धौलपुर के मचकुंड धाम में श्रीकृष्ण के पावन चरण चिह्नों का जीर्णोद्धार, जन्माष्टमी से कर सकेंगे अलौकिक दर्शन धौलपुर के प्रसिद्ध मचकुंड धाम में भगवान श्रीकृष्ण के चरण चिह्नों वाली प्राचीन शिला और गुफा का संरक्षण कार्य तेजी से किया जा रहा है। जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन और महाआरती का आयोजन होगा। राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल धौलपुर में स्थित मचकुंड धाम को एक भव्य और विशाल धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। तीर्थों के भांजे के नाम से प्रख्यात इस पवित्र स्थल की पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन शिला को संवारने का काम तेजी से चल रहा है। इस ऐतिहासिक शिला के बारे में मान्यता है कि इस पर भगवान श्रीकृष्ण के पावन चरण चिह्न मौजूद हैं। आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को इन दिव्य चरण चिह्नों के सुगम दर्शन कराने के उद्देश्य से इस स्थल और उससे जुड़ी गुफा का संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। पुरातत्व विभाग की मदद से हो रहा जीर्णोद्धार लाडली जगमोहन मंदिर के महंत कृष्णदास ने इस विकास कार्य की जानकारी साझा करते हुए बताया कि अब तक यह पवित्र शिला उपेक्षित और सामान्य स्थिति में पड़ी हुई थी। हालांकि, अब स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग के संयुक्त प्रयासों से इस पावन शिला को सुरक्षित करने के साथ-साथ आसपास के पूरे परिसर का कायाकल्प किया जा रहा है। शिला के ठीक नीचे स्थित प्राचीन पौराणिक गुफानुमा स्थान की विशेष रूप से गहन सफाई कराई गई है। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इस पूरे गुफा परिसर को दिव्य और अलौकिक रूप से सजाया जाएगा। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और भव्य महाआरती का आयोजन भी किया जाएगा। द्वापर युग और कालयवन के भस्म होने का पौराणिक इतिहास मचकुंड धाम का संबंध द्वापर युग की अत्यंत महत्वपूर्ण पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। श्रीमद्भागवत पुराण तथा विष्णु पुराण में वर्णित प्रसंगों के अनुसार, द्वापर युग में जब अत्याचारी असुर कालयवन ने मथुरा पर आक्रमण किया था, तब भगवान श्रीकृष्ण रणछोड़कर कालयवन को छकाते हुए मचकुंड धाम की इसी प्राचीन गुफा में आ पहुंचे थे। वहां त्रेता युग के इक्ष्वाकुवंशी राजा मुचकुंद घोर निद्रा में विश्राम कर रहे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीला से अपना पीतांबर विश्राम कर रहे राजा मुचकुंद के ऊपर डाल दिया और स्वयं छिप गए। पीछा करते हुए आया कालयवन राजा मुचकुंद को श्रीकृष्ण समझकर नींद से जगाने लगा और उन्हें लात मार दी। देवराज इंद्र द्वारा राजा मुचकुंद को दिए गए वरदान के अनुसार, जैसे ही राजा ने आंखें खोलकर कालयवन को देखा, उनकी दृष्टि पड़ते ही कालयवन वहीं जलकर भस्म हो गया। धार्मिक मान्यता है कि इस अलौकिक घटनाक्रम के दौरान जब भगवान श्रीकृष्ण के चरण इस पहाड़ी शिला पर पड़े, तो उनके पवित्र पदचिह्न इस पर सदा के लिए अंकित हो गए। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा अभूतपूर्व बढ़ावा धौलपुर का मचकुंड धाम सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और हर साल देश भर से लाखों श्रद्धालु यहां सरोवर में आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। इस प्राचीन गुफा तथा चरण चिह्न वाली पावन शिला का वैज्ञानिक एवं पारंपरिक विधियों से संरक्षण होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए नियमित दर्शन प्रारंभ किए जा रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय धार्मिक पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के व्यापार और सांस्कृतिक महत्व को भी नई ऊंचाई हासिल होगी। इसका आप पर असर धौलपुर स्थित मचकुंड धाम में प्राचीन शिला और गुफा के सौंदर्यीकरण से देश भर के श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए नई सुविधाएं तैयार हो रही हैं। • भारत में: देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं को जन्माष्टमी से भगवान श्रीकृष्ण के पौराणिक चरण चिह्नों के प्रत्यक्ष दर्शन की सुगम सुविधा मिलेगी। इससे धार्मिक यात्रा की योजना बना रहे तीर्थयात्रियों के लिए एक नया और सुव्यवस्थित गंतव्य उपलब्ध होगा। • धौलपुर में: परिसर के जीर्णोद्धार और बढ़ते पर्यटन से स्थानीय छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और परिवहन प्रदाताओं के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को स्थाई संरक्षण प्राप्त होगा। सवाल-जवाब 1. मचकुंड धाम कहां स्थित है और इसे किस नाम से जाना जाता है? मचकुंड धाम राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित है और इसे सभी तीर्थों के भांजे के रूप में जाना जाता है। 2. मचकुंड धाम में किन चरण चिह्नों का दर्शन शुरू हो रहा है? यहां एक पहाड़ी पर स्थित शिला पर भगवान श्रीकृष्ण के पावन चरण चिह्न अंकित हैं, जिनका दर्शन जन्माष्टमी से सुलभ होगा। 3. इस स्थल का द्वापर युग से क्या संबंध है? पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने असुर कालयवन को इसी गुफा में पहुंचाया था, जहां राजा मुचकुंद की दृष्टि से कालयवन भस्म हुआ था। 4. संरक्षण कार्य किसके सहयोग से किया जा रहा है? यह जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त सहयोग से कराया जा रहा है। https://trendkia.com/rajasthan/dholpur-ke-machkund-dham-men-shri-krishna-ke-pavana-charana-chihnon-ka-jirnoddhara-janmashtami-se-kara-sakenge-alaukika-darshana-26783 TrendKia — Har trend, sabse pehle.