धनतेरस पर कीमती धातुओं के अलावा घर लाएं ये पांच वस्तुएं, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा धनतेरस पर सोने और चांदी के अलावा झाड़ू, नमक, साबुत धनिया, पीतल और कौड़ियां खरीदना भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का आगाज़ धनतेरस के दिन से हो जाता है। राजस्थान के करौली और हिंडौन क्षेत्र सहित देश भर में इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व है। अमूमन लोग इस पावन अवसर पर सोने और चांदी के आभूषण या धातु के नए बर्तन खरीदना पसंद करते हैं। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कई ऐसी वस्तुएं भी मौजूद हैं, जिनका आर्थिक मूल्य भले ही अधिक न हो, लेकिन आध्यात्मिक और पारंपरिक दृष्टि से उन्हें घर लाना बेहद कल्याणकारी माना गया है। हिंडौन के ज्योतिषाचार्य पंडित धीरज शर्मा के मुताबिक, आवश्यक नहीं है कि हर कोई महंगी धातुएं ही खरीदे। सामर्थ्य के अनुसार कुछ सामान्य वस्तुएं खरीदकर भी घर में सुख, शांति और समृद्धि का स्वागत किया जा सकता है। धार्मिक परंपराओं में बताई गई ऐसी पांच वस्तुएं मां लक्ष्मी को प्रिय मानी जाती हैं और धनतेरस पर इन्हें घर लाना शुभ फल देता है। झाड़ू: दरिद्रता दूर करने और मां लक्ष्मी के वास का प्रतीक धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को माता लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है। घर की साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़ी होने के कारण इसका संबंध सीधे तौर पर दरिद्रता के निवारण से है। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, धनतेरस के दिन एक नई झाड़ू खरीदकर घर में प्रवेश कराना उत्तम फलदायी होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन झाड़ू लाने से घर से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और मां लक्ष्मी का घर में स्थाई वास सुनिश्चित होता है। नमक: नकारात्मकता मिटाकर वातावरण को शुद्ध करने का जरिया रसोई का सबसे साधारण घटक दिखने वाला नमक भी धनतेरस के दिन विशेष महत्व रखता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नमक घर के भीतर फैली नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने में बेहद असरदार साबित होता है। इस दिन नया नमक खरीदने की परंपरा है। इसके अलावा, धनतेरस और दीपावली के मौके पर कई परिवारों में पानी में नमक डालकर फर्श पर पोछा लगाने का नियम है। माना जाता है कि इस उपाय से पूरे आवास की आबोहवा पवित्र, सकारात्मक और दोषमुक्त बन जाती है। साबुत धनिया: पूजन में अर्पित करने से बढ़ेगा वैभव धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने की भी पुरानी मान्यता है। धार्मिक अनुष्ठानों में साबुत धनिया को समृद्धि, ऐश्वर्य और पारिवारिक सुख का प्रतीक माना जाता है। दीपावली की रात होने वाले मुख्य लक्ष्मी पूजन के दौरान इस साबुत धनिये को माता के चरणों में अर्पित करने का शास्त्रीय विधान है। इसी कारण श्रद्धालु धनतेरस के दिन धनिया खरीदकर उसे आगामी पूजन के लिए सुरक्षित रख लेते हैं। पीतल के बर्तन: छोटी सी वस्तु से भी मिलती है बरकत सोना और चांदी खरीदना यदि बजट से बाहर हो, तो पीतल की खरीदारी को एक उत्तम विकल्प माना जाता है। धनतेरस के दिन पीतल के बर्तन या दैनिक उपयोग की वस्तुएं घर लाना मंगलकारी माना गया है। लोग अपनी आर्थिक क्षमता के मुताबिक पीतल की थाली, लोटा या कोई अन्य पात्र खरीद सकते हैं। मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पीतल की एक छोटी सी चम्मच भी इस दिन खरीदता है, तो उससे भी घर में बरकत और खुशहाली का विस्तार होता है। कौड़ियां: व्यापारिक परंपरा से जुड़ा मां लक्ष्मी का पूजन प्राचीन काल में विनिमय और व्यापार के प्रमुख साधन के रूप में पहचानी जाने वाली कौड़ियों का धार्मिक महत्व आज भी अटूट है। हिंडौन के ज्योतिषाचार्य पंडित धीरज शर्मा बताते हैं कि कौड़ियों