# दीवाली पर इस बार बनाएं बाजरा और तिल की पारंपरिक टिक्की, नोट करें आसान विधि

> दीपावली के मौके पर बाजार की मिलावटी मिठाइयों से दूर इस बार घर पर बाजरे, तिल और गुड़ से बनी पारंपरिक टिक्की तैयार करें। यह व्यंजन स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बेहतरीन है और इसे आसानी से बनाया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/divali-para-isa-bara-banaen-bajara-aura-tila-ki-parnparika-tikki-nota-karen-asana-vidhi-57808 · **Language:** Hindi
**Tags:** दीवाली रेसिपी, बाजरा टिक्की, पारंपरिक मिठाई, त्योहार का खाना, तिल गुड़ रेसिपी, हेल्दी स्नैक्स

दीपावली का पावन पर्व नजदीक आते ही हर घर में तरह-तरह के पकवानों और पारंपरिक मिठाइयों की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं। इस खास अवसर पर लोग बाजार से डिब्बाबंद मिठाइयां लाने के साथ-साथ अपने घर पर ही शुद्ध और पारम्परिक व्यंजन बनाना बेहद पसंद करते हैं। इन्हीं चुनिंदा और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजनों में बाजरा, तिल और गुड़ से तैयार होने वाली स्वादिष्ट टिक्की भी अपनी एक खास जगह रखती है। मुख्य रूप से ग्रामीण अंचलों में बेहद लोकप्रिय यह पारंपरिक पकवान अब शहरी रसोई में भी अपनी जगह बना रहा है, जिसे घर पर बेहद सरल तरीकों से आसानी से तैयार किया जा सकता है।

## आवश्यक सामग्री और सही तैयारी
बाजरा, तिल और गुड़ की खस्ता टिक्की बनाने के लिए आपको सबसे पहले मुख्य सामग्री के रूप में ताजा बाजरे का आटा, सफेद तिल और अच्छी गुणवत्ता वाले गुड़ की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इसके स्वाद और खुशबू को बढ़ाने के लिए आप इसमें अपनी पसंद के अनुसार थोड़ा शुद्ध घी और सौंफ भी मिला सकते हैं। यह पारंपरिक व्यंजन सर्दियों के मौसम में भी सेहत के लिहाज से काफी पसंद किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में इस पकवान को बनाने की पुरानी परंपरा चली आ रही है और त्योहारों के सीजन में इसे विशेष तौर पर हर घर में बनाया जाता है ताकि परिवार के सभी सदस्य इसका लुत्फ उठा सकें।

## आटा गूंथने की सरल प्रक्रिया
इस लजीज टिक्की को बनाने की शुरुआत करते हुए सबसे पहले एक साफ बर्तन में तय मात्रा में बाजरे का आटा लें और उसमें आवश्यकतानुसार तिल मिला लें। इसके बाद गुड़ को थोड़े से पानी के साथ हल्का गर्म करके अच्छी तरह से पिघला लें ताकि उसकी चाशनी जैसी एक एकरस स्थिति बन जाए। अब इस पिघले हुए गुनगुने गुड़ के घोल को धीरे-धीरे बाजरे और तिल के सूखे मिश्रण में मिलाते जाएं। इसी चरण में थोड़ा सा शुद्ध घी भी इसमें शामिल कर लें और सभी सामग्रियों को अपने हाथों से अच्छी तरह मिलाते हुए एकसार कर लें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि मिश्रण इतना नरम और गूंथा हुआ हो कि इससे आसानी से छोटी-छोटी टिक्कियां बिना टूटे बनाई जा सकें।

