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  "type": "article",
  "title": "दिवाली शॉपिंग पर साइबर ठगों का नया जाल, फर्जी वेबसाइट्स और भारी डिस्काउंट के नाम पर हो रही है लूट",
  "summary": "दिवाली के त्योहारी सीजन में साइबर अपराधियों ने बड़े ब्रांड्स की हूबहू नकली वेबसाइट्स बनाकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया है। 70 से 80 प्रतिशत तक भारी डिस्काउंट का लालच देकर ग्राहकों से पैसे ठगे जा रहे हैं, लेकिन सामान कभी डिलीवर नहीं होता।",
  "content": "पाली में इन दिनों ऑनलाइन बाजार के भीतर साइबर अपराधियों का एक नया और अत्यंत खतरनाक तरीका सामने आया है। प्रसिद्ध नामी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के नाम पर ठगों ने न केवल फर्जी सोशल मीडिया पेज तैयार किए हैं, बल्कि देखने में बिल्कुल असली लगने वाली पूरी डुप्लीकेट वेबसाइट्स भी खड़ी कर दी हैं। इन नकली पोर्टल्स की बनावट और डिज़ाइन इस तरह की होती है कि पहली नजर में आम इंसान के लिए यह पहचान पाना बेहद कठिन हो जाता है कि कौन सा प्लेटफॉर्म असली है और कौन सा जालसाजों द्वारा संचालित फर्जी मंच है।\n\nत्योहारी सीजन में भारी डिस्काउंट का झांसा\nबदलते दौर में अब हर प्रकार की जरूरत का सामान घर बैठे ऑनलाइन मंगवाना बेहद आम हो चुका है। विशेष रूप से दिवाली के इस पावन और बड़े त्योहारी सीजन के दौरान ब्रांडेड कपड़ों से लेकर अन्य तमाम उपभोक्ता वस्तुएं ऑनलाइन खरीदना ग्राहकों की पहली पसंद बन चुका है। इसी रुझान का फायदा उठाने के लिए साइबर ठग पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। त्योहारों के इस माहौल में लोगों को लुभाने के लिए 70 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक के भारी-भरकम डिस्काउंट और आकर्षक ऑफर्स का लालच दिया जाता है, जिसके झांसे में आकर लोग बिना सोचे-समझे खरीदारी के लिए आगे बढ़ जाते हैं।\n\nब्रांड्स के नाम और डिजाइन की नकल\nसाइबर सुरक्षा के जानकारों का कहना है कि ये अपराधी बेहद शातिर तरीके से काम करते हैं। वे बड़े ब्रांड्स के नाम में मामूली सा बदलाव करके ग्राहकों को भ्रमित करते हैं और बिल्कुल वैसी ही मिलती-जुलती वेबसाइट तैयार कर लेते हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनियों के असली लोगो, फॉन्ट और होमपेज की हूबहू डिजाइन का इस्तेमाल किया जाता है ताकि कोई शक न कर सके। ग्राहक जब इन फर्जी पोर्टल्स पर पहुंचकर ऑनलाइन पेमेंट कर देते हैं, तो पैसे कटने के बाद भी उनका खरीदा हुआ सामान कभी उनके घर तक नहीं पहुंच पाता है और ठगी का शिकार हुए लोगों को बाद में सच्चाई का पता चलता है.\n\nविशेषज्ञों की चेतावनी और बचाव के उपाय\nइस नए और खतरनाक साइबर अपराध के ट्रेंड का पर्दाफाश करते हुए साइबर एक्सपर्ट अंकित चौधरी ने लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लोग अक्सर कम कीमत और बंपर छूट के चक्कर में बिना जांच-पड़ताल किए ऐसे अनजान प्लेटफॉर्म्स पर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। यदि आप भी इस दिवाली किसी भी ऑनलाइन माध्यम से खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो किसी भी लुभावने विज्ञापन या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले संबंधित वेबसाइट के यूआरएल और उसकी प्रमाणिकता की भली-भांति जांच जरूर कर लें, अन्यथा एक छोटी सी लापरवाही आपकी पूरी दिवाली की खुशियों को फीका कर सकती है।