को धन और समृद्धि का प्रत्यक्ष प्रतीक माना गया है। धनतेरस के दिन बाजार से 7 या 11 की संख्या में कौड़ियां खरीदकर घर लाने की रीत है। बाद में इन कौड़ियों को मां लक्ष्मी के पूजन में शामिल किया जाता है, जिससे आर्थिक संपन्नता और धन वृद्धि के द्वार खुलते हैं। इसका आप पर असर धनतेरस पर महंगे गहनों का बजट न होने पर भी श्रद्धालु कम खर्च में पारंपरिक अनुष्ठानों का पूरा लाभ उठा सकते हैं। • बजट प्रबंधन: सोने या चांदी की महंगी खरीदारी के दबाव के बिना आम नागरिक सस्ती वस्तुएं चुन सकते हैं। नमक, साबुत धनिया या झाड़ू जैसी आवश्यक चीजें बहुत कम कीमत में पारंपरिक महत्व पूरा करती हैं। • धार्मिक तैयारी: पूजन सामग्री का प्रबंध समय रहते करने से त्योहार की व्यवस्था व्यवस्थित रहती है। धनतेरस के दिन ही 7 या 11 कौड़ियां और साबुत धनिया खरीदकर रख लेने से दीपावली पूजन सरल हो जाता है। • घर की स्वच्छता: धनतेरस पर झाड़ू और नमक का उपयोग केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। नमक के पानी से घर में पोछा लगाने और नई झाड़ू के इस्तेमाल से घर का वातावरण स्वच्छ और कीटाणुरहित बनता है। • करौली और हिंडौन में: स्थानीय बाजारों में इन पारंपरिक वस्तुओं की मांग से छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिलता है। क्षेत्र के निवासी नजदीकी दुकानों से अपनी सामर्थ्य के अनुसार पीतल के बर्तन और पूजन सामग्री खरीद सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ धनतेरस पर विशिष्ट वस्तुएं खरीदने की परंपरा केवल आधुनिक बाजार की प्रवृत्ति नहीं, बल्कि प्राचीन सांस्कृतिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। • सांस्कृतिक प्रतीक: प्राचीन समाज में झाड़ू को स्वच्छता का मुख्य साधन और कौड़ियों को मुद्रा माना जाता था। स्वच्छता से दरिद्रता दूर होने और विनिमय के माध्यम से वैभव जुड़ने के कारण इन्हें पूजनीय स्थान मिला। • धार्मिक विधान: दीपावली की पूजा में प्राकृतिक और पारंपरिक तत्वों को अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों में साबुत धनिया और पीतल को सात्विक व समृद्धिदायक माना गया है, जिससे यह परंपरा सदियों से निरंतर जारी है। • सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह: वास्तु और ज्योतिष में नमक को घर की अशुद्धियों को सोखने वाला तत्व माना गया है। त्योहारों पर नकारात्मकता समाप्त कर नए संकल्प लेने के लिए नमक से जुड़े अनुष्ठान विकसित हुए। सवाल-जवाब 1. धनतेरस पर सोने और चांदी के अलावा कौन सी चीजें खरीदना शुभ माना गया है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर झाड़ू, नमक, साबुत धनिया, पीतल के बर्तन और कौड़ियां खरीदना बेहद शुभ होता है। 2. धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने का क्या महत्व है? झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। इसे घर लाने से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा सुख-शांति आती है। 3. नमक खरीदने और उसके पानी से पोछा लगाने की क्या मान्यता है? नमक घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक होता है। इसके पानी से पोछा लगाने से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बनता है। 4. धनतेरस पर खरीदी गई कौड़ियों की संख्या कितनी होनी चाहिए? मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन 7 या 11 कौड़ियां खरीदकर उन्हें दीपावली पर मां लक्ष्मी के पूजन में शामिल करना चाहिए। 5. साबुत धनिया को पूजन में क्यों इस्तेमाल किया जाता है? साबुत धनिया को सुख, वैभव और आर्थिक संपन्नता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे लक्ष्मी पूजन में अर्पित किया जाता है। https://trendkia.com/rajasthan/dhanteras-para-kimati-dhatuon-ke-alava-ghara-laen-ye-pancha-vastuen-barasegi-man-lakshmi-ki-kripa-56819 TrendKia — Har trend, sabse pehle.