# दौसा निकाय चुनाव के चौंकाने वाले आंकड़े, शून्य से लेकर एक वोट के अंतर तक का रोमांच

> दौसा जिले के निकाय चुनाव परिणामों में कई अनोखी और दिलचस्प कहानियां सामने आई हैं। कहीं किसी प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं मिला तो किसी को महज एक वोट से संतोष करना पड़ा। इसके अलावा एक वार्ड में हार-जीत का फैसला भी सिर्फ एक वोट के अंतर से हुआ।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/dausa-nikaya-chunava-ke-chaunkane-vale-ankare-shunya-se-lekara-eka-vota-ke-antara-taka-ka-romancha-32365 · **Language:** Hindi
**Tags:** दौसा निकाय चुनाव, बांदीकुई नगर पालिका, दौसा नगर परिषद, एक वोट से जीत, शून्य वोट, राजस्थान निकाय चुनाव

स्थानीय चुनावों के दौरान कई बार ऐसे परिणाम सामने आते हैं जो आम लोगों को पूरी तरह हैरान कर देते हैं। राजस्थान के दौसा जिले से भी कुछ ऐसे ही अनोखे आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा बटोरी है। चुनाव मैदान में ताल ठोकने वाले कुछ उम्मीदवारों को जहां एक भी वोट हासिल नहीं हुआ, वहीं कुछ ऐसे भी रहे जिन्हें अपनी झोली में केवल एक वोट मिलने से संतोष करना पड़ा। इसके विपरीत एक अन्य वार्ड में दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला इतना कड़ा था कि जीत और हार का फैसला सिर्फ एक वोट के अंतर पर आकर ठहर गया। इन सभी दिलचस्प मामलों ने चुनावी राजनीति की अप्रत्याशित प्रकृति को एक बार फिर सबके सामने ला दिया है।

## दौसा नगर परिषद में बसपा प्रत्याशी को मिले शून्य वोट
दौसा नगर परिषद के वार्ड संख्या 37 का चुनावी परिणाम सबसे अलग और दुर्लभ श्रेणी में गिना जा रहा है। इस वार्ड से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कालूराम को एक भी मतदाता का समर्थन नहीं मिला। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक उनके खाते में शून्य वोट दर्ज किए गए। मैदान में उतरने के बावजूद जब किसी भी व्यक्ति ने उनके पक्ष में ईवीएम का बटन नहीं दबाया, तो यह स्थिति चर्चा का विषय बन गई। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसा नजारा बेहद कम देखने को मिलता है, जहां किसी प्रमुख दल के उम्मीदवार को शून्य मतों पर ही संतोष करना पड़ जाए।

## बांदीकुई में कांग्रेस उम्मीदवार के खाते में आया सिर्फ एक मत
दूसरा हैरान करने वाला मामला बांदीकुई नगर पालिका के वार्ड संख्या 37 से प्रकाश में आया। यहां से कांग्रेस पार्टी की टिकट पर मैदान में उतरीं इंदिरा को मतदाताओं की तरफ से केवल एक वोट मिला। जहां बाकी प्रत्याशियों के पक्ष में सैकड़ों लोगों ने मतदान किया, वहीं कांग्रेस उम्मीदवार को महज एक वोट मिलने से हर कोई अचरज में पड़ गया। यह परिणाम इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय चुनावों में कई बार मजबूत राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को भी किस तरह की अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करना पड़ जाता है।

## एक वोट के अंतर से तय हुआ बांदीकुई के वार्ड 40 का ताज
इन सबसे अलग बांदीकुई नगर पालिका के वार्ड संख्या 40 का मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला रहा। यहाँ दो निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच मुख्य मुकाबला था, जिसमें सुशीला देवी ने अनीता देवी को सिर्फ एक वोट के अंतर से शिकस्त दी। मतगणना पूरी होने पर सुशीला देवी को कुल 229 वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी अनीता देवी के पक्ष में 228 वोट पड़े। इस मामूली से अंतर ने यह साबित कर दिया कि स्थानीय चुनावों में एक-एक वोट कितना कीमती होता है। इसी वार्ड में भारतीय जनता पार्टी की रेखा जाट तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि कांग्रेस की सविता ने चौथा स्थान हासिल किया। अंततः एक वोट के इस मामूली अंतर ने वार्ड की पूरी राजनीतिक तस्वीर ही बदल दी और सुशीला देवी ने पार्षद पद पर कब्जा जमा लिया।