\n\nइसका आप पर असर\nऑनलाइन शॉपिंग के दौरान होने वाली इन ठगी की घटनाओं का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब और मानसिक शांति पर पड़ता है।\n\n• आर्थिक नुकसान: 70 से 80 प्रतिशत डिस्काउंट के लालच में फर्जी वेबसाइट्स पर पेमेंट करने वाले ग्राहक अपनी पूरी रकम गंवा बैठते हैं और उनके हाथ कुछ नहीं आता।\n• त्योहारी बजट पर असर: दिवाली जैसे बड़े अवसर पर ठगी का शिकार होने से परिवारों का त्योहारी बजट बिगड़ जाता है और उत्सव की खुशियां निराशा में बदल जाती हैं।\n• सतर्कता की जरूरत: ग्राहकों को अब किसी भी सामान का भुगतान करने से पहले वेबसाइट के यूआरएल और उसकी प्रामाणिकता की दो बार जांच करनी होगी।\n• व्यक्तिगत डेटा का खतरा: फर्जी पोर्टल्स पर अपनी वित्तीय और व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने से बैंक खाते खाली होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।\n• पाली और आसपास के क्षेत्र में: स्थानीय निवासियों को विशेष रूप से सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अनजान सोशल मीडिया विज्ञापन या मैसेज में दिए गए संदिग्ध शॉपिंग लिंक पर भरोसा न करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nत्योहारी सीजन में साइबर अपराधियों द्वारा इस प्रकार के फर्जीवाड़े को अंजाम देने के पीछे कई खास वजहें और सोची-समझी रणनीतियां काम करती हैं।\n\n• त्योहारी सीजन की भारी मांग: दिवाली के समय ऑनलाइन खरीदारी में अचानक भारी उछाल आता है, जिसका फायदा उठाकर ठग आसानी से लोगों को निशाना बनाते हैं।\n• बड़े डिस्काउंट का प्रलोभन: 70 से 80 प्रतिशत तक की भारी छूट देखकर ग्राहक बिना सोचे-समझे और बिना जांच किए पेमेंट कर देते हैं।\n• तकनीकी नकल की आसानी: साइबर अपराधी नामी ब्रांड्स के लोगो, फॉन्ट और यूआरएल से मिलती-जुलती डुप्लीकेट वेबसाइट्स बेहद कम समय में तैयार कर लेते हैं।\n• जागरूकता की कमी: आम जनता में ऑनलाइन सुरक्षा और यूआरएल की पहचान को लेकर पर्याप्त जानकारी न होने के कारण वे आसानी से झांसे में आ जाते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. साइबर ठग ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान लोगों को कैसे फंसा रहे हैं?\nठग नामी कंपनियों के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया पेज बनाकर 70 से 80 प्रतिशत तक की भारी छूट का लालच देते हैं।\n\n2. इस नए साइबर क्राइम ट्रेंड का खुलासा किसने किया है?\nइस नए खतरे का पर्दाफाश साइबर एक्सपर्ट अंकित चौधरी ने किया है।\n\n3. फर्जी वेबसाइट्स की पहचान करना क्यों मुश्किल होता है?\nये अपराधी ब्रांड्स के नाम में मामूली बदलाव करते हैं और उनकी हूबहू डिजाइन व लोगो का इस्तेमाल करते हैं जिससे पहली नजर में पहचान नहीं होती।\n\n4. दिवाली शॉपिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?\nखरीददारी करने से पहले वेबसाइट के यूआरएल और उसकी सत्यता की अच्छी तरह जांच-पड़ताल अवश्य कर लेनी चाहिए।\n\n5. फर्जी वेबसाइट पर पेमेंट करने के बाद क्या होता है?\nग्राहक पेमेंट तो कर देते हैं लेकिन उनका सामान कभी उनके घर नहीं पहुंचता है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-16",
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    "साइबर क्राइम",
    "दिवाली शॉपिंग",
    "ऑनलाइन फ्रॉड",
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