दीपावली से पहले राजस्थान में मिलावटखोरों पर बड़ा एक्शन, फफूंद लगा कलाकंद और दूषित चाशनी पकड़ी गई राजस्थान में ‘शुद्ध आहार मिलावट पर वार’ अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई जिलों में मिठाई दुकानों और गोदामों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में खराब खाद्य सामग्री नष्ट और सीज की है। दीपावली के पावन पर्व पर मिठाइयों की खरीदारी हर घर की परंपरा का अहम हिस्सा होती है। सगे-संबंधियों को उपहार स्वरूप मिठाई के डिब्बे भेंट करने हों या घर पधारे आगंतुकों का स्वागत करना हो, त्योहारी मिठास के बिना उत्सव अधूरा माना जाता है। हालांकि, इस फेस्टिव सीजन में बाजार से मिठाई चुनते वक्त खरीदारों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता सामने आई है। राजस्थान के विभिन्न जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग की सघन जांच पड़ताल के दौरान अमानक, सड़ी-गली और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में तैयार की जा रही मिठाइयों के चिंताजनक मामले पकड़े गए हैं। कई विनिर्माण इकाइयों में कलाकंद के भीतर मरी हुई मक्खियां और फफूंद लगी क्रीम बरामद हुई, तो कहीं बासी और बदबूदार खाद्य उत्पाद खुलेआम बेचे जा रहे थे। निगरानी दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में अखाद्य सामग्री जब्त की और स्वास्थ्य के लिए घातक उत्पादों को फौरन नष्ट करवाया। शुद्ध आहार मिलावट पर वार अभियान के तहत सघन निरीक्षण राज्य भर में उपभोक्ताओं को मिलावटमुक्त एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य वस्तुएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ राजस्थान सरकार ‘शुद्ध आहार मिलावट पर वार’ अभियान संचालित कर रही है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा विभाग के जांच दल लगातार सक्रिय हैं। अधिकारियों के दस्ते मिठाई की दुकानों, थोक गोदामों, मिष्ठान्न निर्माण शालाओं और प्रसंस्करण प्लांट्स में औचक निरीक्षण कर रहे हैं। जांच दलों द्वारा संदिग्ध खाद्य पदार्थों के वैधानिक नमूने एकत्रित कर राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में रासायनिक विश्लेषण हेतु प्रेषित किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार जब तक प्रयोगशाला की परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक हर नमूने को तकनीकी तौर पर मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता, परंतु विनिर्माण स्थलों पर पाई गई अस्वच्छता, कीड़े-मकोड़ों की मौजूदगी और सड़ांध त्योहारी माहौल में जनस्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विभिन्न जिलों में खाद्य सुरक्षा दस्तों की बड़ी कार्रवाइयां अभियान के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में सघन दबिश देकर अमानक खाद्य सामग्रियों पर कानूनी शिकंजा कसा गया है। एक इलाके में खाद्य सुरक्षा विभाग ने तीन मिष्ठान्न प्रतिष्ठानों का गहन मुआयना किया और खाद्य पदार्थों के नमूने संकलित किए। इस दौरान शर्मा चाट एवं मिष्ठान भंडार से मिश्री मावा का वैधानिक सैंपल लिया गया। इसी दुकान पर जांच टीम को लगभग 20 किलो पुरानी, बासी और खाने योग्य न रह गई मिठाई मिली। अधिकारियों ने किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम को टालने के लिए उस 20 किलो दूषित मिठाई को मौके पर ही नष्ट करवा दिया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी केशव गोयल ने इस प्रशासनिक कार्रवाई का विवरण साझा किया। इसके साथ ही अधिकारियों ने हलवाइयों एवं दुकानदारों को मिठाइयों को आकर्षक बनाने के चक्कर में अत्यधिक अखाद्य अथवा कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल न करने की सख्त समझाइश दी। रावतसर और गोलूवाला में भारी मात्रा में सामग्री जब्त खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच मुहिम के तहत CMHO डॉ. नवनीत शर्मा के नेतृत्व में रावतसर और गोलूवाला क्षेत्रों में व्यापक निरीक्षण किया गया। संयुक्त टीम ने विभिन्न व्यावसायिक केंद्रों पर औचक दस्तक दी और गुणवत्ता मानकों की पड़ताल की। इस दौरान टीम ने 1485 किलो गुड़ और 186 लीटर सरसों का तेल सीज कर दिया। इसके अतिरिक्त लगभग 40 किलो दूषित और उपयोग के अयोग्य पाई गई खाद्य सामग्री को तत्काल प्रभाव से जमीन में नष्ट करवा दिया गया। कार्रवाई के दौरान इलाके के अन्य कई प्रतिष्ठानों से भी संदेह के आधार पर खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्रित किए गए, जिन्हें प्रयोगशाला भेजा गया है। कोटकासिम के गोदाम में फफूंद लगा कलाकंद और मरी मक्खियां अत्यंत वीभत्स और अमानक स्थिति बुढ़ी बावल, कोटकासिम क्षेत्र में सामने आई। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को एक गुप्त मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी। इसके आधार पर टीम ने ग्राम मोठूका निवासी लीलाराम के गोदाम पर छापा मारा। निरीक्षण के दौरान गोदाम के भीतर बुनियादी साफ-सफाई का घोर अभाव पाया गया। ऐसे अत्यंत अस्वच्छ और दुर्गंधयुक्त माहौल में हलवाई बड़े पैमाने पर कलाकंद तैयार कर रहे थे। जब अधिकारियों ने तैयार कलाकंद की बारीकी से जांच की, तो उसमें मरी हुई मक्खियां और जगह-जगह फफूंद लगी हुई स्पष्ट दिखाई दी। खाद्य सुरक्षा दल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए करीब 425 किलो दूषित कलाकंद, 150 किलो दूध और लगभग 50 किलो फफूंद लगी सड़ी क्रीम को मौके पर ही विनष्ट करा दिया। खाद्य सुरक्षा विभाग के नोडल अधिकारी हेमंत यादव ने पुष्टि की कि संबंधित खाद्य पदार्थों के लीगल सैंपल संग्रह कर आगे की वैधानिक जांच के लिए प्रयोगशाला भिजवा दिए गए हैं। रसगुल्ले, गुलाब जामुन और दूषित चाशनी पर शिकंजा त्योहारी मांग को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण अभियान को और तेज किया गया। एक अन्य सघन कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई दुकानों और स्टोरेज गोदामों की तलाशी ली, जहां से 510 किलो गुलाब जामुन और रसगुल्ले सहित बड़ी मात्रा में अमानक खाद्य सामग्री को सीज करने के साथ-साथ नष्ट करवाया गया। इसके अतिरिक्त तुलसीवन रोड स्थित एक पनीर प्लांट का भी निरीक्षण हुआ, जहां से मावा, रिफाइंड ऑयल और क्रीम के नमूने उठाए गए। जांच दल ने कमलेश्वर, श्रीराम और मित्तल मिष्ठान भंडार से मिठाइयों के नमूने संकलित किए। होरीलाल प्रजापत मावा प्लांट और श्रीराम मिष्ठान भंडार में भी नमूनों की जब्ती की गई। मित्तल मिष्ठान भंडार के निरीक्षण में पुरानी, सड़ी और दुर्गंधयुक्त चाशनी बरामद हुई। अधिकारियों ने करीब 100 किलो दूषित चाशनी को तुरंत नाली में बहवाकर नष्ट करवाया। यहां से मावा बर्फी का सैंपल भी लिया गया। इस पूरी मुहिम में मावा, क्रीम और रिफाइंड पामोलिन तेल सहित कुल छह नमूने एकत्रित किए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लैब की रासायनिक रिपोर्ट आते ही दोषी प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। त्योहारी खरीदारी में उपभोक्ता बरतें यह जरूरी सावधानियां दीपावली जैसे बड़े पर्व पर जब जगह-जगह दूषित और मिलावटी खाद्य सामग्री पकड़ी जा रही है, तो आम उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सिर्फ दुकान की चकाचौंध या मिठाई की रंगत देखकर गुणवत्ता का निर्णय न लें। सबसे पहले दुकान और विनिर्माण स्थल की बुनियादी स्वच्छता पर गौर करें कि कहीं मिठाइयां खुले में तो नहीं रखी हैं अथवा उनके इर्द-गिर्द धूल और मक्खियां तो नहीं भिनक रहीं। खरीदारी के बाद पक्का बिल अवश्य प्राप्त करें तथा पैकेट पर विनिर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की जांच करें। असामान्य रूप से भड़कीले और चमकीले रंगों वाली मिठाइयों से बचें, क्योंकि इनमें नुकसानदेह कृत्रिम रंगों की अधिकता हो सकती है। मिठाई की गंध और बनावट को परखें; यदि उसमें से खट्टापन, बासी दुर्गंध या फफूंद का अंदेशा हो तो उसे बिल्कुल न खरीदें। मावा और दुग्ध उत्पादों की ताजगी की पुष्टि करें और यदि कहीं भी मिलावट या गंदगी दिखे तो खाद्य सुरक्षा विभाग को तुरंत सूचित करें। इसका आप पर असर त्योहारी सीजन में मिलावटी और दूषित मिठाइयों के खिलाफ चल रही यह कार्रवाई सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। • राजस्थान में: राज्य भर में