## लोकतंत्र में एक-एक वोट का बढ़ता महत्व
दौसा जिले के इन तमाम परिणामों को अगर एक साथ देखा जाए तो चुनावी राजनीति के कई अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं। एक तरफ जहाँ शून्य वोट पाने वाले उम्मीदवार का मामला है, तो दूसरी तरफ एक वोट पाने वाली कांग्रेस उम्मीदवार का जिक्र है और अंत में एक वोट से जीत हासिल करने वाली पार्षद का उदाहरण सामने है। ये सभी आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि चुनावी समर में एक-एक मत की क्या अहमियत होती है। किसी भी मतदाता की एक पसंद इतिहास बदल सकती है और किसी की बेरुखी उम्मीदवार को शून्य पर ला सकती है।

## इसका आप पर असर
स्थानीय निकाय चुनावों के ये परिणाम यह दर्शाते हैं कि हर एक मतदाता का वोट कितना निर्णायक साबित हो सकता है।

- **भारत में:** स्थानीय निकाय स्तर के चुनावों में कई बार बेहद कम अंतर से हार-जीत तय होती है, जिससे यह संदेश मिलता है कि मतदान का अधिकार कितना महत्वपूर्ण है।
- **दौसा में:** दौसा और बांदीकुई के इन वार्ड परिणामों से स्थानीय मतदाताओं और राजनीतिक दलों में यह चर्चा तेज हो गई है कि प्रचार अभियान के दौरान एक-एक कार्यकर्ता की सक्रियता और हर एक वोट कितना असर डाल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
स्थानीय चुनावों में इस तरह के अनोखे आंकड़े मतदाताओं की व्यक्तिगत पसंद और राजनीतिक समीकरणों के कारण सामने आते हैं।

- **स्थानीय समीकरण:** निकाय चुनाव अक्सर छोटे क्षेत्रों और व्यक्तिगत संपर्कों के आधार पर लड़े जाते हैं, जहाँ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय मुद्दे बड़े दलों के प्रभाव पर भारी पड़ जाते हैं।
- **कम अंतर के मुकाबले:** वार्ड स्तर पर मतदाताओं की कुल संख्या कम होने के कारण कुछ सौ वोटों में ही पूरा मुकाबला सिमट जाता है, जिससे हार-जीत का अंतर घटकर महज एक वोट तक पहुँच जाता है।
- **वोटों का बिखराव:** कई निर्दलीय और दलगत उम्मीदवारों के मैदान में होने के कारण मतों का विभाजन इस तरह होता है कि कुछ उम्मीदवारों का खाता भी नहीं खुल पाता।

## सवाल-जवाब

### 1. दौसा नगर परिषद के वार्ड 37 में किस प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं मिला?
इस वार्ड से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार कालूराम को एक भी वोट नहीं मिला।

### 2. बांदीकुई नगर पालिका के वार्ड 37 में कांग्रेस उम्मीदवार को कितने वोट मिले?
कांग्रेस उम्मीदवार इंदिरा को इस वार्ड में केवल एक वोट मिला।

### 3. बांदीकुई के वार्ड 40 में चुनाव किसने जीता?
निर्दलीय उम्मीदवार सुशीला देवी ने वार्ड 40 का चुनाव जीता।

### 4. बांदीकुई के वार्ड 40 में हार-जीत का अंतर कितना था?
इस वार्ड में जीत-जीत का फैसला महज एक वोट के अंतर से हुआ।

### 5. बांदीकुई के वार्ड 40 में सुशीला देवी को कुल कितने वोट मिले?
सुशीला देवी को कुल 229 वोट मिले।

### 6. बांदीकुई के वार्ड 40 में दूसरे स्थान पर कौन रहीं?
अनीता देवी को 228 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहीं।

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