धौलपुर के सैपऊ में 101 लीटर गंगाजल लेकर निकले कांवड़ियों संग चले सद्दाम खान, सावन में पेश की सामाजिक सौहार्द की नजीर राजस्थान के धौलपुर जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली, जहां सद्दाम खान नामक युवक 101 लीटर गंगाजल की यात्रा में शामिल होकर मंदिर तक साथ चला। राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित सैपऊ उपखंड से सावन के पवित्र महीने के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य सामने आया है। यहां आयोजित कांवड़ यात्रा में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सम्मान और भाईचारे का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। कुकरा गांव के युवाओं द्वारा सोरों गंगाजी से 101 लीटर गंगाजल लाकर ऐतिहासिक शिव मंदिर में अभिषेक करने की इस यात्रा में एक मुस्लिम युवक, सद्दाम खान, पूरी श्रद्धा भावना से कांवड़ियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चले। सोरों गंगाजी से 101 लीटर जल लेकर शुरू हुई यात्रा कांवड़ यात्रा की शुरुआत कुकरा गांव के निवासी राहुल, सुखवीर और सौरभ ने की थी। ये तीनों युवा सोरों गंगाजी से 101 लीटर पवित्र गंगाजल एक बड़ी कांवड़ में भरकर सैपऊ के लिए रवाना हुए थे। लंबी दूरी तय करने के दौरान मार्ग में अन्य स्थानीय युवा भी इस धार्मिक अभियान से जुड़ते चले गए। रास्ते में कुलदीप, मनीष, गौरव, सोनू, मोनु, पंकज और गीतम जैसे युवाओं ने इस यात्रा में भाग लिया और कांवड़ संभालने में सहयोग किया। सद्दाम खान का जुड़ाव और 'हर-हर महादेव' के जयकारे इस पूरी यात्रा का सबसे विशेष और ध्यानाकर्षण योग्य पहलू मांकरा गांव के रहने वाले सद्दाम खान का शामिल होना रहा। सद्दाम खान यात्रा के आधे रास्ते में कांवड़ियों की टोली से जुड़े और पूरे समर्पण के साथ उनके साथ पैदल चलने लगे। पूरे सफर के दौरान सद्दाम खान लगातार 'हर-हर महादेव' का जयघोष करते रहे। रामकिशन परमार के अनुसार, सद्दाम की इस गहरी आस्था और सक्रिय भागीदारी ने न केवल कांवड़ियों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि रास्ते में मौजूद हर देखने वाले का दिल भी जीत लिया। ऐतिहासिक शिव मंदिर में जलाभिषेक और प्रार्थना सावन महीने के पहले सोमवार के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं की यह टोली सैपऊ स्थित ऐतिहासिक महादेव शिव मंदिर पहुंची। मंदिर के मुख्य प्रांगण में 101 लीटर गंगाजल से भगवान शिव का विधिवत अभिषेक किया गया। जलाभिषेक के पश्चात वहां मौजूद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से देश की प्रगति, शांति, समृद्धि और सामाजिक एकता के लिए प्रार्थना की। सैपऊ उपखंड के मुख्य बाजार से जब यह यात्रा गुजरी, तो स्थानीय निवासियों ने जगह-जगह कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की और उनका फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। आपसी सौहार्द और इंसानियत की अनोखी नजीर यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने मिलकर इस यात्रा का स्वागत किया और सद्दाम खान की इस पहल की दिल खोलकर तारीफ की। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस यात्रा ने यह संदेश साफ कर दिया है कि इंसानियत और आपसी प्रेम किसी भी धार्मिक सीमा से परे होते हैं। सैपऊ की यह कांवड़ यात्रा अब केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न रहकर सामाजिक सद्भाव की एक अमर मिसाल बन चुकी है। इसका आप पर असर • भारत भर में: यह घटना समाज में विभिन्न धर्मों के बीच आपसी सौहार्द, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने की प्रेरणा देती है। • धौलपुर (राजस्थान) में: स्थानीय समुदायों के बीच परस्पर विश्वास मजबूत होगा और धार्मिक आयोजनों में सामाजिक सद्भाव बढ़ेगा। सवाल-जवाब 1. यह कांवड़ यात्रा कहां आयोजित की गई थी? यह यात्रा राजस्थान के धौलपुर जिले के सैपऊ उपखंड में आयोजित की गई थी। 2. सोरों गंगाजी से कांवड़ यात्रा किसने शुरू की थी? कुकरा गांव के निवासी राहुल, सुखवीर और सौरभ ने सोरों गंगाजी से यह यात्रा शुरू की थी। 3. कांवड़ में कितना गंगाजल लाया गया था? कांवड़ यात्रा के दौरान 101 लीटर पवित्र गंगाजल लाया गया था। 4. यात्रा में शामिल होने वाले मुस्लिम युवक कौन थे? मांकरा गांव निवासी सद्दाम खान यात्रा के आधे रास्ते में कांवड़ियों की टोली से जुड़े थे। 5. गंगाजल किस मंदिर में अर्पित किया गया? सैपऊ स्थित ऐतिहासिक महादेव शिव मंदिर में सावन के पहले सोमवार को जल अर्पित किया गया। प्रेरणा और सबक • मानवता सबसे ऊपर: इंसानियत और आपसी सम्मान किसी भी धार्मिक पहचान या सीमा से बड़े होते हैं। • सकारात्मक पहल: समाज में भाईचारे का संदेश देने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से छोटे कदम भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। • साझा सांस्कृतिक जुड़ाव: दूसरों की आस्था और परंपराओं का सम्मान करने से सामाजिक ताना-बाना मजबूत होता है। https://trendkia.com/rajasthan/dholpur-ke-saipau-men-101-litara-gngajala-lekara-nikale-kanvariyon-snga-chale-saddam-khan-savana-men-pesha-ki-samajika-sauharda-ki-13506 TrendKia — Har trend, sabse pehle.