मिठाई, मावा और खाद्य तेल खरीदने वाले उपभोक्ताओं को बासी या सड़े उत्पादों से होने वाले फूड पॉइजनिंग और पेट की गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिलेगी। खरीदारों को अब किसी भी संदिग्ध दुकान या अमानक खाद्य सामग्री दिखने पर स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से तुरंत शिकायत करने का अवसर मिलेगा। • त्योहारी बजट पर: मिलावटी और अमानक मिठाइयों के नष्ट होने से खरीदारों को अपनी गाढ़ी कमाई खराब उत्पादों पर गंवाने से बचाव होगा। ग्राहकों को हमेशा अधिकृत दुकानों से पक्का बिल लेकर ही खरीदारी करनी चाहिए ताकि गड़बड़ी मिलने पर कानूनी दावा किया जा सके। • स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता: अत्यधिक कृत्रिम रंगों, फफूंद लगी क्रीम और बासी चाशनी के उपयोग पर रोक लगने से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों में कमी आएगी। उपभोक्ता अब अत्यधिक चमकीली और असामान्य महक वाली मिठाइयों से परहेज कर सुरक्षित विकल्प चुन सकते हैं। • बाजार में गुणवत्ता सुधार: लगातार छापों और जब्ती की कार्रवाई से हलवाइयों और थोक व्यापारियों पर स्वच्छता बनाए रखने और ताजा सामग्री इस्तेमाल करने का कानूनी दबाव बढ़ेगा। इससे त्योहारी सीजन के दौरान आम जनता को स्वच्छ और सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ दीपावली के दौरान मिठाइयों की भारी मांग और अत्यधिक मुनाफा कमाने की होड़ के चलते अमानक सामग्री तैयार की जाती है, जिसे रोकने के लिए प्रशासन ने यह अभियान चलाया है। • त्योहारी मांग में भारी उछाल: दीपावली पर मावा, कलाकंद, रसगुल्ले और गुलाब जामुन की मांग सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। आपूर्ति पूरी करने के लिए कुछ असामाजिक निर्माता समय से पहले ही भारी मात्रा में मिठाइयां बनाकर अस्वास्थ्यकर गोदामों में डंप कर देते हैं। • मुनाफाखोरी और अस्वच्छ भंडारण: लागत कम करने के चक्कर में खराब दूध, फफूंद लगी क्रीम और बासी चाशनी का पुनः इस्तेमाल किया जाता है। मोठूका गांव जैसे गोदामों में साफ-सफाई के अभाव और मक्खी-मच्छरों से बचाव की व्यवस्था न होने के कारण खाद्य सामग्री तेजी से दूषित हो जाती है। • प्रशासनिक निगरानी और सरकारी निर्देश: राज्य सरकार के ‘शुद्ध आहार मिलावट पर वार’ अभियान के तहत त्योहारों से पहले सघन तलाशी के स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं। मुखबिरों से मिली सटीक सूचनाओं और औचक छापों के आधार पर अधिकारियों ने दूषित खाद्य सामग्री पकड़ी और जांच के लिए लैब नमूने भेजे। सवाल-जवाब 1. राजस्थान में खाद्य सुरक्षा विभाग ने किन प्रमुख स्थानों पर छापे मारे? विभाग ने रावतसर, गोलूवाला, बुढ़ी बावल, कोटकासिम और तुलसीवन रोड स्थित पनीर प्लांट सहित कई मिठाई दुकानों और गोदामों पर कार्रवाई की। 2. कोटकासिम के गोदाम में क्या अमानक सामग्री पाई गई? वहां लगभग 425 किलो दूषित कलाकंद मिला जिसमें मरी मक्खियां और फफूंद लगी थी, साथ ही 150 किलो दूध और 50 किलो फफूंद लगी क्रीम नष्ट करवाई गई। 3. रावतसर और गोलूवाला में कितनी खाद्य सामग्री सीज की गई? कार्रवाई के दौरान 1485 किलो गुड़ और 186 लीटर सरसों का तेल सीज किया गया तथा 40 किलो दूषित सामग्री नष्ट करवाई गई। 4. शर्मा चाट एवं मिष्ठान भंडार पर क्या कार्रवाई हुई? वहां से मिश्री मावा का सैंपल लिया गया और दुकान पर मिली करीब 20 किलो पुरानी और खराब मिठाई को मौके पर ही नष्ट करवाया गया। 5. मित्तल मिष्ठान भंडार से क्या बरामद कर नष्ट किया गया? प्रतिष्ठान से लगभग 100 किलो पुरानी और दूषित चाशनी नष्ट करवाई गई तथा मावा बर्फी का कानूनी सैंपल जांच के लिए लिया गया। 6. मिठाई खरीदते समय ग्राहकों को किन बातों की सावधानी रखनी चाहिए? ग्राहकों को दुकान की स्वच्छता देखनी चाहिए, पक्का बिल लेना चाहिए, और जरूरत से ज्यादा चमकीले रंगों या खट्टी गंध वाली मिठाइयों से बचना चाहिए। https://trendkia.com/rajasthan/dipavali-se-pahale-rajasthan-men-milavatakhoron-para-bara-ekshana-phaphunda-laga-kalakand-aura-dushita-chashani-pakari-gai-56640 TrendKia — Har trend, sabse pehle.