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  "type": "article",
  "title": "दूदू के नरैना में संघ प्रचारक से कथित बदसलूकी पर बवाल, थाने में धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने की पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग",
  "summary": "जयपुर ग्रामीण के दूदू क्षेत्र स्थित नरैना पुलिस थाने में आरएसएस के सांभर जिला प्रचारक से कथित दुर्व्यवहार और उन्हें हिरासत में लेने के विरोध में संघ कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है.",
  "content": "राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले अंतर्गत दूदू इलाके में पुलिस प्रशासन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच गंभीर विवाद खड़ा हो गया है. नरैना पुलिस थाने के कर्मियों पर संघ के सांभर जिला प्रचारक के साथ बदसलूकी करने और उन्हें बेवजह हिरासत में बैठाने का आरोप लगा है. इस घटना की जानकारी सार्वजनिक होते ही बड़ी तादाद में संघ के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण नरैना थाने में एकत्र हो गए. पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए आक्रोशित लोगों ने थाना परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है.\n\nरात की गश्त के दौरान विवाद की शुरुआत\nपूरे घटनाक्रम की जड़ बीती रात की एक घटना से जुड़ी है. सांभर क्षेत्र के जिला प्रचारक किसी आवश्यक कार्य से नरैना इलाके में पहुंचे हुए थे. देर रात जब वे इलाके से गुजर रहे थे, तभी गश्त ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों का रवैया शुरुआत से ही काफी आक्रामक और गैर-पेशेवर था. बिना किसी ठोस वजह अथवा संदेह के पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया और सरेआम गाली-गलौज पर उतर आए.\n\nथाने में बैठाने और शांति भंग के आरोप\nविवाद केवल तीखी नोकझोंक तक सीमित नहीं रहा. आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी का धौंस दिखाते हुए जिला प्रचारक को जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लिया और नरैना थाने ले आए. वहां उन्हें शांति भंग करने के झूठे आरोप में थाने के भीतर बैठा दिया गया. देर रात जैसे ही संघ के स्थानीय कार्यकर्ताओं को यह सूचना मिली कि उनके जिला प्रचारक को पुलिस ने इस तरह से हिरासत में रखा है, संगठन से जुड़े लोगों में गहरा असंतोष फैल गया.\n\nसुबह थाने पर उमड़ी भीड़ और नारेबाजी\nसुबह होते ही मामले की खबर आसपास के पूरे इलाके में फैल गई. इसके बाद संघ के तमाम स्थानीय कार्यकर्ता, प्रमुख पदाधिकारी और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण नरैना पुलिस थाने पहुंचने लगे. देखते ही देखते थाना परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई. आक्रोशित लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी नारेबाजी करते हुए परिसर में ही दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक इस मामले में न्यायोचित कदम नहीं उठाए जाते, वे थाने से हटने वाले नहीं हैं.\n\nदोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड करने की मांग\nधरने पर बैठे कार्यकर्ताओं की मुख्य मांग है कि जिला प्रचारक के साथ बदसलूकी, गाली-गलौज और गैरकानूनी बर्ताव करने वाले सभी दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाए. प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बिना किसी जुर्म या शिकायत के एक सामाजिक संगठन के सम्मानित पदाधिकारी के साथ ऐसा बर्ताव पुलिसिया मनमानी को उजागर करता है. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि दोषी कर्मियों पर फौरन निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई तो इस आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा, जिसके परिणाम की पूरी जिम्मेदारी पुलिस और स्थानीय प्रशासन की होगी.\n\nइसका आप पर असर\nइस विवाद के कारण नरैना क्षेत्र में आम नागरिकों और स्थानीय प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर देखने को मिल रहा है.\n\n• नरैना और दूदू में: थाने में चल रहे धरने और विरोध प्रदर्शन के चलते स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था को लेकर तनाव बढ़ गया है. थाने आने वाले आम फरियादियों को अपने नियमित पुलिस कार्यों और शिकायतों के निपटारे में देरी का सामना करना पड़ सकता है.\n• राजस्थान भर में: पुलिस गश्त के दौरान नागरिकों से होने वाले व्यवहार और जवाबदेही को लेकर प्रशासनिक स्तर पर निगरानी सख्त हो सकती है. सामाजिक संगठनों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति के चलते गश्त और चेकिंग के नियमों में सतर्कता बरती जा सकती है.\n• यातायात और स्थानीय बाजार: थाने के बाहर भीड़ जुटने से आसपास के मार्गों पर आवाजाही धीमी हो सकती है. स्थानीय निवासियों को थाने के निकटवर्ती रास्तों से निकलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है.\n• प्रशासनिक कार्रवाई: मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस के उच्चाधिकारी जांच का दायरा बढ़ा सकते हैं. दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मियों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई होने की पूरी संभावना है.\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह टकराव रात के समय पुलिस गश्त के दौरान शुरू हुई पूछताछ और उसके बाद लगाए गए गंभीर आरोपों की वजह से पैदा हुआ है.\n\n• गश्त के दौरान नोकझोंक: देर रात नरैना क्षेत्र में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों ने रास्ते से गुजर रहे सांभर के जिला प्रचारक को पूछताछ के लिए रोका था. आरोप है कि इस दौरान सामान्य चेकिंग के बजाय आक्रामक रवैया अपनाया गया और गाली-गलौज की गई.\n• हिरासत और शांति भंग का आरोप: विवाद बढ़ने पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें थाने लाकर शांति भंग करने के आरोप में बैठा दिया. संगठन के सदस्यों का कहना है कि यह कदम बिना किसी आधार के केवल वर्दी के रौब में उठाया गया.\n• सूचना फैलने पर लामबंदी: रात में हुई इस घटना की जानकारी जैसे ही सुबह अन्य कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों तक पहुंची, लोग आक्रोशित हो गए. संगठन से जुड़े पदाधिकारी के सम्मान को ठेस पहुंचने के कारण यह मामला सामूहिक धरने में बदल गया.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नरैना पुलिस थाने में किस बात को लेकर धरना दिया जा रहा है?\nआरएसएस के सांभर जिला प्रचारक के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित अभद्रता करने और उन्हें थाने में बैठाने के विरोध में यह धरना दिया जा रहा है.\n\n2. यह घटना किस जगह और किस समय की है?\nयह घटना राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले के दूदू क्षेत्र अंतर्गत नरैना इलाके में बीती रात की है.\n\n3. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग क्या है?\nधरने पर बैठे लोगों की मुख्य मांग है कि जिला प्रचारक के साथ दुर्व्यवहार करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत सस्पेंड किया जाए.\n\n4. पुलिस पर क्या गंभीर आरोप लगाए गए हैं?\nपुलिसकर्मियों पर बिना किसी वजह के गाली-गलौज करने, वर्दी का रौब दिखाने और शांति भंग के झूठे आरोप में हिरासत में रखने का आरोप है.\n\n5. थाने पर प्रदर्शन में कौन-कौन लोग शामिल हैं?\nइस विरोध प्रदर्शन में संघ के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण शामिल हैं.",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-11",
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