# धौलपुर में पंचायत चुनाव से पहले फूटा गुस्सा, सीवर के गंदे पानी में डूबी 300 बीघा जमीन

> धौलपुर की भैंसाख पंचायत में चुनाव की सुगबुगाहट के बीच ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर कड़ा रोष जताया है। करीब दो साल से शहर के सीवर का पानी खेतों में भरने से सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद हो रही है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/dholpur-men-pnchayata-chunava-se-pahale-phuta-gussa-sivara-ke-gnde-pani-men-dubi-300-bigha-jamina-43825 · **Language:** Hindi
**Tags:** धौलपुर, पंचायत चुनाव, समोला, भैंसाख, जलभराव, जल जीवन मिशन, राजस्थान

धौलपुर में आगामी पंचायत चुनावों की घोषणा होते ही ग्रामीण इलाकों में नई ग्राम सरकार को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी माहौल के बीच जब भैंसाख ग्राम पंचायत के भैंसाख और समोला गांवों में स्थानीय मुद्दों की पड़ताल की गई, तो बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों का दर्द खुलकर सामने आ गया। लगभग 4 हजार की आबादी तथा 2100 मतदाताओं वाले इन गांवों के निवासियों ने जल निकासी, बदहाल रास्तों, बिजली, शिक्षा और पेयजल संकट को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की है।

## सीवर के गंदे पानी से सैकड़ों बीघा कृषि भूमि तबाह
समोला गांव के किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट खेती का बर्बाद होना बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि धौलपुर शहर की तरफ से आने वाला सीवर का गंदा पानी उनके खेतों में लगातार भर रहा है। इस अनियंत्रित बहाव के चलते करीब 200 से 300 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। खेतों में पिछले लगभग दो साल से गंदा पानी जमा रहने के कारण कोई भी फसल नहीं उग पा रही है। बिना उपज के किसानों को लगातार भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। पीड़ित ग्रामीणों ने प्रशासनिक तंत्र से इस सीवर लाइन के पानी की समुचित निकासी कराने और खेतों में इसके प्रवेश पर अविलंब रोक लगाने की मांग की है।

## पेयजल टंकी अधूरी रहने से गहराया जल संकट
समोला और भैंसाख में पीने के पानी का संकट भी गंभीर रूप धारण कर चुका है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव में पानी की टंकी बनाई जा रही थी, लेकिन इसका निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। टंकी से जलापूर्ति चालू नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए काफी दूर-दराज के स्थानों से पानी ढोकर लाना पड़ता है। कई परिवारों को निजी समरसेबल बोरवेल का सहारा लेकर काम चलाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अधूरे पड़े निर्माण को तुरंत पूरा कराया जाए ताकि नल से नियमित शुद्ध पेयजल मिल सके।

## सड़कों पर कीचड़, नालियां न होने से रास्तों पर जमाव
गांव के भीतर आवागमन की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विभिन्न संपर्क मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं और हर तरफ कीचड़ फैला रहता है। पक्की नालियां न होने की वजह से घरों का गंदा पानी सीधे गलियों और रास्तों में बहता है, जिससे सामान्य दिनों में भी जलभराव की स्थिति बन जाती है। बरसात के मौसम में यह संकट और विकराल हो जाता है। ग्रामीणों ने प्रमुख गलियों में पक्की नालियों का निर्माण कराने, रास्तों पर स्ट्रीट लाइट लगाने और खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत कराने की जोरदार मांग रखी है।

## स्कूल में जलभराव और जर्जर आंगनवाड़ी केंद्र
शिक्षा और पोषण केंद्रों की हालत भी उपेक्षा का शिकार है। समोला गांव के सरकारी विद्यालय परिसर में बारिश के दिनों में भारी जलभराव हो जाता है, जिससे छोटे बच्चों को कक्षाओं तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा गांव के आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्थाएं भी बदहाल हैं, जिसे दुरुस्त कराने की जरूरत है। ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूल के पास जलभराव रोका जाए और गांव के स्तर पर ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

## धार्मिक स्थल जाने वाला मार्ग भी कीचड़ से अटा
धौलपुर शहर से बनखंडी हनुमान जी मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्ग की हालत भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है। इस रास्ते पर लगातार कीचड़ और गंदा पानी जमा रहने से धार्मिक दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं तथा स्थानीय राहगीरों को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है। लोगों ने इस पवित्र मार्ग को अविलंब दुरुस्त कर पक्की सड़क बनवाने का आग्रह किया है।

## परिसीमन के बाद बनी नई पंचायत, अब बदलाव की उम्मीद
ग्रामीणों ने क्षेत्र के प्रशासनिक इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि पहले यह पूरा इलाका तगावली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता था। परिसीमन प्रक्रिया के दौरान तगावली गांव को नगर परिषद क्षेत्र में शामिल कर लिया गया। इसके बाद भैंसाख और समोला गांव को जोड़कर एक नई ग्राम पंचायत गठित की गई। अब पंचायत चुनाव से ठीक पहले अपनी आवाज बुलंद करते हुए ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि उनकी नजरें चुनाव के बाद सत्ता में आने वाले नए प्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इन पुराने संकटों से कब तक निजात दिला पाते हैं।

