जयपुर में चार करोड़ का फायर सिस्टम फेल, पुरोहित जी के कटले में आग से पच्चीस दुकानें खाक जयपुर के पुरोहित जी के कटले में लगी भीषण आग ने करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। चार करोड़ की लागत से लगाया गया ऑटोमैटिक फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह से विफल साबित हुआ। राजधानी जयपुर के मध्य स्थित चारदीवारी इलाके के पुरोहित जी के कटले में गुरुवार की सुबह एक भयानक आग भड़क उठी। इस भीषण अग्निकांड में पच्चीस से अधिक दुकानें पूरी तरह से जलकर खाक हो गईं और व्यापारियों को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस घटना ने स्मार्ट सिटी के तहत किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों की पोल खोल दी है। लगभग तेरह घंटे तक सुलगती रही इस आग ने स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि सुरक्षा के नाम पर सरकारी धन का किस तरह दुरुपयोग हुआ है। चार करोड़ का फायर सिस्टम साबित हुआ नाकारा घटनास्थल की जांच और वहां के हालात ने उन दावों की सच्चाई बयां कर दी है जो चार साल पहले चार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से लगाए गए ऑटोमैटिक फायर फाइटिंग सिस्टम को लेकर किए गए थे। कागजों में स्मार्ट सिटी के अधिकारी भले ही अपनी पीठ थपथपाते रहे हों, लेकिन यह आधुनिक सुरक्षा तंत्र मौके पर एक सफेद हाथी साबित हुआ। दस्तावेजों के अनुसार, पिछले चौदह वर्षों के दौरान यहां छह बार मॉक ड्रिल के सफल होने का दावा किया गया था। इस दौरान छोटी दमकलें और फायर टेंडर भी खरीदे गए थे, लेकिन जब असल में आपदा आई, तो इनमें से एक भी वाहन मौके पर नजर नहीं आया। हालांकि फायर स्टेशन घटनास्थल से केवल एक दशमलव सात किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित था, लेकिन संकरी गलियों के कारण दमकलकर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। बिना पानी और टेस्टिंग के चल रहा था सिस्टम ग्राउंड जीरो पर सामने आए हालात से कई गंभीर लापरवाहियां खुलकर सामने आई हैं। चार करोड़ रुपये की लागत से फायर सिस्टम स्थापित तो कर दिया गया था, लेकिन उसमें न तो पानी का कनेक्शन चालू किया गया था और न ही उसे होज पाइप से जोड़ा गया था। पिछले तीन सालों से इस उपकरण का कोई भी उचित परीक्षण या ट्रायल नहीं किया गया था, जिसके चलते पानी की लाइनें पूरी तरह सूखी पड़ी थीं। इसके अलावा, इस पूरी प्रणाली की डिजाइनिंग में भी भारी खामियां थीं। फायर सिस्टम के नोजल और पाइप को बीस फीट की ऊंचाई पर लगा दिया गया था, जबकि आग दुकानों के निचले हिस्से में लगी थी। जमीन की तरफ पानी का छिड़काव करने के लिए कोई भी नोजल मौजूद नहीं था। विभागों की लापरवाही और भारी अतिक्रमण यह पूरा फायर सिस्टम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगाया गया था और बाद में इसे हेरिटेज नगर निगम को सौंपा जाना था। दोनों ही विभागों के बीच इसके रखरखाव और जवाबदेही को लेकर भारी लापरवाही बरती गई, और जंग खा चुके इस तंत्र की सुध किसी ने नहीं ली। इसके अतिरिक्त, कटले के भीतर सीढ़ियों और रास्तों पर व्यापारियों द्वारा ही दुकानें सजाकर और सामान रखकर भारी अतिक्रमण किया गया था। इस वजह से न तो छोटी दमकलें अंदर प्रवेश कर सकीं और न ही बचाव दल को कोई सुगम रास्ता मिल पाया। गलियां इतनी संकरी थीं कि मुख्य दमकल गाड़ियों को तीन सौ मीटर की दूरी पर ही रोकना पड़ा, और पाइप जोड़ते-जोड़ते पानी का प्रेशर भी समाप्त हो गया। अवैध निर्माण और टला एक बड़ा खतरा जिस सेठी कॉम्प्लेक्स से इस आग की शुरुआत हुई थी, वहां बिना किसी फायर एनओसी के नियमों को ताक पर रखकर एक रूफटॉप रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था। इस इमारत में वेंटिलेशन के रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया था और वहां व्यावसायिक गैस सिलेंडर अवैध रूप से रखे गए थे। हालांकि, गनीमत यह रही कि यह घटना सुबह सात बजे हुई और स्थानीय नागरिकों ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते रेस्टोरेंट से पांच गैस सिलेंडर बाहर निकाल लिए। यदि ऐसा न होता तो भीषण धमाके हो सकते थे और पूरा कटला चपेट में आ जाता। यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की घोर उदासीनता का परिणाम है। यदि भविष्य