# धौलपुर के सरमथुरा में चार फीट लंबी लौकी देख हैरान हुए लोग, किसान मदन मोहन कुशवाह की जैविक खेती की हो रही तारीफ

> राजस्थान के धौलपुर जिले के सरमथुरा मंडी में चार फीट लंबी जैविक लौकी पहुंचने पर लोगों में भारी कौतूहल देखा गया, जहां किसान मदन मोहन कुशवाह की देशी खाद आधारित खेती चर्चा का विषय बन गई।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/dholpur-ke-sarmthura-men-chara-phita-lnbi-lauki-dekha-hairana-hue-loga-kisana-madan-mohan-kushwah-ki-jaivika-kheti-ki-ho-rahi-tari-42535 · **Language:** Hindi
**Tags:** धौलपुर, सरमथुरा, जैविक खेती, मदन मोहन कुशवाह, लौकी, सब्जी मंडी, राजस्थान

राजस्थान के धौलपुर जिले के सरमथुरा कस्बे की स्थानीय सब्जी मंडी में उस समय एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब वहां सामान्य से कई गुना अधिक लंबी एक लौकी बिक्री के लिए पहुंची। लगभग चार फीट लंबाई वाली इस विशालकाय लौकी को देखते ही मंडी में खरीदारों और व्यापारियों की भारी भीड़ जमा हो गई। आमतौर पर दैनिक बाजारों में आधा फीट से लेकर एक फीट तक की लौकियां ही बिकती नजर आती हैं, लेकिन इतनी असाधारण लंबाई वाली सब्जी सामने आते ही पूरा बाजार परिसर कौतूहल के केंद्र में बदल गया।

## मंडी में उमड़ी देखने वालों की भीड़, लोगों ने ली सेल्फी
सब्जी मंडी में जैसे ही यह चार फीट लंबी लौकी पहुंची, हर किसी की नजरें उसी पर टिक गईं। वहां मौजूद ग्राहक और अन्य दुकानदार अपने काम छोड़कर इस अनोखी उपज को निहारने लगे। कई लोगों ने अपने हाथों में लौकी को उठाकर देखा और उसके साथ खड़े होकर सेल्फी खिंचवाई। इतना ही नहीं, बहुत से युवाओं और व्यापारियों ने अपने स्मार्टफोन से इस लंबी लौकी के वीडियो और तस्वीरें बनाईं और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया। पूरे दिन भर सरमथुरा के बाजार में इस खास सब्जी को देखने के लिए लोगों की आवाजाही लगातार बनी रही।

## बरईपुरा के किसान मदन मोहन कुशवाह के खेत में हुई पैदावार
यह विशालकाय लौकी किसी कृषि प्रदर्शनी या विशेष प्रतियोगिता के लिए नहीं लाई गई थी, बल्कि यह सरमथुरा क्षेत्र के बरईपुरा गांव निवासी किसान और सब्जी विक्रेता मदन मोहन कुशवाह के अपने खेत की प्राकृतिक उपज है। मदन मोहन नियमित रूप से अपने खेतों में हरी सब्जियां उगाते हैं और उन्हें तैयार करके बिक्री के लिए सरमथुरा मंडी लाते हैं। जब वे अपनी अन्य रोजमर्रा की सब्जियों के साथ इस लंबी लौकी को लेकर पहुंचे, तब उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी यह सामान्य फसल बाजार में इतनी बड़ी सनसनी बन जाएगी।

## रासायनिक खादों के बिना देशी खाद से की गई जैविक खेती
किसान मदन मोहन कुशवाह ने बताया कि वे अपने खेतों में लौकी के अलावा बैंगन, काशीफल, टमाटर, पालक और तोरई जैसी कई मौसमी सब्जियों की पैदावार करते हैं। उनकी खेती की सबसे अहम खासियत यह है कि वे किसी भी तरह के रासायनिक उर्वरकों या जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते। वे अपनी फसलों के पोषण के लिए पूरी तरह से पारंपरिक देशी खाद और जैविक विधियों पर निर्भर रहते हैं। नियमित देखरेख, पर्याप्त पानी और प्राकृतिक खाद के सही संतुलन के चलते ही उनके खेत की यह लौकी असामान्य रूप से बढ़कर लगभग चार फीट लंबी हो गई।

## इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल हुई अनूठी सब्जी
मंडी में खींची गई तस्वीरों और रिकॉर्ड किए गए वीडियो के ऑनलाइन साझा होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आ गया। लोग इस लंबी लौकी के आकार पर हैरानी जताते हुए किसान के प्रयासों की सराहना कर रहे हैं। मदन मोहन के लिए भले ही यह उनकी दैनिक कृषि का एक हिस्सा थी, लेकिन सरमथुरा मंडी में इसने लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। चार फीट लंबी इस फसल ने न केवल स्थानीय लोगों को आकर्षित किया, बल्कि बिना केमिकल के शुद्ध जैविक खेती के सकारात्मक परिणामों को भी सबके सामने उजागर किया है।

