EWS कोटे के बावजूद निजी कॉलेज की मोटी फीस से राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल छात्र को दिया ये जवाब राजस्थान के एक NEET-UG छात्र ने EWS की 8 लाख रुपये आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेजों की 25 लाख रुपये तक की फीस के अंतर को चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। देश के लाखों परिवार ऐसे हैं जिनकी कमाई सीमित है, लेकिन बच्चे को डॉक्टर बनाने का सपना बड़ा है। ठीक यही टकराव राजस्थान के एक NEET-UG छात्र की याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। छात्र का तर्क सीधा था कि जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS का फायदा लेने के लिए परिवार की सालाना आय अधिकतम 8 लाख रुपये तय की गई है, तो फिर 18 से 25 लाख रुपये सालाना फीस वसूलने वाले निजी मेडिकल कॉलेजों में इसी वर्ग के लिए रखी गई सीटों का आखिर मतलब क्या है। शीर्ष अदालत इस दलील से इत्तेफाक नहीं रखती। कोर्ट ने राजस्थान के छात्र हर्षवर्धन सिंह की याचिका को खारिज करते हुए साफ कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों पर सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने का दबाव नहीं डाला जा सकता। अदालत ने यह रास्ता भी सुझाया कि अगर कोई छात्र फीस का बोझ नहीं उठा सकता, तो वह स्कॉलरशिप या सब्सिडी जैसी मदद का सहारा ले सकता है। आय सीमा और फीस के फासले पर थी पूरी लड़ाई याचिका की बुनियाद यही अंतर था। एक तरफ EWS में आने के लिए परिवार की सालाना आय की ऊपरी सीमा 8 लाख रुपये है, और दूसरी तरफ निजी मेडिकल कॉलेजों की ट्यूशन फीस 18.9 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये सालाना तक पहुंच जाती है। छात्र की ओर से कहा गया कि यह व्यवस्था पूरी तरह बेतुकी है और EWS वर्ग के छात्रों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी करती है। सवाल यह उठाया गया कि 8 लाख की आय वाला परिवार 25 लाख रुपये तक की फीस आखिर कैसे भर पाएगा, और ये दोनों आंकड़े एक साथ कैसे चल सकते हैं। इसी आधार पर छात्र ने राहत मांगी थी। इससे पहले यही मामला राजस्थान हाई कोर्ट में भी खारिज हो चुका था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में माना था कि निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए तय फीस ढांचा कानूनी रूप से दुरुस्त है। अदालत ने यह भी कहा था कि राज्य की फीस रेगुलेटरी कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करते हुए ही फीस तय की है। सरकारी और निजी संस्थान एक जैसे नहीं हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि कोई यह उम्मीद नहीं कर सकता कि निजी शैक्षणिक संस्थान भी सरकारी संस्थानों जितनी ही फीस लें। अदालत ने समझाया कि सेल्फ-फाइनेंसिंग संस्थानों और सरकारी कॉलेजों के चलने का तरीका ही अलग है। जस्टिस नागरत्ना ने जोड़ा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों को राज्य सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि निजी संस्थान अपना पूरा खर्च खुद उठाते हैं। सिर्फ इस वजह से कि किसी निजी कॉलेज की फीस ज्यादा है, उसे सरकारी कॉलेज जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कम फीस का दबाव बढ़ा तो डॉक्टरों की कमी का खतरा सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कैपिटेशन फीस पर रोक जरूर है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि कॉलेज अपनी सामान्य फीस भी न ले सकें। कोर्ट के मुताबिक अगर निजी मेडिकल कॉलेजों को कम फीस लेने पर बाध्य किया गया, तो मेडिकल शिक्षा में उनकी भागीदारी ही कम हो सकती है, जबकि देश को अभी और डॉक्टरों की जरूरत है। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने की कोई वजह नहीं दिखती, इसलिए याचिका खारिज की जाती है। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर इस मामले से जुड़ा कोई कानूनी सवाल आगे उठता है, तो उसे भविष्य के लिए खुला रखा गया है। इसका आप पर असर • भारत में: EWS कोटे से निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने वाले छात्रों को भी 18.9 लाख से 25 लाख रुपये सालाना तक की फीस चुकानी ही होगी, क्योंकि कोर्ट ने इसे कम कराने से इनकार कर दिया है। • राजस्थान में: राज्य के NEET-UG अभ्यर्थियों के लिए यह साफ हो गया है कि सीमित आय होने पर भी राहत का रास्ता फीस घटाना नहीं, बल्कि स्कॉलरशिप या सब्सिडी जैसी मदद लेना है। सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने दायर की थी? राजस्थान के NEET-UG छात्र हर्षवर्धन सिंह ने यह याचिका दायर की थी। 2. EWS के लिए आय की सीमा कितनी है? EWS श्रेणी में शामिल होने के लिए परिवार की सालाना आय अधिकतम 8 लाख रुपये तय है। 3. निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस कितनी है? निजी मेडिकल कॉलेजों में ट्यूशन फीस 18.9 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये सालाना तक है। 4. कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की? अदालत ने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि दोनों के चलने का तरीका अलग है। 5. फीस न चुका पाने वाले छात्रों के लिए कोर्ट ने क्या रास्ता बताया? अदालत ने कहा कि ऐसे छात्र स्कॉलरशिप या सब्सिडी जैसी सुविधाओं का सहारा ले सकते हैं। 6. क्या इससे पहले भी यह मामला किसी अदालत में गया था? हां, इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट भी इस याचिका को खारिज कर चुका था। 7. किस जज ने यह फैसला सुनाया? जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस अपील पर सुनवाई की और टिप्पणियां कीं। https://trendkia.com/rajasthan/ews-kote-ke-bavajuda-niji-koleja-ki-moti-phisa-se-rahata-nahin-supreme-court-ne-medikala-chhatra-ko-diya-ye-javaba-2693 TrendKia — Har trend, sabse pehle.