## इसका आप पर असर
यह मामला ग्रामीण बुनियादी ढांचे की विफलता और चुनाव के दौरान नागरिकों के अधिकारों से सीधे जुड़ा है।

- **धौलपुर के ग्रामीणों पर असर:** समोला और भैंसाख के 2100 से अधिक मतदाताओं और किसानों के सामने आजीविका और पीने के पानी का गंभीर संकट बना हुआ है। शहर से आ रहे सीवर के कारण 200 से 300 बीघा जमीन बंजर पड़ी है और लोग दूर से पानी लाने को मजबूर हैं।
- **आगामी पंचायत चुनाव में मुद्दे:** स्थानीय चुनाव में उम्मीदवार अब इस वादे से बच नहीं पाएंगे कि गंदे पानी की निकासी और टूटी सड़कों को कब दुरुस्त किया जाएगा। यदि नई पंचायत बनते ही काम नहीं हुआ, तो किसानों का आर्थिक नुकसान और बढ़ जाएगा।
- **स्कूली बच्चों और श्रद्धालुओं की परेशानी:** प्राथमिक विद्यालय में पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई और बनखंडी हनुमान मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन लगातार बाधित हो रहा है। प्रशासन द्वारा तुरंत जल निकासी न करने पर बरसात में बीमारियां फैलने का जोखिम भी बना रहेगा।
- **पूरे राजस्थान में:** यह घटनाक्रम दिखाता है कि राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में परिसीमन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं प्रशासनिक अनदेखी के कारण अधूरी लटकी हैं। अन्य पंचायतों के नागरिक भी अपने प्रतिनिधियों से अधूरे विकास कार्यों का समयबद्ध हिसाब मांग सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह समस्या शहर के गंदे पानी की अनियंत्रित निकासी, अधूरी योजनाओं और प्रशासनिक परिसीमन के बाद उपजी उपेक्षा का नतीजा है।

- **शहरी सीवर की अनियंत्रित निकासी:** धौलपुर शहर से निकलने वाले सीवर और गंदे पानी के निकास का उचित प्रबंधन नहीं किया गया, जिससे यह प्राकृतिक ढलान और खेतों की ओर मुड़ गया। पिछले दो वर्षों से कोई ठोस बाधा या वैकल्पिक नाला न बनने के कारण पानी खेतों में लगातार भरता चला गया।
- **अधूरा जल जीवन मिशन:** गांव में पेयजल टंकी का निर्माण तो शुरू हुआ, लेकिन कार्य पूरा किए बिना छोड़ दिया गया। इसके चलते पाइपलाइन और आपूर्ति नेटवर्क चालू नहीं हो सका, जिससे लोगों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ा।
- **परिसीमन के बाद संसाधनों की कमी:** तगावली पंचायत के नगर परिषद में शामिल होने के बाद भैंसाख और समोला को मिलाकर नई पंचायत बना दी गई। नई ग्राम पंचायत को अलग पहचान तो मिल गई, लेकिन बुनियादी बजट और ड्रेनेज के स्थायी समाधान पर उचित ध्यान नहीं दिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. धौलपुर के किन गांवों में सीवर का पानी भरने से किसान परेशान हैं?
धौलपुर पंचायत समिति की भैंसाख ग्राम पंचायत के अंतर्गत समोला और भैंसाख गांव के किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं।

### 2. सीवर के पानी से कितनी कृषि भूमि प्रभावित हुई है?
धौलपुर शहर की ओर से आ रहे सीवर के गंदे पानी के कारण लगभग 200 से 300 बीघा कृषि भूमि जलमग्न है।

### 3. खेतों में फसल न होने की समस्या कितने समय से बनी हुई है?
ग्रामीणों के अनुसार खेतों में पिछले करीब दो साल से सीवर का पानी भरा हुआ है, जिससे वे फसल नहीं ले पा रहे हैं।

### 4. जल जीवन मिशन की क्या स्थिति है?
जल जीवन मिशन के तहत बन रही पानी की टंकी का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे नल से जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है।

### 5. गांव के सरकारी स्कूल और धार्मिक मार्ग में क्या दिक्कत है?
सरकारी स्कूल परिसर में बारिश के दौरान जलभराव हो जाता है, जबकि धौलपुर से बनखंडी हनुमान जी मंदिर जाने वाला रास्ता भी कीचड़ और गड्ढों से बदहाल है।

### 6. भैंसाख ग्राम पंचायत का गठन कैसे हुआ था?
पहले यह क्षेत्र तगावली ग्राम पंचायत में था, लेकिन परिसीमन में तगावली के नगर परिषद में जाने के बाद भैंसाख और समोला को मिलाकर नई पंचायत बनाई गई।

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