## इसका आप पर असर
यह घटना दिखाती है कि बिना रासायनिक खाद के शुद्ध जैविक विधि से भी उत्कृष्ट और भरपूर फसल उगाई जा सकती है।

- **भारत में:** किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके देशी खाद अपना सकते हैं, जिससे लागत घटती है और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है। उपभोक्ताओं के लिए भी केमिकल मुक्त सब्जियां स्वास्थ्य के लिहाज से अधिक सुरक्षित और लाभकारी हैं।
- **धौलपुर में:** सरमथुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के सब्जी उत्पादकों को जैविक कृषि अपनाने की प्रत्यक्ष प्रेरणा मिली है। स्थानीय खरीदारों में भी बिना कीटनाशक वाली स्थानीय फसलों के प्रति भरोसा और मांग बढ़ सकती है।
- **किसानों के लिए:** फसलों की नियमित देखभाल और देशी पोषण से उपज का आकार और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकते हैं। इससे बाजार में फसल को बेहतर दृश्यता और अच्छा ग्राहक प्रतिसाद मिलता है।
- **उपभोक्ताओं के लिए:** बाजार में प्राकृतिक रूप से उगाई गई सब्जियों की पहचान और उपयोग को बढ़ावा मिलता है। इससे लोग अपने दैनिक आहार में स्वस्थ खाद्य विकल्पों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित होते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह असामान्य चार फीट लंबी लौकी किसान द्वारा अपनाई गई शुद्ध जैविक कृषि पद्धति और फसलों की लगातार देखभाल का सीधा परिणाम है। खेत में देशी खाद के प्रयोग और संतुलित प्राकृतिक पोषण ने बेल को अतिरिक्त शक्ति दी, जिससे यह असामान्य आकार तक विकसित हो सकी।

- **जैविक खाद का प्रयोग:** किसान मदन मोहन कुशवाह ने खेत में किसी भी रासायनिक उर्वरक के बजाय केवल देशी गोबर की खाद का उपयोग किया। इस प्राकृतिक पोषण से मिट्टी को जरूरी पोषक तत्व मिले, जिससे फसल का विकास असाधारण रूप से अच्छा हुआ।
- **फसलों की नियमित देखरेख:** खेत में उगाई जाने वाली सब्जियों की समय पर छंटाई, सिंचाई और लगातार निगरानी की गई। इस प्रकार के ध्यान से बेल पर लगी लौकी बिना किसी रुकावट के लगातार बढ़ती रही।
- **विविध सब्जी उत्पादन:** किसान अपने खेत में बैंगन, टमाटर, पालक, काशीफल और तोरई जैसी कई फसलें उगाते हैं, जिससे खेत की मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता संतुलित बनी रहती है। यह अनुकूल वातावरण लौकी के असामान्य विकास में सहायक साबित हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. धौलपुर के सरमथुरा में लौकी की लंबाई कितनी थी?
सरमथुरा सब्जी मंडी में पहुंची इस अनोखी लौकी की लंबाई लगभग चार फीट थी।

### 2. यह चार फीट लंबी लौकी किस किसान के खेत में उगी है?
यह लौकी सरमथुरा के बरईपुरा निवासी किसान और सब्जी विक्रेता मदन मोहन कुशवाह के खेत में उगी है।

### 3. इस लौकी को उगाने के लिए किस प्रकार की खाद का उपयोग किया गया?
किसान मदन मोहन कुशवाह ने इसमें किसी भी रासायनिक खाद के बजाय पूरी तरह से देशी खाद और जैविक तरीकों का उपयोग किया था।

### 4. किसान मदन मोहन अपने खेत में लौकी के अलावा और कौन सी सब्जियां उगाते हैं?
वे अपने खेत में बैंगन, काशीफल, टमाटर, पालक और तोरई की खेती भी नियमित रूप से करते हैं।

### 5. बाजार में सामान्य तौर पर कितनी लंबी लौकी देखने को मिलती है?
बाजार में आमतौर पर आधा फीट से लेकर एक फीट तक लंबी लौकियां ही देखने को मिलती हैं।

## प्रेरणा और सबक
धौलपुर के किसान मदन मोहन कुशवाह का यह प्रयास दिखाता है कि पारंपरिक ज्ञान, कड़ी मेहनत और प्राकृतिक खेती से असाधारण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

- **देशी खाद की ताकत:** महंगी रासायनिक खादों पर निर्भर रहने के बजाय पारंपरिक देशी खाद से भी शानदार पैदावार ली जा सकती है।
- **लगन और नियमित देखभाल:** फसलों की रोजाना सही तरीके से देखभाल करने से सामान्य खेत की उपज भी असाधारण बन सकती है।
- **आत्मनिर्भर खेती:** अपनी ही जमीन पर कई तरह की सब्जियां उगाकर किसान अपनी लागत घटा सकते हैं और बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं।
- **प्राकृतिक तरीकों पर भरोसा:** बिना किसी कृत्रिम रसायन के पर्यावरण और स्वास्थ्य के अनुकूल खेती करना पूरी तरह संभव और व्यावहारिक है।

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