में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो जयपुर के बाजारों में किसी बड़ी अनहोनी को टालना मुश्किल होगा। इसका आप पर असर जयपुर के पुरोहित जी का कटला में हुई इस बड़ी दुर्घटना का सीधा असर स्थानीय कारोबारियों और शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। • भारत में: देश भर के पुराने और घनी आबादी वाले बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था और फायर ऑडिट की अनिवार्यता पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। स्थानीय निकाय ऐसे व्यावसायिक परिसरों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं। • जयपुर में: चारदीवारी क्षेत्र के दुकानदारों और व्यापारियों को करोड़ों के नुकसान के बाद अपनी दुकानों की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से सोचना पड़ रहा है। नगर निगम और प्रशासन अब शहर के अन्य बाजारों में लगे फायर सिस्टम और अवैध निर्माणों की औचक जांच शुरू कर सकते हैं। • सुरक्षा और अनुपालन: बिना एनओसी और अवैध रूप से चल रहे रेस्टोरेंट्स तथा कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों पर प्रशासनिक कार्रवाई तेज होने की पूरी संभावना है। इससे दुकानदारों को अपने परिसरों में वेंटिलेशन और अग्निशामक यंत्रों जैसे बुनियादी सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य हो जाएगा। • प्रशासनिक जवाबदेही: जनता के टैक्स से करोड़ों रुपये खर्च कर स्थापित किए गए सरकारी सुरक्षा तंत्रों के रखरखाव और ऑडिट में पारदर्शिता लाने का दबाव बढ़ गया है। भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए दमकल गाड़ियों के रास्ते से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ जयपुर के पुरोहित जी का कटला में हुआ यह भयंकर अग्निकांड किसी एक तात्कालिक कारण का परिणाम नहीं था, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता, तकनीकी विफलता और नियमों की अनदेखी की लंबी श्रृंखला का नतीजा था। • तकनीकी विफलता और सूखी लाइनें: चार करोड़ रुपये की लागत से स्थापित ऑटोमैटिक फायर फाइटिंग सिस्टम में पानी का कनेक्शन नहीं था और न ही इसे होज पाइपों से जोड़ा गया था, जिससे आग लगने पर वह पूरी तरह निष्प्रभावी साबित हुआ। • रखरखाव की अनदेखी: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगे इस सिस्टम को हेरिटेज नगर निगम को हैंडओवर किए जाने की प्रक्रिया के दौरान दोनों विभागों ने इसके रखरखाव की पूरी उपेक्षा की। • अवैध निर्माण और अतिक्रमण: कटले के रास्तों पर भारी अतिक्रमण के कारण छोटी दमकलें अंदर नहीं पहुंच सकीं, और सेठी कॉम्प्लेक्स में बिना फायर एनओसी के चल रहे रूफटॉप रेस्टोरेंट में वेंटिलेशन की कमी तथा अवैध गैस सिलेंडरों ने आग को और भड़का दिया। सवाल-जवाब 1. जयपुर में आग की यह घटना कहां हुई? यह भीषण आग जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र के हृदय स्थल स्थित पुरोहित जी के कटले में लगी। 2. यह अग्निकांड कब शुरू हुआ? यह भयंकर आग गुरुवार की सुबह लगभग सात बजे भड़की थी। 3. कितनी दुकानों को नुकसान पहुंचा है? इस भीषण अग्निकांड में पच्चीस से अधिक दुकानें जलकर पूरी तरह राख हो गईं। 4. आग बुझाने में कितना समय लगा? लगभग तेरह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। 5. फायर फाइटिंग सिस्टम क्यों फेल हो गया? चार करोड़ की लागत से बना यह सिस्टम पानी के कनेक्शन से नहीं जुड़ा था और पिछले तीन साल से इसकी कोई टेस्टिंग नहीं हुई थी। 6. दमकल गाड़ियों को आने में क्या परेशानी आई? कटले के अंदर व्यापारियों द्वारा किए गए भारी अतिक्रमण और संकरी गलियों के कारण दमकल गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच सकीं। 7. आग की शुरुआत किस कॉम्प्लेक्स से हुई? इस आग की शुरुआत सेठी कॉम्प्लेक्स से हुई थी जहां अवैध रूप से रूफटॉप रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था। 8. बड़ा हादसा कैसे टल गया? स्थानीय लोगों की सूझबूझ से सुबह ही रेस्टोरेंट से पांच गैस सिलेंडर सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए, जिससे बड़ा धमाका टल गया। https://trendkia.com/rajasthan/four-crore-fire-system-fails-as-major-blaze-destroys-twenty-five-shops-in-jaipur-33168 TrendKia — Har trend, sabse pehle.