## तलने और सेंकने की सही विधि
तैयार किए गए मिश्रण से छोटी-छोटी लोइयां तोड़ लें और उन्हें अपनी हथेलियों के बीच दबाकर गोल और चपटी टिक्की का मनचाहा आकार दें। इसके बाद एक भारी तले की कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में घी गर्म करें और आंच को धीमा रखते हुए इन टिक्कियों को दोनों तरफ से उलट-पलट कर अच्छी तरह सेंक लें। इन्हें तब तक आंच पर पकने दें जब तक इनका रंग बदलकर हल्का सुनहरा और क्रिस्पी न हो जाए। धीमी आंच पर पकाने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि टिक्कियां अंदर तक पूरी तरह सिक जाती हैं और उनका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।

## परम परोसने का तरीका और खासियत
पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद इन गर्म टिक्कियों को कुछ देर के लिए सामान्य तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ दें ताकि वे और अधिक खस्ता हो जाएं। इसके बाद इन्हें गरमागरम चाय के साथ या फिर दीपावली के पावन पर्व पर अपने घर आने वाले मेहमानों को आदर के साथ परोसा जा सकता है। बाजरे के आटे, तिल और गुड़ के मेल से तैयार होने वाला यह पारंपरिक पकवान हमारी समृद्ध खानपान संस्कृति का एक बेहतरीन जीवंत उदाहरण है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रसोई में आसानी से उपलब्ध हो जाने वाली घरेलू चीजों का इस्तेमाल किया जाता है और इसे बनाने में बहुत अधिक समय भी खर्च नहीं होता है।

## त्योहार पर देसी स्वाद का अनूठा अनुभव
यदि आप भी इस दीपावली के मौके पर बाजार की मिलावटी मिठाइयों से हटकर कुछ अलग और एकदम पारंपरिक स्वाद चखना चाहते हैं, तो घर पर बाजरा, तिल और गुड़ की यह पौष्टिक टिक्की जरूर ट्राई करें। यह खास पकवान हमारी ग्रामीण संस्कृति और पुरानी पीढ़ी के खानपान की मजबूत परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। त्योहार के इस उल्लास भरे माहौल में अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर इस देसी और सौंधी खुशबू वाले स्वाद का आनंद उठाया जा सकता है, जो सभी को जरूर पसंद आएगा।

## इसका आप पर असर
यह पारंपरिक व्यंजन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक पाठकों के लिए दीवाली पर एक बेहतरीन और पौष्टिक विकल्प साबित होता है।

- **भारत में:** ग्रामीण संस्कृति से जुड़े इस पारंपरिक व्यंजन को अपनाकर लोग इस दीवाली बाजार की मिलावटी मिठाइयों से बच सकते हैं।
- **रसोई और सेहत:** बाजरा और गुड़ का यह मेल सर्दियों के मौसम में शरीर को अंदर से गर्म रखता है और पोषण प्रदान करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक व्यंजनों को दीवाली पर बनाने का मुख्य कारण हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजना और त्योहारों पर शुद्ध खानपान को बढ़ावा देना है।

- **सांस्कृतिक महत्व:** ग्रामीण अंचलों में सर्दियों की शुरुआत और त्योहारों के दौरान बाजरा और गुड़ के सेवन की पुरानी परंपरा रही है।
- **पोषण का लाभ:** बाजरा और तिल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं और शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. बाजरा, तिल और गुड़ की टिक्की बनाने के लिए मुख्य सामग्रियां क्या हैं?
इसके लिए मुख्य रूप से बाजरे का आटा, सफेद तिल और गुड़ की आवश्यकता होती है।

### 2. इस रेसिपी में स्वाद बढ़ाने के लिए क्या मिलाया जाता है?
इसमें स्वाद और खुशबू के लिए थोड़ा शुद्ध घी और सौंफ मिलाई जा सकती है।

### 3. टिक्कियों को किस आंच पर पकाना चाहिए?
टिक्कियों को धीमी आंच पर दोनों तरफ से हल्का सुनहरा होने तक पकाना चाहिए ताकि वे अंदर तक सिक जाएं।

### 4. इस पारंपरिक पकवान को कब परोसा जा सकता है?
तैयार होने के बाद इन्हें ठंडा करके चाय के साथ या त्योहार पर मेहमानों को परोसा जा सकता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._