धौलपुर में बदलेगी सिंचाई की तस्वीर, चंबल के पानी से सिंचित होंगी हजारों हेक्टेयर जमीन धौलपुर लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना का काम अंतिम चरण में है, जिससे जिले के 256 गांवों को पानी मिलेगा। इस योजना पर 852 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई है। राजस्थान के धौलपुर जिले में एरिगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में धौलपुर लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना का काम लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद जिले के 256 गांवों को सिंचाई सुविधा मिलने का प्रस्ताव है। इसके तहत कुल 39,980 हेक्टेयर क्षेत्र में स्प्रिंकलर पद्धति के जरिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के तहत हर साल अक्टूबर से मार्च तक चंबल नदी से 6.54 क्यूमेक्स पानी लिफ्ट किए जाने की योजना है। पेयजल के लिए भी आरक्षित रहेगा पानी इस परियोजना के तहत केवल खेती पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है, बल्कि पीने के पानी का भी पूरा प्रबंध किया गया है। लिफ्ट किए जाने वाले कुल पानी में से 10 प्रतिशत हिस्सा विशेष तौर पर पेयजल के लिए आरक्षित रखा गया है। इससे जिले की एक बड़ी आबादी की पेयजल संबंधी जरूरतें भी पूरी होंगी। धौलपुर जिले की कई तहसीलों को इस योजना के दायरे में रखा गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत दूर करने में मदद मिलेगी। परियोजना के पूरी तरह धरातल पर उतरने के बाद क्षेत्र के भूजल स्तर और कृषि विकास दोनों को बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। विभिन्न तहसीलों के इतने गांवों को मिलेगा सीधा लाभ परियोजना के दायरे में धौलपुर जिले की चार प्रमुख तहसीलों के गांव शामिल किए गए हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक धौलपुर तहसील के 65 गांवों को सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा मनियां तहसील के 83 गांव, राजाखेड़ा के 83 गांव और सैपऊ तहसील के 25 गांव इस परियोजना में शामिल हैं। इस तरह कुल 256 गांवों के कृषि क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने की रूपरेखा तैयार की गई है। आधुनिक स्प्रिंकलर पद्धति से पानी मिलने के कारण किसानों को पानी की बर्बादी रोके बिना अधिक से अधिक क्षेत्रफल में फसल उगाने का अवसर मिलेगा। 852 करोड़ रुपए की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति इस पूरी परियोजना के लिए सरकार की तरफ से 852 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस बजट में से अब तक 716.45 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा चुकी है। निर्माण कार्य अभी तेजी से प्रगतिरत है और इसका करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। बचा हुआ तकनीकी और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद परियोजना के संचालन और पानी की आपूर्ति के चरणों को आगे बढ़ाया जाएगा। चंबल नदी से पानी को लिफ्ट करने की व्यवस्था इस पूरी परियोजना की सबसे मुख्य कड़ी है, जिसके लिए विशेष ढांचा तैयार किया गया है। करीब एक लाख आबादी को मिलेगा सीधा फायदा परियोजना का दायरा केवल कृषि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अंचल की बड़ी आबादी लाभान्वित होगी। आंकड़ों के अनुसार इस परियोजना से करीब एक लाख आबादी को फायदा मिलने की उम्मीद है। धौलपुर, मनियां, राजाखेड़ा और सैपऊ तहसीलों के चिन्हित गांवों के निवासियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। जिन इलाकों में अब तक सिंचाई के साधन बेहद सीमित थे, वहां चंबल का पानी पहुंचने से खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। किसानों की आय में सुधार होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इससे एक नई मजबूती मिलने की संभावना है। इसका आप पर असर धौलपुर लिफ्ट सिंचाई परियोजना के पूरा होने से स्थानीय किसानों और ग्रामीण आबादी के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: राजस्थान जैसे सूखा प्रभावित और जल सीमित क्षेत्रों में सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार देश में कृषि उत्पादन और ग्रामीण जल सुरक्षा को बढ़ावा देता है। • धौलपुर में: धौलपुर, मनियां, राजाखेड़ा और सैपऊ तहसीलों के 256 गांवों के किसानों को स्प्रिंकलर पद्धति से पानी मिलने से फसलों की पैदावार में सुधार होगा। • पेयजल उपलब्धता: कुल लिफ्ट किए जाने वाले पानी का 10 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट से बड़ी राहत मिलेगी। • आर्थिक लाभ: लगभग 39,980 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होने से स्थानीय किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। • जनसंख्या लाभ: जिले की लगभग एक लाख आबादी को इस परियोजना के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। ऐसा क्यों हुआ धौलपुर जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और चंबल नदी के पानी के सदुपयोग के लिए इस परियोजना को अमलीजामा पहनाया गया है। • भौगोलिक जरूरत: धौलपुर जिले के कई क्षेत्रों में पारंपरिक सिंचाई के साधन बेहद सीमित थे, जिसके कारण किसानों को फसल उगाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। • जल संसाधन प्रबंधन: चंबल नदी के पानी को अक्टूबर से मार्च के बीच लिफ्ट करके कृषि और पेयजल दोनों जरूरतों को एक साथ पूरा करने की योजना बनाई गई है। • सरकारी निवेश: कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने इस परियोजना पर 852 करोड़ रुपए की भारी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। • दक्षता बढ़ाना: पारंपरिक बाढ़ सिंचाई के मुकाबले स्प्रिंकलर पद्धति का उपयोग करके पानी की बर्बादी को रोकने और अधिकतम क्षेत्र को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है। सवाल-जवाब 1. धौलपुर लिफ्ट सिंचाई परियोजना का कितना काम पूरा हो चुका है? इस परियोजना का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष तकनीकी काम अंतिम चरण में हैं। 2. इस परियोजना के तहत कुल कितने गांवों को लाभ मिलेगा? परियोजना के पूरा होने के बाद जिले के कुल 256 गांवों को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का प्रस्ताव है। 3. इस योजना पर कुल कितनी लागत स्वीकृत की गई है? सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए 852 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 716.45 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। 4. चंबल नदी से हर साल कितना पानी लिफ्ट किया जाएगा? योजना के मुताबिक हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच चंबल नदी से 6.54 क्यूमेक्स पानी लिफ्ट किए जाने की योजना है। 5. पेयजल के लिए कितना पानी आरक्षित रखा गया है? लिफ्ट किए जाने वाले कुल पानी में से 10 प्रतिशत हिस्सा पेयजल जरूरतों के लिए आरक्षित रखा गया है। 6. किस सिंचाई पद्धति का उपयोग किया जाएगा? खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए आधुनिक स्प्रिंकलर पद्धति का उपयोग किया जाएगा। 7. इस परियोजना से कितनी आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है? परियोजना पूरी होने के बाद जिले की करीब एक लाख आबादी को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। 8. किन-किन तहसीलों के गांव इस परियोजना के दायरे में हैं? धौलपुर तहसील के 65, मनियां के 83, राजाखेड़ा के 83 और सैपऊ तहसील के 25 गांव इस परियोजना के दायरे में शामिल हैं। https://trendkia.com/rajasthan/dhaulapura-men-badalegi-sinchai-ki-tasvira-chnbala-ke-pani-se-sinchita-hongi-hajaron-hekteyara-jamina-39224 TrendKia — Har trend, sabse pehle.