विकसित करती हैं। शिक्षक इन व्यवहारिक मॉडलों का उपयोग कक्षा के भीतर शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में कर सकते हैं। • पर्यावरण और कृषि समाधान: छात्रों द्वारा प्रस्तुत स्मार्ट सिंचाई, वर्षा जल संचयन और कचरा प्रबंधन के प्रारूप स्थानीय स्तर पर भी अपनाए जाने योग्य व्यवहारिक विचार प्रदान करते हैं। यह किसानों और शहरी निकायों को कम लागत वाले तकनीकी उपायों पर सोचने की दिशा दिखाता है। ऐसा क्यों हुआ विद्यार्थियों के भीतर वैज्ञानिक समझ का विकास करने और पुस्तकीय ज्ञान को व्यवहारिक समस्याओं के समाधान से जोड़ने के लिए इस मेले का आयोजन किया गया। • सीखने के व्यवहारिक दृष्टिकोण की जरूरत: परंपरागत शिक्षा प्रणाली में अक्सर केवल पाठ्यपुस्तकों पर जोर रहता है, जिसके चलते विद्यार्थियों को प्रयोग करने के कम मौके मिलते हैं। इस मेले को आयोजित करने का तात्कालिक कारण बच्चों को अपने हाथों से मॉडल बनाकर विज्ञान के नियम समझने का अवसर देना था। • समसामयिक चुनौतियों का समाधान: जल संकट, शहरीकरण, अपशिष्ट प्रबंधन और दिव्यांगजनों की कठिनाइयों जैसी दैनिक समस्याओं के लिए नई पीढ़ी को संवेदनशील बनाना जरूरी समझा गया। इसी उद्देश्य से प्रदर्शनी की विषयवस्तु में पर्यावरण, नैनो तकनीक और स्मार्ट सिटी प्रारूपों को शामिल किया गया। • चरणबद्ध चयन प्रणाली: विद्या भारती द्वारा प्रतिवर्ष क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक शैक्षणिक प्रतियोगिताओं की एक शृंखला आयोजित की जाती है। दौसा का यह आयोजन उसी नियमित प्रक्रिया की प्रांतीय कड़ी है, जिसका उद्देश्य आगामी राज्य व राष्ट्रीय मेलों के लिए श्रेष्ठ प्रतिभागियों का चुनाव करना है। सवाल-जवाब 1. दौसा में आयोजित इस विज्ञान मेले का मुख्य उद्देश्य क्या था? इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान व गणित के प्रति रुचि बढ़ाना और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना था। 2. इस मेले में कुल कितने विद्यार्थियों और जिलों ने भाग लिया? इस तीन दिवसीय मेले में जयपुर प्रांत के 12 जिलों से आए करीब 500 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। 3. प्रदर्शनी में कौन-से मॉडल प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहे? चंद्रयान-3 मिशन से प्रेरित मॉडल तथा भविष्य की नगरीय व्यवस्था को दर्शाने वाला 'फ्यूचर स्मार्ट सिटी-2050' मॉडल मुख्य आकर्षण रहे। 4. दिव्यांगजनों की सहायता के लिए विद्यार्थियों ने क्या नवाचार प्रस्तुत किए? विद्यार्थियों ने दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक और स्मार्ट ग्लासेस जैसे तकनीकी मॉडल पेश किए। 5. दौसा मेले में चयनित प्रतिभागी आगे कहां भाग लेंगे? चयनित विद्यार्थी 2 से 4 नवंबर तक ब्यावर में होने वाले राज्य स्तरीय विज्ञान मेले में और उसके बाद 26 नवंबर से गोरखपुर में राष्ट्रीय मेले में भाग लेंगे। https://trendkia.com/rajasthan/dausa-men-vijnana-mele-ka-jalava-skuli-chhatron-ne-pesha-kie-bhavishya-ke-smarta-shahara-aura-chandrayaan-3-se-jure-navachara-42581 TrendKia — Har trend, sabse pehle.